समता और मैत्री से ही होगा आत्मकल्याण — मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर विराजमान मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने आशीष वचनों में कहा आज समाज में लोगों की भावनाओं में भिन्नता बढ़ती जा रही है, जबकि आवश्यकता है कि प्राणी मात्र के प्रति एक समान भाव और मैत्री भाव रखा जाए। भेदभाव की दृष्टि व्यक्ति के पतन का कारण बनती है। जब मन में द्वेष और वैर के भाव होते हैं, तब न तो ध्यान संभव है और न ही भावों में निर्मलता आ सकती है। अपने अनादर या अपमान का बदला लेने के गलत भाव मन में आते हैं, जिससे व्यक्ति सही मन से ध्यान भी नहीं कर पाता। आम्नायवाद, परंपरावाद, पंथवाद और संतवाद से दूर रहने की सीख देते हुए कहा आज का व्यक्ति इन्हीं उलझनों में फंसा हुआ है। जगत के दिखावे, धन और वैभव से दूर हुए बिना आत्मकल्याण संभव नहीं है। यदि कर्मों से मुक्ति चाहते हो तो संबंधों के मोह से दूर होना होगा। आज व्यक्ति वही चाहता है जिससे राग बढ़े। लोग दिखावे के लिए प्रभु के चरणों में जाते हैं, भगवान से कर्मों की ही कामना करते हैं और फिर उन्हीं कर्मों से मुक्ति की बात भी करते हैं। कड़वी बातें और कड़वी दवा व्यक्ति को अच्छी नहीं लगतीं, जबकि वही रोग को दूर करती हैं। संसार के सुख मांगते रहोगे तो मोह कैसे छूटेगा। मायाचारी प्रवृत्ति में फंसे रहने से सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। मोक्षमार्ग पर चलने के लिए जगत के सभी संबंधों से विरक्ति आवश्यक है। संबंध ही बंधन कराते हैं और जब तक बंधन रहता है, तब तक संसार बढ़ता ही जाता है। पूर्व के कर्म तो बंधे हुए हैं, ऊपर से नए कर्म बांधकर व्यक्ति अपनी दुर्दशा स्वयं कर रहा है। साधु कर्मों से मुक्त होने के लिए बनना पड़ता है, केवल वेश धारण करने से कर्म नहीं कटते। कर्मों के क्षय के लिए धर्म, ध्यान और पुण्य की आराधना आवश्यक है। साधु राग और मोह से मुक्त होने के लिए बनते हैं, न कि उनमें लिप्त होने के लिए। संबंधों से मुक्त होने और कर्मों का क्षय करने के लिए साधु बनकर ध्यान करना पड़ता है। केवल पिच्छी और कमंडल धारण कर लेने से साधु नहीं बनते। साधुभेष दिखावे के लिए नहीं, बल्कि धर्म और ध्यान की सच्ची आराधना के लिए होता है। भेष धारण करने मात्र से न भगवान बना जा सकता है और न ही अच्छा इंसान। समता रूपी जल का उपयोग कर राग से बचना होगा, तभी आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
समता और मैत्री से ही होगा आत्मकल्याण — मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर विराजमान मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने आशीष वचनों में कहा आज समाज में लोगों की भावनाओं में भिन्नता बढ़ती जा रही है, जबकि आवश्यकता है कि प्राणी मात्र के प्रति एक समान भाव और मैत्री भाव रखा जाए। भेदभाव की दृष्टि व्यक्ति के पतन का कारण बनती है। जब मन में द्वेष और वैर के भाव होते हैं, तब न तो ध्यान संभव है और न ही भावों में निर्मलता आ सकती है। अपने अनादर या अपमान का बदला लेने के गलत भाव मन में आते हैं, जिससे व्यक्ति सही मन से ध्यान भी नहीं कर पाता। आम्नायवाद, परंपरावाद, पंथवाद और संतवाद से दूर रहने की सीख देते हुए कहा आज का व्यक्ति इन्हीं उलझनों में फंसा हुआ है। जगत के दिखावे, धन और वैभव से दूर हुए बिना आत्मकल्याण संभव नहीं है। यदि कर्मों से मुक्ति चाहते हो तो संबंधों के मोह से दूर होना होगा। आज व्यक्ति वही चाहता है जिससे राग बढ़े। लोग दिखावे के लिए प्रभु के चरणों में जाते हैं, भगवान से कर्मों की ही कामना करते हैं और फिर उन्हीं कर्मों से मुक्ति की बात भी करते हैं। कड़वी बातें और कड़वी दवा व्यक्ति को अच्छी नहीं लगतीं, जबकि वही रोग को दूर करती हैं। संसार के सुख मांगते रहोगे तो मोह कैसे छूटेगा। मायाचारी प्रवृत्ति में फंसे रहने से सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती। मोक्षमार्ग पर चलने के लिए जगत