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डबरा (ग्वालियर/)मध्य प्रदेश नकली bisleri कारोबार पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, शिकायत मिलने पर हुई छापेमारी डबरा में नकली पानी की फैक्ट्री पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। यह छापेमारी शिकायत मिलने के बाद की गई, जब प्रशासन को पता चला कि ठाकुर बाबा रोड स्थित अंकित मेघानी और जंगीपुरा स्थित रोहित साहू द्वारा अवैध रूप से 'बिसलेरी' ब्रांड के नाम पर पानी बेचा जा रहा था। विभाग की टीम ने इन दोनों स्थानों पर छापा मारकर माल जब्त किया। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद शुरू की गई थी। इन दोनों आरोपियों के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था, और वे बिना किसी अनुमति के अवैध तरीके से पानी की पैकिंग और बिक्री कर रहे थे। प्रशासन ने इस कार्रवाई को गंभीरता से लिया है और भविष्य में इस तरह के कारोबार पर पूरी तरह से नकेल कसने का फैसला किया है।

4 hrs ago
user_Rajesh kumar soni
Rajesh kumar soni
Reporter पिछोर (डबरा), ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago

डबरा (ग्वालियर/)मध्य प्रदेश नकली bisleri कारोबार पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, शिकायत मिलने पर हुई छापेमारी डबरा में नकली पानी की फैक्ट्री पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। यह छापेमारी शिकायत मिलने के बाद की गई, जब प्रशासन को पता चला कि ठाकुर बाबा रोड स्थित अंकित मेघानी और जंगीपुरा स्थित रोहित साहू द्वारा अवैध रूप से 'बिसलेरी' ब्रांड के नाम पर पानी बेचा जा रहा था। विभाग की टीम ने इन दोनों स्थानों पर छापा मारकर माल जब्त किया। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद शुरू की गई थी। इन दोनों आरोपियों के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था, और वे बिना किसी अनुमति के अवैध तरीके से पानी की पैकिंग और बिक्री कर रहे थे। प्रशासन ने इस कार्रवाई को गंभीरता से लिया है और भविष्य में इस तरह के कारोबार पर पूरी तरह से नकेल कसने का फैसला किया है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने जताया दुख #anewsimpact #plancrash #NarendraSinghTomar Narendra Singh Tomar
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    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने जताया दुख
#anewsimpact #plancrash #NarendraSinghTomar 
Narendra Singh Tomar
    user_NEWS IMPACT GWALIOR
    NEWS IMPACT GWALIOR
    Journalist सिटी सेंटर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • झाँसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में आज चतुर्थ भारतीय उद्यानिकी शिखर सम्मेलन–सह–अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 28 से 30 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय “सतत विकास, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुदृढ़ता हेतु स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलों का संवर्धन” है। सम्मेलन का आयोजन बागवानी अनुसंधान एवं विकास समिति उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने सब्जी एवं उद्यानिकी क्षेत्र के समग्र विकास पर बल देते हुए कहा कि स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित फसलें पोषण सुरक्षा, औषधीय गुणों और जलवायु सहनशीलता के कारण छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार से सीधा जुड़ाव स्थापित कर इन फसलों को मुख्यधारा में लाया जा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत कृषि विकास को गति मिलेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी एवं मसाला वर्गीय फसलों की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री और प्रमाणित बीजों को उत्पादकता बढ़ाने की कुंजी बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, मानकीकरण और कटाई-पश्चात प्रबंधन से गुणवत्ता व बाजार क्षमता में सुधार संभव है। उद्यानिकी आयुक्त, भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि भारतीय उद्यानिकी क्षेत्र में निर्यात की व्यापक संभावनाएँ हैं, बशर्ते गुणवत्ता, निरंतरता और मूल्य श्रृंखला आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने मानकीकरण, ट्रेसबिलिटी और किसान–उद्यमी सहभागिता को निर्यात उन्मुख उद्यानिकी के लिए आवश्यक बताया। भारतीय कृषि एवं बागवानी अनुसंधान विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. बलराज सिंह ने ऐसे सम्मेलनों को अनुसंधान और नवाचार के लिए उपयोगी मंच बताया, जबकि उपाध्यक्ष डॉ. बी.एस. तोमर ने क्षमता निर्माण और तकनीक प्रसार पर जोर दिया। पूर्व कुलपति डॉ. टी. जनकीराम ने जामुन, करौंदा और सहजन जैसी स्वदेशी फसलों के व्यावसायीकरण की आवश्यकता बताई। आईसीएआर–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने गुणवत्तायुक्त बीज और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला। आईजीएफआरआई झाँसी के निदेशक डॉ. पंकज कौशल ने घास की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। स्थानीय आयोजन सचिव एवं अधिष्ठाता डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि सम्मेलन में 8 देशों और भारत के 20 राज्यों से 300 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान प्लेनरी व्याख्यान, तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएँ और पोस्टर प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी। इस अवसर पर सभी अतिथियों द्वारा उद्यानिकी, कृषि एवं वानिकी से संबंधित 7 पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही बागवानी विज्ञान में अनुसंधान एवं विकास के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड डॉ. उमाकांत दुबे (नई दिल्ली) को प्रदान किया गया। लीडरशिप अवार्ड कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह, उद्यानिकी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार एवं डॉ. वी.एस. तोमर को दिया गया। डॉ. कीर्ति सिंह मेमोरियल अवार्ड डॉ. सी. इंदुरानी (तमिलनाडु) और डॉ. आर.के. सिंह (मेरठ) को प्रदान किया गया। डॉ. गौतम कल्लू उत्कृष्टता बागवानी अनुसंधान पुरस्कार डॉ. राजेश कुमार (निदेशक, आईआईवीआर वाराणसी) को मिला। मानद फेलो पुरस्कार डॉ. दिलफूजा जब्बोरोवा (उज्बेकिस्तान), डॉ. के.के. उपाध्याय, डॉ. बी.के. सिंह और डॉ. एस.आर. सिंह को प्रदान किया गया। सरोज सिंह मेमोरियल एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड अपूर्वा त्रिपाठी और मनसुख पटेल को तथा चौधरी गंगासरन त्यागी मेमोरियल प्रगतिशील किसान/उद्यम पुरस्कार डॉ. कमलजीत (जालंधर) और शिवकरन (बीकानेर, राजस्थान) को दिया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, सह–आयोजन सचिव डॉ. मनमोहन डोबरियाल, डॉ. गौरव शर्मा, डॉ. आर.के. सिंह, अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, नीति-निर्माता एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. सोम दत्त द्वारा किया गया।
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    झाँसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में आज चतुर्थ भारतीय उद्यानिकी शिखर सम्मेलन–सह–अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 28 से 30 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य विषय “सतत विकास, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुदृढ़ता हेतु स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित उद्यानिकी फसलों का संवर्धन” है। सम्मेलन का आयोजन बागवानी अनुसंधान एवं विकास समिति उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने सब्जी एवं उद्यानिकी क्षेत्र के समग्र विकास पर बल देते हुए कहा कि स्वदेशी