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प्राथमिक विद्यालय–मरहा में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के अंतर्गत पाँच आउटडोर खेल उपकरणों की स्थापना बच्चों के समग्र विकास की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है। इस पहल से विद्यालय परिसर में न केवल आनंदमय वातावरण बना है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया भी अधिक रोचक, सजीव और प्रभावी हो गई है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं – मुख्य विकास अधिकारी महोदय जनपद बस्ती, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय बस्ती, खंड शिक्षा अधिकारी महोदय शिक्षा क्षेत्र–बस्ती सदर, समस्त शिक्षा विभागीय अधिकारीगण का। आप सभी के सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच के कारण विद्यालय में बाल-अनुकूल, सुरक्षित और गतिविधि-आधारित शिक्षण वातावरण तैयार हो सका है। ECCE अर्थात प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर केंद्रित एक समग्र शिक्षा व्यवस्था है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है। नई 5+3+3+4 शैक्षिक संरचना में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए फाउंडेशनल स्टेज निर्धारित किया गया है, जिसमें बाल वाटिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस चरण में खेल-आधारित शिक्षण, भाषा विकास, संज्ञानात्मक क्षमता, मोटर स्किल्स तथा सामाजिक सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि बच्चे सीखने को बोझ नहीं बल्कि आनंद के रूप में अनुभव करें। यह उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत–मरहा के प्राथमिक विद्यालय परिसर में इससे पूर्व भी ग्राम पंचायत विकास समिति द्वारा सीमित संसाधनों के माध्यम से बाल वाटिका की स्थापना की गई थी, जिसके अंतर्गत पाँच खेल उपकरण स्थापित किए गए थे। उस समय ग्राम पंचायत ने अपने स्तर से प्रयास कर बच्चों के लिए खेल-आधारित वातावरण तैयार किया था। अब वर्तमान पहल के माध्यम से उसी व्यवस्था का विस्तार किया गया है, जिससे बाल वाटिका और अधिक सुदृढ़, आकर्षक एवं समृद्ध बन गई है। मरहा प्राथमिक विद्यालय की बाल वाटिका में रंगीन और आकर्षक कक्षाओं के साथ-साथ गतिविधि-आधारित शिक्षण सामग्री, लर्निंग कॉर्नर, स्वच्छता एवं पोषण पर ध्यान तथा सुरक्षित खेल वातावरण की व्यवस्था की गई है। हालिया स्थापित प्लस खेल उपकरण इस वातावरण को और अधिक समृद्ध बनाते हैं। इनमें लहरदार फिसलपट्टी (वेव स्लाइड), मेहराब झूला (आर्च स्विंग), ऊपर-नीचे झूला या डोलक झूला (सी-सॉ), रॉकेट नौका झूला (रॉकेट बोट) तथा घूमने वाला चक्र झूला (मेरी-गो-राउंड) शामिल हैं। ये सभी उपकरण बच्चों के शारीरिक संतुलन, समन्वय, साहस, सहभागिता और आत्मविश्वास को विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे। निश्चित रूप से यह पहल केवल खेल उपकरणों की स्थापना भर नहीं है, बल्कि यह नन्हे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला है। खेल ही सीख है और सीख ही जीवन की दिशा निर्धारित करती है। मरहा प्राथमिक विद्यालय में ECCE बाल वाटिका की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में स्थापित हो रही है। एक बार पुनः सभी संबंधित अधिकारियों एवं सहयोगियों को हार्दिक धन्यवाद। #ECCE #BalVatika #मरहा_प्राथमिक_विद्यालय #नई_शिक्षा_नीति #बस्ती_जनपद #शिक्षा_विकास

5 hrs ago
user_AKHIL KUMAR YADAV
AKHIL KUMAR YADAV
Voice of people बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago
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प्राथमिक विद्यालय–मरहा में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) के अंतर्गत पाँच आउटडोर खेल उपकरणों की स्थापना बच्चों के समग्र विकास की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है। इस पहल से विद्यालय परिसर में न केवल आनंदमय वातावरण बना है, बल्कि सीखने की प्रक्रिया भी अधिक रोचक, सजीव और प्रभावी हो गई है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं – मुख्य विकास अधिकारी महोदय जनपद बस्ती, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय बस्ती, खंड शिक्षा अधिकारी महोदय शिक्षा क्षेत्र–बस्ती सदर, समस्त शिक्षा विभागीय अधिकारीगण का। आप सभी के सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच के कारण विद्यालय में बाल-अनुकूल, सुरक्षित और गतिविधि-आधारित शिक्षण वातावरण तैयार हो सका है। ECCE अर्थात प्रारंभिक बाल्यावस्था

