मूल पाठ के अनुसार, जिसे कुछ लोग अपराधी मान रहे हैं, वह कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी था, जिसने समाज के लिए संघर्ष किया और परिश्रम किया। सही जानकारी का अभाव उन्हें अपराधी या पागल कहना अज्ञानता है। बताया गया है कि उन्होंने खुद आत्मसमर्पण किया था, जिसकी पूरी लाइव वीडियो भी सार्वजनिक है। प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर धोखे से उनकी हत्या कर दी गई। इसलिए, बयानबाजी करने से पहले पूरी सच्चाई जानना आवश्यक है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका समर्थन सिर्फ इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि वह ब्राह्मण थे, बल्कि किसी भी इंसान का सम्मान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और कर्म से तय होता है। वह किसी एक समाज के नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और गरीब-वंचित तबकों के लिए एक मज़बूत आवाज़ थे। उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि गरीबों, मज़दूरों और कमज़ोर लोगों के हक़ के लिए व्यवस्था से लड़ने का रास्ता चुना, यही वजह है कि उनका बलिदान आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है। जो लोग नेतृत्व के संदर्भ में कड़े कदम उठाने या एनकाउंटर की भाषा बोलने की बात करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि नेतृत्व न्याय, जवाबदेही, संवेदनशीलता और जनता के विश्वास से बनता है। कहा गया है कि योगी जी उन पर कार्रवाई करते हैं जो अपराधी और समाज के दुश्मन होते हैं, लेकिन यहाँ जिस व्यक्ति की बात हो रही है, उसने गरीबों, दलितों, पिछड़ों और वंचितों के हक़ के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। ऐसे व्यक्ति की तुलना अपराधियों से करना या उसे अपराधी बताना इतिहास और समाज दोनों के साथ अन्याय है। बिहार की राजनीति को नकल नहीं, अपनी ज़मीन की समझ की ज़रूरत है, और जनता यह फ़र्क़ अच्छी तरह समझती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए व्यवस्था से लड़ते-लड़ते शहीद हुए इस इंसान के बलिदान को आज जाति के चश्मे से देखा जा रहा है। हालाँकि, सच यह है कि उनका बलिदान बिहार और उस गांव की जनता हमेशा याद रखेगी, क्योंकि ऐसे लोग मरते नहीं, बल्कि इतिहास बन जाते हैं। यह माना गया है कि शासन, प्रशासन और पुलिस उसे गलत साबित करके कहानी खत्म कर देंगे, लेकिन भरत भूषण तिवारी ने लोगों के दिलों में जो जगह बनाई है, उसे कोई मिटा नहीं पाएगा। एक भरत भूषण तिवारी को तो मार गिराया गया, लेकिन याद रखना चाहिए कि हज़ारों भरत भूषण तिवारी को लोगों में ज़िंदा भी कर दिया गया। जय हिंद जय भारत। भरत भूषण तिवारी अमर रहे।
मूल पाठ के अनुसार, जिसे कुछ लोग अपराधी मान रहे हैं, वह कोई अपराधी नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी था, जिसने समाज के लिए संघर्ष किया और परिश्रम किया। सही जानकारी का अभाव उन्हें अपराधी या पागल कहना अज्ञानता है। बताया गया है कि उन्होंने खुद आत्मसमर्पण किया था, जिसकी पूरी लाइव वीडियो भी सार्वजनिक है। प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर धोखे से उनकी हत्या कर दी गई। इसलिए, बयानबाजी करने से पहले पूरी सच्चाई जानना आवश्यक है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका समर्थन सिर्फ इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि वह ब्राह्मण थे, बल्कि किसी भी इंसान का सम्मान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और कर्म से तय होता है। वह किसी एक समाज के नहीं, बल्कि अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और गरीब-वंचित तबकों के लिए एक मज़बूत आवाज़ थे। उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि गरीबों, मज़दूरों और कमज़ोर लोगों के हक़ के लिए व्यवस्था से लड़ने का रास्ता चुना, यही वजह है कि उनका बलिदान आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है। जो लोग नेतृत्व के संदर्भ में कड़े कदम उठाने या एनकाउंटर की भाषा बोलने की बात करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि नेतृत्व न्याय, जवाबदेही, संवेदनशीलता और जनता के विश्वास से बनता है। कहा गया है कि योगी जी उन पर कार्रवाई करते हैं जो अपराधी और समाज के दुश्मन होते हैं, लेकिन यहाँ जिस व्यक्ति की बात हो रही है, उसने गरीबों, दलितों, पिछड़ों और वंचितों के हक़ के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। ऐसे व्यक्ति की तुलना अपराधियों से करना या उसे अपराधी बताना इतिहास और समाज दोनों के साथ अन्याय है। बिहार की राजनीति को नकल नहीं, अपनी ज़मीन की समझ की ज़रूरत है, और जनता यह फ़र्क़ अच्छी तरह समझती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए व्यवस्था से लड़ते-लड़ते शहीद हुए इस इंसान के बलिदान को आज जाति के चश्मे से देखा जा रहा है। हालाँकि, सच यह है कि उनका बलिदान बिहार और उस गांव की जनता हमेशा याद रखेगी, क्योंकि ऐसे लोग मरते नहीं, बल्कि इतिहास बन जाते हैं। यह माना गया है कि शासन, प्रशासन और पुलिस उसे गलत साबित करके कहानी खत्म कर देंगे, लेकिन भरत भूषण तिवारी ने लोगों के दिलों में जो जगह बनाई है, उसे कोई मिटा नहीं पाएगा। एक भरत भूषण तिवारी को तो मार गिराया गया, लेकिन याद रखना चाहिए कि हज़ारों भरत भूषण तिवारी को लोगों में ज़िंदा भी कर दिया गया। जय हिंद जय भारत। भरत भूषण तिवारी अमर रहे।
- भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर दीपक पंडित ने बिहार पुलिस को एक बड़ा चैलेंज दिया है। इस चुनौती से संबंधित एक ऑडियो वायरल हो रहा है। हालांकि, इस वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि न तो चैनल करता है और न ही मैं इसकी पुष्टि करता हूँ।1
