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*लेखनी,कर्म,आस्था और आत्म अनुशासन का महापर्व भगवान चित्रगुप्त प्रकट्योत्सव* ( अंजनी सक्सेना-विभूति फीचर्स) भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में ऐसे अनेक देवता हैं जिनका संबंध केवल आस्था एवं विश्वास से ही नहीं जीवन के मूल सिद्धांतों से भी है। इन्हीं में एक प्रमुख नाम है भगवान चित्रगुप्त का,जिन्हें कर्मो के लेखाकार, न्याय के संरक्षक और सत्य के प्रतीक के रुप में पूजा जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान चित्रगुप्त, प्रत्येक प्राणी के पाप पुण्यों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं यथा वे धर्मराज के सहायक हैं। भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति का विवरण कई पुराणों एवं धर्मग्रंथों में मिलता है। इस विवरण के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, पेट या जंघा से वैश्य तथा पैरों से शूद्र उत्पन्न किए। उन्होंने सूर्य एवं चन्द्र आदि ग्रहों के साथ ही बिना पैर वाले जीवों से लेकर अनेक पैर वाले जीवों की रचना की। इस सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा के शरीर (काया) से बड़ी-बड़ी भुजाओं वाले, श्याम वर्ण, कमलवत् नेत्रवान्, शंख के समान गर्दन वाले, तेजस्वी, अति बुद्धिमान, हाथ में लेखनी और दवात धारण किए हुए, अव्यक्त जन्मा चित्रगुप्त जी प्रकट हुए। समाधि खुलने के बाद ब्रह्मा जी ने अपने सामने उपस्थित इस पुरुष से पूछा आप कौन हैं? उस पुरुष ने कहा - मैं आपके ही शरीर से उत्पन्न हुआ हूं इसलिए आप मेरा नामकरण कीजिए तथा मेरे कर्तव्य बताईये। ब्रह्मा जी ने यह सुनकर कहा कि तुम मेरी काया (शरीर) से उत्पन्न हुए हो इसलिए तुम्हारी संज्ञा कायस्थ है। तुम्हारी उत्पत्ति के समय मेरा मन विश्रांत स्थिति में था अर्थात् मेरा चित्त गुप्त था इसलिए तुम चित्रगुप्त कहलाओगे। तुम धर्मराज की धर्मपुरी में निवास करो और प्राणियों के धर्माधर्म पर विचार करो। भगवान चित्रगुप्त के नाम में ही उनकी भूमिका छिपी है “चित्र” यानी स्पष्ट चित्रण और “गुप्त” यानी छिपा हुआ। अर्थात वे केवल दिखाई देने वाले कर्म ही नहीं, बल्कि मन के भाव और इरादों तक का लेखा रखते हैं। उनके स्वरूप का वर्णन करते हुए एक प्रचलित श्लोक अक्सर सुनने को मिलता है- *“लेखनी-पत्र-हस्तं च चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।* *कर्मणा लेखनं यस्य सर्वभूतहिते रतम्॥”* इस श्लोक में चित्रगुप्त के उस रूप का चित्रण है, जिसमें वे हाथ में लेखनी और पत्र लिए हुए हैं और समस्त प्राणियों के कर्मों का लेखा लिखते हैं। जिसमें हर कार्य का हिसाब है और हर निर्णय का परिणाम। धर्म ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुए। एक सूर्य कन्या से तथा दूसरा नाग कन्या से। इन पत्नियों से उनके बारह पुत्र उत्पन्न हुए। इन पुत्रों के नाम पर ही कायस्थों की बारह उपजातियां हैं। भगवान चित्रगुप्त ने अपने इन पुत्रों को शास्त्रों की शिक्षा दी तथा उनके लिए कर्तव्यों का निर्धारण किया। इन कर्तव्यों के अनुसार कायस्थों को देवताओं का पूजन, पितरों का श्राद्ध तथा अभ्यागतों की सेवा करना चाहिए। चित्रगुप्त जी ने अपनी संतति को महिषासुर मर्दिनी देवी की पूजन एवं उपासना करने का भी आदेश दिया। भारतीय समाज में कायस्थ एक बुद्धिजीवी एवं चतुर जाति मानी जाती है। मध्यकाल में तो यह मान्यता थी कि राज-काज के संचालन में इससे कुशल एवं प्रवीण कोई अन्य जाति नहीं है। गुप्त काल से लेकर राजपूत, मुगल एवं मराठा शासकों के काल में कायस्थ न केवल महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होते थे, बल्कि राजस्व विभाग विशेषकर 