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एक नाबालिग बालिका के अपहरण के मामले में पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई की है। इस घटना को लेकर, पुलिस अधीक्षक ने जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने का दावा किया है।

2 hrs ago
user_उपसंपादक जय प्रकाश द्विवेदी
उपसंपादक जय प्रकाश द्विवेदी
Local News Reporter देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

एक नाबालिग बालिका के अपहरण के मामले में पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई की है। इस घटना को लेकर, पुलिस अधीक्षक ने जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने का दावा किया है।

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  • 👉बाउंसर -पोलटिक्स 👈 ✍️ अरविंद मिश्रा 🤳 8889463039 " मामा " की राजनैतिक ताकत है "अपनापन" इसीलिए सबसे अलग दिखते हैं शिवराज सिंह चौहान सिंगरौली - राजनीति में ...पद, प्रतिष्ठा और शक्ति ...की चर्चा अक्सर होती है...लेकिन कुछ नेता ऐसे भी होते हैं... जिनकी पहचान केवल उनके पद से नहीं...बल्कि लोगों के साथ उनके भावनात्मक रिश्तों से बनती है। “शिवराज का मोदी पर अपनापन…” दर‌असल इसी राजनीतिक और मानवीय संबंध की पड़ताल करता है। यहां केवल... एक पुस्तक ‘अपनापन’ के बहाने शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों की चर्चा नहीं है... बल्कि भारतीय राजनीति में उस दुर्लभ तत्व को भी रेखांकित करना है...जिसे आज के दौर में सबसे अधिक संकटग्रस्त माना जाता है ...और वह है व्यक्तिगत आत्मीयता और संगठनात्मक निष्ठा। मूल प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्या है जो शिवराज सिंह चौहान को भाजपा के अन्य नेताओं से अलग बनाता है? इसका उत्तर... उनके राजनीतिक कौशल में जितना छिपा है, उससे कहीं अधिक उनके व्यवहार और संबंधों में है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से ...हटने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद कम नहीं हुआ... इसके पीछे केवल उनका जनाधार नहीं... बल्कि वह विश्वास है जो उन्होंने कार्यकर्ताओं, किसानों और शीर्ष नेतृत्व के बीच... वर्षों में अर्जित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ...उनकी सार्वजनिक आत्मीयता को कुछ लोग राजनीतिक रणनीति मान सकते हैं, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय राजनीति में दीर्घकालिक संबंध केवल औपचारिकता से नहीं चलते। ‘अपनापन’ एक राजनीतिक पूंजी भी है। लोकतंत्र में चुनाव जीतने के लिए संगठन चाहिए, लेकिन संगठन को जीवंत बनाए रखने के लिए... भावनात्मक जुड़ाव भी आवश्यक होता है। शिवराज सिंह चौहान की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत यही रही है... कि उन्होंने स्वयं को केवल प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में प्रस्तुत किया। “मामा” की छवि कोई राजनीतिक विज्ञापन भर नहीं थी...वह एक सामाजिक संवाद का माध्यम बनी... यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी उनकी लोकप्रियता बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है कि क्यों कुछ नेता पद छोड़ने के बाद भी प्रभावशाली बने रहते हैं... जबकि कुछ पद के साथ ही अप्रासंगिक हो जाते हैं। शिवराज का उदाहरण बताता है कि... जनता के साथ भावनात्मक निवेश, राजनीतिक निवेश से अधिक टिकाऊ होता है। शिवराज की कार्यशैली अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की उस संगठनात्मक संस्कृति को भी सामने लाती है... जहां वैचारिक प्रतिबद्धता और नेतृत्व के प्रति सम्मान को महत्व दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज सिंह चौहान के संबंधों को ...केवल व्यक्ति-व्यक्ति का संबंध मानना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस राजनीतिक परंपरा का भी संकेत है जिसमें संगठन व्यक्ति से बड़ा माना जाता है, लेकिन व्यक्ति की निष्ठा और योगदान का सम्मान भी किया जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी ...शिवराज राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते हैं। यह प्रसंग केवल भाजपा या शिवराज तक सीमित नहीं है...यह पूरे राजनीतिक वर्ग के लिए एक संदेश है कि जनता केवल भाषणों और घोषणाओं से प्रभावित नहीं होती... वह नेताओं के व्यवहार, रिश्तों और संवेदनशीलता को भी देखती है। आज जब राजनीति में ...कटुता, आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमले बढ़ रहे हैं, तब ‘अपनापन’ जैसे शब्द का राजनीतिक विमर्श में आना अपने आप में महत्वपूर्ण है। शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी के संबंधों पर केंद्रित यह चर्चा अंततः एक बड़े सत्य की ओर संकेत करती है.. कि राजनीति की वास्तविक शक्ति केवल सत्ता नहीं, बल्कि विश्वास है। पद बदलते हैं, सरकारें बदलती हैं, समीकरण बदलते हैं, लेकिन जो नेता लोगों और नेतृत्व के बीच "भरोसे" का पुल बना लेते हैं...वे राजनीतिक परिदृश्य में लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहते हैं। शिवराज सिंह चौहान की राजनीति का यही “अपनापन” शायद उनकी सबसे बड़ी पूंजी है...एक ऐसी पूंजी, जिसे न चुनावी आंकड़ों में मापा जा सकता है और न ही केवल राजनीतिक समीकरणों से समझा जा सकता है। यह वह पूंजी है जो व्यक्ति को... नेता और.. नेता को "जननेता" बनाती है। ........
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    👉बाउंसर -पोलटिक्स 👈
  ✍️ अरविंद मिश्रा 
 🤳 8889463039