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देखभाल एवं शिक्षा, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर केंद्रित एक समग्र शिक्षा व्यवस्था है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है। नई 5+3+3+4 शैक्षिक संरचना में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए फाउंडेशनल स्टेज निर्धारित किया गया है, जिसमें बाल वाटिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस चरण में खेल-आधारित शिक्षण, भाषा विकास, संज्ञानात्मक क्षमता, मोटर स्किल्स तथा सामाजिक सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि बच्चे सीखने को बोझ नहीं बल्कि आनंद के रूप में अनुभव करें। यह उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत–मरहा के प्राथमिक विद्यालय परिसर में इससे पूर्व भी ग्राम पंचायत विकास समिति द्वारा

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सीमित संसाधनों के माध्यम से बाल वाटिका की स्थापना की गई थी, जिसके अंतर्गत पाँच खेल उपकरण स्थापित किए गए थे। उस समय ग्राम पंचायत ने अपने स्तर से प्रयास कर बच्चों के लिए खेल-आधारित वातावरण तैयार किया था। अब वर्तमान पहल के माध्यम से उसी व्यवस्था का विस्तार किया गया है, जिससे बाल वाटिका और अधिक सुदृढ़, आकर्षक एवं समृद्ध बन गई है। मरहा प्राथमिक विद्यालय की बाल वाटिका में रंगीन और आकर्षक कक्षाओं के साथ-साथ गतिविधि-आधारित शिक्षण सामग्री, लर्निंग कॉर्नर, स्वच्छता एवं पोषण पर ध्यान तथा सुरक्षित खेल वातावरण की व्यवस्था की गई है। हालिया स्थापित प्लस खेल उपकरण इस वातावरण को और अधिक समृद्ध बनाते हैं। इनमें लहरदार फिसलपट्टी (वेव स्लाइड), मेहराब झूला (आर्च स्विंग),

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ऊपर-नीचे झूला या डोलक झूला (सी-सॉ), रॉकेट नौका झूला (रॉकेट बोट) तथा घूमने वाला चक्र झूला (मेरी-गो-राउंड) शामिल हैं। ये सभी उपकरण बच्चों के शारीरिक संतुलन, समन्वय, साहस, सहभागिता और आत्मविश्वास को विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे। निश्चित रूप से यह पहल केवल खेल उपकरणों की स्थापना भर नहीं है, बल्कि यह नन्हे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला है। खेल ही सीख है और सीख ही जीवन की दिशा निर्धारित करती है। मरहा प्राथमिक विद्यालय में ECCE बाल वाटिका की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में स्थापित हो रही है। एक बार पुनः सभी संबंधित अधिकारियों एवं सहयोगियों को हार्दिक धन्यवाद। #ECCE #BalVatika #मरहा_प्राथमिक_विद्यालय #नई_शिक्षा_नीति #बस्ती_जनपद #शिक्षा_विकास

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  • शिवराजपुर कुशमोर घाट हर्रैया बस्ती में मनोरमा धर्मार्थ गौ सेवा ट्रस्ट के द्वारा गौशाला के साथ यज्ञशाला का निर्माण कार्य धन की कमी के चलते बहुत धीमा चल रहा है हमारी सोच थी की क्षेत्र के लोग हमारी मदद करेंगे लेकिन ऐसा नहीं है अब क्योंकि हमने गौ रक्षा करने का संकल्प लिया है तो अपना धर्म हम जरूर निभाएंगे और संपूर्ण भारत में गौरक्षा के लिए गौ शाला और शिक्षा के लिए गुरुकुलों का निर्माण करेंगे हम आशा करते हैं की धर्मार्थी लोग हमारी मदद जरूर करेंगे
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    शिवराजपुर कुशमोर घाट हर्रैया बस्ती में मनोरमा धर्मार्थ गौ सेवा ट्रस्ट के द्वारा गौशाला के साथ यज्ञशाला का निर्माण कार्य धन की कमी के चलते बहुत धीमा चल रहा है हमारी सोच थी की क्षेत्र के लोग हमारी मदद करेंगे लेकिन ऐसा नहीं है अब क्योंकि हमने गौ रक्षा करने का संकल्प लिया है तो अपना धर्म हम जरूर निभाएंगे और संपूर्ण भारत में गौरक्षा के लिए गौ शाला और शिक्षा के लिए गुरुकुलों का निर्माण करेंगे हम आशा करते हैं की धर्मार्थी लोग हमारी मदद जरूर करेंगे
