जानिए.. काफ़ी रोचक जानकारी : मोहन जोदड़ो की सभ्यता दुनिया की बेहतरीन सभ्यता थी. कैसे... वीडियो में देखिए महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ भारतीय कॉल : 9931481554 व्हाट्सप्प : +91-6202433405 मोहनजोदड़ो सभ्यता के विकास पर विशेष लेख भूमिका मानव इतिहास की प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में सिंधु घाटी सभ्यता का विशेष स्थान है। इसी महान सभ्यता का एक प्रमुख और विकसित नगर था मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ है – “मृतकों का टीला”। यह नगर आज के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित था। लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह नगर अपने चरम विकास पर था। 1. खोज और महत्व मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। इसके बाद जॉन मार्शल के नेतृत्व में विस्तृत खुदाई कराई गई। इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पहले ही अत्यंत उन्नत शहरी सभ्यता विकसित हो चुकी थी। 2. नगर नियोजन (City Planning) मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन था। सड़कों का निर्माण सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली ग्रिड प्रणाली में किया गया था। घर पक्की ईंटों से बने होते थे और अधिकतर घरों में आंगन, स्नानघर और कुएँ होते थे। शहर में नालियों की उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था थी, जो ढकी हुई होती थी। नगर को मुख्य रूप से ऊपरी नगर (दुर्ग क्षेत्र) और निचला नगर में विभाजित किया गया था। यह नगर नियोजन उस समय की अत्यंत उन्नत तकनीकी समझ को दर्शाता है। 3. सामाजिक और आर्थिक जीवन मोहनजोदड़ो के लोग मुख्यतः कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प से जुड़े थे। गेहूँ, जौ और कपास की खेती की जाती थी। मिट्टी के बर्तन, मनके, धातु के औजार और आभूषण बनाए जाते थे। व्यापार के लिए तौल-माप की मानकीकृत प्रणाली का प्रयोग होता था। इस सभ्यता का व्यापार दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक होता था। 4. महान स्नानागार (Great Bath) मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध निर्माण महान स्नानागार है। यह एक विशाल जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे बने हुए थे। इसे पक्की ईंटों और जलरोधी पदार्थों से बनाया गया था। माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था। 5. धर्म और संस्कृति मोहनजोदड़ो के लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी मुख्यतः मूर्तियों और मुहरों से मिलती है। मातृ देवी (Mother Goddess) की पूजा के प्रमाण मिलते हैं। पशु आकृतियों वाली मुहरें भी मिली हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि एक मुहर पर दिखाई देने वाली आकृति बाद में भगवान शिव के पशुपति रूप से मिलती-जुलती है। 6. लिपि और कला मोहनजोदड़ो की लिपि आज भी अपूर्ण रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है। इस सभ्यता की कला अत्यंत उत्कृष्ट थी। प्रसिद्ध कांस्य की “नर्तकी” की मूर्ति दाढ़ी वाले पुजारी की मूर्ति सुंदर मुहरें और मिट्टी के खिलौने ये सभी उस समय की उच्च कला और शिल्पकला को दर्शाते हैं। 7. पतन के कारण लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास मोहनजोदड़ो सभ्यता का पतन शुरू हो गया। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं: प्राकृतिक आपदाएँ और बाढ़ जलवायु परिवर्तन व्यापार का पतन नदी के मार्ग में परिवर्तन हालाँकि इसके पतन का सटीक कारण आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है। निष्कर्ष मोहनजोदड़ो सभ्यता मानव इतिहास की सबसे उन्नत प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक थी। इसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित व्यापार प्रणाली, उत्कृष्ट कला और वैज्ञानिक सोच यह दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समाज अत्यंत संगठित और विकसित था। आज मोहनजोदड़ो के अवशेष हमें यह सिखाते हैं कि सभ्यता का विकास केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और ज्ञान से भी होता है।
