चित्रकूट में 26 दिन में दूसरी बार बाढ़ जैसे हालात: मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान के पार; MP-UP प्रशासन अलर्ट, SDRF तैनात चित्रकूट / सतना: सतना जिले के चित्रकूट और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में 26 दिनों के भीतर दूसरी बार बाढ़ जैसे गंभीर हालात बन गए हैं। रामघाट पर मंडराया खतरा, दुकानें कराई गईं खाली शुक्रवार शाम मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश स्थित प्रसिद्ध रामघाट पर खतरे के निशान को पार कर गया। पानी घाट की सीढ़ियों को पार करते हुए आसपास की दुकानों और निचले इलाकों तक पहुँचने लगा है। शाम ढलते ही जलस्तर में हुई बढ़ोतरी से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई। खतरे को देखते हुए दुकानदारों ने अपनी दुकानें खाली कर सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना शुरू कर दिया है। वहीं श्रद्धालुओं और आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। जलस्तर का रिकॉर्ड और स्थिति मध्य प्रदेश की सीमा में 25 सितंबर की रात 8 बजे आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर 135.02 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह इस क्षेत्र के अधिकतम बाढ़ जलस्तर (139.60 मीटर) से 4.58 मीटर कम है। प्रशासन लगातार बढ़ते जलस्तर पर पैनी नज़र बनाए हुए है। 26 दिन पहले वायुसेना की ली गई थी मदद चित्रकूट में इससे पहले 29 और 30 अगस्त को भी मंदाकिनी नदी में जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँच गया था। उस दौरान रामघाट समेत कई इलाकों में लोग बाढ़ में फँस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद लेनी पड़ी थी। प्रशासन अलर्ट, SDRF की टीम तैनात स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों का प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ पर है। शुक्रवार शाम सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह ने चित्रकूट पहुँचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। चित्रकूट में सुरक्षा के मद्देनजर SDRF (राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल) की टीम तैनात कर दी गई है। तटीय व निचले इलाकों में लाउडस्पीकर के ज़रिए अनाउंसमेंट कराकर लोगों को सतर्क रहने और घाटों से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है, तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित आश्रय स्थलों पर शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासनिक अपील: प्रशासन ने आम जनता, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे नदी और घाट के निचले हिस्सों में जाने से बचें तथा सतर्क रहें।
चित्रकूट में 26 दिन में दूसरी बार बाढ़ जैसे हालात: मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान के पार; MP-UP प्रशासन अलर्ट, SDRF तैनात चित्रकूट / सतना: सतना जिले के चित्रकूट और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में 26 दिनों के भीतर दूसरी बार बाढ़ जैसे गंभीर हालात बन गए हैं। रामघाट पर मंडराया खतरा, दुकानें कराई गईं खाली शुक्रवार शाम मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश स्थित प्रसिद्ध रामघाट पर खतरे के निशान को पार कर गया। पानी घाट की सीढ़ियों को पार करते हुए आसपास की दुकानों और निचले इलाकों तक पहुँचने लगा है। शाम ढलते ही जलस्तर में हुई बढ़ोतरी से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई। खतरे को देखते हुए दुकानदारों ने अपनी दुकानें खाली कर सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना शुरू कर दिया है। वहीं श्रद्धालुओं और आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। जलस्तर का रिकॉर्ड और स्थिति मध्य प्रदेश की सीमा में 25 सितंबर की रात 8 बजे आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर 135.02 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह इस क्षेत्र के अधिकतम बाढ़ जलस्तर (139.60 मीटर) से 4.58 मीटर कम है। प्रशासन लगातार बढ़ते जलस्तर पर पैनी नज़र बनाए हुए है। 