   " मामा " की राजनैतिक ताकत है "अपनापन"
 इसीलिए सबसे अलग दिखते हैं शिवराज सिंह चौहान 
सिंगरौली - 
राजनीति में ...पद, प्रतिष्ठा और शक्ति ...की चर्चा अक्सर होती है...लेकिन कुछ नेता ऐसे भी होते हैं... जिनकी पहचान केवल उनके पद से नहीं...बल्कि लोगों के साथ उनके भावनात्मक रिश्तों से बनती है।  “शिवराज का मोदी पर अपनापन…” दर‌असल इसी राजनीतिक और मानवीय संबंध की पड़ताल करता है।
यहां केवल... एक पुस्तक ‘अपनापन’ के बहाने शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों की चर्चा नहीं है... बल्कि भारतीय राजनीति में उस दुर्लभ तत्व को भी रेखांकित करना है...जिसे आज के दौर में सबसे अधिक संकटग्रस्त माना जाता है ...और वह है व्यक्तिगत आत्मीयता और संगठनात्मक निष्ठा।
 मूल प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्या है जो शिवराज सिंह चौहान को भाजपा के अन्य नेताओं से अलग बनाता है? इसका उत्तर... उनके राजनीतिक कौशल में जितना छिपा है, उससे कहीं अधिक उनके व्यवहार और संबंधों में है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से ...हटने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद कम नहीं हुआ... इसके पीछे केवल उनका जनाधार नहीं... बल्कि वह विश्वास है जो उन्होंने कार्यकर्ताओं, किसानों और शीर्ष नेतृत्व के बीच... वर्षों में अर्जित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ...उनकी सार्वजनिक आत्मीयता को कुछ लोग राजनीतिक रणनीति मान सकते हैं, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय राजनीति में दीर्घकालिक संबंध केवल औपचारिकता से नहीं चलते।