    user_पवन सिंह सनातनी
    पवन सिंह सनातनी
    Hindu temple हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • विकास पुरुष एके शर्मा कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश
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    विकास पुरुष एके शर्मा कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश
    user_Vipin Times Khlilabad
    Vipin Times Khlilabad
    Local News Reporter खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • *पसमांदा समाज को आबादी के अनुपात में मिले राजनीतिक हिस्सेदारी : मु. इसहाक अंसारी* *2027 विधानसभा चुनाव में PDA के तहत 64 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की मांग, संवैधानिक अधिकार संवाद कार्यक्रम में उठी आवाज* ✍️ *आशु सिंह* संतकबीरनगर। ओबीसी श्रेणी के पसमांदा एवं दलित मुस्लिम समाज के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी को लेकर आयोजित “जागरूकता एवं संवैधानिक अधिकार संवाद कार्यक्रम” में समाज के नेताओं ने अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का नेतृत्व ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद इसहाक अंसारी ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज लंबे समय से सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहा है। जब तक वंचित तबकों को उनके संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की सही जानकारी नहीं होगी, तब तक वास्तविक सामाजिक न्याय संभव नहीं है। इस उद्देश्य से जागरूकता अभियान चलाकर समाज को संगठित करने की जरूरत है। प्रेस वार्ता के दौरान मु. इसहाक अंसारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि “हम समाजवादी विचारधारा के साथ हैं और रहेंगे, लेकिन हमें हमारी आबादी के अनुसार राजनीतिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।” उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मांग की कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के तहत पसमांदा समाज को आबादी के अनुपात में कम से कम 64 सीटों पर चुनाव लड़ाया जाए। उन्होंने कहा कि पसमांदा समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़े बिना सामाजिक न्याय की अवधारणा अधूरी है। यदि समाज को निर्णय प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व मिलेगा, तभी उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा। कार्यक्रम में सामाजिक एकता, शिक्षा के प्रसार और युवाओं को राजनीति में आगे आने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पसमांदा और दलित मुस्लिम समाज को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। इसके लिए गांव-गांव संवाद कार्यक्रम चलाकर लोगों को संगठित किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठजन उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, शिक्षा के विस्तार और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।
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    *पसमांदा समाज को आबादी के अनुपात में मिले राजनीतिक हिस्सेदारी : मु. इसहाक अंसारी*
*2027 विधानसभा चुनाव में PDA के तहत 64 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की मांग, संवैधानिक अधिकार संवाद कार्यक्रम में उठी आवाज*
✍️ *आशु सिंह*
संतकबीरनगर।
ओबीसी श्रेणी के पसमांदा एवं दलित मुस्लिम समाज के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी को लेकर आयोजित “जागरूकता एवं संवैधानिक अधिकार संवाद कार्यक्रम” में समाज के नेताओं ने अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का नेतृत्व ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद इसहाक अंसारी ने किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज लंबे समय से सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहा है। जब तक वंचित तबकों को उनके संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की सही जानकारी नहीं होगी, तब तक वास्तविक सामाजिक न्याय संभव नहीं है। इस उद्देश्य से जागरूकता अभियान चलाकर समाज को संगठित करने की जरूरत है।
