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"मुझे प्रेग्नेंट करिए, 8 लाख रुपए लीजिए " अजब-गजब फेसबुक पर इस कैप्शन के साथ महिलाओं के खूब वीडियो आते हैं। कुछ में मेरी विधवा बेटी से शादी, मेरी बेटी को बच्चा, ऐसे तमाम वीडियो दिखते हैं। ये सब मजदूर टाइप व बुजुर्गों के फेसबुक फीड में ज्यादा आते हैं। क्योंकि इनका इंटरेस्ट ऐसे पोस्ट में दिख जाता है। उत्सुकता बस कई बार कमेंट बॉक्स खोलता हूं तो सैकड़ों लोग अपना नंबर दिए रहते हैं। ऐसे ही बिहार के ये भाई साहब थे। प्रेग्नेंट करके 8 लाख रुपये लेना चाहते थे। इसलिए नंबर दे दिया। इन्हें फोन आया और 800 रुपए देने को कहा। उसने कहा कि कागज बन जाए, ताकि फंसने वाली बात न हो। भाई ने 2 दिन की मजदूरी भेज दी। इसके बाद फंसते चले गए। वीडियो में देख लीजिए। आप लोग अपने आसपास के लोगों को बताया करिए कि ये सब फ्रॉड है। ऐसे ही प्रेग्नेंट करने की इच्छा न पाले, वरना कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।

23 hrs ago
user_Local News
Local News
Aadhar center विश्रामपुर, पलामू, झारखंड•
23 hrs ago

"मुझे प्रेग्नेंट करिए, 8 लाख रुपए लीजिए " अजब-गजब फेसबुक पर इस कैप्शन के साथ महिलाओं के खूब वीडियो आते हैं। कुछ में मेरी विधवा बेटी से शादी, मेरी बेटी को बच्चा, ऐसे तमाम वीडियो दिखते हैं। ये सब मजदूर टाइप व बुजुर्गों के फेसबुक फीड में ज्यादा आते हैं। क्योंकि इनका इंटरेस्ट ऐसे पोस्ट में दिख जाता है। उत्सुकता बस कई बार कमेंट बॉक्स खोलता हूं तो सैकड़ों लोग अपना नंबर दिए रहते हैं। ऐसे ही बिहार के ये भाई साहब थे। प्रेग्नेंट करके 8 लाख रुपये लेना चाहते थे। इसलिए नंबर दे दिया। इन्हें फोन आया और 800 रुपए देने को कहा। उसने कहा कि कागज बन जाए, ताकि फंसने वाली बात न हो। भाई ने 2 दिन की मजदूरी भेज दी। इसके बाद फंसते चले गए। वीडियो में देख लीजिए। आप लोग अपने आसपास के लोगों को बताया करिए कि ये सब फ्रॉड है। ऐसे ही प्रेग्नेंट करने की इच्छा न पाले, वरना कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे।

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  • एसके झा सर (SK Jha Sir) का 'बगीचा' (बगीचा रेस्टोरेंट एंड रिसॉर्ट) बिहार के हाजीपुर (Hajipur) में NH-22 पर इकारा गुमटी (Ekara Gumti) / कुतुबपुर इकारा के पास स्थित है, जो पटना से लगभग 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। एसके झा सर के इस लोकप्रिय 'बगीचा' रेस्टोरेंट के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं: पता और मुख्य विशेषताएं पूरा पता: BAGICHA RESORT & RESTAURANT, NH-22, इकारा गुमटी (Ekara Gumti), हाजीपुर, वैशाली जिला, बिहार। [1] माहौल: यह एक बड़े हरे-भरे आम के बगीचे और प्राकृतिक वातावरण के बीच बना हुआ अनोखा रेस्टोरेंट व रिसॉर्ट है। [1, 2] खान-पान: यहाँ मिट्टी के चूल्हे पर बना पारंपरिक ग्रामीण शैली का खाना, देसी लिट्टी-चोखा, और लाइव तालाब से ताज़ा मछली निकालकर बनाई जाने वाली डिशेज मिलती हैं। [1, 2, 3]
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    एसके झा सर (SK Jha Sir) का 'बगीचा' (बगीचा रेस्टोरेंट एंड रिसॉर्ट) बिहार के हाजीपुर (Hajipur) में NH-22 पर इकारा गुमटी (Ekara Gumti) / कुतुबपुर इकारा के पास स्थित है, जो पटना से लगभग 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। 
एसके झा सर के इस लोकप्रिय 'बगीचा' रेस्टोरेंट के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
पता और मुख्य विशेषताएं
पूरा पता: BAGICHA RESORT & RESTAURANT, NH-22, इकारा गुमटी (Ekara Gumti), हाजीपुर, वैशाली जिला, बिहार। [1]
माहौल: यह एक बड़े हरे-भरे आम के बगीचे और प्राकृतिक वातावरण के बीच बना हुआ अनोखा रेस्टोरेंट व रिसॉर्ट है। [1, 2]
खान-पान: यहाँ मिट्टी के चूल्हे पर बना पारंपरिक ग्रामीण शैली का खाना, देसी लिट्टी-चोखा, और लाइव तालाब से ताज़ा मछली निकालकर बनाई जाने वाली डिशेज मिलती हैं। [1, 2, 3]
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    15 hrs ago
  • श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था, पैदल गश्त, सघन चेकिंग, यातायात प्रबंधन एवं रूट डायवर्जन के संबंध में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा की बाइट श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था, पैदल गश्त, सघन चेकिंग, यातायात प्रबंधन एवं रूट डायवर्जन के संबंध में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा की बाइट
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    श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था, पैदल गश्त, सघन चेकिंग, यातायात प्रबंधन एवं रूट डायवर्जन के संबंध में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा की बाइट