‘अपनापन’ एक राजनीतिक पूंजी भी है।

लोकतंत्र में चुनाव जीतने के लिए संगठन चाहिए, लेकिन संगठन को जीवंत बनाए रखने के लिए... भावनात्मक जुड़ाव भी आवश्यक होता है। शिवराज सिंह चौहान की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत यही रही है... कि उन्होंने स्वयं को केवल प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में प्रस्तुत किया। “मामा” की छवि कोई राजनीतिक विज्ञापन भर नहीं थी...वह एक सामाजिक संवाद का माध्यम बनी... यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी उनकी लोकप्रियता बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है कि क्यों कुछ नेता पद छोड़ने के बाद भी प्रभावशाली बने रहते हैं... जबकि कुछ पद के साथ ही अप्रासंगिक हो जाते हैं। शिवराज का उदाहरण बताता है कि... जनता के साथ भावनात्मक निवेश, राजनीतिक निवेश से अधिक टिकाऊ होता है।
शिवराज की कार्यशैली अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की उस संगठनात्मक संस्कृति को भी सामने लाती है... जहां वैचारिक प्रतिबद्धता और नेतृत्व के प्रति सम्मान को महत्व दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज सिंह चौहान के संबंधों को ...केवल व्यक्ति-व्यक्ति का संबंध मानना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस राजनीतिक परंपरा का भी संकेत है जिसमें संगठन व्यक्ति से बड़ा माना जाता है, लेकिन व्यक्ति की निष्ठा और योगदान का सम्मान भी किया जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी ...शिवराज राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते हैं। यह प्रसंग केवल भाजपा या शिवराज तक सीमित नहीं है...यह पूरे राजनीतिक वर्ग के लिए एक संदेश है कि जनता केवल भाषणों और घोषणाओं से प्रभावित नहीं होती... वह नेताओं के व्यवहार, रिश्तों और संवेदनशीलता को भी देखती है। आज जब राजनीति में ...कटुता, आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमले बढ़ रहे हैं, तब ‘अपनापन’ जैसे शब्द का राजनीतिक विमर्श में आना अपने आप में महत्वपूर्ण है। शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी के संबंधों पर केंद्रित यह चर्चा अंततः एक बड़े सत्य की ओर संकेत करती है.. कि राजनीति की वास्तविक शक्ति केवल सत्ता नहीं, बल्कि विश्वास है। पद बदलते हैं, सरकारें बदलती हैं, समीकरण बदलते हैं, लेकिन जो नेता लोगों और नेतृत्व के बीच "भरोसे" का पुल बना लेते हैं...वे राजनीतिक परिदृश्य में लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहते हैं। शिवराज सिंह चौहान की राजनीति का यही “अपनापन” शायद उनकी सबसे बड़ी पूंजी है...एक ऐसी पूंजी, जिसे न चुनावी आंकड़ों में मापा जा सकता है और न ही केवल राजनीतिक समीकरणों से समझा जा सकता है। यह वह पूंजी है जो व्यक्ति को... नेता और.. नेता को "जननेता" बनाती है।
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    user_Arvind Kumar Mishra
    Arvind Kumar Mishra
    Singrauli, Madhya Pradesh•
    14 hrs ago
  • सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र के पटवध ग्राम पंचायत में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घाघर नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोरी चांदनी गोंड की मौत हो गई। बताया गया है कि चांदनी गुड़वा-गुड़िया बहाने के लिए नदी में उतरी थी और इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई, जिससे यह हादसा हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा मातम पसरा है और पूरे गाँव में शोक का माहौल है।
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    सोनभद्र जिले के चोपन थाना क्षेत्र के पटवध ग्राम पंचायत में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घाघर नदी में डूबने से 17 वर्षीय किशोरी चांदनी गोंड की मौत हो गई। बताया गया है कि चांदनी गुड़वा-गुड़िया बहाने के लिए नदी में उतरी थी और इसी दौरान वह गहरे पानी में चली गई, जिससे यह हादसा हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। इस हृदय विदारक घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा मातम पसरा है और पूरे गाँव में शोक का माहौल है।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • रीवा जिले के गंगेव जनपद पंचायत क्षेत्र में एक महिला जनपद सदस्य के कथित अपहरण के मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस प्रकरण में गंगेव जनपद पंचायत के अध्यक्ष विकास तिवारी पर महिला को जबरन अपने साथ ले जाने का गंभीर आरोप लगा है। वार्ड क्रमांक 22 से निर्वाचित जनपद सदस्य शारदा नामदेव के पति अमृतलाल नामदेव ने मनगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 24 मई की सुबह उनकी पत्नी को जनपद पंचायत गंगेव के अध्यक्ष विकास तिवारी जबरन अपने साथ ले गए हैं। शिकायतकर्ता अमृतलाल नामदेव का कहना है कि घटना के बाद से उनकी पत्नी का कोई पता नहीं चल सका है और उन्हें आशंका है कि उनकी जान को भी खतरा हो सकता है, जिसके चलते उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द बरामदगी की मांग की है। इसी बीच शारदा नामदेव का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह अपने पति द्वारा अपहरण की बात कहती हुई नजर आ रही हैं। हालांकि, इस वीडियो को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें इसमें किसी के निर्देश पर बयान देते हुए देखा जा सकता है, जिससे यह मामला और भी अधिक संदिग्ध हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और महिला जनपद सदस्य की तलाश में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को गंगेव जनपद पंचायत की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।
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    रीवा जिले के गंगेव जनपद पंचायत क्षेत्र में एक महिला जनपद सदस्य के कथित अपहरण के मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस प्रकरण में गंगेव जनपद पंचायत के अध्यक्ष विकास तिवारी पर महिला को जबरन अपने साथ ले जाने का गंभीर आरोप लगा है।