के सभी संबंधों से विरक्ति आवश्यक है। संबंध ही बंधन कराते हैं और जब तक बंधन रहता है, तब तक संसार बढ़ता ही जाता है। पूर्व के कर्म तो बंधे हुए हैं, ऊपर से नए कर्म बांधकर व्यक्ति अपनी दुर्दशा स्वयं कर रहा है। साधु कर्मों से मुक्त होने के लिए बनना पड़ता है, केवल वेश धारण करने से कर्म नहीं कटते। कर्मों के क्षय के लिए धर्म, ध्यान और पुण्य की आराधना आवश्यक है। साधु राग और मोह से मुक्त होने के लिए बनते हैं, न कि उनमें लिप्त होने के लिए। संबंधों से मुक्त होने और कर्मों का क्षय करने के लिए साधु बनकर ध्यान करना पड़ता है। केवल पिच्छी और कमंडल धारण कर लेने से साधु नहीं बनते। साधुभेष दिखावे के लिए नहीं, बल्कि धर्म और ध्यान की सच्ची आराधना के लिए होता है। भेष धारण करने मात्र से न भगवान बना जा सकता है और न ही अच्छा इंसान। समता रूपी जल का उपयोग कर राग से बचना होगा, तभी आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
- समाधिस्थ परम पूज्य 108 श्री भूतबली सागर महाराज जी के शिष्य, परम पूज्य 108 श्री मुक्ति सागर महाराज जी दीर्घकाल से तप, त्याग, संयम एवं कठोर साधना द्वारा आत्मशुद्धि के पथ पर अग्रसर थे। तहसील पिड़ावा, जिला झालावाड़ में, निर्यापक मुनि परम पूज्य 108 श्री मुनि सागर महाराज के पावन सानिध्य में, विधिवत् मंत्रोच्चार एवं शास्त्रीय विधान के अनुसार यम संलेखना व्रत का प्रारंभ किया गया था। सोलह दिनों तक आपने आहार-पानी सहित सभी शारीरिक आवश्यकताओं का क्रमशः त्याग कर, समभाव, क्षमा और वैराग्य के साथ इस व्रत का पालन किया और अंततः सत्रहवें दिन समाधि को प्राप्त हुए।1
- कन्नौद की वैष्णवी कॉलोनी सहित हाईवे के सुने मकानों को चोरों ने बनाया निशाना, ₹ 1 लाख के गहने व ₹ 25 हजार नगदी किऐ चोरी,पुलिस को दी चुनौती कन्नौद: इंदौर बैतुल हाईवे स्थित कन्नौद की वैष्णवी कॉलोनी मे लखन शर्मा सूने मकान में गत गत शनिवार रविवार की मध्य रात्रि 12 से 2:00 बजे के बीच तीन अज्ञात चोरों ने वारदात को अंजाम दिया सोमवार शाम 4 बजे लखन शर्मा ने बताया की मेरे सुने मकान से करीब ₹ 1 लाख रुपये से अधिक के जेवर व 20 से 25000 रुपए नगदी चोरी कर ले गये तथा वैष्णवी कालोनी के सामने स्थित इंदौर नेमावर हाईवे के मकानो में भी चोरी का प्रयास किया, लेकिन मकान मालिकों के जाग जाने के चलते वहां से अज्ञात चोर फरार हो गए पूर्व में भी वैष्णवी कॉलोनी के एक मकान में दिनदहाड़े चोरी की घटना को अंजाम दिया था जिसके आरोपियों को कन्नौद पुलिस के दबंग थाना प्रभारी तेहजीब काँजी के निर्देशन में भोपाल से चोरों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की थी वही शनिवार रविवार की मध्य रात्रि को 12 से 2:00 बजे के मध्य अज्ञात चोरों ने सूने मकान को निशाना बनाने का प्रयास किया जिसमें एक मकान में चोरी करने में सफल हुए वहीं पुलिस की रात्रि कालीन गस्त को चुनौती देते हुए करीब 2 घंटे तक चोरी का प्रयास किया जो विभिन्न सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं लखन शर्मा सहित अन्य लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी पुलिस ने मौका मुआयना कर जांच शुरू कर दिए4
- राहवीर योजना को बढ़ावा: शुजालपुर में नियमों का पालन करने वालों का सम्मान, घायल को अस्पताल पहुंचाने पर ₹25 हजार का प्रोत्साहन देखते रहिए सत्य एक्सप्रेस पर मध्य प्रदेश की तमाम बड़ी खबरें — निर्मल गोस्वामी के साथ📞 मो. 73540416221
- 💔🔥🌹♥️💫💥🤗😅 मेरी जाने जाना मैं तुझे प्यार किया सारी दुनिया के आगे इकरार किया 💥🌈🇨🇮😁😂🫣🎉😚1
- इंदौर लापरवाह व्यवस्था और दूषित पानी से हुई 21 मासूम लोगों की मौत के ख़िलाफ़ मध्यप्रदेश कांग्रेस ने निकाली न्याय यात्रा1
- सारंगपुर में बेरोजगार भर्ती1
- कोलार स्थित बोरदा गांव में सम्माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री मगनलाल झांझोट जी अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया1
- 🫵🙏🏵️🪄🪄💫यह दिल आशिकाना ♥️🫣🤗😁🗓️🔥1