एवं अल्प-उपयोगित फसलें पोषण सुरक्षा, औषधीय गुणों और जलवायु सहनशीलता के कारण छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार से सीधा जुड़ाव स्थापित कर इन फसलों को मुख्यधारा में लाया जा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत कृषि विकास को गति मिलेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उद्यानिकी एवं मसाला वर्गीय फसलों की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री और प्रमाणित बीजों को उत्पादकता बढ़ाने की कुंजी बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, मानकीकरण और कटाई-पश्चात प्रबंधन से गुणवत्ता व बाजार क्षमता में सुधार संभव है।
उद्यानिकी आयुक्त, भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि भारतीय उद्यानिकी क्षेत्र में निर्यात की व्यापक संभावनाएँ हैं, बशर्ते गुणवत्ता, निरंतरता और मूल्य श्रृंखला आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने मानकीकरण, ट्रेसबिलिटी और किसान–उद्यमी सहभागिता को निर्यात उन्मुख उद्यानिकी के लिए आवश्यक बताया।
भारतीय कृषि एवं बागवानी अनुसंधान विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. बलराज सिंह ने ऐसे सम्मेलनों को अनुसंधान और नवाचार के लिए उपयोगी मंच बताया, जबकि उपाध्यक्ष डॉ. बी.एस. तोमर ने क्षमता निर्माण और तकनीक प्रसार पर जोर दिया। पूर्व कुलपति डॉ. टी. जनकीराम ने जामुन, करौंदा और सहजन जैसी स्वदेशी फसलों के व्यावसायीकरण की आवश्यकता बताई। आईसीएआर–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने गुणवत्तायुक्त बीज और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला। आईजीएफआरआई झाँसी के निदेशक डॉ. पंकज कौशल ने घास की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी।
स्थानीय आयोजन सचिव एवं अधिष्ठाता डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि सम्मेलन में 8 देशों और भारत के 20 राज्यों से 300 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान प्लेनरी व्याख्यान, तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएँ और पोस्टर प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी।
इस अवसर पर सभी अतिथियों द्वारा उद्यानिकी, कृषि एवं वानिकी से संबंधित 7 पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही बागवानी विज्ञान में अनुसंधान एवं विकास के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड डॉ. उमाकांत दुबे (नई दिल्ली) को प्रदान किया गया।
लीडरशिप अवार्ड कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह, उद्यानिकी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार एवं डॉ. वी.एस. तोमर को दिया गया।
डॉ. कीर्ति सिंह मेमोरियल अवार्ड डॉ. सी. इंदुरानी (तमिलनाडु) और डॉ. आर.के. सिंह (मेरठ) को प्रदान किया गया।
डॉ. गौतम कल्लू उत्कृष्टता बागवानी अनुसंधान पुरस्कार डॉ. राजेश कुमार (निदेशक, आईआईवीआर वाराणसी) को मिला।
मानद फेलो पुरस्कार डॉ. दिलफूजा जब्बोरोवा (उज्बेकिस्तान), डॉ. के.के. उपाध्याय, डॉ. बी.के. सिंह और डॉ. एस.आर. सिंह को प्रदान किया गया।
सरोज सिंह मेमोरियल एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड अपूर्वा त्रिपाठी और मनसुख पटेल को तथा चौधरी गंगासरन त्यागी मेमोरियल प्रगतिशील किसान/उद्यम पुरस्कार डॉ. कमलजीत (जालंधर) और शिवकरन (बीकानेर, राजस्थान) को दिया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, सह–आयोजन सचिव डॉ. मनमोहन डोबरियाल, डॉ. गौरव शर्मा, डॉ. आर.के. सिंह, अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, नीति-निर्माता एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. सोम दत्त द्वारा किया गया।
    user_Praveen Kumar
    Praveen Kumar
    Reporter Jhansi, Uttar Pradesh•
    3 hrs ago