'पटवारियों' के पदों पर कायस्थों का ही अधिकार होता था। भगवान चित्रगुप्त के प्रकटोत्सव वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी के दिन मंदिरों में श्रद्धालु भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं, कलम-दवात अर्पित करते हैं और अपने जीवन में सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। कई स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान की झांकियां, भजन-कीर्तन और पारंपरिक वेशभूषा में शामिल लोग उत्सव को जीवंत बना देते हैं। प्रकटोत्सव के अलावा कायस्थ जाति में भगवान चित्रगुप्त की वर्ष में कम-से-कम दो बार और पूजन होती है। इनमें से पहली पूजन दीपावली की द्वितीया को होती है तथा दूसरी होली की द्वितीया (दौज) को। यह दोनों ही तिथियां भाई दौज या यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन प्रत्येक कायस्थ के घर मे चित्रगुप्त जी एवं कलम दवात की पूजा होती है। कई स्थानों पर यह पूजन सामूहिक रूप से भी की जाती है। पूजन के समय भगवान चित्रगुप्त की स्तुति में जो मंत्र कहे जाते हैं, उनका अर्थ है कि दवात-कलम और खल्ली धारण करने वाले भगवान चित्रगुप्त आप लेखकों को अक्षर प्रदान करते हैं। इन धर्मग्रंथो में कहा गया है कि कायस्थों के अतिरिक्त अन्य जाति के लोग भी चित्रगुप्त जी की पूजन करते हैं तो इस पूजन से उन मनुष्यों की आयु बढ़ती है तथा उन्हें नरक के कष्ट नहीं भोगने पडते है और वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं। आज के दौर में जब पारदर्शिता और जवाबदेही की चर्चा हर क्षेत्र में हो रही है। चाहे वह राजनीति हो, प्रशासन हो या समाज तब भगवान चित्रगुप्त की अवधारणा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका संदेश स्पष्ट है कि हर कर्म का लेखा है और अंततः न्याय अवश्य होता है। यह विचार व्यक्ति को अपने आचरण के प्रति सजग बनाता है और समाज में नैतिकता को मजबूत करता है। भगवान चित्रगुप्त के प्रकटोत्सव की अपनी अलग पहचान और महत्व है। समय के साथ इस उत्सव का स्वरूप भी बदला है। अब यह केवल मंदिरों या समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी व्यापक रूप से मनाया जा रहा है। युवा पीढ़ी इसे नए अंदाज़ में जोड़ रही है, लेकिन मूल भावना वही बनी हुई है कर्म, सत्य और जिम्मेदारी। भगवान चित्रगुप्त का प्रकटोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन का एक संदेश है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारे हर कर्म का महत्व है, हर निर्णय का प्रभाव है और हर व्यक्ति अपने जीवन की कहानी खुद लिख रहा है। यह दिन उसी लेखनी और उसी जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर सामने आता है,जहां आस्था और आत्मचिंतन एक साथ चलते हैं, और जहां पूजा केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि एक संकल्प भी बन जाती *(विभूति फीचर्स)*

16 hrs ago
user_शैल शक्ति
शैल शक्ति
लालकुआँ, नैनीताल, उत्तराखंड•
16 hrs ago
d049e621-46c2-4b46-a6bb-a9a9a5b7650d

*लेखनी,कर्म,आस्था और आत्म अनुशासन का महापर्व भगवान चित्रगुप्त प्रकट्योत्सव* ( अंजनी सक्सेना-विभूति फीचर्स) भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में ऐसे अनेक देवता हैं जिनका संबंध केवल आस्था एवं विश्वास से ही नहीं जीवन के मूल सिद्धांतों से भी है। इन्हीं में एक प्रमुख नाम है भगवान चित्रगुप्त का,जिन्हें कर्मो के लेखाकार, न्याय के संरक्षक और सत्य के प्रतीक के रुप में पूजा जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान चित्रगुप्त, प्रत्येक प्राणी के पाप पुण्यों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं यथा