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2024 #वंचित अतिपिछड़ा_वोट: 2024 के समानुपाती, 2027 में NDA से 40-50% और घट सकता है! 📉🗳️ ​"कारण: समाज में व्याप्त भय भूख भ्रष्टाचार महंगाई बेरोजगारी और आरक्षण बनाम आश्वासन" ⚖️🚫 ​2024 लोकसभा चुनावों के परिणामों को देखते हुए, वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों का वोटिंग पैटर्न वाकई एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है। यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। मैं इन बिंदुओं को तथ्यों के साथ विश्लेषण करके बताता हूँ कि यह क्यों संभव है और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं। यह पूरा विश्लेषण हालिया राजनीतिक रुझानों (Trends) पर आधारित है। 🧐📊 ​1. 2024 में वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों का वोटिंग पैटर्न और इनके बीच के लोडरो का प्रभाव: 🚩जो BJP-NDA के सहयोगी हैं वे सिर्फ सत्ता की मलाई काटने और परिवारवाद की राजनीति में मस्त हैं समाज को असल मुद्दों से भटकाकर। बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश में 2024 की हार वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों के एक बड़े हिस्से का BJP से मोहभंग होने का साफ संकेत थी। 📉 ​वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वर्ग जिसमें मुख्य रूप से 17 अतिपिछड़ी जातियां शामिल हैं) UP में बेहद मजबूत है। वे यहाँ की लगभग सभी लोकसभा सीटों और विधानसभा सीटों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में वे OBC कैटेगरी में हैं, लेकिन उनकी मुख्य मांग 'SC स्टेटस' (अनुसूचित जाति का दर्जा) हासिल करना है। ✊ ​2024 में, वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्ग का एक बड़ा हिस्सा SP की ओर शिफ्ट हुआ, क्योंकि SP की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) स्ट्रेटजी ने उन्हें आकर्षित किया और फिर बीजेपी के खिलाफ उनके पास कोई दुसरा विकल्प भी नहीं था। SP ने गैर-यादव OBC (जैसे निषाद, कुरमी, राजभर आदि) को ज्यादा टिकट दिए, जिससे BJP को अपने पारंपरिक OBC वोट बैंक में बड़ा नुकसान हुआ। 🤝 ​नतीजा: UP में BJP 62 से घटकर 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि SP 37 सीटों पर पहुंच गई। वजह: वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वर्ग अब सिर्फ अपने बीच के लोडरो के गठबंधन पर नहीं, बल्कि अपने मौलिक मुद्दों (जैसे आरक्षण, संवैधानिक अधिकार और आर्थिक सशक्तिकरण आदि) पर फोकस कर रहा है। इन वर्गों के सत्ता संरक्षण प्राप्त लोडरो का प्रभाव समाज में कभी वैसा नहीं रहा जैसा दावा किया गया, क्योंकि जब वे भाजपा के धुर विरोधी थे, तब भी भाजपा ने 2014 और 2017 में उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। 🧐 ​आज वंचित अतिपिछड़ा समाज का एक बड़ा वर्ग अपने बीच के लोडरो को "BJP का मोहरा" मानता है। समाज का तर्क है कि जब वे साथ नहीं थे, तब भाजपा ने कृषि मंत्रालय से अलग 'मत्स्य मंत्रालय' बनाया और आरक्षण की बात भी समय-समय पर की जाती थी। साथ ही, भाजपा जिन्हें टिकट देती थी, उन्हें जिताने के लिए अपना पूरा कैडर लगा देती थी। 🗳️📌 ​2. क्या 2027 में वंचित अतिपिछड़ा समाज का रुख 2024 जैसा रहेगा? ❓ इसकी संभावना 'हां' की तरफ अधिक झुकती है। अगर वंचित अतिपिछड़ा समाज का 2024 वाला ट्रेंड जारी रहा—यानी उन्होंने पुनः SP की PDA नीति को समर्थन दिया—तो SP को 2027 में बड़ा फायदा मिल सकता है। 📈 ​UP में OBC वोट्स (जिसमें अतिपिछड़ा समाज OBC का बहुत बड़ा हिस्सा है) कुल वोटों का लगभग 40% से ज्यादा हैं। अगर ये PDA के साथ मजबूती से जुड़ गए, तो SP+Congress गठबंधन बंपर बहुमत का आंकड़ा पार कर सकता है और सरकार बना सकता है। 