जानिए.. काफ़ी रोचक जानकारी : मोहन जोदड़ो की सभ्यता दुनिया की बेहतरीन सभ्यता थी. कैसे... वीडियो में देखिए महाराजगंज, सिवान, बिहार JHVP BHARAT NEWS EDITED BY : परवेज़ भारतीय कॉल : 9931481554 व्हाट्सप्प : +91-6202433405 मोहनजोदड़ो सभ्यता के विकास पर विशेष लेख भूमिका मानव इतिहास की प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में सिंधु घाटी सभ्यता का विशेष स्थान है। इसी महान सभ्यता का एक प्रमुख और विकसित नगर था मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ है – “मृतकों का टीला”। यह नगर आज के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के किनारे स्थित था। लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह नगर अपने चरम विकास पर था। 1. खोज और महत्व मोहनजोदड़ो की खोज 1922 ई. में प्रसिद्ध भारतीय पुरातत्वविद् राखालदास बनर्जी ने की थी। इसके बाद जॉन मार्शल के नेतृत्व में विस्तृत खुदाई कराई गई। इस खोज से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय
उपमहाद्वीप में हजारों वर्ष पहले ही अत्यंत उन्नत शहरी सभ्यता विकसित हो चुकी थी। 2. नगर नियोजन (City Planning) मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता उसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन था। सड़कों का निर्माण सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली ग्रिड प्रणाली में किया गया था। घर पक्की ईंटों से बने होते थे और अधिकतर घरों में आंगन, स्नानघर और कुएँ होते थे। शहर में नालियों की उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था थी, जो ढकी हुई होती थी। नगर को मुख्य रूप से ऊपरी नगर (दुर्ग क्षेत्र) और निचला नगर में विभाजित किया गया था। यह नगर नियोजन उस समय की अत्यंत उन्नत तकनीकी समझ को दर्शाता है। 3. सामाजिक और आर्थिक जीवन मोहनजोदड़ो के लोग मुख्यतः कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प से जुड़े थे। गेहूँ, जौ और कपास की खेती की जाती थी। मिट्टी के बर्तन, मनके, धातु के औजार और आभूषण बनाए जाते थे। व्यापार के लिए तौल-माप की
मानकीकृत प्रणाली का प्रयोग होता था। इस सभ्यता का व्यापार दूर-दूर तक, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक होता था। 4. महान स्नानागार (Great Bath) मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध निर्माण महान स्नानागार है। यह एक विशाल जलकुंड था, जिसके चारों ओर कमरे बने हुए थे। इसे पक्की ईंटों और जलरोधी पदार्थों से बनाया गया था। माना जाता है कि इसका उपयोग धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था। 5. धर्म और संस्कृति मोहनजोदड़ो के लोगों के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी मुख्यतः मूर्तियों और मुहरों से मिलती है। मातृ देवी (Mother Goddess) की पूजा के प्रमाण मिलते हैं। पशु आकृतियों वाली मुहरें भी मिली हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि एक मुहर पर दिखाई देने वाली आकृति बाद में भगवान शिव के पशुपति रूप से मिलती-जुलती है। 6. लिपि और कला मोहनजोदड़ो की लिपि आज भी अपूर्ण रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है। इस सभ्यता की कला अत्यंत
उत्कृष्ट थी। प्रसिद्ध कांस्य की “नर्तकी” की मूर्ति दाढ़ी वाले पुजारी की मूर्ति सुंदर मुहरें और मिट्टी के खिलौने ये सभी उस समय की उच्च कला और शिल्पकला को दर्शाते हैं। 7. पतन के कारण लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास मोहनजोदड़ो सभ्यता का पतन शुरू हो गया। इसके संभावित कारणों में शामिल हैं: प्राकृतिक आपदाएँ और बाढ़ जलवायु परिवर्तन व्यापार का पतन नदी के मार्ग में परिवर्तन हालाँकि इसके पतन का सटीक कारण आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का विषय है। निष्कर्ष मोहनजोदड़ो सभ्यता मानव इतिहास की सबसे उन्नत प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक थी। इसका सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित व्यापार प्रणाली, उत्कृष्ट कला और वैज्ञानिक सोच यह दर्शाती है कि हजारों वर्ष पहले भी मानव समाज अत्यंत संगठित और विकसित था। आज मोहनजोदड़ो के अवशेष हमें यह सिखाते हैं कि सभ्यता का विकास केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और ज्ञान से भी होता है।