प्रेस वार्ता के दौरान मु. इसहाक अंसारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि “हम समाजवादी विचारधारा के साथ हैं और रहेंगे, लेकिन हमें हमारी आबादी के अनुसार राजनीतिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।” उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मांग की कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के तहत पसमांदा समाज को आबादी के अनुपात में कम से कम 64 सीटों पर चुनाव लड़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि पसमांदा समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़े बिना सामाजिक न्याय की अवधारणा अधूरी है। यदि समाज को निर्णय प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व मिलेगा, तभी उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा। कार्यक्रम में सामाजिक एकता, शिक्षा के प्रसार और युवाओं को राजनीति में आगे आने के लिए प्रेरित किया गया।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि पसमांदा और दलित मुस्लिम समाज को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। इसके लिए गांव-गांव संवाद कार्यक्रम चलाकर लोगों को संगठित किया जाएगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठजन उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, शिक्षा के विस्तार और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।
    user_LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    3 hrs ago
  • भावनाओं का विज्ञान
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    भावनाओं का विज्ञान
    user_राघवेंद्र त्रिपाठी राष्ट्रीय म
    राघवेंद्र त्रिपाठी राष्ट्रीय म
    Media Consultant खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *शिकायत है* आकाशवाणी 17 2 2026 ई0 यह ग्राम पंचायत भगवानपुर का पंचायत भवन है । ग्राम पंचायत भगवानपुर ब्लॉक बघौली ,पुलिस स्टेशन बखिरा, तहसील खलीलाबाद, जनपद संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता है। 👉🏾 जैसा की स्पष्ट दिखाई दे रहा है, ग्राम पंचायत भगवानपुर का पंचायत भवन गांव कानापार में बनवाया गया है। ✍️पंचायत भवन के गेट की कुंडी तोड़ डाली गई है ❗ यह काम अराजक तत्वों के द्वारा किया गया है । शायद उनका उद्देश्य पंचायत भवन के अंदर चोरी करने का उद्देश्य था । क्योंकि अंदर कंप्यूटर है ,सिस्टम सब लगे हुए हैं ,मशीन रखी हुई है, लेकिन किसी प्रकार का क्षति नहीं पहुंचाया गया है! केवल गेट को ही क्षति पहुंचाया गया है। पानी के पाइप को तोड़ डाला गया है। अराजक तत्वों के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है। शासन प्रशासन को संज्ञान में लेना चाहिए। यह काम रात्रि में अंधेरे में किया गया है। 16 फरवरी 2026 ई0 को शाम को इसका पता चला है ,देखा गया है। अर्थात 15 फरवरी के रात में ही इसे तोड़ा गया है।
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    *शिकायत है*
आकाशवाणी
17 2 2026  ई0
यह  ग्राम पंचायत भगवानपुर का पंचायत भवन है । ग्राम पंचायत भगवानपुर ब्लॉक बघौली ,पुलिस स्टेशन बखिरा, तहसील खलीलाबाद, जनपद संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता है। 
👉🏾 जैसा की स्पष्ट दिखाई दे रहा है, ग्राम पंचायत भगवानपुर का पंचायत भवन गांव कानापार  में बनवाया गया है। 
✍️पंचायत भवन के गेट की कुंडी तोड़ डाली गई है ❗
यह काम  अराजक तत्वों के द्वारा किया गया है । शायद उनका  उद्देश्य पंचायत भवन के अंदर चोरी करने का उद्देश्य था । 
क्योंकि अंदर कंप्यूटर है ,सिस्टम सब लगे हुए हैं ,मशीन  रखी हुई है, लेकिन किसी प्रकार का क्षति नहीं पहुंचाया गया है! 
