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सरसों की आवक बढ़ी तो खैरथल मंडी में लौटी रौनक खैरथल जिले में इन दिनों सरसों की फसल की आवक तेज हो गई है। मार्च माह की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने भी अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद किसान कड़ी धूप में सरसों की कटाई और थ्रेसिंग के काम में जुटे हुए हैं। खेतों में लगातार फसल निकालने के साथ ही खैरथल अनाज मंडी में नई सरसों की आवक बढ़ने लगी है। जिससे मंडी परिसर में इन दोनों अच्छी खासी चहल-पहल देखने को मिल रही है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 80 हजार कट्टे नई सरसों मंडी में पहुंच रहे हैं। फसल की कटाई तेज होने के कारण आने वाले दिनों में आवक और भी बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही है
सुनील कान्त गोल्डी
सरसों की आवक बढ़ी तो खैरथल मंडी में लौटी रौनक खैरथल जिले में इन दिनों सरसों की फसल की आवक तेज हो गई है। मार्च माह की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने भी अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद किसान कड़ी धूप में सरसों की कटाई और थ्रेसिंग के काम में जुटे हुए हैं। खेतों में लगातार फसल निकालने के साथ ही खैरथल अनाज मंडी में नई सरसों की आवक बढ़ने लगी है। जिससे मंडी परिसर में इन दोनों अच्छी खासी चहल-पहल देखने को मिल रही है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 80 हजार कट्टे नई सरसों मंडी में पहुंच रहे हैं। फसल की कटाई तेज होने के कारण आने वाले दिनों में आवक और भी बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही है
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- राजस्थान में नशे के खिलाफ एक नई जागरूकता की लहर देखने को मिल रही है। जहां एक ओर नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर युवा वर्ग अब इसके खिलाफ खुलकर सामने आ रहा है। हाल ही में आईपीएस अधिकारी विकास कुमार ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे खुद नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें। राजस्थान, जो अपनी वीरता, परंपरा और परिश्रम के लिए जाना जाता है, आज एक नए संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। यह संघर्ष है नशे जैसी बुराई के खिलाफ। समाज के विभिन्न वर्ग—छात्र, शिक्षक, अभिभावक और प्रशासन—अब एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह युवाओं के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जागरूकता अभियान, शिक्षा और सामूहिक प्रयास ही इसका प्रभावी समाधान हो सकते हैं। युवाओं का कहना है कि वे अपने प्रदेश की पहचान को किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने देंगे। उनके अनुसार, राजस्थान की असली ताकत उसकी युवा शक्ति, संस्कृति और मेहनत है, न कि नशा। अंततः यह लड़ाई केवल नशे के खिलाफ नहीं, बल्कि राजस्थान के भविष्य, उसकी पहचान और उसके स्वाभिमान को बचाने की लड़ाई है। और इस लड़ाई में जीत उसी की होगी जो जागरूक, संगठित और दृढ़ संकल्पित होगा।1
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