वे धर्मराज के सहायक हैं। भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति का विवरण कई पुराणों एवं धर्मग्रंथों में मिलता है। इस विवरण के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, पेट या जंघा से वैश्य तथा पैरों से शूद्र उत्पन्न किए। उन्होंने सूर्य एवं चन्द्र आदि ग्रहों के साथ ही बिना पैर वाले जीवों से लेकर अनेक पैर वाले जीवों की रचना की। इस सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा के शरीर (काया) से बड़ी-बड़ी भुजाओं वाले, श्याम वर्ण, कमलवत् नेत्रवान्, शंख के समान गर्दन वाले, तेजस्वी, अति बुद्धिमान, हाथ में लेखनी और दवात धारण किए हुए, अव्यक्त जन्मा चित्रगुप्त जी प्रकट हुए। समाधि खुलने के बाद ब्रह्मा जी ने अपने सामने उपस्थित इस पुरुष से पूछा आप कौन हैं? उस पुरुष ने कहा - मैं आपके ही शरीर से उत्पन्न हुआ हूं इसलिए आप मेरा नामकरण कीजिए तथा मेरे कर्तव्य बताईये। ब्रह्मा जी ने यह सुनकर कहा कि तुम मेरी काया (शरीर) से उत्पन्न हुए हो इसलिए तुम्हारी संज्ञा कायस्थ है। तुम्हारी उत्पत्ति के समय मेरा मन विश्रांत स्थिति में था अर्थात् मेरा चित्त गुप्त था इसलिए तुम चित्रगुप्त कहलाओगे। तुम धर्मराज की धर्मपुरी में निवास करो और प्राणियों के धर्माधर्म पर विचार करो। भगवान चित्रगुप्त के नाम में ही उनकी भूमिका छिपी है “चित्र” यानी स्पष्ट चित्रण और “गुप्त” यानी छिपा हुआ। अर्थात वे केवल दिखाई देने वाले कर्म ही नहीं, बल्कि मन के भाव और इरादों तक का लेखा रखते हैं। उनके स्वरूप का वर्णन करते हुए एक प्रचलित श्लोक अक्सर सुनने को मिलता है- *“लेखनी-पत्र-हस्तं च चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।* *कर्मणा लेखनं यस्य सर्वभूतहिते रतम्॥”* इस श्लोक में चित्रगुप्त के उस रूप का चित्रण है, जिसमें वे हाथ में लेखनी और पत्र लिए हुए हैं और समस्त प्राणियों के कर्मों का लेखा लिखते हैं। जिसमें हर कार्य का हिसाब है और हर निर्णय का परिणाम। धर्म ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुए। एक सूर्य कन्या से तथा दूसरा नाग कन्या से। इन पत्नियों से उनके बारह पुत्र उत्पन्न हुए। इन पुत्रों के नाम पर ही कायस्थों की बारह उपजातियां हैं। भगवान चित्रगुप्त ने अपने इन पुत्रों को शास्त्रों की शिक्षा दी तथा उनके लिए कर्तव्यों का निर्धारण किया। इन कर्तव्यों के अनुसार कायस्थों को देवताओं का पूजन, पितरों का श्राद्ध तथा अभ्यागतों की सेवा करना चाहिए। चित्रगुप्त जी ने अपनी संतति को महिषासुर मर्दिनी देवी की पूजन एवं उपासना करने का भी आदेश दिया। भारतीय समाज में कायस्थ एक बुद्धिजीवी एवं चतुर जाति मानी जाती है। मध्यकाल में तो यह मान्यता थी कि राज-काज के संचालन में इससे कुशल एवं प्रवीण कोई अन्य जाति नहीं है। गुप्त काल से लेकर राजपूत, मुगल एवं मराठा शासकों के काल में कायस्थ न केवल महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होते थे, बल्कि राजस्व विभाग विशेषकर 'पटवारियों' के पदों पर कायस्थों का ही अधिकार होता था। भगवान चित्रगुप्त के प्रकटोत्सव वैशाख शुक्ल पक्ष सप्तमी के दिन मंदिरों में श्रद्धालु भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं, कलम-दवात अर्पित करते हैं और अपने जीवन में सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। कई स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान की झांकियां, भजन-कीर्तन और पारंपरिक वेशभूषा में शामिल लोग उत्सव को जीवंत बना देते हैं। प्रकटोत्सव के अलावा कायस्थ जाति में भगवान चित्रगुप्त की वर्ष में कम-से-कम दो बार और पूजन होती है। इनमें से पहली पूजन दीपावली की द्वितीया को होती है तथा दूसरी होली