केवल गेट को ही क्षति पहुंचाया गया है। पानी के पाइप को तोड़ डाला गया है। अराजक तत्वों के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है। 
शासन प्रशासन को संज्ञान में लेना चाहिए। यह काम रात्रि में अंधेरे में किया गया है। 
16 फरवरी 2026  ई0 को शाम को इसका पता चला है ,देखा गया है। अर्थात 15 फरवरी के रात में ही इसे तोड़ा गया है।
    user_Kamalakant tiwari
    Kamalakant tiwari
    Journalist खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • Post by Vindhyavasini Yadav
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    Post by Vindhyavasini Yadav
    user_Vindhyavasini Yadav
    Vindhyavasini Yadav
    Local News Reporter Ghanghata, Sant Kabeer Nagar•
    16 hrs ago
  • जनपद मुख्यालय में कचरा प्रबंधन फेल: आबादी के बीच सड़ता कूड़ा, बढ़ता संक्रमण का खतरा अंबेडकरनगर। जनपद मुख्यालय के मुख्य कस्बे में कचरा संग्रहण की मौजूदा व्यवस्था स्थानीय लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। नगर पालिका द्वारा घर-घर से एकत्रित कचरे को मुख्य बाजार और घनी आबादी वाले इलाकों में अस्थायी रूप से डंप किया जा रहा है। सुबह से लेकर कचरा उठने तक सड़ते कूड़े से उठने वाली तेज दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों का जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे के ढेर के पास से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से अधिक परेशान हैं। बाजार क्षेत्र में बदबू के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है, जिससे व्यापार पर असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खुले में पड़े गीले कचरे से मक्खी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है। इससे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सड़ते कचरे से निकलने वाली जहरीली गैसें और बैक्टीरिया श्वसन संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे सकते हैं। नगर पालिका की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत नियमित सफाई अभियान चलाने और लोगों से कचरा अलग-अलग देने की अपील की जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा उठाने वाली गाड़ियां अक्सर देर से पहुंचती हैं और कई बार कचरे को ढककर नहीं ले जाया जाता, जिससे रास्ते में भी गंदगी फैलती रहती है। पालिका प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मुख्य आबादी से दूर एक स्थायी ट्रांसफर प्वाइंट विकसित किया जाएगा, जिससे कचरा सीधे वहां ले जाया जा सके और बीच बाजार में डंपिंग की आवश्यकता न पड़े। फिलहाल, स्थानीय निवासी और व्यापारी त्वरित और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक कचरा संग्रहण और निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं की जाएगी, तब तक स्वच्छता अभियान का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।
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    जनपद मुख्यालय में कचरा प्रबंधन फेल: आबादी के बीच सड़ता कूड़ा, बढ़ता संक्रमण का खतरा
अंबेडकरनगर।
जनपद मुख्यालय के मुख्य कस्बे में कचरा संग्रहण की मौजूदा व्यवस्था स्थानीय लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। नगर पालिका द्वारा घर-घर से एकत्रित कचरे को मुख्य बाजार और घनी आबादी वाले इलाकों में अस्थायी रूप से डंप किया जा रहा है। सुबह से लेकर कचरा उठने तक सड़ते कूड़े से उठने वाली तेज दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे के ढेर के पास से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से अधिक परेशान हैं। बाजार क्षेत्र में बदबू के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है, जिससे व्यापार पर असर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खुले में पड़े गीले कचरे से मक्खी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है। इससे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सड़ते कचरे से निकलने वाली जहरीली गैसें और बैक्टीरिया श्वसन संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे सकते हैं।
नगर पालिका की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत नियमित सफाई अभियान चलाने और लोगों से कचरा अलग-अलग देने की अपील की जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा उठाने वाली गाड़ियां अक्सर देर से पहुंचती हैं और कई बार कचरे को ढककर नहीं ले जाया जाता, जिससे रास्ते में भी गंदगी फैलती रहती है।