26 दिन पहले वायुसेना की ली गई थी मदद चित्रकूट में इससे पहले 29 और 30 अगस्त को भी मंदाकिनी नदी में जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँच गया था। उस दौरान रामघाट समेत कई इलाकों में लोग बाढ़ में फँस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद लेनी पड़ी थी। प्रशासन अलर्ट, SDRF की टीम तैनात स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों का प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ पर है। शुक्रवार शाम सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह ने चित्रकूट पहुँचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। चित्रकूट में सुरक्षा के मद्देनजर SDRF (राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल) की टीम तैनात कर दी गई है। तटीय व निचले इलाकों में लाउडस्पीकर के ज़रिए अनाउंसमेंट कराकर लोगों को सतर्क रहने और घाटों से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है, तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित आश्रय स्थलों पर शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासनिक अपील: प्रशासन ने आम जनता, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे नदी और घाट के निचले हिस्सों में जाने से बचें तथा सतर्क रहें।
- *झूला झूलता मैहर विकास! बिना गाइडलाइन के निर्माण, श्रद्धालु और वाहन चालक परेशान* मैहर। धार्मिक नगरी मैहर में विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर भले ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। शहर में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाएं कई स्थानों पर दिखाई नहीं दे रही हैं। निर्माण स्थल पर न तो पर्याप्त चेतावनी बोर्ड नजर आते हैं, न रेडियम संकेतक और न ही डायवर्सन की स्पष्ट जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए गए हैं। स्थिति यह है कि जहां मन आया, वहां निर्माण कार्य के चलते रास्ता बदल दिया जाता है और कई जगह बैरियर लगाकर यातायात को रोक दिया जाता है। इससे मैहर आने वाले बाहर के श्रद्धालुओं और यात्रियों को रास्ता समझने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान यदि स्पष्ट सांकेतिक बोर्ड, रेडियम पट्टियां और सुरक्षित डायवर्सन की व्यवस्था हो तो दुर्घटनाओं की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज अलाउद्दीन चौक पर देखने को मिला सड़क निर्माण की अव्यवस्था का एक उदाहरण। सतना निवासी एक चार पहिया वाहन सड़क निर्माण के दौरान किनारे पर्याप्त संकेतक और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क से नीचे उतर गया। बाद में क्रेन की मदद से वाहन को वापस सड़क पर लाया गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। शहर में कई जगह सड़कें टुकड़ों-टुकड़ों में बन रही हैं। कहीं सड़क बनी तो कहीं किनारा अधूरा छोड़ दिया गया। निर्माणाधीन मार्गों पर रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब पर्याप्त रेडियम, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं होने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता। सवाल यह है कि