उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पड़रौना स्थित विशुनपुरा विकास खंड में गन्ना किसान यूरिया खाद की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। किसान सेवा सहकारी समिति खेसिया और मंसाछापर बाजार में पीसीएफ गोदाम, दोनों ही जगहों पर यूरिया का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। पहली बारिश के बाद गन्ने की फसल में यूरिया डालने का यह सही समय है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर खाद न मिलने से किसानों को फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है। पिछले कई दिनों से समिति और गोदाम के चक्कर काट रहे किसानों को हर बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्राइवेट खाद दुकानों पर यूरिया खुलेआम उपलब्ध है, जहां दुकानदार सरकारी रेट से 150 से 200 रुपये प्रति बोरी ज्यादा वसूल रहे हैं, जिससे किसान मजबूरी में महंगे दाम पर खाद खरीदने को विवश हैं। खेसिया के गन्ना किसान रामसिंह ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे रोज सुबह समिति जाते हैं, लेकिन हर बार यही बताया जाता है कि स्टॉक आया नहीं है। वहीं, दुकान पर 350 रुपये वाली यूरिया 500 रुपये में मिल रही है और उन्होंने सरकार से कालाबाजारी पर नकेल कसने की मांग की। मंसाछापर के शिवकुमार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहली बारिश का समय निकल रहा है और अगर अब खाद नहीं डाली गई तो गन्ने की ग्रोथ रुक जाएगी, जिससे सिर्फ किसानों को ही नुकसान होगा। इस मामले पर प्रशासन का कहना है कि खंड कृषि अधिकारी ने बताया कि खाद की मांग बढ़ने के कारण आपूर्ति में दिक्कत आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला स्तर से रैक छोड़ी गई है और 1-2 दिन में स्टॉक पहुंचने की उम्मीद है। अधिकारी ने यह भी कहा कि प्राइवेट दुकानों पर अधिक दाम वसूलने की शिकायत मिलने पर छापेमारी की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी होगी। किसानों ने मांग की है कि पीसीएफ गोदामों और समितियों पर तुरंत खाद भेजी जाए और प्राइवेट दुकानों पर रेट नियंत्रित किए जाएं, अन्यथा वे उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पड़रौना स्थित विशुनपुरा विकास खंड में गन्ना किसान यूरिया खाद की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। किसान सेवा सहकारी समिति खेसिया और मंसाछापर बाजार में पीसीएफ गोदाम, दोनों ही जगहों पर यूरिया का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। पहली बारिश के बाद गन्ने की फसल में यूरिया डालने का यह सही समय है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर खाद न मिलने से किसानों को फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है। पिछले कई दिनों से समिति और गोदाम के चक्कर काट रहे किसानों को हर बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्राइवेट खाद दुकानों पर यूरिया खुलेआम उपलब्ध है, जहां दुकानदार सरकारी रेट से 150 से 200 रुपये प्रति बोरी ज्यादा वसूल रहे हैं, जिससे किसान मजबूरी में महंगे दाम पर खाद खरीदने को विवश हैं। खेसिया के गन्ना किसान रामसिंह ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे रोज सुबह समिति जाते हैं, लेकिन हर बार यही बताया जाता है
कि स्टॉक आया नहीं है। वहीं, दुकान पर 350 रुपये वाली यूरिया 500 रुपये में मिल रही है और उन्होंने सरकार से कालाबाजारी पर नकेल कसने की मांग की। मंसाछापर के शिवकुमार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहली बारिश का समय निकल रहा है और अगर अब खाद नहीं डाली गई तो गन्ने की ग्रोथ रुक जाएगी, जिससे सिर्फ किसानों को ही नुकसान होगा। इस मामले पर प्रशासन का कहना है कि खंड कृषि अधिकारी ने बताया कि खाद की मांग बढ़ने के कारण आपूर्ति में दिक्कत आई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला स्तर से रैक छोड़ी गई है और 1-2 दिन में स्टॉक पहुंचने की उम्मीद है। अधिकारी ने यह भी कहा कि प्राइवेट दुकानों पर अधिक दाम वसूलने की शिकायत मिलने पर छापेमारी की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी होगी। किसानों ने मांग की है कि पीसीएफ गोदामों और समितियों पर तुरंत खाद भेजी जाए और प्राइवेट दुकानों पर रेट नियंत्रित किए जाएं, अन्यथा वे उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।
