बारिश से तालाब बनी जसरा की नवीन सब्जी मंडी, कीचड़ और जलभराव से किसान-व्यापारी बेहाल प्रयागराज। यमुनापार की सबसे बड़ी नवीन सब्जी मंडी जसरा लगातार बारिश के बाद बदहाल हो गई है। मंडी परिसर में महीनों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। सड़कें कीचड़ से पट गई हैं और जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भरा हुआ है। जलभराव और गंदगी के कारण उठ रही दुर्गंध से व्यापारी, किसान और पल्लेदार परेशान हैं। प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाली मंडी में अव्यवस्थाओं के बीच कामकाज चल रहा है। मंडी की बिजली व्यवस्था भी लंबे समय से खराब पड़ी है। रात के समय आने वाले ट्रकों से सब्जियों की लोडिंग-अनलोडिंग अंधेरे में करनी पड़ती है। करीब एक सप्ताह पहले अंधेरे में काम कर रहे एक पल्लेदार को सांप ने डंस लिया था। उसकी हालत गंभीर हो गई थी, हालांकि उपचार के बाद उसकी जान बच गई। बुधवार को मंडी सचिव ने किया निरीक्षण समस्याओं की जानकारी मिलने पर बुधवार को मंडी सचिव श्यामलाल पटेल ने मंडी परिषद के जेई के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जल निकासी, नाली निर्माण, जर्जर सड़कों की मरम्मत और चट्टों पर लगे टीनशेड की मरम्मत सहित विभिन्न समस्याओं का आकलन किया गया। निरीक्षण के बाद आवश्यक कार्यों का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की बात कही गई। आढ़ती रामचंद्र सोनकर, पंचराज कुशवाहा और मंडी अध्यक्ष अजय साहू ने बताया कि जलभराव के कारण रोजाना कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारी राजकमल मांजू, रमाशंकर कौशल और नवीन ने बताया कि पूरी मंडी महज दो हैंडपंपों के सहारे चल रही है, जबकि मंडी की सड़कें दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। किसान राकेश कुशवाहा, नरगेन, राजीव, राधेश्याम सोनकर और कमलेश कुशवाहा ने बताया कि गड्ढों में वाहन फंसने और पलटने से सब्जियां बर्बाद हो रही हैं। वहीं पल्लेदार योगराज और अखिलेश ने कहा कि एक क्विंटल तक का बोझ उठाकर कीचड़ भरी सड़कों पर चलना किसी खतरे से कम नहीं है। पांच साल से बंद पड़ा सार्वजनिक शौचालय मंडी परिसर में करीब पांच वर्ष पहले बनाया गया सार्वजनिक शौचालय भी आज तक बंद पड़ा है। इसके चलते महिला किसानों और कर्मचारियों को खुले में शौच जाने की मजबूरी बनी हुई है। किसानों और व्यापारियों ने मंडी की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान कराने की मांग की है। निरीक्षण के दौरान मुन्ना सोनकर, बबोल सोनकर, शिवबाबू पटेल, सुशील केसरवानी, महेंद्र सोनकर, दिनेश कुशवाहा और सीताराम केसरवानी समेत बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने जल निकासी, सड़क, बिजली, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग उठाई।
बारिश से तालाब बनी जसरा की नवीन सब्जी मंडी, कीचड़ और जलभराव से किसान-व्यापारी बेहाल प्रयागराज। यमुनापार की सबसे बड़ी नवीन सब्जी मंडी जसरा लगातार बारिश के बाद बदहाल हो गई है। मंडी परिसर में महीनों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। सड़कें कीचड़ से पट गई हैं और जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भरा हुआ है। जलभराव और गंदगी के कारण उठ रही दुर्गंध से व्यापारी, किसान और पल्लेदार परेशान हैं। प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाली मंडी में अव्यवस्थाओं के बीच कामकाज चल रहा है। मंडी की बिजली व्यवस्था भी लंबे समय से खराब पड़ी है। रात के समय आने वाले ट्रकों से सब्जियों की लोडिंग-अनलोडिंग अंधेरे में करनी पड़ती है। करीब एक सप्ताह पहले अंधेरे में काम कर रहे एक पल्लेदार को सांप ने डंस लिया था। उसकी हालत गंभीर हो गई थी, हालांकि उपचार के बाद उसकी जान बच गई। बुधवार को मंडी सचिव ने किया निरीक्षण समस्याओं की जानकारी मिलने पर बुधवार को मंडी सचिव श्यामलाल पटेल ने मंडी परिषद