दिन-रात इन्हीं सड़कों से गुजरने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को यह अव्यवस्था क्यों नजर नहीं आती? यदि शहर में विकास कार्य हो रहे हैं तो उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और निर्माण की निर्धारित गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की है। मैहर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर विकास के नाम पर कब तक एक तरफ सड़क बनाई जाएगी और दूसरी तरफ उसे उखाड़ने जैसी स्थिति पैदा होती रहेगी? क्या विकास का मतलब केवल निर्माण करा देना है, या फिर सुरक्षित, व्यवस्थित और टिकाऊ निर्माण भी विकास का हिस्सा है? मैहर में जनता और बाहर से आने वाले श्रद्धालु विकास का लाभ चाहते हैं, लेकिन ऐसा विकास नहीं जिसमें सड़क पर चलना भी किसी झूले की सवारी जैसा अनुभव बन जाए।3
- श्री श्री 1008 श्री जुगल किशोर जू सरकार धाम पन्ना दिनांक 25 श्री श्री 1008 श्री जुगल किशोर जू सरकार धाम पन्ना दिनांक 25 सितंबर 2026 दिन शुक्रवार के आज के दर्शन जय जय श्री राधे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे जय श्री राधे.........1
- खबर सतना/रामवन पथ गमन मार्ग पर कार ने बाइक को मारी जोरदार टक्कर, वनकर्मी गंभीर घायल सतना रेफर। बीती रात की बताई जा रही घटना। खबर सतना/रामवन पथ गमन मार्ग पर कार ने बाइक को मारी जोरदार टक्कर, वनकर्मी गंभीर घायल सतना रेफर। बीती रात की बताई जा रही घटना। मैहर ,सतना बाईपास स्थित रामवन पथ गमन मार्ग पर बुधवार देर रात टोल प्लाजा के पहले एक तेज रफ्तार कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार युवक सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा रहा। इसी दौरान वहां से गुजर रहे युवा कांग्रेस मैहर के जिला अध्यक्ष सौरभ लल्ला शर्मा ने अपने साथियों के साथ रुककर घायल की मदद की और पुलिस को सूचना दी। जानकारी के मुताबिक, घायल की पहचान रावेंद्र वर्मा पिता द्वारिका प्रसाद वर्मा, उम्र 32 वर्ष, निवासी हनुमान नगर, जिला सतना के रूप में हुई है। रावेंद्र मैहर वन विभाग में स्थायी कर्मचारी के रूप में पदस्थ हैं। बुधवार रात ड्यूटी खत्म करने के बाद वह बाइक से सतना स्थित अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।1
- *दमदार सरपंच रावेंद्र मिश्रा ने जन सुनवाई में जनहित के मुद्दों में बखिया उधेड़ दी,जन सुनवाई के ठेकेदारों को लज्जा भी न आई* रिवारा क्षेत्र में कल अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग की जन सुनवाई थी अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग नई खदान यहां खोलना चाह रहा है जहां कंपनी के पालतू चमचों ने कंपनी की ऐसी चमचागिरी की देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि चमचों की जीभ थोड़ी छोटी पड़ गई जिससे कायदे से बेचारे चाट नहीं पाए इसका मलाल उनको रहेगा। वही क्षेत्र के दमदार सरपंच के उद्योग के तामम कारनामों की ऐसी बखिया उधेड़ी ऐसा आइना दिखाया कि सभी की बोलती बंद हो गई। व्यक्ति के अगर आंख न हो तो उसे अंधा कहते है लेकिन जिसके आंख हो रोशनी हो फिर भी उसे दिखाई न दे तो उसे क्या कहेंगे हमारी भाषा में उसे मदान्ध कहा जाता है इसलिए इन सुनवाई में अल्ट्राटेक सहित जो उनके पालतू चमचे थे वे ऐसा मदान्ध थे कि उन्हें क्षेत्र में कोई समस्या दिखाई ही नहीं दी। प्रदूषण से पूरा क्षेत्र कराह रहा है लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे है स्वांस टीवी फेफड़े लंग्स किडनी हार्ट की बीमारी तो आम हो चुकी है क्षेत्र में ईमानदारी से सर्वे करा लिया जाय इतने पेशेंट निकलेंगे कि आंख कान नाक सब चौंधिया जायेगे लेकिन चमचों को