श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत सुरक्षा व्यवस्था, पैदल गश्त, सघन चेकिंग, यातायात प्रबंधन एवं रूट डायवर्जन के संबंध में पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा की बाइट
    user_Nitesh Kumar
    Nitesh Kumar
    Mandi Agent Mahuli•
    9 hrs ago
  • शिक्षक पर अभद्र व्यवहार सहित गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, बलरामपुर शिक्षक पर गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पेंडारी में पदस्थ शिक्षक शिवा यादव पर छात्राओं से अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों ने आयुक्त कार्यालय तक शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। नाराज अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई होने तक वे अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव का कहना है कि शिकायत अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आई है।जबकी लिखित में शिकायत इन्हें दी गई है।
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    शिक्षक पर अभद्र व्यवहार सहित गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं,

बलरामपुर 
शिक्षक पर गंभीर आरोप,शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं,
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पेंडारी में पदस्थ शिक्षक शिवा यादव पर छात्राओं से अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों ने आयुक्त कार्यालय तक शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। नाराज अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई होने तक वे अपनी बेटियों को स्कूल नहीं भेजेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव का कहना है कि शिकायत अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आई है।जबकी लिखित में शिकायत इन्हें दी गई है।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    26 min ago
  • रथ यात्रा पूजा कवर लाइव प्रसारण, Bharat News bulletin के साथ, दर्शन कर नवावे माथ l दिनाक 26/07/2026 को भारत के कुछ राज्यो मे मनाये जाने वाले रथ यात्रा के बारे आप सभी तो जानते ही है | कि भारत के ओडिसा राज्य मे बडे धुम - धाम से इस त्योहार को मनाया जाता है | रथ यात्रा के जुलूस मे लाखो लाख लोगो भिड़ देखने को मिलता है | साथ-साथ बंगाल ,तमिलनाडू , केरला , अन्य राज्यो मे भी बडे ही धुम - धाम से मनाया जाता है | जिसका मै एक विडियो के माध्यम से आप सभी दर्शण कराने का प्रर्यातण किये है |
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    रथ यात्रा पूजा कवर लाइव प्रसारण, Bharat News bulletin के साथ, दर्शन कर नवावे माथ l
दिनाक 26/07/2026 को भारत के कुछ राज्यो मे मनाये जाने वाले रथ यात्रा  के बारे आप सभी तो जानते ही है | कि भारत के ओडिसा राज्य मे बडे धुम - धाम से इस त्योहार को मनाया जाता है | रथ यात्रा  के जुलूस मे लाखो लाख लोगो भिड़ देखने को मिलता है | साथ-साथ बंगाल ,तमिलनाडू , केरला , अन्य राज्यो मे भी बडे ही धुम - धाम से मनाया जाता है  | जिसका मै एक विडियो के माध्यम से आप सभी दर्शण कराने का प्रर्यातण किये है |
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Communications central गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    18 hrs ago
  • क्या अपनी रैयती जमीन पर लगे पेड़ काटने के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है ?? आईए जानते हैं इस संबंध में सीएनटी एक्ट क्या कहता है ?? ** सीएनटी एक्सध में सीएनटी एक्यत को अपनी जमीन पर पेड़ और बांस लगाने, काटने और अपने व्यक्तिगत या घरेलू कार्यों के लिए उसका उपयोग करने का पूरा अधिकार है। ** पेड़ के फल, फूल, लाख या कुसुम जैसी उपज पर भी रैयत का अधिकार है।" अब प्रश्न यह है कि फिर वन विभाग के परमिट की क्या अपनी रैयती जमीन पर लगे पेड़ काटने के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है ?? आईए जानते हैं इस संबंध में सीएनटी एक्ट क्या कहता है ?? ** सीएनटी एक्सध में सीएनटी एक्यत को अपनी जमीन पर पेड़ और बांस लगाने, काटने और अपने व्यक्तिगत या घरेलू कार्यों के लिए उसका उपयोग करने का पूरा अधिकार है। ** पेड़ के फल, फूल, लाख या कुसुम जैसी उपज पर भी रैयत का अधिकार है।" अब प्रश्न यह है कि फिर वन विभाग के परमिट की
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    क्या अपनी रैयती जमीन पर लगे पेड़ काटने के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है ?? आईए जानते हैं इस संबंध में सीएनटी एक्ट क्या कहता है ?? ** सीएनटी एक्सध में सीएनटी एक्यत को अपनी जमीन पर पेड़ और बांस लगाने, काटने और अपने व्यक्तिगत या घरेलू कार्यों के लिए उसका उपयोग करने का पूरा अधिकार है। ** पेड़ के फल, फूल, लाख या कुसुम जैसी उपज पर भी रैयत का अधिकार है।"  अब प्रश्न यह है कि फिर वन विभाग के परमिट की