🏛️ ​क्या यह संभव है? ✅ 2022 विधानसभा में BJP ने 255 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 लोकसभा में हुए OBC शिफ्ट से साफ हो गया है कि ये वोट अब 'फ्लोटिंग' (परिवर्तनशील) हैं। SP की PDA स्ट्रेटजी धरातल पर काम कर रही है। SP ने 2024 में गैर-यादव OBC को 12 टिकट दिए (BJP ने 7) और दलितों को सामान्य सीटों पर भी उतारा। इससे अतिपिछड़ा समाज को लगा कि SP उनके मुद्दों (आरक्षण और रोजगार) पर ज्यादा संवेदनशील है। 💼 ​हालिया चर्चाएं और मीडिया फीडबैक दिखाते हैं कि यदि चुनाव आज होते हैं, तो SP मजबूत स्थिति में है। इसका मुख्य कारण OBC वर्ग में BJP के खिलाफ बढ़ता असंतोष (जैसे बुलडोजर पॉलिसी, गरीब कमजोरों पर हो रहे अन्याय अत्याचार और आरक्षण पर अनिश्चितता) है। 🗣️ ​डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी): अतिपिछड़ा समाज यूपी के सभी विधानसभा सीटों पर प्रभावशाली है, खासकर पूर्वांचल में। अगर 2024 के अनुपात में अतिपिछड़ा समाज का 40-50% वोट 2027 में PDA की तरफ और शिफ्ट हुआ, तो उत्तर प्रदेश में SP की सीटें अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ सकती हैं। 🗺️🚀 ​3. निष्कर्ष: 🏁 अगर अतिपिछड़ा समाज और अन्य OBC वर्गों का रुख 2024 जैसा ही रहा, तो SP के PDA मिशन को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा और 2027 में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा "गेम चेंजर" साबित होगा, क्योंकि अब बहुतायत आवादी वाला वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वोटर "हिंदुत्व" के बजाय "सोशल जस्टिस" (सामाजिक न्याय) को प्राथमिकता दे रहे हैं। ⚖ सौजन्य से - अनिल कुमार प्रजापति राष्ट्रीय संयोजक अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान।🙏

20 hrs ago
user_अनिल कुमार प्रजापति
अनिल कुमार प्रजापति
Voice of people घनघटा, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
20 hrs ago
d58ee983-3b0e-4bce-87fa-d61532ca8220

2024 #वंचित अतिपिछड़ा_वोट: 2024 के समानुपाती, 2027 में NDA से 40-50% और घट सकता है! 📉🗳️ ​"कारण: समाज में व्याप्त भय भूख भ्रष्टाचार महंगाई बेरोजगारी और आरक्षण बनाम आश्वासन" ⚖️🚫 ​2024 लोकसभा चुनावों के परिणामों को देखते हुए, वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों का वोटिंग पैटर्न वाकई एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है। यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। मैं इन बिंदुओं को तथ्यों के साथ विश्लेषण करके बताता हूँ कि यह क्यों संभव है और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं। यह पूरा विश्लेषण हालिया राजनीतिक रुझानों (Trends) पर आधारित है। 🧐📊 ​1. 2024 में वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों का वोटिंग पैटर्न और इनके बीच के लोडरो का प्रभाव: 🚩जो BJP-NDA के सहयोगी हैं वे सिर्फ सत्ता की मलाई काटने और परिवारवाद की राजनीति में मस्त हैं समाज को असल मुद्दों से भटकाकर। बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश में 2024 की हार वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्गों के एक बड़े हिस्से का BJP से मोहभंग होने का साफ संकेत थी। 📉 ​वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वर्ग जिसमें मुख्य रूप से 17 अतिपिछड़ी जातियां शामिल हैं) UP में बेहद मजबूत है। वे यहाँ की लगभग सभी लोकसभा सीटों और विधानसभा सीटों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में वे OBC कैटेगरी में हैं, लेकिन उनकी मुख्य मांग 'SC स्टेटस' (अनुसूचित जाति का दर्जा) हासिल करना है। ✊ ​2024 में, वंचित अतिपिछड़े उपेक्षित वर्ग का एक बड़ा हिस्सा SP की ओर शिफ्ट हुआ, क्योंकि SP की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) स्ट्रेटजी ने उन्हें आकर्षित किया और फिर बीजेपी के खिलाफ उनके पास कोई दुसरा विकल्प भी नहीं था। SP ने गैर-यादव OBC (जैसे निषाद, कुरमी, राजभर आदि) को ज्यादा टिकट दिए, जिससे BJP को अपने पारंपरिक OBC वोट बैंक में बड़ा नुकसान हुआ। 