रामराज्य नजर आता है। पानी बिजली सड़क शिक्षा की ऐसी बदहाल व्यवस्था आपने पूरे भारत में कही न देखी होगी। चमचों एक दिन के लिए आंखे उधार ले लो और भदानपुर मोहरबा रोड में चले जाओ प्रधानमंत्री सड़क की बोटी बोटी नोच कर यह उद्योग खा गया लेकिन तुम्हे दिखाई नहीं दिया अफसोस तुम्हारे नैनो में दिखाई नहीं दिया। हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों का जीना दुश्वार कर दिया कितने लोग बेघर हो गए लेकिन तुम्हारे नैन छिद्र बंद रहे। कितने आदिवासियों की जमीन यह उद्योग प्रशासन के दम पर बेजा कब्जा कर बिना कोई प्रतिफल दिए खोद कर समंदर बना दिया और तुम ताली बजाते रह गए। जिनकी जमीन गई उन्हें रोजगार का वादा था लेकिन बेचारे यहां वहा मजदूरी करते भटक रहे है दिखाई नहीं दिया। धन्यवाद सरपंच रावेंद्र मिश्रा जिन्होंने जनहित की बाते दमदारी से रखी क्षेत्र में उद्योग द्वारा उपजाई गई समस्याओं से अवगत कराया जिसका जवाब न तो उद्योग के पास था और न ही प्रशासन के पास। प्रशासन और उद्योग सग्गामित्ति से चलते है इसलिए परमिशन तो मिलेगी ही नहीं तो जितना विरोध क्षेत्र की जनता ने इस उद्योग का किया मैहर जिले में क्या प्रदेश में कही भी यह उद्योग अनुमति न पाता। *दमदार सरपंच रावेंद्र मिश्रा ने जन सुनवाई में जनहित के मुद्दों में बखिया उधेड़ दी,जन सुनवाई के ठेकेदारों को लज्जा भी न आई* रिवारा क्षेत्र में कल अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग की जन सुनवाई थी अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग नई खदान यहां खोलना चाह रहा है जहां कंपनी के पालतू चमचों ने कंपनी की ऐसी चमचागिरी की देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि चमचों की जीभ थोड़ी छोटी पड़ गई जिससे कायदे से बेचारे चाट नहीं पाए इसका मलाल उनको रहेगा। वही क्षेत्र के दमदार सरपंच के उद्योग के तामम कारनामों की ऐसी बखिया उधेड़ी ऐसा आइना दिखाया कि सभी की बोलती बंद हो गई। व्यक्ति के अगर आंख न हो तो उसे अंधा कहते है लेकिन जिसके आंख हो रोशनी हो फिर भी उसे दिखाई न दे तो उसे क्या कहेंगे हमारी भाषा में उसे मदान्ध कहा जाता है इसलिए इन सुनवाई में अल्ट्राटेक सहित जो उनके पालतू चमचे थे वे ऐसा मदान्ध थे कि उन्हें क्षेत्र में कोई समस्या दिखाई ही नहीं दी। प्रदूषण से पूरा क्षेत्र कराह रहा है लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे है स्वांस टीवी फेफड़े लंग्स किडनी हार्ट की बीमारी तो आम हो चुकी है क्षेत्र में ईमानदारी से सर्वे करा लिया जाय इतने पेशेंट निकलेंगे कि आंख कान नाक सब चौंधिया जायेगे लेकिन चमचों को रामराज्य नजर आता है। पानी बिजली सड़क शिक्षा की ऐसी बदहाल व्यवस्था आपने पूरे भारत में कही न देखी होगी। चमचों एक दिन के लिए आंखे उधार ले लो और भदानपुर मोहरबा रोड में चले जाओ प्रधानमंत्री सड़क की बोटी बोटी नोच कर यह उद्योग खा गया लेकिन तुम्हे दिखाई नहीं दिया अफसोस तुम्हारे नैनो में दिखाई नहीं दिया। हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों का जीना दुश्वार कर दिया कितने लोग बेघर हो गए लेकिन तुम्हारे नैन छिद्र बंद रहे। कितने आदिवासियों की जमीन यह उद्योग प्रशासन के दम पर बेजा कब्जा कर बिना कोई प्रतिफल दिए खोद कर समंदर बना दिया और तुम ताली बजाते रह गए। जिनकी जमीन गई उन्हें रोजगार का वादा था लेकिन बेचारे यहां वहा मजदूरी करते भटक रहे है दिखाई नहीं दिया। धन्यवाद सरपंच रावेंद्र मिश्रा जिन्होंने जनहित की बाते दमदारी से रखी क्षेत्र में उद्योग द्वारा उपजाई गई समस्याओं से अवगत कराया जिसका जवाब न तो उद्योग के पास था और न ही प्रशासन के पास। प्रशासन और उद्योग सग्गामित्ति से चलते है इसलिए परमिशन तो मिलेगी ही नहीं तो जितना विरोध क्षेत्र की जनता ने इस उद्योग का किया मैहर जिले में क्या प्रदेश में कही भी यह उद्योग अनुमति न पाता।1
