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सूरत: बेबसी की भीड़, पुलिस की लाठियां और व्यवस्था का सन्नाटा सूरत: बेबसी की भीड़, पुलिस की लाठियां और व्यवस्था का सन्नाटा सूरत, गुजरात। आज सूरत के रेलवे स्टेशन से आई तस्वीरें केवल भीड़ की नहीं, बल्कि उस भरोसे के टूटने की हैं जो एक आम आदमी व्यवस्था पर करता है। सड़कों पर लंबी लाइनें, स्टेशन पर तिल रखने की जगह नहीं और चारों तरफ अपनी बारी का इंतज़ार करते थके-हारे लोग। सवाल यह है कि आखिर एक आम नागरिक जाए तो जाए कहाँ? रोजी-रोटी का संकट और पलायन का दर्द सूरत में गैस सिलेंडर की किल्लत और ठप पड़े होटल व्यवसाय ने मज़दूरों के सामने 'भूखे मरने' की नौबत पैदा कर दी है। जो लोग बिहार और अन्य राज्यों से अपना पेट पालने के लिए गुजरात आए थे, आज उनके पास न काम है और न ही शहर में रुकने का कोई सहारा। जब पेट खाली हो, तो इंसान को अपना गाँव और अपना घर ही सबसे सुरक्षित लगता है। लेकिन घर जाने की यह राह भी कांटों भरी है। प्रशासन की चुप्पी और चुनावी शोर आज आम आदमी पूछ रहा है— क्या हम भारतीय नहीं हैं? एक तरफ सरकारें और राजनीतिक दल असम और बंगाल के चुनावों की रैलियों में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ वो लोग जो देश की अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाते हैं, पुलिस के डंडे खाने को मजबूर हैं। क्या प्रशासन को इस स्थिति का अंदाज़ा नहीं था? जब हज़ारों की संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं, तो ट्रेनों की अतिरिक्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? लाठीचार्ज: क्या यही न्याय है? स्टेशन पर बच्चों को संभाले, भारी सामान ढोते और अपनी बारी का इंतज़ार करते लोगों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करना बेहद निंदनीय है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल का प्रयोग करना अंतिम रास्ता होना चाहिए, न कि पहला। ये लोग अपराधी नहीं हैं, ये वो बेबस नागरिक हैं जो सिर्फ सुरक्षित अपने घर पहुंचना चाहते हैं। निष्कर्ष होटल व्यवसाय बंद होने से मध्यम और निम्न वर्ग पूरी तरह टूट चुका है। अगर प्रशासन समय रहते भोजन और यातायात की सुचारू व्यवस्था करता, तो शायद आज ये मंजर नहीं देखना पड़ता। लोकतंत्र में जनता का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए, न कि चुनाव। आज सूरत की सड़कों पर बहता पसीना और स्टेशन पर पड़ते डंडे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि आम आदमी की लड़ाई आज भी बहुत लंबी है। हौसला रखें, यह वक्त भी गुजर जाएगा। आपकी आवाज इस पोस्ट के माध्यम से उन लोगों तक जरूर पहुंचेगी जो सत्ता के गलियारों में बैठे हैं। मुझसे जुड़ें (Contact for more updates): Instagram: @mr.karanveerchanal WhatsApp: +91 62652 42530

4 hrs ago
user_Karan Chanal
Karan Chanal
जावद, नीमच, मध्य प्रदेश•
4 hrs ago
474c1162-b794-4862-a60d-d5c95a14ee2e

सूरत: बेबसी की भीड़, पुलिस की लाठियां और व्यवस्था का सन्नाटा सूरत: बेबसी की भीड़, पुलिस की लाठियां और व्यवस्था का सन्नाटा सूरत, गुजरात। आज सूरत के रेलवे स्टेशन से आई तस्वीरें केवल भीड़ की नहीं, बल्कि उस भरोसे के टूटने की हैं जो एक आम आदमी व्यवस्था पर करता है। सड़कों पर लंबी लाइनें, स्टेशन पर तिल रखने की जगह नहीं और चारों तरफ अपनी बारी का इंतज़ार करते थके-हारे लोग। सवाल यह है कि आखिर एक आम नागरिक जाए तो जाए कहाँ? रोजी-रोटी का संकट और पलायन का दर्द सूरत में गैस सिलेंडर की किल्लत और ठप पड़े होटल व्यवसाय ने मज़दूरों के सामने 'भूखे मरने' की नौबत पैदा कर दी है। जो लोग बिहार और अन्य राज्यों से अपना पेट पालने के लिए गुजरात आए थे, आज उनके पास न काम है और न ही शहर में रुकने का कोई सहारा। जब पेट खाली हो, तो इंसान को अपना गाँव और अपना घर ही सबसे सुरक्षित लगता है। लेकिन घर जाने की यह राह भी कांटों भरी है। प्रशासन की चुप्पी और चुनावी शोर आज आम आदमी पूछ रहा है— क्या हम भारतीय नहीं हैं? एक तरफ सरकारें और राजनीतिक दल असम और बंगाल के चुनावों की रैलियों में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी तरफ वो लोग जो देश की अर्थव्यवस्था का पहिया घुमाते हैं, पुलिस के डंडे खाने को मजबूर हैं। क्या प्रशासन को इस स्थिति का अंदाज़ा नहीं था? जब हज़ारों की संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं, तो ट्रेनों की