के जेई के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जल निकासी, नाली निर्माण, जर्जर सड़कों की मरम्मत और चट्टों पर लगे टीनशेड की मरम्मत सहित विभिन्न समस्याओं का आकलन किया गया। निरीक्षण के बाद आवश्यक कार्यों का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की बात कही गई। आढ़ती रामचंद्र सोनकर, पंचराज कुशवाहा और मंडी अध्यक्ष अजय साहू ने बताया कि जलभराव के कारण रोजाना कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारी राजकमल मांजू, रमाशंकर कौशल और नवीन ने बताया कि पूरी मंडी महज दो हैंडपंपों के सहारे चल रही है, जबकि मंडी की सड़कें दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। किसान राकेश कुशवाहा, नरगेन, राजीव, राधेश्याम सोनकर और कमलेश कुशवाहा ने बताया कि गड्ढों में वाहन फंसने और पलटने से सब्जियां बर्बाद हो रही हैं। वहीं पल्लेदार योगराज और अखिलेश ने कहा कि एक क्विंटल तक का बोझ उठाकर कीचड़ भरी सड़कों पर चलना किसी खतरे से कम नहीं है। पांच साल से बंद पड़ा सार्वजनिक शौचालय मंडी परिसर में करीब पांच वर्ष पहले बनाया गया सार्वजनिक शौचालय भी आज तक बंद पड़ा है। इसके चलते महिला किसानों और कर्मचारियों को खुले में शौच जाने की मजबूरी बनी हुई है। किसानों और व्यापारियों ने मंडी की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान कराने की मांग की है। निरीक्षण के दौरान मुन्ना सोनकर, बबोल सोनकर, शिवबाबू पटेल, सुशील केसरवानी, महेंद्र सोनकर, दिनेश कुशवाहा और सीताराम केसरवानी समेत बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने जल निकासी, सड़क, बिजली, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग उठाई।
- चैनपुरवा मे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी नाली ठेकेदार ने अधूरी नाली छोड़कर किया खेल स्कूली बच्चे और बाइक सवार रोज गिरकर हो रहे घायल *बड़ा भ्रष्टाचार: चिल्ला गौहानी / चैनपुरवा चिल्ला गौहानी चैनपुरवा में 6 माह पहले जिला पंचायत निधि से बनी RCC नाली भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ठेकेदार ने अधूरी छोड़कर किया खेल, स्कूली बच्चे और बाइक सवार रोज गिरकर हो रहे घायल प्रयागराज /बारा ब्लॉक के चिल्ला गौहानी ग्राम पंचायत के चैनपुरवा बस्ती में भ्रष्टाचार का बड़ा नमूना देखने को मिल रहा है। 6 माह पहले जिला पंचायत निधि से बनवाई गई RCC नाली आज पूरी तरह से अधूरी और जर्जर पड़ी है।ग्रामीणों का आरोप अधूरी नाली बनी मौत का कुआं ठेकेदार ने नाली को बीच में ही अधूरी छोड़ दिया। न कहीं स्लैब डाला गया, न कहीं ढक्कन लगाया गया। खुली नाली में रोजाना स्कूली बच्चे, महिलाएं और बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं।मानक विहीन कार्य: नाली घटिया सीमेंट और कम सरिया लगाकर बनाई गई, जो 6 महीने में ही टूट-फूट गई।जिम्मेदार मौन शिकायत के बाद भी जिला पंचायत के अधिकारी, प्रधान और सचिव कोई सुध नहीं ले रहे। ग्रामीणों का कहना है कि पूरा पैसा कागजों में हजम कर लिया गया और काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। बच्चों की जान पर खतरा:चैनपुरवा में इसी नाली के रास्ते से आंगनवाड़ी के बच्चे रोज गुजरते हैं। खुली और गहरी नाली में कई बार बच्चे गिर चुके हैं। रात में बाइक सवारों के लिए यह नाली काल बन गई है। ग्रामीणों ने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज और DM प्रयागराज*से मांग की है कि मौके पर जांच कराकर दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और नाली को तत्काल पूरा कराया जाए।अगर जल्द नाली पूरी नहीं हुई तो ग्रामीण ब्लॉक मुख्यालय पर धरना देने को मजबूर होंगे। चिल्ला गौहानी चैनपुरवा में जिला पंचायत निधि की RCC नाली भ्रष्टाचार की भेंट - 6 माह से अधूरी, स्कूली बच्चे और बाइक सवार गिरकर घायल1