- तकनीकी स्वीकृति की फाइल में त्रुटि का पेंच 39 वार्डों का विकास ठप, शहडोल नपा के पार्षदों ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन शहडोल। शहडोल नगर पालिका में इन दिनों विकास का पहिया घोंघे की रफ्तार से भी धीमा चल रहा है, और इसका जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि संभागीय कार्यालय में बैठे अफसरों की वो लाल कलम है, जो हर फाइल में कोई न कोई त्रुटि निकालकर उसे कागजों के ढेर में वापस दबा देती है। पिछले दो सालों से नगर के सभी 39 वार्डों के पार्षद अपने-अपने इलाके में रोड, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। आखिर में सब्र का बांध टूटा तो संयुक्त पार्षद मंच के बैनर तले तमाम पार्षदों ने एकजुट होकर संभागायुक्त की चौखट पर जाकर ज्ञापन का पुलिंदा सौंप दिया। 2 साल से फाइलों का पिंग-पॉन्ग खेल पार्षदों का सीधा आरोप है कि जब भी वार्ड की जनता के लिए रोड, नाली या पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रस्ताव नगर पालिका स्तर से मंजूर होकर तकनीकी स्वीकृति के लिए कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास संभागीय कार्यालय भेजा जाता है, तो वहां बैठे जिम्मेदार अफसर कोई न कोई कमी या त्रुटि का बहाना बनाकर फाइलों को वापस लौटा देते हैं। पिछले 2 वर्षों से फाइलों का यह पिंग-पॉन्ग खेल बदस्तूर जारी है। निकाय दफ्तर से फाइल ईई दफ्तर जाती है और वहां से तकनीकी पेंच फंसाकर वापस नगर पालिका भेज दी जाती है। इस चक्कर में 39 वार्डों का विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़ा है और जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी ही नगर सरकार में उपेक्षित और लाचार महसूस कर रहे हैं। 1 साल में 3 सीएमओ और 2 ईई बदले! शहडोल नगर पालिका में प्रशासनिक स्थिरता की क्या स्थिति है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते एक साल में यहां 3-3 मुख्य नगर पालिका अधिकारी बदले जा चुके हैं। संभागीय कार्यालय का हाल तो और भी हास्यास्पद है, यहां कार्यपालन यंत्री के 02 पद स्वीकृत हैं, लेकिन काम सिर्फ 01 ही अफसर के भरोसे चल रहा है। इस एक साल में यहां भी 2 बार कार्यपालन यंत्री बदले जा चुके हैं। जब दफ्तरों में अफसरों का आना-जाना ही लगा रहेगा, तो विकास की फाइलों पर दस्तखत कौन करेगा? इस तबादला उद्योग का खामियाजा सीधे तौर पर शहडोल की आम जनता भुगत रही है। बुढ़ार चौक से न्यू बस स्टैंड रोड बेहाल संयुक्त पार्षद मंच ने अपने शिकायती पत्र में नगर की दो प्रमुख और विकराल समस्याओं पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कराया है। बुढ़ार चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग: इस बेहद व्यस्त मार्ग के निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सडक़ की खस्ताहाली और धूल-गड्ढों से जनता का गुस्सा दिन-ब-दिन फूट रहा है। सीवर परियोजना का कोराम: पिछले 2 सालों से शहडोल शहर में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर पूरे शहर को खोदकर छोड़ दिया गया है। सीवर कंपनी अपनी मर्जी से जहां चाहे खुदाई कर देती है, न कोई समयसीमा है और न ही वार्ड पार्षदों को इसकी कोई पूर्व सूचना दी जाती है। जनता रोज दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है और ठेकेदार बेफिक्र घूम रहा है। अव्यवस्था सुधारो, वरना होगा आंदोलन शहडोल के सभी वार्ड पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि यदि तकनीकी स्वीकृतियों में अनावश्यक देरी का यह सिलसिला तुरंत बंद नहीं हुआ और सीवर कंपनी की मनमानी पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनप्रतिनिधि खामोश नहीं बैठेंगे। अब देखना यह होगा कि संभागायुक्त के हस्तक्षेप के बाद संभागीय कार्यालय के कार्यपालन यंत्री और नगर पालिका प्रशासन की नींद टूटती है या फिर 39 वार्डों का विकास यूं ही फाइलों के पन्नों में दम तोड़ता रहेगा। तकनीकी स्वीकृति की फाइल में त्रुटि का पेंच 39 वार्डों का विकास ठप, शहडोल नपा के पार्षदों ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन शहडोल। शहडोल नगर पालिका में इन दिनों विकास का पहिया घोंघे की रफ्तार से भी धीमा चल रहा है, और इसका जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि संभागीय कार्यालय में बैठे अफसरों की वो लाल कलम है, जो हर फाइल में कोई न कोई त्रुटि निकालकर उसे कागजों के ढेर में वापस दबा देती है। पिछले दो सालों से नगर के सभी 39 वार्डों के पार्षद अपने-अपने इलाके में रोड, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। आखिर में सब्र का बांध टूटा तो संयुक्त पार्षद मंच के बैनर तले तमाम पार्षदों ने एकजुट होकर संभागायुक्त की चौखट पर जाकर ज्ञापन का पुलिंदा सौंप दिया। 2 साल से फाइलों का पिंग-पॉन्ग खेल पार्षदों का सीधा आरोप है कि जब भी वार्ड की जनता के लिए रोड, नाली या पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रस्ताव नगर पालिका स्तर से मंजूर होकर तकनीकी स्वीकृति के लिए कार्यपालन यंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास संभागीय कार्यालय भेजा जाता है, तो वहां बैठे जिम्मेदार अफसर कोई न कोई कमी या त्रुटि का बहाना बनाकर फाइलों को वापस लौटा देते हैं। पिछले 2 वर्षों से फाइलों का यह पिंग-पॉन्ग खेल बदस्तूर जारी है। निकाय दफ्तर से फाइल ईई दफ्तर जाती है और वहां से तकनीकी पेंच फंसाकर वापस नगर पालिका भेज दी जाती है। इस चक्कर में 39 वार्डों का विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़ा है और जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी ही नगर सरकार में उपेक्षित और लाचार महसूस कर रहे हैं। 1 साल में 3 सीएमओ और 2 ईई बदले! शहडोल नगर पालिका में प्रशासनिक स्थिरता की क्या स्थिति है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते एक साल में यहां 3-3 मुख्य नगर पालिका अधिकारी बदले जा चुके हैं। संभागीय कार्यालय का हाल तो और भी हास्यास्पद है, यहां कार्यपालन यंत्री के 02 पद स्वीकृत हैं, लेकिन काम सिर्फ 01 ही अफसर के भरोसे चल रहा है। इस एक साल में यहां भी 2 बार कार्यपालन यंत्री बदले जा चुके हैं। जब दफ्तरों में अफसरों का आना-जाना ही लगा रहेगा, तो विकास की फाइलों पर दस्तखत कौन करेगा? इस तबादला उद्योग का खामियाजा सीधे तौर पर शहडोल की आम जनता भुगत रही है। बुढ़ार चौक से न्यू बस स्टैंड रोड बेहाल संयुक्त पार्षद मंच ने अपने शिकायती पत्र में नगर की दो प्रमुख और विकराल समस्याओं पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कराया है। बुढ़ार चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग: इस बेहद व्यस्त मार्ग के निर्माण को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सडक़ की खस्ताहाली और धूल-गड्ढों से जनता का गुस्सा दिन-ब-दिन फूट रहा है। सीवर परियोजना का कोराम: पिछले 2 सालों से शहडोल शहर में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर पूरे शहर को खोदकर छोड़ दिया गया है। सीवर कंपनी अपनी मर्जी से जहां चाहे खुदाई कर देती है, न कोई समयसीमा है और न ही वार्ड