पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़, कुल 62 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है। इस जमीन का उपयोग दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं के निर्माण और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, विशेष रूप से चीन की सीमा के करीब। हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित भारतीय वायुसेना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है। यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर देश की लड़ाकू क्षमता को काफी बढ़ाती है। राफेल एक आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है, जो लंबी दूरी तक हमला करने, दुश्मन के रडार से बचने और हवा से हवा तथा हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन करने में सक्षम है। सूत्रों के अनुसार, इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं, हालांकि सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था और चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी। पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक प्रमुख फाइटर और ट्रेनिंग हब है, जहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं। यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी विख्यात है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां संपन्न हुए हैं। कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभालने में सक्षम है। मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी, जिससे यह विकास शांति और युद्धकाल दोनों में बदलती तैनाती के लिए गेम चेंजर साबित होगा। राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बेहद खतरनाक बना देता है, क्योंकि S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है, और राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत प्रदान करता है। पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। ये दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से भी जाना जाता है, की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ता है। भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही है, और हसीमारा व कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम तथा लॉजिस्टिक सपोर्ट को भी मजबूत किया जा रहा है। यह विकास न केवल चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा।
पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़, कुल 62 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है। इस जमीन का उपयोग दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं के निर्माण और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, विशेष रूप से चीन की सीमा के करीब। हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित भारतीय वायुसेना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है। यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर देश की लड़ाकू क्षमता को काफी बढ़ाती है। राफेल एक आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है, जो लंबी दूरी तक हमला करने, दुश्मन के रडार से बचने और हवा से हवा तथा हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन करने में सक्षम है। सूत्रों के अनुसार, इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं, हालांकि सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था और चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे
सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी। पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक प्रमुख फाइटर और ट्रेनिंग हब है, जहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं। यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी विख्यात है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां संपन्न हुए हैं। कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभालने में सक्षम है। मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी, जिससे यह विकास शांति और युद्धकाल दोनों में बदलती तैनाती के लिए गेम चेंजर साबित होगा। राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बेहद खतरनाक बना देता है, क्योंकि S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है, और राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत प्रदान करता है। पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। ये दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से भी जाना जाता है, की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ता है। भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही है, और हसीमारा व कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम तथा लॉजिस्टिक सपोर्ट को भी मजबूत किया जा रहा है। यह विकास न केवल चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा।
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- फिल्म अभिनेता अली खान ने एक विशेष लाइव इंटरव्यू दिया है।1
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