की द्वितीया (दौज) को। यह दोनों ही तिथियां भाई दौज या यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन प्रत्येक कायस्थ के घर मे चित्रगुप्त जी एवं कलम दवात की पूजा होती है। कई स्थानों पर यह पूजन सामूहिक रूप से भी की जाती है। पूजन के समय भगवान चित्रगुप्त की स्तुति में जो मंत्र कहे जाते हैं, उनका अर्थ है कि दवात-कलम और खल्ली धारण करने वाले भगवान चित्रगुप्त आप लेखकों को अक्षर प्रदान करते हैं। इन धर्मग्रंथो में कहा गया है कि कायस्थों के अतिरिक्त अन्य जाति के लोग भी चित्रगुप्त जी की पूजन करते हैं तो इस पूजन से उन मनुष्यों की आयु बढ़ती है तथा उन्हें नरक के कष्ट नहीं भोगने पडते है और वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं। आज के दौर में जब पारदर्शिता और जवाबदेही की चर्चा हर क्षेत्र में हो रही है। चाहे वह राजनीति हो, प्रशासन हो या समाज तब भगवान चित्रगुप्त की अवधारणा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका संदेश स्पष्ट है कि हर कर्म का लेखा है और अंततः न्याय अवश्य होता है। यह विचार व्यक्ति को अपने आचरण के प्रति सजग बनाता है और समाज में नैतिकता को मजबूत करता है। भगवान चित्रगुप्त के प्रकटोत्सव की अपनी अलग पहचान और महत्व है। समय के साथ इस उत्सव का स्वरूप भी बदला है। अब यह केवल मंदिरों या समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी व्यापक रूप से मनाया जा रहा है। युवा पीढ़ी इसे नए अंदाज़ में जोड़ रही है, लेकिन मूल भावना वही बनी हुई है कर्म, सत्य और जिम्मेदारी। भगवान चित्रगुप्त का प्रकटोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन का एक संदेश है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारे हर कर्म का महत्व है, हर निर्णय का प्रभाव है और हर व्यक्ति अपने जीवन की कहानी खुद लिख रहा है। यह दिन उसी लेखनी और उसी जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर सामने आता है,जहां आस्था और आत्मचिंतन एक साथ चलते हैं, और जहां पूजा केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि एक संकल्प भी बन जाती *(विभूति फीचर्स)*

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  • Post by शैल शक्ति
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    Post by शैल शक्ति
    user_शैल शक्ति
    शैल शक्ति
    लालकुआँ, नैनीताल, उत्तराखंड•
    20 hrs ago
  • Post by Jagdish Ballabh Sharma
    1
    Post by Jagdish Ballabh Sharma
    user_Jagdish Ballabh Sharma
    Jagdish Ballabh Sharma
    Teacher हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • Post by Surendra Kumar
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    Post by Surendra Kumar
    user_Surendra Kumar
    Surendra Kumar
    Paint Shop कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • बाजपुर।गदरपुर के लोकप्रिय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे एवं उनके पुत्र पर बुक्सा जनजाति की भूमि हड़पने के आरोप लगाए थे जिसको लेकर विधायक अरविंद पांडे ने तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान से वार्ता कर उन्होंने कहा 2023 में पीड़ित का खतौनी पर नाम चढ़ाने का आदेश हुआ था। क्यों नहीं चढ़ाया। पीड़ित परिवार का नाम दर्ज करवरकर यहां से जाएंगे।
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    बाजपुर।गदरपुर के लोकप्रिय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे एवं उनके पुत्र पर बुक्सा जनजाति की भूमि हड़पने के आरोप लगाए थे जिसको लेकर विधायक अरविंद पांडे ने तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान से वार्ता कर उन्होंने कहा 2023 में पीड़ित का खतौनी पर नाम चढ़ाने का आदेश हुआ था। क्यों नहीं चढ़ाया। पीड़ित परिवार का नाम दर्ज करवरकर यहां से जाएंगे।