- कुशीनगर जनपद में परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को भोजन परोसने वाली रसोइयों ने अब 'आर-पार की लड़ाई' का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय रसोइया कर्मचारी समिति, जनपद कुशीनगर के बैनर तले इन रसोइयों ने शनिवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, मानदेय में भारी बढ़ोतरी करने और नियमितीकरण की प्रमुख मांगें शामिल हैं। मुख्यमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में बताया गया है कि रसोइयों को वर्तमान में महज 2000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार चलाने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, कई विद्यालयों में रसोइयों से भोजन बनाने के अलावा झाड़ू लगाने, शौचालय साफ करने और बर्तन धोने जैसे अन्य काम भी कराए जाते हैं, जिससे उनका मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से शोषण हो रहा है। समिति ने मांग की है कि रसोइयों का मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, उन्हें नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, साथ ही मानदेय का भुगतान समय पर हो और उन पर होने वाले उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए। समिति के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश कुशवाहा के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन स्वीकार करने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य ने रसोइयों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान फेकनी, कलावती, रेनू देवी, ऊषा देवी, गुड़िया, गीता सहित बड़ी संख्या में रसोइया कर्मचारी मौजूद रहीं।4
- कुशीनगर में परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को भोजन परोसने वाली रसोइयों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय रसोइया कर्मचारी समिति, जनपद कुशीनगर के बैनर तले इन रसोइयों ने सोमवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानदेय में भारी बढ़ोतरी और नियमितीकरण की प्रमुख मांगें उठाई गईं। मुख्यमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में बताया गया कि रसोइयों को प्रतिमाह मात्र 2000 रुपये का मानदेय मिलता है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में परिवार चलाने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, कई विद्यालयों में उनसे भोजन बनाने के अलावा झाड़ू लगाने, शौचालय साफ करने और बर्तन धोने जैसे अतिरिक्त कार्य भी कराए जाते हैं, जिसके कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने मांग की है कि उनका मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, उन्हें नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, मानदेय का भुगतान समय पर हो और उन पर होने वाले उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए। समिति के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश कुशवाहा के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य ने रसोइयों की मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस दौरान फेकनी, कलावती, रेनू देवी, ऊषा देवी, गुड़िया, गीता सहित बड़ी संख्या में रसोइया कर्मचारी मौजूद रहीं।4
- रामजन्म राजभर की हत्या कर दी गई है। यह घटना समाजवादी पार्टी के दौरे से संबंधित है, जिसमें दो यादवों ने रामजन्म राजभर को मारा है।1
- एक भयंकर आर्थिक तूफ़ान सर पर मंडरा रहा है, जिसके लिए पिछले 12 सालों में मोदी जी द्वारा खड़ा किया गया ढाँचा ज़िम्मेदार बताया गया है। इस दावे के अनुसार, यह ढाँचा विशेष रूप से अडानी और अंबानी के लिए निर्मित किया गया था और अब यही ढाँचा भरभराकर ढहने वाला है। आशंका जताई गई है कि जब यह ढाँचा ढहेगा, तब अडानी और अंबानी को चोट नहीं पहुँचेगी, क्योंकि उनके पास इस स्थिति से निकलने के रास्ते मौजूद हैं। हालाँकि, इसका सीधा और बुरा असर आम जनता पर पड़ेगा। इसमें युवाओं, ग़रीबों, मध्यमवर्ग के लोगों, किसानों, मज़दूरों और छोटे व्यापारियों को चोट पहुँचने की बात कही गई है, जिन्हें इस ढाँचे का कभी हिस्सा नहीं माना गया।1
- बंगाल में हजारों हिंदुओं की हत्या, हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार, जजों को बंधक बनाए जाने और सांसद-विधायकों की पिटाई जैसी गंभीर घटनाओं को लेकर गहरा गुस्सा व्यक्त किया गया है। यह तीव्र रोष इन कथित कृत्यों के संदर्भ में सामने आया है, जिसके साथ ही यह भी कहा गया है कि “जैसी करनी वैसी भरनी।”1
- बकरीद के दिन हिंदू लड़के सूर्या चौहान की हत्या के मुख्य आरोपी मोहम्मद असद को उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया है। इस कार्रवाई पर लोगों ने 'नो जेल नो बेल सीधे अल्लाह से मेल' जैसे नारे के साथ संतुष्टि व्यक्त की है, जो इस मामले को लेकर व्याप्त जन आक्रोश को दर्शाता है।1