  • झांसी अवैध शराब के विरुद्ध आबकारी विभाग की ताबड़तोड़ कार्यवाही, 480 लीटर अवैध शराब बरामद* जनपद झांसी में राजस्व वृद्धि एवं आबकारी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु जिलाधिकारी झांसी मृदुल चौधरी व उप आबकारी आयुक्त झांसी प्रभार झांसी उमेश चन्द्र पाण्डेय एवं जिला आबकारी अधिकारी झांसी मनीष कुमार के निर्देशन में *आबकारी विभाग, झांसी* की जनपद में गठित टीमों द्वारा चलाए जा रहे प्रवर्तन अभियान के अंतर्गत आज *दिनांक 28.01.2026* को *डायमंड फैक्ट्री नहर, पारीछा रेलवे क्रॉसिंग, पारीछा नहर के पास, बड़ागांव, बचावली व डेरा टाकोरी, तेजपुरा, कटेरा, मगरवारा* में दबिश दी गई। दबिश के दौरान *480 लीटर अवैध कच्ची शराब* बरामद कर *2000 किग्रा लहन* मौके पर नष्ट करते हुए आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं में *03 अभियोग* पंजीकृत किए गये। कार्यवाही में *01 अभियुक्ता* को गिरफ्तार किया गया। मौके पर दबिश टीम में मनोज कुमार श्रीवास्तव आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 झांसी एवं हर्ष बाबू आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-3 झांसी तथा आबकारी स्टॉफ सम्मिलित रहे। चेकिंग के दौरान अवैध अड्डों से शराब न खरीदने हेतु लोगों को जागरूक किया गया। सार्वजनिक स्थलों पर शराब का सेवन करने वालो की भी चेकिंग करते हुए लोगों को चेतावित किया गया। साथ ही अवैध शराब/अपमिश्रित शराब व ओवर रेटिंग के दृष्टिगत जनपद की देशी शराब/कंपोजिट मदिरा दुकानों पर टेस्ट परचेजिंग कराते हुए आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुकानों में संचित स्टॉक का स्टॉक पंजिका में अंकित स्टॉक से मिलान करते हुए भौतिक रूप से सत्यापन किया गया एवं पूर्ण रूप से PoS मशीन से मदिरा की बिक्री करने के निर्देश दिए गए।
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    झांसी 
अवैध शराब के विरुद्ध आबकारी विभाग की ताबड़तोड़ कार्यवाही, 480 लीटर अवैध शराब बरामद*
जनपद झांसी में राजस्व वृद्धि एवं आबकारी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु जिलाधिकारी झांसी मृदुल चौधरी व उप आबकारी आयुक्त झांसी प्रभार झांसी उमेश चन्द्र पाण्डेय एवं जिला आबकारी अधिकारी झांसी मनीष कुमार के निर्देशन में *आबकारी विभाग, झांसी* की जनपद में गठित टीमों द्वारा चलाए जा रहे प्रवर्तन अभियान के अंतर्गत आज *दिनांक 28.01.2026* को *डायमंड फैक्ट्री नहर, पारीछा रेलवे क्रॉसिंग, पारीछा नहर के पास, बड़ागांव, बचावली व डेरा टाकोरी, तेजपुरा, कटेरा, मगरवारा* में दबिश दी गई। दबिश के दौरान *480 लीटर अवैध कच्ची शराब* बरामद कर *2000 किग्रा लहन* मौके पर नष्ट करते हुए आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं में *03 अभियोग* पंजीकृत किए गये। कार्यवाही में *01 अभियुक्ता* को गिरफ्तार किया गया। मौके पर दबिश टीम में मनोज कुमार श्रीवास्तव आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 झांसी एवं हर्ष बाबू आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-3 झांसी तथा आबकारी स्टॉफ सम्मिलित रहे। चेकिंग के दौरान अवैध अड्डों से शराब न खरीदने हेतु लोगों को जागरूक किया गया। सार्वजनिक स्थलों पर शराब का सेवन करने वालो की भी चेकिंग करते हुए लोगों को चेतावित किया गया। साथ ही अवैध शराब/अपमिश्रित शराब व ओवर रेटिंग के दृष्टिगत जनपद की देशी शराब/कंपोजिट मदिरा दुकानों पर टेस्ट परचेजिंग कराते हुए आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुकानों में संचित स्टॉक का स्टॉक पंजिका में अंकित स्टॉक से मिलान करते हुए भौतिक रूप से सत्यापन किया गया एवं पूर्ण रूप से PoS मशीन से मदिरा की बिक्री करने के निर्देश दिए गए।
    user_प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना झांसी
    प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना झांसी
    Journalist झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अगर यह बेटी आपकी होती तो......