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- सीवान सहित बिहार की 10 बड़ी खबरें | फटाफट अंदाज़ में 🎤 ब्रेकिंग न्यूज़ | सीवान सहित बिहार की बड़ी खबरें नमस्कार… आप देख रहे हैं हिंदुस्तान TV। आइए जानते हैं सीवान सहित बिहार की बड़ी खबरें फटाफट अंदाज़ में। 🔹 सीवान में नगर परिषद की बड़ी कार्रवाई, आनंद नगर इलाके में जेसीबी चलाकर अवैध अतिक्रमण हटाया गया। 🔹 सीवान में शराब के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान, 25 अवैध शराब भट्ठियां ध्वस्त और हजारों लीटर अर्धनिर्मित शराब नष्ट। 🔹 सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के 486 बकायेदारों पर केस दर्ज, कई लोगों पर गिरफ्तारी वारंट जारी। 🔹 सदर अस्पताल रोड पर नाले का पानी फैलने से मरीजों और राहगीरों को भारी परेशानी। 🔹 मौसम विभाग का अलर्ट, बिहार में तेज हवा और बारिश की संभावना जताई गई। 🔹 मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा जारी, कई जिलों में विकास योजनाओं की सौगात दी जा रही है। 🔹 सीवान में बिजली मेंटेनेंस के कारण कई इलाकों में दिनभर बिजली की आवाजाही। 🔹 मंडलकारा में बंदी दरबार का आयोजन, 550 कैदियों ने प्रशासन के सामने रखी अपनी समस्याएं। 🔹 दरौली में जमीन विवाद के मामले में पुलिस जांच तेज। 🔹 और सीवान के स्कूल के बच्चों का शैक्षणिक दौरा, पटना के चिड़ियाघर और तारामंडल के लिए रवाना। 📺 ऐसी ही ताज़ा खबरों के लिए Hindustan TV को फॉलो करें। #SiwanNews #BiharNews #BreakingNews #Siwan #Bihar #HindustanTV #LocalNews #HindiNews1
- ब्रेकिंग न्यूज : गोपालगंज जिले के विजयीपुर थाना क्षेत्र के चौमुखा गांव के पास दो बाइकों की जोरदार टक्कर में एक बाइक सवार की मौत हो गई। मृतक की पहचान विजयीपुर थाना क्षेत्र के मटीयारी टोला रतनपुरा गांव निवासी राजकिशोर प्रजापति के 30 वर्षीय पुत्र अनिल प्रजापति के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, अनिल प्रजापति काम खत्म कर अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। चौमुखा गांव के पास पहुंचने पर विपरीत दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार बाडक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाडकें क्षतिग्रस्त हो गई और अनिल सडक पर गिर गए। पुलिस ने दोनों दुर्घटनाग्रस्त बाइकों को जब्त कर लिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है...1
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- मैरवा प्रखंड कार्यालय में सामाजिक सुरक्षा पेंशन सुधार हेतु विशेष शिविर का आयोजन मैरवा : सीवान जिले के मैरवा प्रखंड कार्यालय के सभागार कक्ष में सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन के लाभार्थियों की समस्याओं को सुना गया और उनके दस्तावेजों की जांच की गई। शिविर के दौरान पेंशन से संबंधित त्रुटियों को सुधारने का काम किया गया। साथ ही जिन लाभार्थियों को अब तक पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था, उनके आवेदन भी लिए गए और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों ने बताया कि सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस विशेष शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर में पहुंचे लोगों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया गया और उन्हें योजनाओं से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी दी गई। प्रखंड प्रशासन का कहना है कि आगे भी इस तरह के शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि जरूरतमंद लोगों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।1
- 14march 2026 banda bundel khand jab gais ki kami hi nahi to ye line kaisi1
- सादर अवगत कराना है कि जनपद बलिया के कोतवाली थानान्तर्गत दिनांक 13.03.2026 को एक निजी हॉस्पिटल पूर्वांचल में एक महिला प्रसव के लिए एडमिट हुई और उसके दो मृत बच्चियां जन्म ली, उसके कुछ देर पश्चात उस महिला की भी मृत्यु हो गई, इस संबंध में परिजनों के द्वारा थाना स्थानीय पर प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसके प्रकरण में थाना स्थानीय पर वैधानिक कार्यवाही प्रचलित है । इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) बलिया कृपा शंकर की वीडियो बाइट1