क्या अपनी रैयती जमीन पर लगे पेड़ काटने के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है ?? आईए जानते हैं इस संबंध में सीएनटी एक्ट क्या कहता है ?? ** सीएनटी एक्सध में सीएनटी एक्यत को अपनी जमीन पर पेड़ और बांस लगाने, काटने और अपने व्यक्तिगत या घरेलू कार्यों के लिए उसका उपयोग करने का पूरा अधिकार है। ** पेड़ के फल, फूल, लाख या कुसुम जैसी उपज पर भी रैयत का अधिकार है।"  अब प्रश्न यह है कि फिर वन विभाग के परमिट की
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    21 hrs ago
  • ग्राम पंचायत चंद्रनगर में विकास के नाम पर बड़ा खेल? नाममात्र मुरम, अभिलेखों में 1320 ट्रैक्टर का बिल होने का आरोप; पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल बलरामपुर। जिले की ग्राम पंचायत चंद्रनगर में सड़क मुरमीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात के दौरान ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से राहत दिलाने के उद्देश्य से कराए गए इस कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर बेहद कम मात्रा में मुरम डाली गई, जबकि पंचायत के अभिलेखों में लगभग 1320 ट्रैक्टर मुरम का बिल तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर वास्तविक रूप से केवल 100 से 150 ट्रैक्टर मुरम अथवा मिट्टी डालकर कार्य पूरा दर्शा दिया गया। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग पंचायत के अभिलेखों, भुगतान विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से कागजों में अधिक मात्रा में मुरम दर्शाई गई। पहली ही बारिश में बह गई मुरम ग्रामीणों का कहना है कि मुरमीकरण कार्य की गुणवत्ता पहली ही बारिश में उजागर हो गई। सड़क पर डाली गई मुरम और मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह गई, जिससे पूरा मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पैदल चलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहन फिसलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि जिस सड़क से बरसात में राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब दुर्घटनाओं का कारण बनती जा रही है। ग्रामीणों के लिए बढ़ी मुश्किलें ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को अस्पताल और मुख्य मार्ग तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार कीचड़ और जलभराव के कारण वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे समय पर उपचार और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर उसका लाभ दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया गया होता तो पहली ही बारिश में सड़क की यह स्थिति नहीं होती। पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जातीं तथा विकास कार्यों के संबंध में ग्रामीणों की राय नहीं ली जाती। उनका कहना है कि पंचायत के सचिव, सरपंच के पुत्र तथा कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा अधिकांश निर्णय लिए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की जानकारी भी आम लोगों तक समय पर नहीं पहुंचती। यदि कार्यों का प्रस्ताव, स्वीकृत राशि और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी। प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज ग्रामीणों के अनुसार जब कथित अनियमितताओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित मुरमीकरण कार्य की भुगतान राशि पर रोक लगा दी। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि प्राप्त नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल भुगतान रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि कार्य में प्रयुक्त सामग्री, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान अभिलेख, परिवहन संबंधी दस्तावेज तथा अन्य रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी मात्रा में मुरम डाली गई और सरकारी धन का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं। उच्च स्तरीय जांच की मांग ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, सड़क मुरमीकरण कार्य का भौतिक सत्यापन कराने तथा पंचायत के सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल इस मामले की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि भविष्य में विकास कार्यों में होने वाली संभावित अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क मुरमीकरण कार्य में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और यदि अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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    ग्राम पंचायत चंद्रनगर में विकास के नाम पर बड़ा खेल? नाममात्र मुरम, अभिलेखों में 1320 ट्रैक्टर का बिल होने का आरोप; पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की पोल