पार्षदों को इसकी कोई पूर्व सूचना दी जाती है। जनता रोज दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है और ठेकेदार बेफिक्र घूम रहा है। अव्यवस्था सुधारो, वरना होगा आंदोलन शहडोल के सभी वार्ड पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि यदि तकनीकी स्वीकृतियों में अनावश्यक देरी का यह सिलसिला तुरंत बंद नहीं हुआ और सीवर कंपनी की मनमानी पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनप्रतिनिधि खामोश नहीं बैठेंगे। अब देखना यह होगा कि संभागायुक्त के हस्तक्षेप के बाद संभागीय कार्यालय के कार्यपालन यंत्री और नगर पालिका प्रशासन की नींद टूटती है या फिर 39 वार्डों का विकास यूं ही फाइलों के पन्नों में दम तोड़ता रहेगा।2
- मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान: रामपुर बघेलान में प्रशासन का शक्ति प्रदर्शन, एक ही ट्रेवलर में पहुंचा पूरा अमला विधायक, कलेक्टर और एसपी ने दिया भरोसे का संदेश बोले, जनता का विश्वास ही हमारी ताकत,, "रामपुर बाघेलान, सतना। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान को लेकर आज रामपुर बघेलान तहसील कार्यालय में प्रशासनिक अमले का जमावड़ा लगा। अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि *कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, डीएफओ मयंक चांदीवाल, अपर कलेक्टर विकास सिंह, एसडीएम एल.आर. जांगड़े सहित जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारी एक साथ एक ही ट्रेवलर में सवार होकर कलेक्ट्रेट सतना से रामपुर बघेलान पहुंचे। तहसील परिसर में *विधायक विक्रम सिंह विक्की और जनपद अध्यक्ष राबेन्द्र सिंह छोटू* के साथ बड़ी बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों-कर्मचारियों को अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। विधायक विक्रम सिंह विक्की ने कहा - "यह अभियान सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा है कि हर योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। रामपुर में हम हर समस्या का समाधान मौके पर ही करेंगे।" कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने कहा - "इस अभियान का उद्देश्य शासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत करना है। आज पूरा प्रशासन एक वाहन से इसलिए आया ताकि टीम भावना का संदेश जाए और जनता को लगे कि पूरा प्रशासन उनके साथ खड़ा है। सभी विभाग फील्ड में रहकर निराकरण करेंगे।" पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह ने कहा - "जन विश्वास में पुलिस की भूमिका सबसे अहम है। हमारा लक्ष्य जनता में सुरक्षा और भरोसे का भाव बढ़ाना है। हम गांव-गांव जाकर संवाद करेंगे और भयमुक्त, अपराधमुक्त समाज बनाएंगे।"4
- खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज चैनल मध्य प्रदेश सतना जिला संपादक अरुण कुमार शर्मा खास खबर चित्रकूट- मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के बाद क्षेत्र में जारी लगातार बारिश के बाद अलर्ट मोड पर प्रशासन, मन्दाकिनी किनारे रहने वाले श्रद्धालुओं, रहवासी एवं दुकानदारों को नदी के घाटों से दूर रहने एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई, नाव से श्रद्धालुओं को नौका विहार न करवाने की अपील की गई, इस मौके पर मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, तहसीलदार कमलेश सिंह भदौरिया, सीएमओ अंकित सोनी और सहायक राजस्व निरीक्षक सदीप त्रिपाठी मौजूद रहे।1