- मेजा क्षेत्र स्थित सोनार का तारा में धूमधाम से मनाया गया ललही छठ पर्व महिलाओं ने विधि-विधान से किया पूजन, पति और बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए की मंगलकामना मेजा क्षेत्र स्थित सोनार का तारा में धूमधाम से मनाया गया ललही छठ पर्व महिलाओं ने विधि-विधान से किया पूजन, पति और बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए की मंगलकामना मेजा, प्रयागराज। मेजा क्षेत्र स्थित सोनार का तारा में बुधवार को ललही छठ पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। पर्व को लेकर सुबह से ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा की सामग्री लेकर निर्धारित पूजा स्थल पर पहुंचीं और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर अपने सुहाग तथा बच्चों के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। ललही छठ पर्व को लेकर महिलाओं ने विशेष तैयारी की थी। सुबह से ही घरों में पूजा-पाठ की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाएं पारंपरिक रूप से पूजा की सामग्री लेकर एकत्रित हुईं। पूजा स्थल पर पहुंचकर महिलाओं ने सामूहिक रूप से ललही छठ की पूजा की तथा परिवार की खुशहाली के लिए भगवान से प्रार्थना की। इस दौरान महिलाओं ने श्रद्धा के साथ व्रत एवं पूजन किया। मान्यता के अनुसार ललही छठ का पर्व संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से जुड़ा हुआ है। इसी भावना के साथ महिलाओं ने अपने बच्चों की लंबी उम्र और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूजा-अर्चना की। साथ ही अपने सुहाग की सलामती तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की मंगलकामना की। सोनार का तारा में पर्व के दौरान धार्मिक माहौल बना रहा। पूजा स्थल पर महिलाओं की काफी भीड़ रही। महिलाएं समूह में बैठकर पूजा की विधि पूरी करती नजर आईं। पूजा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ पूजा की सामग्री और पर्व से जुड़ी मान्यताओं को साझा किया तथा आपस में पर्व की शुभकामनाएं दीं। ललही छठ पर्व के अवसर पर गांव में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। छोटे-बड़े सभी लोग पर्व को लेकर उत्साहित नजर आए। महिलाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने परिवार के सभी सदस्यों के सुखी जीवन की कामना करते हुए पर्व का समापन किया। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि ललही छठ उनके लिए आस्था और पारिवारिक सुख-समृद्धि से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा करने से परिवार पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ हर वर्ष महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव से इस पर्व को मनाती हैं। पर्व के दौरान गांव की आपसी एकता और भाईचारा भी देखने को मिला। महिलाओं ने मिल-जुलकर पूजा की और एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी। पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा। देर तक महिलाओं की पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां चलती रहीं।1
- आधी रात भारी बारिश बनी आफत: विशाल महुआ का पेड़ मकान पर गिरा, बुजुर्ग महिला गंभीर घायल गुनई गहरपुर में मचा हड़कंप, मकान क्षतिग्रस्त; भैंस का पैर टूटा, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मुआवजे की लगाई गुहार प्रतीक गौरव मेजा, प्रयागराज। ग्राम पंचायत गुनई गहरपुर में बुधवार की आधी रात करीब 12 बजे भारी बारिश के बीच एक बड़ा हादसा हो गया। शीतला प्रसाद पाल पुत्र स्वर्गीय हिंछलाल पाल के घर के सामने खड़ा विशालकाय महुआ का पेड़ अचानक भरभराकर मकान पर जा गिरा। पेड़ गिरने की तेज आवाज से आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। हादसे में मकान का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय परिवार के लोग घर में मौजूद थे। पेड़ गिरने से चमेला देवी पत्नी स्वर्गीय हिंछलाल पाल गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे के बाद परिजनों और आसपास के ग्रामीणों ने राहत एवं बचाव में मदद की तथा घायल महिला को उपचार दिलाने की व्यवस्था की। वहीं, पेड़ की चपेट में आने से परिवार की एक भैंस का पैर टूट गया, जिससे पशुधन की भी क्षति हुई है। मकान के क्षतिग्रस्त होने और भैंस के घायल होने से पीड़ित परिवार को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। प्रशासन से तत्काल सहायता की मांग की। घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मकान को हुए नुकसान और पशुधन की क्षति का उचित आकलन कराया जाए तथा शासन के नियमानुसार आर्थिक सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों ने घायल महिला के समुचित उपचार की व्यवस्था कराने के साथ-साथ क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान खतरा बने पेड़ों का सर्वे कराकर आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से जान-माल की क्षति को रोका जा सके। घटना के बाद से पीड़ित परिवार सदमे में है और प्रशासन से तत्काल राहत की उम्मीद लगाए बैठा है।3
- सालभर बाद फिर गांव में दिखा तेंदुआ! सरायइनायत के कतवारूपुर गांव में तेंदुआ दिखने से मचा हड़कंप। तेंदुआ CCTV कैमरे में कैद होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की है। सालभर बाद फिर गांव में दिखा तेंदुआ! सरायइनायत के कतवारूपुर गांव में तेंदुआ दिखने से मचा हड़कंप। तेंदुआ CCTV कैमरे में कैद होने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की है।1
- सिरसा घाट पर बढ़ता गंगा-जमुना का जलस्तर, दावों की खुली पोल! 40 साल पुरानी सड़क, नाली का पानी गंगा में, स्वास्थ्य टीम का भी अता-पता नहीं मेजा/सिरसा। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम क्षेत्र में जलस्तर बढ़ता नजर आ रहा है। ऐसे में सिरसा नगर पंचायत अंतर्गत सिरसा घाट की जमीनी हकीकत सरकारी व्यवस्थाओं के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। घाटों पर बेहतर व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मौके पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सिरसा घाट तक पहुंचने वाली सड़क करीब 40 वर्ष पुरानी है और आज भी उसी के सहारे आवागमन हो रहा है। बढ़ते जलस्तर के बीच घाट पर साफ-सफाई, जलनिकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई दे रहा है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि नाली का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है, जिससे नदी की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए टीमों को मुस्तैद रखने की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक सिरसा घाट पर स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम मौके पर नजर नहीं आई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कागजों में तैयार स्वास्थ्य टीम जमीन पर कहां है? मामले को लेकर समाजसेवियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रयागराज डॉ. अरुण तिवारी से संपर्क करने का प्रयास किया। सीएमओ ने कहा कि “हम अधीक्षक से बात करके बताते हैं।” अब सवाल यह है कि बढ़ते जलस्तर के बीच अगर कोई आपात स्थिति पैदा होती है तो सिरसा घाट पर स्वास्थ्य और राहत व्यवस्था कितनी तैयार है? सरकारी दावों और सिरसा घाट की जमीनी हकीकत के बीच का यह अंतर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सिरसा घाट पर बढ़ता गंगा-जमुना का जलस्तर, दावों की खुली पोल! 40 साल पुरानी सड़क, नाली का पानी गंगा में, स्वास्थ्य टीम का भी अता-पता नहीं मेजा/सिरसा। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम क्षेत्र में जलस्तर बढ़ता नजर आ रहा है। ऐसे में सिरसा नगर पंचायत अंतर्गत सिरसा घाट की जमीनी हकीकत सरकारी व्यवस्थाओं के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। घाटों पर बेहतर व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मौके पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सिरसा घाट तक पहुंचने वाली सड़क करीब 40 वर्ष पुरानी है और आज भी उसी के सहारे आवागमन हो रहा है। बढ़ते जलस्तर के बीच घाट पर साफ-सफाई, जलनिकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई दे रहा है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि नाली का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है, जिससे नदी की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए टीमों को मुस्तैद रखने की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक सिरसा घाट पर स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम मौके पर नजर नहीं आई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कागजों में तैयार स्वास्थ्य टीम जमीन पर कहां है? मामले को लेकर समाजसेवियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रयागराज डॉ. अरुण तिवारी से संपर्क करने का प्रयास किया। सीएमओ ने कहा कि “हम अधीक्षक से बात करके बताते हैं।” अब सवाल यह है कि बढ़ते जलस्तर के बीच अगर कोई आपात स्थिति पैदा होती है तो सिरसा घाट पर स्वास्थ्य और राहत व्यवस्था कितनी तैयार है? सरकारी दावों और सिरसा घाट की जमीनी हकीकत के बीच का यह अंतर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।1
- प्रयागराज/बारा: ग्राम सभा अमिलिया और नौढ़ीयातरहार में आवारा पशुओं के आतंक से किसान बेबस और लाचार हैं, भीषण बारिश में दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि दिन में तो किसी तरह फसल बचा लेते हैं, लेकिन रात में आवारा पशुओं का झुंड खेतों में घुसकर खून-पसीने की कमाई को चौपट कर देता है। यह बारा क्षेत्र का सबसे पिछड़ा गांव बताया जा रहा है, जहां 95 प्रतिशत लोग किसानी पर आश्रित हैं, किसानों ने महंगाई में कर्ज लेकर रोपाई, खाद, तार और खंभा की व्यवस्था की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा में एक भी पशु बाड़ा नहीं है और सरकार द्वारा इस पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे किसानों की लहलहाती फसल रातों-रात बर्बाद हो रही है। किसानों ने बताया कि अगर यही स्थिति रही तो वे भरण-पोषण में असमर्थ होकर खुदकुशी करने को मजबूर होंगे, उनकी दुर्दशा सुनने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विधायक, सांसद और प्रशासन इस ग्राम सभा में गौशाला और पशु बाड़े की व्यवस्था कराकर किसानों को आवारा पशुओं से निजात दिलाए।2
- कब ईश्वर किस रूप में आएंगे... यह आपकी ढृढ़ आस्था व विश्वास पर निर्भर करता है...फैक्ट है... नेपाल बाढ़ की त्रासदी में तेज बहाव की धारा के बीच फंसे इस घर के छः लोग ने जीवन की आशा बिल्कुल छोड़ दी थी, विडियो वायरल। कब ईश्वर किस रूप में आएंगे... यह आपकी ढृढ़ आस्था व विश्वास पर निर्भर करता है...फैक्ट है... नेपाल बाढ़ की त्रासदी में तेज बहाव की धारा के बीच फंसे इस घर के छः लोग ने जीवन की आशा बिल्कुल छोड़ दी थी, विडियो वायरल। लेकिन इस घर की महिला सदस्य #लक्ष्मी पांडे ने सुरक्षित बचने के बाद बताया की... हम छः लोग चौथी मंजिल पर चले गए थे पानी का बहाव तीसरी मंजिल के ऊपर तक बहने लगा था... उस वक्त हम सभी लोग ॐ नमः शिवाय और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे... हम सभी को भगवान शंकर ने बचाया है... ईश्वर की कृपा से हम सभी बच गए... ईश्वरीय कृपा का यह प्रत्यक्ष उदाहरण... श्रीसीताराम1
- UP DGP राजीव कृष्ण जी का प्रयागराज पुलिस कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर अजय पाल सर ने किया एयरपोर्ट पर स्वागत UP DGP राजीव कृष्ण जी का प्रयागराज पुलिस कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर अजय पाल सर ने किया एयरपोर्ट पर स्वागत1
- हर घर योगी259 मेजाविधान सभाचुनाव क्षेत्र सिरसासंग राष्ट्रीय नर सेवाआपकासेवक रमेश चंद्र वर्मा 73557 128684