Shuru
Apke Nagar Ki App…
उपस्वास्थ्य केंद्र kuwaliya में लंबे समय से खंडहर होकर पड़ा है न तो कोई सफाई करवाता है और न ही कोई ठीक करवा रहा है आए दिन जानवर घरों में घुस जाते है कृपया करके सफाई करने का कष्ट करे
Sanjay giri goswami
उपस्वास्थ्य केंद्र kuwaliya में लंबे समय से खंडहर होकर पड़ा है न तो कोई सफाई करवाता है और न ही कोई ठीक करवा रहा है आए दिन जानवर घरों में घुस जाते है कृपया करके सफाई करने का कष्ट करे
More news from राजस्थान and nearby areas
- Post by Rajendra Tabiyar1
- Post by Bapulal Ahari2
- वागड़ केसरी व वागड़ गौरव आचार्य 108 चंद्रगुप्त गुरुदेव का मंगल विहार वागोल जैन तीर्थ एवं अन्देश्वर तीर्थ की ओर श्रद्धा और भावनाओं के बीच प्रारंभ हुआ। विदाई के दौरान भक्तों की आंखों में आंसू छलक उठे और वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया। दिगंबर बीस पंथी जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव के सानिध्य में मूलनायक आदिनाथ भगवान का प्रातः बेला में विधि-विधान से पंचामृत अभिषेक हुआ। सायंकाल गुरुदेव का विहार वागोल जैन तीर्थ के लिए हुआ, जहां समाजजनों ने नंगे पांव चलकर सहभागिता की तथा मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की आरती व गुरुभक्ति का आयोजन किया। महामंत्री हंसमुख लाल सेठ ने बताया कि गुरुदेव का अगला विहार अन्देश्वर तीर्थ की ओर रहेगा तथा 10 मार्च को भिलूड़ा में उनका मंगल प्रवेश होगा, जहां पूज्य गुरु गुप्तुनंदी गुरुदेव से गुरु-शिष्य मिलन होगा। गुरुदेव ने संदेश दिया कि संयम, करुणा और क्षमा ही सच्चा धर्म है।1
- गोविंद गुरु की जन्मस्थली ग्राम पंचायत बांसिया में स्थित बंजारा मंडेरी टांडा में धुलंडी पर जमकर गैर नृत्य खेला। युवाओं ओर बुजुर्गों में विशेष उत्साह बना रहा। पारंपरिक गैर नृत्य में छोटे बच्चों ने भी अनुसरण करते हुए समाज विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान देते नजर आए।4
- वागधारा का स्वराज संगठन शिविर का आयोजन किया जा रहा है 32 संगठन के लोग हैं इसमें अलग-अलग राज्य से संगठन है1
- रंगों के उत्सव होली के रंग में सभी रंगे हुए हैं. अलग अलग जगहों पर अलग अलग मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार होली मनाई जाती है. लेकिन मेवाड़ में एक ऐसी जगह है जहां पर रंगों के साथ बारूद की होली खेली जाती है. उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चित्तौड़गढ़ हाईवे पर स्थिति मेनार में होली के तीसरे दिन चैत्र कृष्ण द्वितीया को यह होली खेली जाती है. जहां देर रात तक बंदूके बारूद उगलती है और तोपों की गर्जन से पूरा मेनार धधक उठता है. यह होली 4 मार्च को जमरा बीज को मनाई जाएगी. यह परंपरा मेनार के लोग 500 साल से निभाते आ रहे हैं. शाम होते ही बजता है युद्ध का बिगुल जमारबिज की सुबह तलवारों की गेर से पहले गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल जाजम बिछाई जाती और इसके साथ ही ग्रामीणों अमल कसूंबे की रस्म अदा की जाती है. फिर दिनभर गांव में अन्य जगहों से आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है और होली के पहले बना विशेष खाना खिलाया जाता है. शाम होते ही युवा युद्ध की तैयारी में जुट जाते हैं. युद्ध का बिगुल बजता है. इसमें मशालचियों की अगुवाई में सफेद धोती-कुर्ता और कसूमल पाग पहने ग्रामीणों के पांच दल पांच रास्तों से गांव के चारभुजा मंदिर के सामने चौराहा पहुंचते और फेरावत के इशारे पर एक साथ सभी रणबांकुर बंदूको से हवाई फायर करते हैं. चारों तरह आग की लपटे दिखाई देती है. साथ में पटाखे भी छूटते रहते हैं. एक सैकंड ऐसा नहीं होता कि कही से बंदूकों, तोपों या पटाखों की आवाजें ना आए. यह भी कुछ देर तक नहीं शाम को शुरू होने