सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने के लिए एक सख्त कानूनी प्रावधानों वाला संशोधन बिल पेश किया है। इस बिल के कारण लोकसभा में भारी शोर-शराबा और हंगामा हुआ, जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को सदन की कार्यवाही को कुछ समय या पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सदन के बीचों-बीच (वेल में) आकर नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन बिल का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को रोकना पड़ा। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इस बिल के जरिए केवल अपना पीठ थपथपा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने के लिए एक सख्त कानूनी प्रावधानों वाला संशोधन बिल पेश किया है। इस बिल के कारण लोकसभा में भारी शोर-शराबा और हंगामा हुआ, जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को सदन की कार्यवाही को कुछ समय या पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सदन के बीचों-बीच (वेल में) आकर नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन बिल का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को रोकना पड़ा। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इस बिल के जरिए केवल अपना पीठ थपथपा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
- अरविंद केजरीवाल का वीडियो हुआ वायरल ई २० पर खड़े किए सवाल!1
- लोकतंत्र में विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन देश के प्रधानमंत्री या किसी भी मंत्री के लिए अभद्र भाषा, गाली-गलौज और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना बिल्कुल उचित नहीं है। हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शन की कई वायरल वीडियो में ऐसी भाषा सुनने को मिल रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। असहमति अपनी जगह है, लेकिन मर्यादा और सम्मान बनाए रखना हर नागरिक, विशेषकर छात्रों की जिम्मेदारी है। इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी शर्मनाक है। यह घटना एक बार फिर से इस बात पर जोर देती है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भी मर्यादा और सम्मान को बनाए रखना आवश्यक है।1
- न्यूज इंडिया अपडेट (NIU) पर उत्तराखंड क्रांति दल की महिला प्रकोष्ठ की केंद्रीय अध्यक्ष रिटायर्ड मेजर संतोष भंडारी से खास बातचीत की गई है।1
- हरिद्वार में अपने दौरे के दौरान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक नन्हीं बच्ची से स्नेहपूर्वक मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्ची के सपनों, उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर बातचीत की। सीएम धामी ने इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर एक संदेश भी पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा कि 'हमारे नौनिहालों की मुस्कान में उत्तराखंड के सुनहरे कल की झलक दिखती है।' मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की बेटियां ही सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके सुरक्षित, शिक्षित एवं सशक्त भविष्य के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने दोहराया कि सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण सरकार का संकल्प है, ताकि हर बेटी अपने सपनों को नई उड़ान दे सके।1
- उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में कांग्रेस ने बीजेपी पर मेडिकल कॉलेज की चोरी का आरोप लगाया है। कांग्रेस का दावा है कि टिहरी मुख्यालय के समीप मेडिकल कॉलेज बनाया गया है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी की कड़ी आलोचना की है और आरोप लगाया है कि सरकार मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं का सही उपयोग नहीं कर रही है। कांग्रेस के इस आरोप के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। स्थानीय लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है। कांग्रेस ने मांग की है कि मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए और स्थानीय लोगों को इसका लाभ दिया जाए।1
- देशभर में छात्रों के मुद्दों और पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्षी दलों ने आज लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार नारेबाजी और हंगामा किया। इस हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजीजू ने विपक्ष से अपील की कि वे सदन में नारेबाज़ी छोड़कर बिल पर खुलकर सकारात्मक चर्चा करें। एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 को लेकर संसद में भारी घमासान मचा है। विधेयक के मुख्य बिंदुओं में पेपर लीक के दोषियों के लिए जेल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा, मामलों की रोजाना सुनवाई करके 90 दिनों (3 महीने) के भीतर ट्रायल पूरा करने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का प्रस्ताव है। जरूरत पड़ने पर मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का अधिकार भी दिया गया है। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक छात्रों के हित में नहीं है और इससे पुलिस को अत्यधिक शक्तियां मिल जाएंगी। विपक्षी दलों ने सदन में नारेबाजी और हंगामा करके अपना विरोध जताया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है और विधेयक को पारित कराने में मुश्किलें आ रही हैं।1
- 13 फरवरी को UGC नियमों के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान वायरल हुए एक वीडियो के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मॉरिस नगर थाना कथित भीड़ द्वारा मारपीट, गला दबाने, जातिसूचक धमकियों और छेड़छाड़ के आरोपों की जांच कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल दोनों छात्र संगठनों—ABVP और AISA—ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। एक छात्रा ने ANI से बातचीत में दावा किया कि करीब 500 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला किया, अनुचित तरीके से छुआ और दुष्कर्म की धमकियां दीं। उन्होंने बताया कि कानून विभाग के लोगों और पुलिस की मदद से वह वहां से निकल सकीं। इस बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।1