- उमरिया जिले के बांधवगढ़ में 5 दिनों तक गजराज उड़ाएंगे मौज हांथी महोत्सव उमरिया जिले के बांधवगढ़ में 5 दिनों तक गजराज उड़ाएंगे मौज। बाघों के लिए विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आज से जंगल के सबसे बड़े सेवकों का सम्मान शुरू हो रहा है बांधवगढ़ में गुरुवार से 5 दिवसीय हाथी महोत्सव की शुरुआत हो रही है इस बार खास बात ये है कि ये महोत्सव ताला गेट में नहीं बल्कि परासी गेट में मनाया जा रहा है जिसमें बांधवगढ़ के 15 हाथी मे से 9 हाथी शामिल हुए है प्रतिवर्ष हाथी महोत्सव का आयोजन हाथियों के सम्मान और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है इस बार ये महोत्सव 24 सितंबर से 28 सितंबर तक चलेगा आयोजन को लेकर धमोखर बफर परिक्षेत्र के परासी गेट में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं महोत्सव के दौरान 5 दिनों तक हाथियों से कोई भी काम नहीं लिया जाएगा रोज सुबह सभी हाथियों को नहलाने के बाद चंदन का टीका और तेल से मालिश की जाएगी पशु चिकित्सकों की विशेष टीम उनका स्वास्थ्य परीक्षण करेगी वहीं उनके मनपसंद आहार के तौर पर केला, सेब, गन्ना, नारियल, अमरूद, गुड़ और रोटी दी जाएगी पूरे दिन उन्हें जंगल में मौजमस्ती के लिए खुला छोड़ा जाएगा BTR में हाथियों की भूमिका बेहद अहम है जहाँ गाड़ियां नहीं पहुंच पाती वहाँ रेस्क्यू गश्त और घायल वन्यजीवों तक पहुंचने के लिए इन्हीं हाथियों की मदद ली जाती है इस बार आयोजन स्थल बदलने के पीछे प्रबंधन का उद्देश्य परासी और बफर जोन के ग्रामीणों को भी इस उत्सव से जोड़ना है ताकि जंगली हाथियों के व्यवहार को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ सके बांधवगढ़ का ये वार्षिक हाथी उत्साह हर वर्ष पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।1
- ग्राम खारी में सड़क निर्माण की मांग, ग्रामीणों ने विधायक से लगाई गुहार कीचड़ भरे रास्तों से आवागमन को मजबूर ग्रामीण, सड़क निर्माण की उठी मांग ब्यौहारी/शहडोल। जनपद पंचायत ब्यौहारी अंतर्गत ग्राम पंचायत खारी में सड़क सुविधा की समस्या को लेकर ग्रामीणों में परेशानी बनी हुई है। गांव में सड़क का अभाव होने के कारण बारिश के दौरान रास्तों में कीचड़ और जलभराव की स्थिति निर्मित हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक से अपील करते हुए ग्राम खारी में जल्द से जल्द सड़क निर्माण करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी और आवागमन सुगम हो सकेगा। वहीं, गांव की सड़क समस्या को लेकर विकास कार्यों और जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित जनप्रतिनिधि और प्रशासन उनकी समस्या का संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि ग्राम खारी में सड़क निर्माण को प्राथमिकता देते हुए जल्द समाधान किया जाए। ग्राम खारी में सड़क निर्माण की मांग, ग्रामीणों ने विधायक से लगाई गुहार कीचड़ भरे रास्तों से आवागमन को मजबूर ग्रामीण, सड़क निर्माण की उठी मांग ब्यौहारी/शहडोल। जनपद पंचायत ब्यौहारी अंतर्गत ग्राम पंचायत खारी में सड़क सुविधा की समस्या को लेकर ग्रामीणों में परेशानी बनी हुई है। गांव में सड़क का अभाव होने के कारण बारिश के दौरान रास्तों में कीचड़ और जलभराव की स्थिति निर्मित हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक से अपील करते हुए ग्राम खारी में जल्द से जल्द सड़क निर्माण करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी और आवागमन सुगम हो सकेगा। वहीं, गांव की सड़क समस्या को लेकर विकास कार्यों और जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित जनप्रतिनिधि और प्रशासन उनकी समस्या का संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि ग्राम खारी में सड़क निर्माण को प्राथमिकता देते हुए जल्द समाधान किया जाए।1