के बाद आधी रात के आगे भी चलता रहता है. मेनार के लोगों ने बताया कि बात तब की है जब मेवाड़ पर महाराणा अमर सिंह का राज था. उस समय मेवाड़ की पावन धरा पर जगह जगह मुगलों की छावनिया पड़ी हुई थी. इसी तरह मेनार में भी गाँव के पूर्व दिशा में मुगलों ने अपनी छावनी बना रखी थी. इन छावनियो के आतंक से नर नारी दुखी हो उठे थे. इस पर मेनारवासी मेनारिया ब्राह्मण भी मुग़ल छावनी के आतंक से त्रस्त हो चुके. जब मेनारवासियों को वल्लभनगर छावनी पर विजय का समाचार मिला तो गाँव के लोग ओंकारेश्वर चबूतरे पर इकट्ठे हुए और युद्ध की योजना बनाई गई. उस समय गांव छोटा और छावनी बड़ी थी. समय की नजाकत को ध्यान में रखते हुए कूटनीति से काम लिया. इस कूटनीति के तहत होली का त्यौहार छावनी वालो के साथ मनाना तय हुआ. होली और धुलंडी साथ साथ मनाई गई. विक्रम संवंत 1657 किया गया था आयोजन चेत्र माघ कृष्ण पक्ष द्वितीय विक्रम संवंत 1657 की रात्रि को राजवादी गैर का आयोजन किया गया. गैर देखने के लिए छावनी वालो को आमंत्रित किया गया. ढोल ओंकारेश्वर चबूतरे पर बजाया गया. नंगी तलवारों, ढालो तथा हेनियो की सहायता से गैर खेलनी शुरू हुई. अचानक ढोल की आवाज ने रणभेरी का रूप ले लिया. गाँव के वीर छावनी के सैनिको पर टूट पड़े. रात भर भयंकर युद्ध चला. ओंकार माराज के चबूतरे से शुरु हुई लड़ाई छावनी तक पहुँच गई और मुगलों को मार गिराया और मेवाड़ को मुगलो के आतंक से बचाया. मेनार के इस ऐतिहासिक जमराबिज के पर्व पर ग्रामीण स्वयं व्यवस्था को बनाये रखते है और हर कार्य को बखूबी अपने घर का समझ कर करते है. इसलिए इस दिन पुलिस जाप्ते की भी आवश्यकता नहीं रहती है और ना ही प्रशासन का कोई कार्य रहता है. ग्रामीण युवा अपने स्तर पर ही सारी जिम्मेदारियां निभाते है और खास बात यह रहती है कि जमराबिज के दिन इतना बारूद बंदूकों से दागा जाता है और तलवारों से गैर नृत्य किया जाता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई आंच तक नहीं आती है.3
- डूंगरपुर।आठवीं बोर्ड परीक्षा देने जा रहे बच्चों से भरे ऑटो को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में 14 बच्चे और एक शिक्षक सहित 16 लोग घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे हिम्मत दिखाते हुए परीक्षा देने सेंटर पहुंचे। जानकारी के अनुसार बलवाड़ा स्थित मुस्कान संस्थान के 14 बच्चे बुधवार दोपहर करीब 12 बजे एक शिक्षक के साथ ऑटो में सवार होकर डूंगरपुर शहर स्थित किशनलाल गर्ग स्कूल परीक्षा केंद्र पर आठवीं बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे थे। जैसे ही ऑटो बलवाड़ा पेट्रोल पंप मोड़ पर पहुंचा, सामने से आई एक तेज रफ्तार कार ने बच्चों से भरे ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ऑटो अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। ऑटो में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई।हादसे के बाद कार चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सड़क से गुजर रहे लोगों ने तुरंत मदद करते हुए ऑटो में फंसे बच्चों को बाहर निकाला। सूचना मिलने पर पायलट शांतिलाल और ईएमटी चेतन मौके पर पहुंचे और घायलों को डूंगरपुर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। सूचना पर मुस्कान संस्थान के निर्देशक भरत नागदा भी अस्पताल पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों को शहर के किशनलाल गर्ग स्कूल परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दिलाने के लिए रवाना किया गया। भरत नागदा ने बताया कि सभी बच्चाें का बुधवार काे संस्कृत का पेपर था। जिनका सेंटर किशनलाल गर्ग स्कूल में हाेने से अाॅटाे में सवार हाेकर एग्जाम सेंटर पर परीक्षा देने के लिए जा रहे थे।1
- Post by Rajendra Tabiyar1