    user_Kush BAZPUR
    Kush BAZPUR
    Bajpur, Udam Singh Nagar•
    20 hrs ago
  • रामपुर प्रदेश में मुख्यमंत्री के मिशन शक्ति फेज-5 के तहत महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी अद्भुत तस्वीर सामने आई है, जो पूरे प्रदेश की बेटियों का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी। रामपुर जिले में बुधवार को सेंट मैरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 10वीं की छात्रा श्रीसिंह ने एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी बनकर यह साबित कर दिया कि बेटियां सिर्फ सपने नहीं देखतीं, बल्कि मौका मिलने पर कड़े और बड़े फैसले भी ले सकती हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचकर विधिवत डीएम की कुर्सी संभालने वाली इस मेधावी छात्रा ने स्वास्थ्य, पूर्ति और आवास से जुड़ी 25 शिकायतों को पूरी गंभीरता से सुना और अपने हस्ताक्षर से उनके त्वरित निस्तारण के आदेश जारी किए। इस एक दिन के कार्यकाल में छात्रा ने न सिर्फ प्रशासनिक धमक दिखाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अगर प्रदेश की बेटियों को नेतृत्व का अवसर मिले,तो वे न्याय और जनसेवा की बेहतरीन मिसाल कायम कर सकती हैं। जब 10वीं की छात्रा ने एसडीएम को दिए कब्जा हटवाने के निर्देश छात्रा श्रीसिंह का सांकेतिक कार्यकाल केवल रस्म अदायगी नहीं रहा। जनसुनवाई के दौरान जब उनके सामने तहसील सदर के ग्राम घनश्यामपुर में अवैध कब्जे से जुड़ा एक प्रार्थना पत्र आया, तो इस युवा डीएम ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बिना किसी झिझक के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर को सख्त निर्देश दिए कि मौके पर जाकर तत्काल अवैध कब्जा हटवाया जाए और जमीन की पैमाइश सुनिश्चित की जाए। एक स्कूली छात्रा द्वारा इतनी दृढ़ता और स्पष्टता से लिए गए इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि प्रदेश की बेटियां अब किसी भी चुनौती से डरने वाली नहीं हैं। इस दौरान जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने भी पूरे समय छात्रा का सहयोग करते हुए उन्हें प्रशासनिक बारीकियों से अवगत कराया। फाइलों और फैसलों के बीच दिखा एक संवेदनशील प्रशासक का दिल प्रशासनिक जटिलताओं और अवैध कब्जे हटाने जैसे कड़े फैसलों के बीच इस सांकेतिक डीएम ने एक अनूठी मानवीय मिसाल भी पेश की, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।अपनी शिकायतें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे फरियादियों के साथ आए छोटे बच्चों को जब छात्रा ने देखा,तो उन्हें अपने पास बुलाकर चॉकलेट वितरित की। डीएम की कुर्सी पर बैठी एक दीदी के हाथों चॉकलेट पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और पूरा माहौल सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। इस मार्मिक पहल ने यह संदेश दिया कि एक बेहतरीन प्रशासन सिर्फ नियमों की किताब से नहीं चलता, बल्कि उसमें जनता के प्रति मानवीय संवेदनाओं का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पूरे प्रदेश की बेटियों के लिए बना प्रेरणा का मंच श्रीसिंह का यह एक दिन का कार्यकाल केवल रामपुर तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश की बालिकाओं के लिए एक नजीर बन गया है।इस दौरान कन्या इंटर कॉलेज खारी कुआं और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पहाड़ी गेट की छात्राओं ने जब वहां पहुंचकर संवाद किया, तो उन्हें अपनी उम्र की एक लड़की को जिले की सर्वाेच्च कुर्सी पर बैठे देखकर असीम प्रेरणा मिली। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने भी इस अवसर का लाभ उठाते हुए छात्राओं को सफलता के लिए नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच के टिप्स दिए। साथ ही 1090, 181, 112 और 1098 जैसे मिशन शक्ति हेल्पलाइन नंबरों का निर्भीकता से उपयोग करने के लिए उन्हें जागरूक किया।अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संदीप कुमार वर्मा,अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डा. नितिन मदान और जिला प्रोबेशन अधिकारी ईरा आर्या, वन स्टाप सेंटर संचालिका श्रीमती चाँद बी सहित पूरे प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में हुआ यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि समाज में महिलाओं की भागीदारी अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है। प्रशासनिक कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर छात्रा ने भी माना कि शासन की योजनाओं को पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश की हर उस बेटी के लिए एक खुली उड़ान का आमंत्रण है, जो अपनी मेहनत से भविष्य में उच्च प्रशासनिक पदों पर पहुंचकर देश और प्रदेश की तस्वीर बदलना चाहती है।
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    रामपुर प्रदेश में मुख्यमंत्री के मिशन शक्ति फेज-5 के तहत महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी अद्भुत तस्वीर सामने आई है, जो पूरे प्रदेश की बेटियों का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी। रामपुर जिले में बुधवार को सेंट मैरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की 10वीं की छात्रा श्रीसिंह ने एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी बनकर यह साबित कर दिया कि बेटियां सिर्फ सपने नहीं देखतीं, बल्कि मौका मिलने पर कड़े और बड़े फैसले भी ले सकती हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचकर विधिवत डीएम की कुर्सी संभालने वाली इस मेधावी छात्रा ने स्वास्थ्य, पूर्ति और आवास से जुड़ी 25 शिकायतों को पूरी गंभीरता से सुना और अपने हस्ताक्षर से उनके त्वरित निस्तारण के आदेश जारी किए। इस एक दिन के कार्यकाल में छात्रा ने न सिर्फ प्रशासनिक धमक दिखाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अगर प्रदेश की बेटियों को नेतृत्व का अवसर मिले,तो वे न्याय और जनसेवा की बेहतरीन मिसाल कायम कर सकती हैं।
जब 10वीं की छात्रा ने एसडीएम को दिए कब्जा हटवाने के निर्देश
छात्रा श्रीसिंह का सांकेतिक कार्यकाल केवल रस्म अदायगी नहीं रहा। जनसुनवाई के दौरान जब उनके सामने तहसील सदर के ग्राम घनश्यामपुर में अवैध कब्जे से जुड़ा एक प्रार्थना पत्र आया, तो इस युवा डीएम ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बिना किसी झिझक के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर को सख्त निर्देश दिए कि मौके पर जाकर तत्काल अवैध कब्जा हटवाया जाए और जमीन की पैमाइश सुनिश्चित की जाए। एक स्कूली छात्रा द्वारा इतनी दृढ़ता और स्पष्टता से लिए गए इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि प्रदेश की बेटियां अब किसी भी चुनौती से डरने वाली नहीं हैं। इस दौरान जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने भी पूरे समय छात्रा का सहयोग करते हुए उन्हें प्रशासनिक बारीकियों से अवगत कराया।
फाइलों और फैसलों के बीच दिखा एक संवेदनशील प्रशासक का दिल