अतिरिक्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? लाठीचार्ज: क्या यही न्याय है? स्टेशन पर बच्चों को संभाले, भारी सामान ढोते और अपनी बारी का इंतज़ार करते लोगों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करना बेहद निंदनीय है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल का प्रयोग करना अंतिम रास्ता होना चाहिए, न कि पहला। ये लोग अपराधी नहीं हैं, ये वो बेबस नागरिक हैं जो सिर्फ सुरक्षित अपने घर पहुंचना चाहते हैं। निष्कर्ष होटल व्यवसाय बंद होने से मध्यम और निम्न वर्ग पूरी तरह टूट चुका है। अगर प्रशासन समय रहते भोजन और यातायात की सुचारू व्यवस्था करता, तो शायद आज ये मंजर नहीं देखना पड़ता। लोकतंत्र में जनता का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए, न कि चुनाव। आज सूरत की सड़कों पर बहता पसीना और स्टेशन पर पड़ते डंडे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि आम आदमी की लड़ाई आज भी बहुत लंबी है। हौसला रखें, यह वक्त भी गुजर जाएगा। आपकी आवाज इस पोस्ट के माध्यम से उन लोगों तक जरूर पहुंचेगी जो सत्ता के गलियारों में बैठे हैं। मुझसे जुड़ें (Contact for more updates): Instagram: @mr.karanveerchanal WhatsApp: +91 62652 42530

More news from राजस्थान and nearby areas
  • गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539 9079008107
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    गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539
9079008107
    user_न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    Farmer छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • *पूर्व विधायक श्री देवीलाल धाकड़ ने नागरिकों से स्व-गणना करने की अपील की* लिंक पर जाकर 5 मिनट में स्व-गणना का फॉर्म आसानी से भरें* मंदसौर 20 अप्रैल 2026। गरोठ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री देवीलाल धाकड़ ने जनगणना प्रक्रिया के अंतर्गत आम नागरिकों से स्व-गणना करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अब नागरिक घर बैठे ही आसानी से अपनी जनगणना संबंधी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। श्री धाकड़ ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे जनगणना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्व-गणना फॉर्म भरें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सहभागिता निभाएं। उन्होंने बताया कि स्व-गणना की यह सुविधा 30 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करते हुए सुरक्षित एवं गोपनीय तरीके से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समय सीमा के भीतर स्व-गणना अवश्य पूर्ण करें, ताकि जनगणना कार्य को सुचारू एवं सटीक रूप से संपन्न किया जा सके।
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    *पूर्व विधायक श्री देवीलाल धाकड़ ने नागरिकों से स्व-गणना करने की अपील की*
लिंक पर जाकर 5 मिनट में स्व-गणना का फॉर्म आसानी से भरें*
मंदसौर 20 अप्रैल 2026। गरोठ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री देवीलाल धाकड़ ने जनगणना प्रक्रिया के अंतर्गत आम नागरिकों से स्व-गणना करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अब नागरिक घर बैठे ही आसानी से अपनी जनगणना संबंधी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।
श्री धाकड़ ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे जनगणना के आधिकारिक पोर्टल  पर जाकर स्व-गणना फॉर्म भरें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सहभागिता निभाएं।
उन्होंने बताया कि स्व-गणना की यह सुविधा 30 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल या अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करते हुए सुरक्षित एवं गोपनीय तरीके से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समय सीमा के भीतर स्व-गणना अवश्य पूर्ण करें, ताकि जनगणना कार्य को सुचारू एवं सटीक रूप से संपन्न किया जा सके।
    user_दीपक प्रजापति
    दीपक प्रजापति
    मल्हारगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • MAA JOGANIA EPISODE -18......A Novel of Arawali ki lokdevi MAA JOGANIA.
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    MAA JOGANIA EPISODE -18......A Novel of Arawali ki lokdevi MAA JOGANIA.