बलरामपुर। जिले की ग्राम पंचायत चंद्रनगर में सड़क मुरमीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात के दौरान ग्रामीणों को कीचड़ और जलभराव से राहत दिलाने के उद्देश्य से कराए गए इस कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर बेहद कम मात्रा में मुरम डाली गई, जबकि पंचायत के अभिलेखों में लगभग 1320 ट्रैक्टर मुरम का बिल तैयार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर वास्तविक रूप से केवल 100 से 150 ट्रैक्टर मुरम अथवा मिट्टी डालकर कार्य पूरा दर्शा दिया गया। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभाग पंचायत के अभिलेखों, भुगतान विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से कागजों में अधिक मात्रा में मुरम दर्शाई गई।
पहली ही बारिश में बह गई मुरम
ग्रामीणों का कहना है कि मुरमीकरण कार्य की गुणवत्ता पहली ही बारिश में उजागर हो गई। सड़क पर डाली गई मुरम और मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह गई, जिससे पूरा मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पैदल चलने वाले लोगों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर वाहन फिसलने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि जिस सड़क से बरसात में राहत मिलने की उम्मीद थी, वही अब दुर्घटनाओं का कारण बनती जा रही है।
ग्रामीणों के लिए बढ़ी मुश्किलें
ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को अस्पताल और मुख्य मार्ग तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार कीचड़ और जलभराव के कारण वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे समय पर उपचार और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन धरातल पर उसका लाभ दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि यदि कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया गया होता तो पहली ही बारिश में सड़क की यह स्थिति नहीं होती।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्राम सभा और आम सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जातीं तथा विकास कार्यों के संबंध में ग्रामीणों की राय नहीं ली जाती। उनका कहना है कि पंचायत के सचिव, सरपंच के पुत्र तथा कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा अधिकांश निर्णय लिए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की जानकारी भी आम लोगों तक समय पर नहीं पहुंचती। यदि कार्यों का प्रस्ताव, स्वीकृत राशि और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों के अनुसार जब कथित अनियमितताओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने संबंधित मुरमीकरण कार्य की भुगतान राशि पर रोक लगा दी। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि प्राप्त नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल भुगतान रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि कार्य में प्रयुक्त सामग्री, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान अभिलेख, परिवहन संबंधी दस्तावेज तथा अन्य रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी मात्रा में मुरम डाली गई और सरकारी धन का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, सड़क मुरमीकरण कार्य का भौतिक सत्यापन कराने तथा पंचायत के सभी संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल इस मामले की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि भविष्य में विकास कार्यों में होने वाली संभावित अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क मुरमीकरण कार्य में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और यदि अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ? Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ?
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    Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ? 
Ranchi के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को सरकार ने क्यों भेजे 43 करोड़ रुपये ?
    user_Active line News
    Active line News
    Court reporter गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    7 hrs ago
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