देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ जिला स्तरीय सतत विकास लक्ष्य क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित, 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति पर दिया जोर सलूम्बर। जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वीसी कक्ष में जिला स्तरीय सतत विकास लक्ष्य (SDGs) क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों का आकलन किया गया तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में उपनिदेशक आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग शेल सिंह ने कहा कि सतत विकास लक्ष्य वर्ष 2030 तक समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैश्विक पहल है। इसके माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाने का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, लैंगिक समानता, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी विभागों को योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना होगा। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जाए तथा विभागीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही संबंधित विभागों को आवश्यक सूचनाएं एवं प्रगति रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि जिले में लक्ष्यों की प्राप्ति की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके। बैठक में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
देवघर में संत समाज की ऐतिहासिक घोषणा : कालकानंद गिरी बनीं जमशेदपुर किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर, देश-विदेश से मिल रही बधाइयाँ जिला स्तरीय सतत विकास लक्ष्य क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित, 2030 तक लक्ष्यों की प्राप्ति पर दिया जोर सलूम्बर। जिला कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वीसी कक्ष में जिला स्तरीय सतत विकास लक्ष्य (SDGs) क्रियान्वयन एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों का आकलन किया गया तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में उपनिदेशक आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग शेल सिंह ने कहा कि सतत विकास लक्ष्य वर्ष 2030 तक समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैश्विक पहल है। इसके माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाने का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, लैंगिक समानता, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी विभागों को योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना होगा। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जाए तथा विभागीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही संबंधित विभागों को आवश्यक सूचनाएं एवं प्रगति रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि जिले में लक्ष्यों की प्राप्ति की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके। बैठक में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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- डूंगरपुर। खेतों me फसल काटने गई युवती की जहरीले जानवर के काटने से तबियत बिगड़ गई। वही युवती का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। पाप जानकारी अनुसार जिले के निकटवर्ती खांड़ी ओबरी गांव निवासी रीना पिता प्रेमशंकर भनात मंगलवार शाम अपने घर के पास खेतों में गेहूं की फसल काटने के लिए गई थी। तभी फसल में छिपे जहरीले जानवर ने युवती के हाथ पर काट लिया। जिसके बाद युवती को चक्कर ओर उल्टी की शिकायत होने पर उसे निजी वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। युवती का उपचार चल रहा है।1
- साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित डूंगरपुर। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने पीएचईडी अधीक्षण अभियंता को गर्मियों से पूर्व जिले में पेयजल वितरण के उचित प्रबंधन हेतु समीक्षा बैठक आयोजित कर आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह निर्देश जिला परिषद के ईडीपी सभागार में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में विभाग वार समीक्षा करते हुए दिए। बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान पालनहार योजना, पेंशन योजना के तहत सत्यापन आदि की जानकारी दी तथा सीमलवाड़ा, चिखली, गलियाकोट में न्यून प्रगति पर तीव्रता से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न योजनाओं में मार्च पूर्व लक्ष्य के अनुसार स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में पीएचइडी अधीक्षण अभियंता ने पेयजल वितरण, हेड पंप, ट्यूब वेल, विभागीय कार्य एवं योजनाओं की क्रियान्वित के संबंध में जानकारी दी। इसी क्रम में पीडब्ल्यूडी, एवीएनएल, टीएडी, पशुपालन, उद्योग, जल संसाधन, सहकारिता, आईसीडीएस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभागों की समीक्षा करते हुए सभी प्रगतिरत कार्यों को तय समय अवधि में पूर्ण करने तथा न्यून प्रगति वाली योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने संपर्क पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के तत्काल निस्तारण करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर दिनेश चंद्र धाकड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी गण मौजूद रहें।3