वार्ड क्रमांक 22 से निर्वाचित जनपद सदस्य शारदा नामदेव के पति अमृतलाल नामदेव ने मनगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 24 मई की सुबह उनकी पत्नी को जनपद पंचायत गंगेव के अध्यक्ष विकास तिवारी जबरन अपने साथ ले गए हैं। शिकायतकर्ता अमृतलाल नामदेव का कहना है कि घटना के बाद से उनकी पत्नी का कोई पता नहीं चल सका है और उन्हें आशंका है कि उनकी जान को भी खतरा हो सकता है, जिसके चलते उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द बरामदगी की मांग की है।

इसी बीच शारदा नामदेव का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह अपने पति द्वारा अपहरण की बात कहती हुई नजर आ रही हैं। हालांकि, इस वीडियो को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें इसमें किसी के निर्देश पर बयान देते हुए देखा जा सकता है, जिससे यह मामला और भी अधिक संदिग्ध हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और महिला जनपद सदस्य की तलाश में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को गंगेव जनपद पंचायत की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक ढांचे में कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। एक मजबूत संगठन अपने समर्पित और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की बदौलत ही समाज के बीच प्रभावी ढंग से काम कर पाता है। कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के माध्यम से संगठन की विचारधारा, उसकी कार्यपद्धति और नेतृत्व कौशल के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे वे जनसेवा और संगठन के विस्तार में बेहतर योगदान दे पाते हैं। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए, भाजपा समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है, ताकि कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, ज्ञान और नेतृत्व क्षमता का संचार हो सके। संगठन को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह कहा गया है कि कार्यकर्ता ही संगठन की शक्ति हैं, संगठन ही सफलता की गारंटी है और प्रशिक्षण ही कार्यकर्ताओं को नेतृत्व की सही दिशा प्रदान करता है।
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    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक ढांचे में कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। एक मजबूत संगठन अपने समर्पित और प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की बदौलत ही समाज के बीच प्रभावी ढंग से काम कर पाता है।

कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के माध्यम से संगठन की विचारधारा, उसकी कार्यपद्धति और नेतृत्व कौशल के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे वे जनसेवा और संगठन के विस्तार में बेहतर योगदान दे पाते हैं। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए, भाजपा समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है, ताकि कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, ज्ञान और नेतृत्व क्षमता का संचार हो सके।

संगठन को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह कहा गया है कि कार्यकर्ता ही संगठन की शक्ति हैं, संगठन ही सफलता की गारंटी है और प्रशिक्षण ही कार्यकर्ताओं को नेतृत्व की सही दिशा प्रदान करता है।
    user_मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    Advertising Photographer सोनहत, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के ग्राम पंचायत भैसवार में चकबंदी के विरोध में चल रहा धरना प्रदर्शन अपने 377वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा कर रहे हैं। धरने में शामिल कुछ किसान हरिद्वार में आयोजित 'शिविर चिंतन' के लिए अपने निजी साधन से वहां जाएंगे। हरिद्वार में चौधरी चरण सिंह वीआईपी घाट पर 3, 4 और 5, 2026 को एक महापंचायत आयोजित की जाएगी।
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    जनपद सोनभद्र के घोरावल तहसील के ग्राम पंचायत भैसवार में चकबंदी के विरोध में चल रहा धरना प्रदर्शन अपने 377वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा कर रहे हैं।

