FMCG सेक्टर पर महंगाई की मार, क्या आपके घर का बजट फिर से बिगड़ने वाला है.. FMCG सेक्टर पर महंगाई की मार, क्या आपके घर का बजट फिर से बिगड़ने वाला है.. *FMCG कम्पनीज प्राइस हिके : भारत का FMCG सेक्टर (रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें बनाने वाला क्षेत्र) इस समय एक अजीब स्थिति में है. एक तरफ गांवों और छोटे शहरों में सामान की मांग बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है. डाबर और अन्य कंपनियों की कीमतों में बढ़ोतरी डाबर इंडिया ने संकेत दिया है कि वह वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा सकती है. कंपनी ने पिछली तिमाही में मुनाफे में 15.75% की बढ़त दर्ज की है, लेकिन पैकेजिंग मटीरियल की बढ़ती लागत चिंता का विषय है. डाबर पहले ही कीमतों में 4% का इजाफा कर चुकी है और अब अगले दौर की तैयारी में है. क्यों बढ़ रहा है दबाव ? कंपनियों के सामने लागत बढ़ने की कई वजहें हैं. पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है. कच्चे तेल का व्यापक असर: कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक पैकेजिंग, रसायन और परिवहन लागत को भी महंगा बना देता है. इनपुट कॉस्ट: चाय, कॉफी, दूध, गेहूं और खाद्य तेलों जैसी कच्ची सामग्रियों के दाम ऊंचे बने हुए हैं. मानसून की आशंका: अगर इस साल मानसून औसत से कम रहता है, तो खेती से जुड़े उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं. दिग्गज कंपनियों का हाल HUL (हिंदुस्तान यूनिलीवर): कंपनी ने बेहतर वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की है, जो बाजार में सुधार का संकेत है. हालांकि, चाय और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की महंगाई इनके लिए बड़ी चुनौती है. नेस्ले इंडिया: शहरी क्षेत्रों और ‘प्रीमियम प्रोडक्ट्स’ (जैसे महंगी कॉफी और चॉकलेट्स) में इनकी पकड़ मजबूत है. लेकिन दूध और कॉफी की बढ़ती कीमतें इनके मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं. मैरिको: कंपनी अब साधारण तेलों के बजाय ‘प्रीमियम’ और ‘डिजिटल-फर्स्ट’ ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रही है ताकि मुनाफे को स्थिर रखा जा सके. ब्रिटानिया और ITC: इन कंपनियों के लिए गेहूं और खाद्य तेलों की महंगाई सबसे बड़ा जोखिम है. ग्रामीण मांग में सुधार इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि ग्रामीण इलाकों (गांवों और कस्बों) में सामान की मांग बढ़ी है. लंबे समय की सुस्ती के बाद अब ग्रामीण बाजार रिकवर कर रहा है. कंपनियों के मैनेजमेंट का मानना है कि खपत में सुस्ती का बुरा दौर अब बीत चुका है. क्या होगा आप पर असर? अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में मध्यमवर्गीय परिवारों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है. उत्पादों के दाम बढ़ना: साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं. ‘श्रिंकफ्लेशन’ (Shrinkflation): मुमकिन है कि कंपनियां दाम न बढ़ाएं, लेकिन उसी कीमत पर मिलने वाले पैकेट का वजन (Quantity) कम कर दें.
FMCG सेक्टर पर महंगाई की मार, क्या आपके घर का बजट फिर से बिगड़ने वाला है.. FMCG सेक्टर पर महंगाई की मार, क्या आपके घर का बजट फिर से बिगड़ने वाला है.. *FMCG कम्पनीज प्राइस हिके : भारत का FMCG सेक्टर (रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें बनाने वाला क्षेत्र) इस समय एक अजीब स्थिति में है. एक तरफ गांवों और छोटे शहरों में सामान की मांग बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने कंपनियों की टेंशन बढ़ा दी है. डाबर और अन्य कंपनियों की कीमतों में बढ़ोतरी डाबर इंडिया ने संकेत दिया है कि वह वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा सकती है. कंपनी ने पिछली तिमाही में मुनाफे में 15.75% की बढ़त दर्ज की है, लेकिन पैकेजिंग मटीरियल की बढ़ती लागत चिंता का विषय है. डाबर पहले ही कीमतों में 4% का इजाफा कर चुकी है और अब अगले दौर की तैयारी में है. क्यों बढ़ रहा है दबाव ? कंपनियों के सामने लागत बढ़ने की कई वजहें हैं. पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है. कच्चे तेल का व्यापक असर: कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक पैकेजिंग, रसायन और परिवहन लागत को भी महंगा बना देता है. इनपुट कॉस्ट: चाय, कॉफी, दूध, गेहूं और खाद्य तेलों जैसी कच्ची सामग्रियों के दाम ऊंचे बने हुए हैं. मानसून की आशंका: अगर इस साल मानसून औसत से कम रहता है, तो खेती से जुड़े उत्पादों की कीमतें और बढ़ सकती हैं. दिग्गज कंपनियों का हाल HUL (हिंदुस्तान यूनिलीवर): कंपनी ने बेहतर वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की है, जो बाजार में सुधार का संकेत है. हालांकि, चाय और कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की महंगाई इनके लिए बड़ी चुनौती है. नेस्ले इंडिया: शहरी क्षेत्रों और ‘प्रीमियम प्रोडक्ट्स’ (जैसे महंगी कॉफी और चॉकलेट्स) में इनकी पकड़ मजबूत है. लेकिन दूध और कॉफी की बढ़ती कीमतें इनके मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं. मैरिको: कंपनी अब साधारण तेलों के बजाय ‘प्रीमियम’ और ‘डिजिटल-फर्स्ट’ ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रही है ताकि मुनाफे को स्थिर रखा जा सके. ब्रिटानिया और ITC: इन कंपनियों के लिए गेहूं और खाद्य तेलों की महंगाई सबसे बड़ा जोखिम है. ग्रामीण मांग में सुधार इन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि ग्रामीण इलाकों (गांवों और कस्बों) में सामान की मांग बढ़ी है. लंबे समय की सुस्ती के बाद अब ग्रामीण बाजार रिकवर कर रहा है. कंपनियों के मैनेजमेंट का मानना है कि खपत में सुस्ती का बुरा दौर अब बीत चुका है. क्या होगा आप पर असर? अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में मध्यमवर्गीय परिवारों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है. उत्पादों के दाम बढ़ना: साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं. ‘श्रिंकफ्लेशन’ (Shrinkflation): मुमकिन है कि कंपनियां दाम न बढ़ाएं, लेकिन उसी कीमत पर मिलने वाले पैकेट का वजन (Quantity) कम कर दें.