🤝 ​नतीजा: UP में BJP 62 से घटकर 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि SP 37 सीटों पर पहुंच गई। वजह: वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वर्ग अब सिर्फ अपने बीच के लोडरो के गठबंधन पर नहीं, बल्कि अपने मौलिक मुद्दों (जैसे आरक्षण, संवैधानिक अधिकार और आर्थिक सशक्तिकरण आदि) पर फोकस कर रहा है। इन वर्गों के सत्ता संरक्षण प्राप्त लोडरो का प्रभाव समाज में कभी वैसा नहीं रहा जैसा दावा किया गया, क्योंकि जब वे भाजपा के धुर विरोधी थे, तब भी भाजपा ने 2014 और 2017 में उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। 🧐 ​आज वंचित अतिपिछड़ा समाज का एक बड़ा वर्ग अपने बीच के लोडरो को "BJP का मोहरा" मानता है। समाज का तर्क है कि जब वे साथ नहीं थे, तब भाजपा ने कृषि मंत्रालय से अलग 'मत्स्य मंत्रालय' बनाया और आरक्षण की बात भी समय-समय पर की जाती थी। साथ ही, भाजपा जिन्हें टिकट देती थी, उन्हें जिताने के लिए अपना पूरा कैडर लगा देती थी। 🗳️📌 ​2. क्या 2027 में वंचित अतिपिछड़ा समाज का रुख 2024 जैसा रहेगा? ❓ इसकी संभावना 'हां' की तरफ अधिक झुकती है। अगर वंचित अतिपिछड़ा समाज का 2024 वाला ट्रेंड जारी रहा—यानी उन्होंने पुनः SP की PDA नीति को समर्थन दिया—तो SP को 2027 में बड़ा फायदा मिल सकता है। 📈 ​UP में OBC वोट्स (जिसमें अतिपिछड़ा समाज OBC का बहुत बड़ा हिस्सा है) कुल वोटों का लगभग 40% से ज्यादा हैं। अगर ये PDA के साथ मजबूती से जुड़ गए, तो SP+Congress गठबंधन बंपर बहुमत का आंकड़ा पार कर सकता है और सरकार बना सकता है। 🏛️ ​क्या यह संभव है? ✅ 2022 विधानसभा में BJP ने 255 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 लोकसभा में हुए OBC शिफ्ट से साफ हो गया है कि ये वोट अब 'फ्लोटिंग' (परिवर्तनशील) हैं। SP की PDA स्ट्रेटजी धरातल पर काम कर रही है। SP ने 2024 में गैर-यादव OBC को 12 टिकट दिए (BJP ने 7) और दलितों को सामान्य सीटों पर भी उतारा। इससे अतिपिछड़ा समाज को लगा कि SP उनके मुद्दों (आरक्षण और रोजगार) पर ज्यादा संवेदनशील है। 💼 ​हालिया चर्चाएं और मीडिया फीडबैक दिखाते हैं कि यदि चुनाव आज होते हैं, तो SP मजबूत स्थिति में है। इसका मुख्य कारण OBC वर्ग में BJP के खिलाफ बढ़ता असंतोष (जैसे बुलडोजर पॉलिसी, गरीब कमजोरों पर हो रहे अन्याय अत्याचार और आरक्षण पर अनिश्चितता) है। 🗣️ ​डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी): अतिपिछड़ा समाज यूपी के सभी विधानसभा सीटों पर प्रभावशाली है, खासकर पूर्वांचल में। अगर 2024 के अनुपात में अतिपिछड़ा समाज का 40-50% वोट 2027 में PDA की तरफ और शिफ्ट हुआ, तो उत्तर प्रदेश में SP की सीटें अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ सकती हैं। 🗺️🚀 ​3. निष्कर्ष: 🏁 अगर अतिपिछड़ा समाज और अन्य OBC वर्गों का रुख 2024 जैसा ही रहा, तो SP के PDA मिशन को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा और 2027 में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा "गेम चेंजर" साबित होगा, क्योंकि अब बहुतायत आवादी वाला वंचित अतिपिछड़ा उपेक्षित वोटर "हिंदुत्व" के बजाय "सोशल जस्टिस" (सामाजिक न्याय) को प्राथमिकता दे रहे हैं। ⚖ सौजन्य से - अनिल कुमार प्रजापति राष्ट्रीय संयोजक अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान।🙏

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    Rohit nishad Rohit Kumar
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    16 hrs ago
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