धरने में शामिल कुछ किसान हरिद्वार में आयोजित 'शिविर चिंतन' के लिए अपने निजी साधन से वहां जाएंगे। हरिद्वार में चौधरी चरण सिंह वीआईपी घाट पर 3, 4 और 5, 2026 को एक महापंचायत आयोजित की जाएगी।
    user_Brijesh kumar singh
    Brijesh kumar singh
    घोरावल, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • प्रस्तुत पाठ में 'ओम श्री लक्ष्मी नारायण नमो नमः' का उल्लेख किया गया है, जो कि भगवान लक्ष्मी नारायण को एक पवित्र और श्रद्धापूर्ण नमस्कार के रूप में दर्शाया गया है।
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    प्रस्तुत पाठ में 'ओम श्री लक्ष्मी नारायण नमो नमः' का उल्लेख किया गया है, जो कि भगवान लक्ष्मी नारायण को एक पवित्र और श्रद्धापूर्ण नमस्कार के रूप में दर्शाया गया है।
    user_Damodar kushwaha
    Damodar kushwaha
    Farmer Rampur Naikin, Sidhi•
    8 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा 2026-28 का आयोजन आज सोनभद्र जनपद में किया जा रहा है। कुल 2186 अभ्यर्थी दो पालियों में इस परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके लिए जनपद में 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने इस परीक्षा को पूरी तरह से नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए कमर कस ली है और पूरी तरह सतर्क है। सभी परीक्षा केंद्रों पर स्टैटिक मजिस्ट्रेट के साथ पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा 2026-28 का आयोजन आज सोनभद्र जनपद में किया जा रहा है। कुल 2186 अभ्यर्थी दो पालियों में इस परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके लिए जनपद में 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने इस परीक्षा को पूरी तरह से नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए कमर कस ली है और पूरी तरह सतर्क है। सभी परीक्षा केंद्रों पर स्टैटिक मजिस्ट्रेट के साथ पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • रीवा में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर नशामुक्ति का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस खास मौके पर तंबाकू की ‘चिता’ जलाई गई, जिसके माध्यम से लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प भी लिया।
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    रीवा में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर नशामुक्ति का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस खास मौके पर तंबाकू की ‘चिता’ जलाई गई, जिसके माध्यम से लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प भी लिया।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist गुढ़, रीवा, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • अंबिकापुर में नायब तहसीलदार और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ एक महिला पार्षद ने नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, महिला पार्षद ने अधिकारी पर उनके साथ अनुचित व्यवहार करने और आपत्तिजनक बातें कहने का आरोप लगाया है। यह पूरा विवाद पहले से ही चर्चा का विषय था, जब सीतापुर क्षेत्र में नायब तहसीलदार और विधायक समर्थकों के बीच कथित विवाद के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने नायब तहसीलदार और विधायक पक्ष की शिकायतों पर मामले दर्ज कर अपनी जाँच पहले ही शुरू कर दी थी। महिला पार्षद के इन आरोपों के सामने आने के बाद, इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। हालाँकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक स्तर पर जाँच की प्रक्रिया जारी है। पुलिस और जिला प्रशासन पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला पार्षद द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं। इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
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    अंबिकापुर में नायब तहसीलदार और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ एक महिला पार्षद ने नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, महिला पार्षद ने अधिकारी पर उनके साथ अनुचित व्यवहार करने और आपत्तिजनक बातें कहने का आरोप लगाया है।

यह पूरा विवाद पहले से ही चर्चा का विषय था, जब सीतापुर क्षेत्र में नायब तहसीलदार और विधायक समर्थकों के बीच कथित विवाद के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने नायब तहसीलदार और विधायक पक्ष की शिकायतों पर मामले दर्ज कर अपनी जाँच पहले ही शुरू कर दी थी।

महिला पार्षद के इन आरोपों के सामने आने के बाद, इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। हालाँकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक स्तर पर जाँच की प्रक्रिया जारी है। पुलिस और जिला प्रशासन पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।

फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला पार्षद द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं। इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
    user_मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    मीडिया रिपोर्टर छत्तीसगढ़
    Advertising Photographer सोनहत, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
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