प्रशासनिक जटिलताओं और अवैध कब्जे हटाने जैसे कड़े फैसलों के बीच इस सांकेतिक डीएम ने एक अनूठी मानवीय मिसाल भी पेश की, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।अपनी शिकायतें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे फरियादियों के साथ आए छोटे बच्चों को जब छात्रा ने देखा,तो उन्हें अपने पास बुलाकर चॉकलेट वितरित की। डीएम की कुर्सी पर बैठी एक दीदी के हाथों चॉकलेट पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और पूरा माहौल सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। इस मार्मिक पहल ने यह संदेश दिया कि एक बेहतरीन प्रशासन सिर्फ नियमों की किताब से नहीं चलता, बल्कि उसमें जनता के प्रति मानवीय संवेदनाओं का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पूरे प्रदेश की बेटियों के लिए बना प्रेरणा का मंच
श्रीसिंह का यह एक दिन का कार्यकाल केवल रामपुर तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश की बालिकाओं के लिए एक नजीर बन गया है।इस दौरान कन्या इंटर कॉलेज खारी कुआं और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पहाड़ी गेट की छात्राओं ने जब वहां पहुंचकर संवाद किया, तो उन्हें अपनी उम्र की एक लड़की को जिले की सर्वाेच्च कुर्सी पर बैठे देखकर असीम प्रेरणा मिली। जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने भी इस अवसर का लाभ उठाते हुए छात्राओं को सफलता के लिए नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच के टिप्स दिए। साथ ही 1090, 181, 112 और 1098 जैसे मिशन शक्ति हेल्पलाइन नंबरों का निर्भीकता से उपयोग करने के लिए उन्हें जागरूक किया।अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संदीप कुमार वर्मा,अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डा. नितिन मदान और जिला प्रोबेशन अधिकारी ईरा आर्या, वन स्टाप सेंटर संचालिका श्रीमती चाँद बी सहित पूरे प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में हुआ यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि समाज में महिलाओं की भागीदारी अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है। प्रशासनिक कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर छात्रा ने भी माना कि शासन की योजनाओं को पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।यह घटना पूरे उत्तर प्रदेश की हर उस बेटी के लिए एक खुली उड़ान का आमंत्रण है, जो अपनी मेहनत से भविष्य में उच्च प्रशासनिक पदों पर पहुंचकर देश और प्रदेश की तस्वीर बदलना चाहती है।
    user_कामरान खांन कम्मु
    कामरान खांन कम्मु
    बिलासपुर, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • Post by Mr Salim
    1
    Post by Mr Salim
    user_Mr Salim
    Mr Salim
    खटीमा, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड•
    6 hrs ago
  • वाला रास्ता बहुत बुरा है जॉकी आरती ले जाने में बड़ी समस्या होतीमोहल्ला टोंडोली से कब्रिस्तान जाने है एक छोटी सी वीडियो भी अपलोड करता हूं
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    वाला रास्ता बहुत बुरा है जॉकी आरती ले जाने में बड़ी समस्या होतीमोहल्ला टोंडोली से कब्रिस्तान जाने है एक छोटी सी वीडियो भी अपलोड करता हूं
    user_Shiv Kumar Saini
    Shiv Kumar Saini
    टांडा, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
    52 min ago
  • Post by Jagdish Ballabh Sharma
    4
    Post by Jagdish Ballabh Sharma
    user_Jagdish Ballabh Sharma
    Jagdish Ballabh Sharma
    Teacher हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड•
    17 hrs ago
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