- मोबाइल को तकिए के नीचे रखकर सोना या रातभर चार्ज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे ब्लास्ट का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को भी मोबाइल से दूर रखें, क्योंकि इसका ज्यादा इस्तेमाल उनकी आंखों, दिमाग और सेहत पर बुरा असर डाल सकता है।1
- शेखपुरा के शेखूपुर बाजार में एग रोल खाने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें अमित कुमार नामक युवक को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। घायल अमित को बेहतर इलाज के लिए पावापुरी रेफर किया गया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों, पिता-पुत्र इम्तियाज और छोटू आलम को गिरफ्तार कर लिया है।1
- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी ने एक नया वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो में उन्होंने पीएम मोदी के कुछ 'छिपे हुए राजों' का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया है। उनकी इस अपील के बाद बाजार और आम जनता में इसे लेकर तेज चर्चा शुरू हो गई है। यह कदम वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।1
- Post by Santosh Kumar Gupta1
- चमघारा के दर्जनों ग्रामीणों ने स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन निर्माण हेतु डी एम से लगाई गुहार। 1 साल बीत जाने के बावजूद भी भूमि दाता चमघारा के दर्जनों ग्रामीणों ने स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन निर्माण हेतु डी एम से लगाई गुहार। 1 साल बीत जाने के बावजूद भी भूमि दाता नहीं हुआ जमीन राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री। लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक थाना क्षेत्र अंतर्गत चमघारा गांव के दर्जनों ग्रामीण सोमवार को लखीसराय जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार से मिलकर चमघारा गांव में सिविल सर्जन सह सदस्य सचिव जिला स्वास्थ्य समिति लखीसराय पत्रांक डी यु 675 दिनांक 3/ 4/ 2025 के द्वारा लिखित पत्र अपर समाहार्ता लखीसराय को मौजा चमघारा खाता संख्या 237 खसरा 390 रकबा 12 डिसमिल जमाबंदी नंबर 10 जमीन का मालिक दोजराज यादव शैतान में प्राप्त जमीन को महामहिम राज्यपाल बिहार सरकार पटना के नाम से निबंधन कराने हेतु भेजा गया इसके उपरांत अंचल अधिकारी लखीसराय के पत्रांक 803 दिनांक 3/ 4 /2025 के द्वारा उक्त जमीन का मापी कर अमीन का नजरी नक्शा एवं ट्रेस नक्शा संलग्न कर जिला पदाधिकारी लखीसराय को भेजा गया। विशेष कार्य पदाधिकारी जिला गोपनीय शाखा लखीसराय के पत्रक 4427 दिनांक 6/ 9/ 2025 के द्वारा अपर समाहर्ता लखीसराय को भूमि नामांतरण करनी हेतू जिला पदाधिकारी के पत्र के आलोक में एक सप्ताह के अंदर कार्य करने का निर्देश दिया गया इसके बावजूद भी आज तक भूमि दान करता कागजी फाइल लेकर प्रतिदिन कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सरकारी कर्मी उदासीन रवैया के कारण भूमि दान करता की भूमि का राज्यपाल के नाम से लिखित नहीं कराया गया है। जिसको लेकर चमघारा के दर्जनों ग्रामीण वकील यादव प्रकाश पंडित अजय कुमार यादव राम प्रकाश यादव अशोक मंडल विंदेश्वरी यादव सुनील यादव गंगा यादव रामखेलावन यादव अनिक महतो विनोद महतो के द्वारा सामूहिक रूप से लखीसराय जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार से मिलकर स्वास्थ्य उप केंद्र के जमीन संबंधी कार्य पूरा करने एवं जल्द से जल्द स्वस्थ उपकेंद्र भवन के निर्माण हेतु गुहार लगाया जिस पर जिला पदाधिकारी लखीसराय शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मैं तुरंत इस मामले की जानकारी संबंधित पदाधिकारी से लेता हूं और जल्द से जल्द चमघारा गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र के भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।1
- *बेटियों को पिटवाने के बाद बिहार के शिक्षा मंत्री का ज्ञान सुनिए…*1
- शेखपुरा जिले के करंडे थाना पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी पवन यादव को गिरफ्तार किया है। गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर पकड़े गए पवन पर कांड संख्या 83/23 के तहत मुकदमा दर्ज था। पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।1