लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से अबतक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 9 लोग झुलसे हैं जिनका इलाज जारी है। अग्निकांड के इस मुश्किल वक्त में, एक नौजवान पुलिसकर्मी ने जान बचाने की कोशिश में कई बार हथौड़ा चलाकर पीछे की दीवार तोड़ दी, और इसी रास्ते से 15 लड़कों के शव निकाले गए। घटनास्थल पर सुरक्षा संबंधी गंभीर चूक सामने आई है। बताया जा रहा है कि इमारत में दूसरा कोई निकास द्वार नहीं था, और मुख्य गेट पर लगा थंब लॉक आग के कारण काम नहीं कर पाया और बंद हो गया। इसके साथ ही, छत पर जाने वाला गेट भी ताले से बंद था। लोगों का कहना है कि अगर छत का गेट खुला होता, तो वे छत पर जाकर आसपास की इमारतों की छतों पर कूदकर अपनी जान बचा सकते थे, क्योंकि पीछे की कई छतें एक-दूसरे से मिली हुई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना स्थल का जायजा लिया और हालात का जायजा लेने के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने तत्काल दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का निर्देश दिया है। इस दल में अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग, तथा प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन, शामिल हैं। जांच दल को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और गंभीर रूप से घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे, उनके साथ यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद थे। उन्होंने अग्नि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) पहुंचकर इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से भेंट की। उन्होंने उनका कुशल-क्षेम जाना और चिकित्सकों से घायलों के उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की। राजनाथ सिंह ने आश्वस्त किया कि सभी घायलों का समुचित उपचार कुशल चिकित्सकों के नेतृत्व में शीर्ष प्राथमिकता पर किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश सरकार सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की सद्गति और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की। इस भीषण अग्निकांड में मरने वालों में सागर, नीलेश सूरज शाह, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, सुखमनी, अनामिका, संयम, भविष्य, भाहजान, मो. अम्मार, सुमल्या, अनुछा, अब्दुल रहमान और जयनिल चक्रवर्ती शामिल हैं। वहीं, जयंत, लवप्रीत, आसिफ, पंकज, भुवन श्रीवास्तव, शैलेंद्र, अभिषेक, पंकज जोशी और गौरव कुमार अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है।
लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से अबतक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 9 लोग झुलसे हैं जिनका इलाज जारी है। अग्निकांड के इस मुश्किल वक्त में, एक नौजवान पुलिसकर्मी ने जान बचाने की कोशिश में कई बार हथौड़ा चलाकर पीछे की दीवार तोड़ दी, और इसी रास्ते से 15 लड़कों के शव निकाले गए। घटनास्थल पर सुरक्षा संबंधी गंभीर चूक सामने आई है। बताया जा रहा है कि इमारत में दूसरा कोई निकास द्वार नहीं था, और मुख्य गेट पर लगा थंब लॉक आग के कारण काम नहीं कर पाया और बंद हो गया। इसके साथ ही,
छत पर जाने वाला गेट भी ताले से बंद था। लोगों का कहना है कि अगर छत का गेट खुला होता, तो वे छत पर जाकर आसपास की इमारतों की छतों पर कूदकर अपनी जान बचा सकते थे, क्योंकि पीछे की कई छतें एक-दूसरे से मिली हुई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना स्थल का जायजा लिया और हालात का जायजा लेने के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने तत्काल दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का निर्देश दिया है। इस दल में अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग, तथा प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन, शामिल
हैं। जांच दल को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और गंभीर रूप से घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे, उनके साथ यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद थे। उन्होंने अग्नि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) पहुंचकर इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से भेंट की। उन्होंने उनका कुशल-क्षेम जाना और चिकित्सकों से घायलों के उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त की। राजनाथ सिंह
ने आश्वस्त किया कि सभी घायलों का समुचित उपचार कुशल चिकित्सकों के नेतृत्व में शीर्ष प्राथमिकता पर किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश सरकार सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की सद्गति और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की। इस भीषण अग्निकांड में मरने वालों में सागर, नीलेश सूरज शाह, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, सुखमनी, अनामिका, संयम, भविष्य, भाहजान, मो. अम्मार, सुमल्या, अनुछा, अब्दुल रहमान और जयनिल चक्रवर्ती शामिल हैं। वहीं, जयंत, लवप्रीत, आसिफ, पंकज, भुवन श्रीवास्तव, शैलेंद्र, अभिषेक, पंकज जोशी और गौरव कुमार अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है।
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।1
- मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए एक आवश्यक अपील की गई है, जिसमें कहा गया है कि किसी का एक छोटा सा प्रयास एक परिवार की खुशियों को वापस ला सकता है। इस अपील में गरीब मरीजों के इलाज और ऑपरेशन के खर्चों में आर्थिक सहायता देने का आग्रह किया गया है, क्योंकि एक छोटा सा दान किसी की जान बचा सकता है। यह भी सूचित किया गया है कि डोनेशन या मरीज के सत्यापन से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए सीधे टीम से संपर्क किया जाए।1
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा थाना क्षेत्र अंतर्गत उमरावखेड़ा (जेहटा) में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक पीड़ित परिवार दबंगों के जानलेवा हमलों, छेड़छाड़ और लूटपाट से तंग आकर अपना घर-द्वार छोड़ने पर मजबूर हो गया है। पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस, विशेषकर जेहटा चौकी पर, आरोपियों को खुला संरक्षण देने और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने का संगीन आरोप लगाया है। यह सिलसिला पिछले एक साल से जारी है, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। पीड़ित अशोक कुमार (निवासी उमरावखेड़ा, जेहटा) ने बताया कि बीते 30 मई 2026 की रात करीब 09:58 बजे पड़ोसी आरोपी काशी ने बाहर से एक टेंपो में अज्ञात गुंडों को बुलाया। इन बदमाशों ने उनके घर में घुसकर तांडव मचाया, पत्नी के साथ छेड़छाड़ व लूटपाट की, और पूरे परिवार को लाठी-डंडों व सरियों से बेरहमी से पीटा, जिससे सभी को गंभीर चोटें आईं। यह पूरी वारदात घर के बाहर और अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है। पीड़ित का आरोप है कि इस घटना के बाद उन्हें पूरी रात दुबग्गा थाने में बैठना पड़ा, तब जाकर मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले में कार्रवाई न होने पर पीड़ित परिवार 5 जून 2026 को एसीपी महोदय के समक्ष पेश हुआ। एसीपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जेहटा चौकी इंचार्ज को फोन कर फटकार लगाई और गिरफ्तारी न होने का कारण पूछते हुए मुकदमे में उचित धाराएं बढ़ाकर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया। हालाँकि, आरोप है कि जेहटा चौकी इंचार्ज ने एसीपी के आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया और कोई कदम नहीं उठाया। पीड़ित अशोक कुमार ने जेहटा चौकी इंचार्ज सुमित श्रीवास्तव और दरोगा जयप्रकाश पर आरोपियों से साठगांठ का आरोप लगाते हुए पूर्व की कई घटनाओं का भी ब्योरा दिया। इनमें 5 जुलाई 2025 को आरोपी राजेश, धीरज और पप्पू द्वारा लाठी-डंडों व सरियों से जानलेवा हमला शामिल है, जिसमें ग्रामीणों के बीच-बचाव से जान बची थी, लेकिन पुलिस ने मामूली धाराओं (BNS 126/135) में मामला रफा-दफा कर दिया था। 6 दिसंबर 2025 को आरोपी धीरज ने पीड़ित के बेटे को इतना पीटा कि उसकी उंगली टूट गई, जिस पर पुलिस ने सिर्फ एक मामूली NCR दर्ज की। 14 अप्रैल 2026 को आरोपी धीरज ने शाम को पीड़ित के घर की तरफ बारूद जैसी ज्वलनशील वस्तु फेंकी, जिससे परिवार में दहशत फैल गई। इसके बाद 18 अप्रैल 2026 को जब धीरज की पत्नी द्वारा पीड़ित के बेटे को पीटने की शिकायत लेकर परिवार जेहटा चौकी पहुंचा, तो आरोपी काशी ने चौकी इंचार्ज सुमित श्रीवास्तव और दरोगा जयप्रकाश के सामने ही पीड़ित परिवार को 'बोटी-बोटी काटने' की धमकी दी, जिस पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित परिवार ने उच्चाधिकारियों को दिए पत्र में स्पष्ट कहा है कि वे अपनी जान बचाने के लिए पलायन कर चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके जिम्मेदार नामजद आरोपियों (काशी, राजेश, धीरज, पप्पू, पूर्णिमा, शांति) के साथ-साथ जेहटा चौकी इंचार्ज और संबंधित दरोगा भी होंगे। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच जेहटा चौकी पुलिस से हटाकर किसी अन्य उच्चाधिकारी से कराने, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और दबंगों व उनके अज्ञात गुंडों को गिरफ्तार कर परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई है।3
- लखनऊ, उत्तर प्रदेश की कवयित्री सोनी शुक्ला क्रांति ने एक ओजपूर्ण गीत के माध्यम से अन्याय और तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान किया है। उनके इस गीत में बताया गया है कि सत्य का पथिक कभी रुकता नहीं और जुल्म के आगे मस्तक झुकता नहीं है। कवयित्री ने हाथों में मशाल लेकर रात से टकराकर एक नए युग की सुबह लाने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है। गीत में यह आह्वान किया गया है कि जब जन-जन जागेगा, तो हुकूमत कांप उठेगी और अंधियारा डरकर स्वयं दूर भाग जाएगा। हर रक्त की बूंद से 'इंकलाब' का नारा गूंजने और न्याय की इस जंग में हर हाथ के शामिल होने की बात कही गई है। कवयित्री का कहना है कि वीरों के इस देश में कायरता का कोई स्थान नहीं है और जब तक हक नहीं मिल जाता, तब तक कोई आराम नहीं होगा। सोनी शुक्ला क्रांति ने अपनी कलम की धार से नया इतिहास लिखने की बात कही है, जहाँ पापी झुकेंगे और सत्य के प्रहरी सीना तानकर खड़े रहेंगे। गीत 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे के साथ यह विश्वास व्यक्त करता है कि क्रांति की यह गूंज हर दिल में समाएगी, सच्चाई की जीत होगी और हर तानाशाही समाप्त हो जाएगी।1