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    अगर यह बेटी आपकी होती तो......
    user_Radhika Narayan
    Radhika Narayan
    Jhansi, Uttar Pradesh•
    5 hrs ago
  • झांसी बबीना
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    झांसी बबीना
    user_ARIF mansoori
    ARIF mansoori
    Local News Reporter Jhansi, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
  • खड़पुरा ग्राम में ओले गिरने से गेहूं की फसल हुई खराब ।किसान जगत सिंह यादव के खेत की फोटो देखिए, लगभग 30 बीघा खेत में खड़ी फसल खराब
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    खड़पुरा ग्राम में ओले गिरने से गेहूं की फसल हुई खराब ।किसान जगत सिंह यादव के खेत की फोटो देखिए, लगभग 30 बीघा खेत में खड़ी फसल खराब
    user_Satish Parihare
    Satish Parihare
    Journalist Karera, Shivpuri•
    13 hrs ago
  • नशे की हालत में टमटम से लटका युवक फिर जमकर ही कुटाई #NewsImpact #GwaliorNews #gwaliorpolice #gwalior
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    नशे की हालत में टमटम से लटका युवक फिर जमकर ही कुटाई
#NewsImpact #GwaliorNews #gwaliorpolice #gwalior
    user_NEWS IMPACT GWALIOR
    NEWS IMPACT GWALIOR
    Journalist सिटी सेंटर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    1 day ago
  • बबीना थाना क्षेत्र के बड़ा तालाब मदन टोर मोहल्ले में कच्ची शराब खरीदते लोग जिसे आज तक कोई नहीं रोक सका बबीना कस्बे मैं हर जगह बिकती है कच्ची शराब रिपोर्ट प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना झांसी
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    बबीना थाना क्षेत्र के बड़ा तालाब मदन टोर मोहल्ले में कच्ची शराब खरीदते लोग जिसे आज तक कोई नहीं रोक सका बबीना कस्बे मैं हर जगह बिकती है कच्ची शराब 
रिपोर्ट 
प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना झांसी
    user_प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना झांसी
    प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना झांसी
    Journalist झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • टहरौली (झांसी)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर विधिक जगत में तीव्र विरोध सामने आया है। बुधवार को तहसील टहरौली के अधिवक्ताओं ने इस नियमावली को असंवैधानिक बताते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) टहरौली गौरव आर्या को सौंपा। यह ज्ञापन एडवोकेट रीतेश मिश्रा ‘राघवेन्द्र’ के आवाहन पर तथा टहरौली बार संघ के पूर्व अध्यक्ष राजीव समाधिया, अश्वनी पटैरिया और नरोत्तम शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में दिया गया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी का नया इक्विटी रेगुलेशन भारतीय संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध है और समानता के अधिकार पर सीधा प्रहार करता है। संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का आरोप ज्ञापन में कहा गया कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत प्रदत्त समानता के अधिकारों का उल्लंघन करता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि ‘इक्विटी’ की आड़ में बनाए गए ये प्रावधान वर्ग-विशेष पर आधारित हैं, जिससे समान परिस्थितियों वाले विद्यार्थियों के बीच भेदभाव उत्पन्न होगा। प्रमुख विधिक आपत्तियां अधिवक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कई आपत्तियां दर्ज कराईं। ई.पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कोई भी मनमाना नियम समानता के अधिकार के विपरीत होता है। इसके साथ ही नए नियमों में शिकायत तंत्र को एकपक्षीय बताते हुए Audi Alteram Partem यानी “दूसरे पक्ष को सुनने” के सिद्धांत की अनदेखी का आरोप लगाया गया, जिससे मेधावी छात्रों के करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिवक्ताओं ने इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर विशेष प्रावधान असीमित नहीं हो सकते। वर्तमान नियम मेरिट आधारित शिक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं। साथ ही नियमों की भाषा को अस्पष्ट और विवेकाधीन शक्तियों से युक्त बताते हुए इसे डॉक्ट्रिन ऑफ प्रोपोर्शनालिटी के विरुद्ध बताया गया। अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें अधिवक्ताओं ने मांग की कि “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को तत्काल प्रभाव से निरस्त या वापस लिया जाए। साथ ही शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर कोई भी नियम लागू करने से पहले विधिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सभी वर्गों से व्यापक परामर्श किया जाए तथा समानता के अधिकार और मेरिट आधारित शिक्षा व्यवस्था का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद इस अवसर पर एडवोकेट रीतेश मिश्रा, राजीव समाधिया, अश्वनी पटैरिया, नरोत्तम शर्मा, अमित शर्मा, रजनीश बाजपेयी, संजय शर्मा, नरेश समाधिया, राघवेन्द्र रिछारिया, चन्द्रपाल सिंह बुन्देला, वीरेन्द्र तिवारी, दीपक पस्तोर, अंकित पाण्डेय, रामबाबू वशिष्ठ, आदित्य शुक्ला, ब्रजेन्द्र पटैरिया, अमित खरे, चन्द्रशेखर चतुर्वेदी सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में यूजीसी की इस नियमावली को वापस लेने की मांग की।
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    टहरौली (झांसी)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर विधिक जगत में तीव्र विरोध सामने आया है। बुधवार को तहसील टहरौली के अधिवक्ताओं ने इस नियमावली को असंवैधानिक बताते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) टहरौली गौरव आर्या को सौंपा।
यह ज्ञापन एडवोकेट रीतेश मिश्रा ‘राघवेन्द्र’ के आवाहन पर तथा टहरौली बार संघ के पूर्व अध्यक्ष राजीव समाधिया, अश्वनी पटैरिया और नरोत्तम शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में दिया गया। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी का नया इक्विटी रेगुलेशन भारतीय संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध है और समानता के अधिकार पर सीधा प्रहार करता है।
संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का आरोप
ज्ञापन में कहा गया कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत प्रदत्त समानता के अधिकारों का उल्लंघन करता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि ‘इक्विटी’ की आड़ में बनाए गए ये प्रावधान वर्ग-विशेष पर आधारित हैं, जिससे समान परिस्थितियों वाले विद्यार्थियों के बीच भेदभाव उत्पन्न होगा।
प्रमुख विधिक आपत्तियां
अधिवक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कई आपत्तियां दर्ज कराईं। ई.पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कोई भी मनमाना नियम समानता के अधिकार के विपरीत होता है।
इसके साथ ही नए नियमों में शिकायत तंत्र को एकपक्षीय बताते हुए Audi Alteram Partem यानी “दूसरे पक्ष को सुनने” के सिद्धांत की अनदेखी का आरोप लगाया गया, जिससे मेधावी छात्रों के करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अधिवक्ताओं ने इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ प्रकरण का हवाला देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर विशेष प्रावधान असीमित नहीं हो सकते। वर्तमान नियम मेरिट आधारित शिक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं। साथ ही नियमों की भाषा को अस्पष्ट और विवेकाधीन शक्तियों से युक्त बताते हुए इसे डॉक्ट्रिन ऑफ प्रोपोर्शनालिटी के विरुद्ध बताया गया।
अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
अधिवक्ताओं ने मांग की कि “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को तत्काल प्रभाव से निरस्त या वापस लिया जाए। साथ ही शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर कोई भी नियम लागू करने से पहले विधिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सभी वर्गों से व्यापक परामर्श किया जाए तथा समानता के अधिकार और मेरिट आधारित शिक्षा व्यवस्था का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद
इस अवसर पर एडवोकेट रीतेश मिश्रा, राजीव समाधिया, अश्वनी पटैरिया, नरोत्तम शर्मा, अमित शर्मा, रजनीश बाजपेयी, संजय शर्मा, नरेश समाधिया, राघवेन्द्र रिछारिया, चन्द्रपाल सिंह बुन्देला, वीरेन्द्र तिवारी, दीपक पस्तोर, अंकित पाण्डेय, रामबाबू वशिष्ठ, आदित्य शुक्ला, ब्रजेन्द्र पटैरिया, अमित खरे, चन्द्रशेखर चतुर्वेदी सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में यूजीसी की इस नियमावली को वापस लेने की मांग की।
    user_Praveen Kumar
    Praveen Kumar
    Reporter Jhansi, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
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