पालिका प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मुख्य आबादी से दूर एक स्थायी ट्रांसफर प्वाइंट विकसित किया जाएगा, जिससे कचरा सीधे वहां ले जाया जा सके और बीच बाजार में डंपिंग की आवश्यकता न पड़े।
फिलहाल, स्थानीय निवासी और व्यापारी त्वरित और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक कचरा संग्रहण और निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं की जाएगी, तब तक स्वच्छता अभियान का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।
    user_Anubhavi  Post
    Anubhavi Post
    अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मेहदावल बायपास चौराहा हुआ अतिक्रमण मुक्त, शहर में लौटी राहत की सांस__________________ राघवेंद्र त्रिपाठी संवाददाता विधान केसरी संत कबीर नगर संत कबीर नगर, 17 फरवरी 2026: पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर के निर्देशन में यातायात विभाग द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत मेहदावल बायपास चौराहा पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से न केवल यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ है, बल्कि स्थानीय नागरिकों को भी बड़ी राहत मिली है। अभियान के दौरान फुटपाथ के किनारे लगे ठेले, अनियमित वाहन पार्किंग और वाहन स्टैंड द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाया गया। यातायात पुलिस के अधिकारीयो के निर्देश पर हेड कांस्टेबल संजय राय एवं हेड कांस्टेबल वशिष्ठ नारायण पांडेय अमोंग अन्य यातायात विभाग के जवानों की उपस्थिति में यह कार्रवाई की गई। इससे पहले, मेहदावल बायपास चौराहे पर अतिक्रमण की समस्या काफी गंभीर थी, जिससे यातायात जाम और नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब, इस चौराहे को अतिक्रमण मुक्त करने से शहर की सुंदरता में भी इजाफा हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अतिक्रमण न करें और शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में सहयोग करें। यह कार्रवाई शहर के विकास और नागरिकों की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस अधीक्षक ने विशेष निर्देश दिया है कि अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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    मेहदावल बायपास चौराहा हुआ अतिक्रमण मुक्त, शहर में लौटी राहत की सांस__________________
राघवेंद्र त्रिपाठी संवाददाता विधान केसरी संत कबीर नगर
संत कबीर नगर, 17 फरवरी 2026: पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर के निर्देशन में यातायात विभाग द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत मेहदावल बायपास चौराहा पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से न केवल यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ है, बल्कि स्थानीय नागरिकों को भी बड़ी राहत मिली है। अभियान के दौरान फुटपाथ के किनारे लगे ठेले, अनियमित वाहन पार्किंग और वाहन स्टैंड द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाया गया। यातायात पुलिस के अधिकारीयो के निर्देश पर हेड कांस्टेबल संजय राय एवं हेड कांस्टेबल वशिष्ठ नारायण पांडेय अमोंग अन्य यातायात विभाग के जवानों  की उपस्थिति में यह कार्रवाई की गई। इससे पहले, मेहदावल बायपास चौराहे पर अतिक्रमण की समस्या काफी गंभीर थी, जिससे यातायात जाम और नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब, इस चौराहे को अतिक्रमण मुक्त करने से शहर की सुंदरता में भी इजाफा हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अतिक्रमण न करें और शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में सहयोग करें। यह कार्रवाई शहर के विकास और नागरिकों की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस अधीक्षक ने विशेष निर्देश दिया है कि अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
    user_राघवेंद्र त्रिपाठी राष्ट्रीय म
    राघवेंद्र त्रिपाठी राष्ट्रीय म
    Media Consultant खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
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