- कोरिया जिले के सोनहत के नौगई क्षेत्र में हुए एक हत्याकांड के मामले में पाँच अपराधियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन पाँचों अपराधियों को पटना थाना क्षेत्र में पैदल मार्च कराया गया।1
- चिरमिरी पुलिस ने लोगों को निवेश पर 10 प्रतिशत मासिक लाभ और 10 माह में राशि दोगुनी करने का झांसा देकर ₹72 लाख की ठगी करने वाले आरोपी विकास घोघाल (27) को बिलासपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने क्रिप्टो करेंसी, ऑनलाइन ट्रेडिंग और अन्य व्यवसायों में निवेश के नाम पर चिरमिरी निवासी अनवर मोहम्मद से ₹10 लाख, तापस बनर्जी से ₹28 लाख और जॉय बंधोपाध्याय से ₹30 लाख रुपये प्राप्त किए थे। इस तरह कुल ₹72 लाख की ठगी की गई। थाना चिरमिरी में दर्ज अपराध की जांच के दौरान, पुलिस ने बैंक लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी विकास घोघाल को पकड़ा। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से एक कार और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, और मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है।1
- छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले को दहला देने वाले 'नौगई तिहरे हत्याकांड' में आज एक बड़ी सफलता मिली है। 16 जून की रात एक बीजेपी नेता सहित तीन बेगुनाहों को कार में पेट्रोल डालकर जिंदा फूंकने वाले इस जघन्य नरसंहार के मामले में पुलिस के बढ़ते दबाव और चौतरफा नाकेबंदी के आगे बेबस होकर 4 अन्य आरोपियों ने मनेन्द्रगढ़ में आत्मसमर्पण कर दिया है।2
- कोरिया के नौगई में हुए तिहरे हत्याकांड मामले में चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस घटना में कार में आग लगाने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। मामले के सभी आरोपियों ने, जिनमें मनोज त्रिपाठी भी शामिल हैं, मनेन्द्रगढ़ सिटी कोतवाली में आत्मसमर्पण किया है। इस दौरान एसपी रत्ना सिंह भी कोतवाली पहुंचीं।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दमन से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, जिसके तहत देश में गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। दमन में विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि ये परियोजनाएं क्षेत्र के आर्थिक विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देंगी। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में दमन और दीव की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और केंद्र सरकार की पूरी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने देश को नई पहचान दी है, जिसके परिणामस्वरूप करोड़ों लोगों को पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली, गैस कनेक्शन और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं मिली हैं। अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री मोदी ने नारी शक्ति को देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है, जिससे वे हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए, उन्होंने नई शिक्षा नीति, कौशल विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप संस्कृति द्वारा पैदा किए गए नए अवसरों का जिक्र किया और उनसे विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य दोहराया, जिसके लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल सेवाओं और जनभागीदारी को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से भारत विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल होगा। दमन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और विकास परियोजनाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम ने क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा देने के साथ-साथ विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान की।1
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपने दो दिवसीय प्रवास पर अंबिकापुर पहुँच गए हैं। वे आज रात सर्किट हाउस में विश्राम करेंगे, जिसके लिए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और शहर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अपने प्रवास के दौरान, मुख्यमंत्री कल, 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पीजी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। सुबह 6 बजे शुरू होने वाले इस सामूहिक योग कार्यक्रम में वे स्वयं भी योगाभ्यास करेंगे और आम नागरिकों के साथ योग करेंगे। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए पीजी कॉलेज ग्राउंड में सभी व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक हिस्सा लेंगे, जिसके लिए स्थल पर सभी आवश्यक सुविधाएं और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।1
- कोरिया जिले के सोनहत नगोई क्षेत्र में पटना पुलिस थाने द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई, जहाँ जिंदा जलाने के आरोपियों का जुलूस निकाला गया। इस जुलूस के दौरान एक वीडियो में एक साहब की भाषा रिकॉर्ड हुई, जिसमें वे एक ट्रैक्टर चालक को दबंग अंदाज में गाड़ी बंद करने को कहते नजर आ रहे थे। इस पर सवाल उठाया गया कि क्या यह भाषा सही है, और क्या इसी तरह के शब्दों का प्रयोग किसी VIP या नेता की गाड़ी के लिए भी किया जाता। पोस्ट में जोर दिया गया है कि इज्जत सभी की होती है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, क्योंकि सभी इंसान होते हैं। साहब को सलाह दी गई कि वे अपनी जुबान को सही रखें और चेहरा देखकर न बोलें। हालांकि, पुलिस की इस पूरी कार्रवाई को 'शानदार' बताया गया है। पोस्ट में लोगों से इस विषय पर अपनी राय कमेंट कर साझा करने का आग्रह भी किया गया है।1