    user_Shyam pokra
    Shyam pokra
    Hindi sahitya writer. Manasa, Neemuch•
    14 hrs ago
  • अजमेर/पुष्कर। राजस्थान के अजमेर जिले स्थित पुष्कर घाटी में रविवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों से भरे परिवार को मातम में बदल दिया। यात्रियों से भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 31 लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में कुल 33 यात्री सवार थे, जो पीसांगन क्षेत्र के भडसुरी गांव में पारिवारिक कार्यक्रम में मायरा लेकर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि पुष्कर घाटी में सांझी छत के पास बस का स्टेयरिंग अचानक फेल हो गया, जिससे चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका। बस पहले सड़क किनारे बनी रेलिंग से टकराई और फिर पलटियां खाते हुए गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में विमला देवी और पूजा की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य घायलों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से खाई से निकालकर पुष्कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर घायलों को अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया। कपड़ों की रस्सी बनाकर बचाई जानें हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर सबसे पहले मौके पर पहुंचे। खाई गहरी होने के कारण लोगों ने अपने कपड़ों की रस्सी बनाकर घायलों को बाहर निकाला। कई लोग घायल यात्रियों को कंधों पर उठाकर सड़क तक लाए। स्थानीय लोगों की तत्परता से कई जिंदगियां बच सकीं। झाड़ियों ने रोकी बस की रफ्तार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस स्थान पर बस गिरी, वहां नीचे पेड़ और कंटीली झाड़ियां थीं। बस सीधे नीचे गिरने के बजाय झाड़ियों में अटकती हुई पलटती गई, जिससे उसकी रफ्तार कम हो गई। यही वजह रही कि बड़ा हादसा और अधिक भयावह होने से बच गया। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पुष्कर घाटी जैसे संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। तीखे मोड़, पुराने वाहन, कमजोर सुरक्षा रेलिंग और तकनीकी जांच की कमी जैसी समस्याएं लगातार हादसों को न्योता दे रही हैं। पुष्कर घाटी का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और कमजोर व्यवस्था का गंभीर संकेत है। दो महिलाओं की मौत ने परिवारों की खुशियां छीन लीं, जबकि स्थानीय लोगों की बहादुरी ने मानवता की मिसाल कायम की। अब देखना यह है कि प्रशासन इससे सबक लेता है या नहीं।
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    अजमेर/पुष्कर। राजस्थान के अजमेर जिले स्थित पुष्कर घाटी में रविवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों से भरे परिवार को मातम में बदल दिया। यात्रियों से भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 31 लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में कुल 33 यात्री सवार थे, जो पीसांगन क्षेत्र के भडसुरी गांव में पारिवारिक कार्यक्रम में मायरा लेकर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि पुष्कर घाटी में सांझी छत के पास बस का स्टेयरिंग अचानक फेल हो गया, जिससे चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका। बस पहले सड़क किनारे बनी रेलिंग से टकराई और फिर पलटियां खाते हुए गहरी खाई में जा गिरी।
हादसे में विमला देवी और पूजा की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य घायलों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से खाई से निकालकर पुष्कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर घायलों को अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया।
कपड़ों की रस्सी बनाकर बचाई जानें
हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर सबसे पहले मौके पर पहुंचे। खाई गहरी होने के कारण लोगों ने अपने कपड़ों की रस्सी बनाकर घायलों को बाहर निकाला। कई लोग घायल यात्रियों को कंधों पर उठाकर सड़क तक लाए। स्थानीय लोगों की तत्परता से कई जिंदगियां बच सकीं।
झाड़ियों ने रोकी बस की रफ्तार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस स्थान पर बस गिरी, वहां नीचे पेड़ और कंटीली झाड़ियां थीं। बस सीधे नीचे गिरने के बजाय झाड़ियों में अटकती हुई पलटती गई, जिससे उसकी रफ्तार कम हो गई। यही वजह रही कि बड़ा हादसा और अधिक भयावह होने से बच गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पुष्कर घाटी जैसे संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। तीखे मोड़, पुराने वाहन, कमजोर सुरक्षा रेलिंग और तकनीकी जांच की कमी जैसी समस्याएं लगातार हादसों को न्योता दे रही हैं।
पुष्कर घाटी का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और कमजोर व्यवस्था का गंभीर संकेत है। दो महिलाओं की मौत ने परिवारों की खुशियां छीन लीं, जबकि स्थानीय लोगों की बहादुरी ने मानवता की मिसाल कायम की। अब देखना यह है कि प्रशासन इससे सबक लेता है या नहीं।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • Post by Hashim beg Beg
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    Post by Hashim beg Beg
    user_Hashim beg Beg
    Hashim beg Beg
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • Post by DS7NEWS NETWORK
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    Post by DS7NEWS NETWORK
    user_DS7NEWS NETWORK
    DS7NEWS NETWORK
    News Anchor चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • 🌷🙏🙏🏼SRI LAKSHMINATH BHAGVAN SIV SANKAR JI VASAKRAJ MAHARAJ GOVIND SAWARIYA SETH JI 🌺 AAPKI JAY HO AAP Hi HARI OM 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 OM ♥️ 🙏🏽 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 OM ♥️ 🙏🏽 🕉 OM SIVAY NAMAH 🌺🙏🏽🌷💖
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    🌷🙏🙏🏼SRI LAKSHMINATH BHAGVAN SIV SANKAR JI VASAKRAJ MAHARAJ GOVIND SAWARIYA SETH JI 🌺 AAPKI JAY HO AAP Hi HARI OM 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 OM ♥️ 🙏🏽 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 OM ♥️ 🙏🏽 🕉 OM SIVAY NAMAH 🌺🙏🏽🌷💖
    user_Kanhaiya lal Joshi
    Kanhaiya lal Joshi
    Pujari चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539 9079008107
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    गांव अचारी पोस्ट सुबी तहसील छोटी सादड़ी जिला प्रतापगढ़ राजस्थान 9660737539
9079008107
    user_न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    Farmer छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    10 hrs ago
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