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नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी आफत बन गई है। नदी से 2.03 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसके बाद अब यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बिहार में बाढ़ आने वाली है।
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नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी आफत बन गई है। नदी से 2.03 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसके बाद अब यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बिहार में बाढ़ आने वाली है।
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- पश्चिम चंपारण के बैरिया अंतर्गत पटजीरवा माई स्थान परिसर में लगे चापाकल की सफाई विजय और रानू के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं ने मिलकर की है। सफाई के दौरान युवाओं ने चापाकल के आसपास जमा गंदगी और कीचड़ को पूरी तरह से हटाकर परिसर को स्वच्छ बनाया। स्थानीय लोगों ने युवाओं की इस सराहनीय पहल की काफी प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि ऐसे सामाजिक कार्यों से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ती है और अन्य लोगों को भी इससे प्रेरणा मिलती है।1
- पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड क्षेत्र में पूजहा घाट के समीप गंडक नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और संभावित कटाव को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मंगलवार की दोपहर करीब तीन बजे ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ अपनी कड़ी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे आसपास के गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से कई बार कटावरोधी कार्य कराने की मांग की गई है, लेकिन वे हर बार यह कहकर बात टाल देते हैं कि कटाव शुरू होने पर ही काम कराया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं किया गया, तो गंडक नदी कई गांवों को अपने आगोश में ले सकती है। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने स्थानीय सांसद और विधायक को मौके पर बुलाकर स्थिति का जायजा लेने तथा तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन की लापरवाही ऐसे ही जारी रही तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।1
- बेतिया नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या-2 में स्थित पश्चिम करगहिया मेन रोड की जर्जर सड़क और जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने ₹1.89 करोड़ की लागत से पीसीसी सड़क और आरसीसी नाला निर्माण की निविदा जारी कर दी है। महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण योजना के धरातल पर उतरने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। योजना के कार्यादेश जारी होने के बाद निर्माण कार्य को छह माह की अवधि में ही पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इस योजना के तहत अशोक जायसवाल के घर से पश्चिम करगहिया स्थित अरविंद साह के घर तक पीसीसी सड़क एवं नाले का नवनिर्माण कराया जाएगा। महापौर श्रीमती सिकारिया के अनुसार, करीब 1.89 करोड़ रुपये की प्राक्कलित लागत वाली इस योजना के लिए योग्य संवेदक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से दावेदारी कर सकते हैं। इच्छुक संवेदक आगामी 23 जुलाई से 8 अगस्त 2026 तक ई-टेंडरिंग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, जिसका तकनीकी एवं वित्तीय निष्पादन विभागीय नियमों के तहत किया जाएगा। नगर निगम प्रशासन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक वार्ड में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। महापौर ने भरोसा दिलाया कि पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित कर वार्ड-2 के लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे वर्षा के मौसम में होने वाले जलजमाव और आवागमन की समस्या से राहत मिलने के साथ ही क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।1
- कुशीनगर के पडरौना नगर में बढ़ते मच्छरों के प्रकोप से बचाव के लिए नगर पालिका परिषद पडरौना के अध्यक्ष विनय जायसवाल के आदेश पर पूरे नगर में दवा का छिड़काव किया गया है। इस अभियान के तहत पडरौना नगर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर भी दवा छिड़की गई। इसके साथ ही, पडरौना के नेत्र चिकित्सालय हॉस्पिटल में भी मच्छरों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव किया गया है।4
- पश्चिम चंपारण के बेतिया में लाल बाजार चौक के पास 14 जुलाई 2026 को लोगों को बहुत अरसे बाद लीली घोड़ी का करतब देखने को मिला। इस करतब को देखकर वहां मौजूद कई बुजुर्गों ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। बुजुर्ग लोगों का कहना था कि वे इस तरह का करतब अपने बचपन के दिनों में देखा करते थे, जो अब लंबे समय के बाद फिर से देखने को मिला है।1
- कुशीनगर के पडरौना में विश्व हिन्दू महासंघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज के जन्मदिवस को एक बिल्कुल अलग और अनोखे अंदाज में मनाया है। इस भव्य उत्सव के दौरान कई खास और गौरवशाली पल देखने को मिले। महासंघ द्वारा आयोजित किए गए इस विशेष कार्यक्रम के उन सुंदर और यादगार लम्हों की कुछ चुनिंदा झलकियों को भी साझा किया गया है, जिसमें उनके इस अनोखे सेलिब्रेशन को देखा जा सकता है।1
- बिहार से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या गरीब और अनपढ़ लोगों की जमीन को धोखे से हड़पा जा रहा है।1
- पश्चिम चंपारण के नौतन प्रखंड अंतर्गत मंगलपुर गुजरिया स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय प्लस टू परिसर में मंगलवार दोपहर करीब एक बजे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वातावरण के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्य अर्चना श्रीवास्तव ने स्वयं पौधारोपण कर किया। प्राचार्य अर्चना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय ग्रामीणों से अपने जीवन में कम से कम पांच पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य रंजन कुमार गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताते हुए कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने भी छात्रों से पौधों की नियमित देखरेख करने का आग्रह किया। इस अभियान के तहत विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए। अंत में शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण करते हुए एक हरित, स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।1
- पश्चिम चम्पारण के योगापट्टी प्रखंड के सिसवा मंगलपुर के पास गंडक नदी के कटाव से अपने गांव को बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीण खुद ही ढाल बन गए हैं। बेतिया में जल संसाधन विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सुनवाई न किए जाने के बाद ग्रामीणों ने खुद ही नदी के किनारे सैंड बैग रखकर तटबंध को बचाने का मोर्चा संभाल लिया है। इस संकट का मुख्य कारण वाल्मीकिनगर गंडक बराज से गंडक नदी में छोड़ा गया 1.50 लाख क्यूसेक से अधिक पानी है, जिसके कल सुबह तक इस क्षेत्र से गुजरने की संभावना है। नदी का जलस्तर बढ़ने से सिसवा मंगलपुर में लकड़ी के बल्ला पाइलिंग से बना बांध और तटबंध कई जगहों पर धंसने लगा है। इस स्थिति के चलते पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी डर और घबराहट का माहौल बन गया है। ग्रामीणों ने पहले ही जूनियर इंजीनियर (JE) और अन्य अधिकारियों से संपर्क कर ढांचे को मजबूत करने के लिए रेत की बोरियां, लकड़ी के खंभे और पाइलिंग लगवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन अधिकारी पूरी तरह नाकाम रहे। जब इस संबंध में जूनियर इंजीनियर से बात की गई तो उन्होंने अजीबोगरीब तर्क देते हुए कह दिया कि उन्हें अभी तक ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। अधिकारियों की इस बेरुखी और लाचारी के बीच ग्रामीणों ने खुद ही जल संसाधन विभाग के सैंड बैग उठाकर कटाव-रोधी काम शुरू कर दिया है।1