- उदयपुर/डूंगरपुर। लोकसभा क्षेत्र उदयपुर के जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने दिल्ली के सदन में पुरजोर आवाज उठाई है। मंगलवार को संसद में नियम 377 के तहत विशेष उल्लेख करते हुए डॉ. रावत ने जिले की पांच महत्वपूर्ण पंचायत समितियों - ओगणा, सुलाव, देवला, नाई और कल्याणपुर में नवीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोलने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी। उन्होंने तर्क दिया कि ये क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से दुर्गम हैं, बल्कि शिक्षा के संसाधनों के अभाव में यहां की प्रतिभाएं पिछड़ रही हैं। सांसद डॉ. रावत ने सदन को सांख्यिकीय आंकड़ों के साथ अवगत कराया कि ये पांचों पंचायत समितियां पूर्णतः जनजाति बाहुल्य हैं और विद्यालय स्थापना की सभी पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं। उन्होंने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए बताया कि देवला में 98 प्रतिशत, सुलाव में 95 प्रतिशत, कल्याणपुर में 88 प्रतिशत, नाई में 86 प्रतिशत और ओगणा में 68 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या निवास करती है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में एक भी एकलव्य विद्यालय संचालित नहीं होने के कारण यहां के बालक-बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के लिए भटकना पड़ता है या उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित रहना पड़ता है। डॉ. रावत ने अपने संबोधन में क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुर्गम अरावली पहाड़ियों में बसे इन गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार करना समय की मांग है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत विशेष बजट प्रावधान कर इन पांचों स्थानों पर एकलव्य विद्यालयों की स्वीकृति जल्द प्रदान की जाए। सांसद की इस पहल से स्थानीय नागरिकों में हर्ष की लहर है, क्योंकि इन क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षा के इस आधुनिक ढांचे की मांग की जा रही थी। यदि यह मांग स्वीकार होती है, तो इन सुदूर क्षेत्रों के जनजाति विद्यार्थियों को भी समग्र और वैश्विक स्तर की शिक्षा सुलभ हो सकेगी।1
- उदयपुर जिला कलेक्टर नमित मेहता ने मंगलवार को कुराबड़ क्षेत्र का दौरा कर विभिन्न सरकारी कार्यालयों और क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं की मौका निरीक्षण करते हुए प्रगति की समीक्षा की अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।1
- झाड़ोल पुलिस की कार्रवाई: अवैध देशी टोपीदार बंदूक के साथ एक आरोपी गिरफ्तार1
- -पंचायत समिति ओगणा, सुलाव, देवला, नाई एवं कल्याणपुर है इसके लिए पात्र उदयपुर/डूंगरपुर। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने पांच पंचायत समितियों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोलने की मांग की है। सांसद डॉ रावत ने मंगलवार को संसद में नियम 377 के अधीन यह मामला रखा। सांसद डॉ रावत ने संसद में बताया कि लोकसभा क्षेत्र उदयपुर के अंतर्गत जिला उदयपुर की पंचायत समितियों ओगणा, सुलाव, देवला, नाई एवं कल्याणपुर में वर्तमान में एक भी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित नहीं है, जबकि ये सभी क्षेत्र जनजाति बहुल हैं। जनगणना 2011 के अनुसार पंचायत समिति ओगणा में 68 प्रतिशत, सुलाव में 95 प्रतिशत, देवला में 98 प्रतिशत, नाई में 86 प्रतिशत तथा कल्याणपुर में 88 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति जनसंख्या निवास करती है एवं एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोले जाने हेतु सम्पूर्ण पात्रता रखती है। ये पंचायत समितियां दुर्गम एवं भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में स्थित हैं, जिससे जनजाति बालक-बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा के समुचित अवसर उपलब्ध नहीं हो पाते। परिणामस्वरूप उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी एवं प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होती है। स्थानीय नागरिकों द्वारा लंबे समय से यहां एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाने की मांग की जा रही है। अतः अनुरोध है कि संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत उपर्युक्त पांचों पंचायत समितियों में नवीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान कर जनजाति विद्यार्थियों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं समग्र शिक्षा सुनिश्चित की जाए।1