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सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाने के थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करना महंगा पड़ गया है। न्यायालय ने इटवा थाने की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पीड़ित युवक को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश पारित किया है, साथ ही संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। यह मामला एक एससी/एसटी अधिनियम से संबंधित था, जिसमें अभियुक्त अनिल सोनी की गिरफ्तारी पर माननीय हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से रोक लगाई थी। इसके बावजूद थाना प्रभारी ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना और विधि के शासन की अवमानना माना गया। न्यायालय ने इस घटना को पुलिस की गंभीर लापरवाही करार दिया, मानो उसके लिए न्यायालय का आदेश केवल एक कागज़ का टुकड़ा भर हो। जमानत मिलने के बाद, अभियुक्त ने पुनः इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने पाया कि गिरफ्तारी पर स्पष्ट रोक के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई की थी। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक माह के भीतर पीड़ित व्यक्ति को ₹5 लाख का मुआवजा अदा करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यदि उचित समझे, तो यह राशि संबंधित दोषी अधिकारी से वसूल कर सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी उन्नाव पुलिस के विरुद्ध इसी प्रकार के मामले में ₹10 लाख का मुआवजा लगाया जा चुका है। इस निर्णय का विधिक महत्व यह है कि न्यायालय के आदेश केवल कागज़ के टुकड़े नहीं होते, बल्कि उनका पालन प्रत्येक सरकारी अधिकारी के लिए बाध्यकारी है। यह फैसला उन थाना प्रभारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो कभी-कभी अधिवक्ताओं या न्यायालय की शक्ति को कमतर आंकते हैं, और यह बताता है कि कानून व संविधान के समक्ष प्रत्येक अधिकारी जवाबदेह है। न्यायालय ने जोर दिया कि किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा संरक्षित है) का उल्लंघन होने पर राज्य उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। यह तर्क कि 'मुझे न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं थी', विशेषकर तब जब आदेश की सूचना उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया हो, सामान्यतः स्वीकार्य नहीं होता। अवैध गिरफ्तारी केवल एक विभागीय त्रुटि नहीं, बल्कि नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का गंभीर हनन भी है। अधिवक्ता सत्येंद्र नाथ श्रीवास्तव के अनुसार, विधि का शासन तभी सार्थक है जब न्यायालय के आदेशों का सम्मान किया जाए; यदि राज्य के अधिकारी स्वयं न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने लगें, तो नागरिकों की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार गंभीर खतरे में पड़ जाते हैं। यह निर्णय उन सभी मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है जहाँ न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासनिक मनमानी या अधिकारों का दुरुपयोग किया जाता है, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि न्याय और संविधान सर्वोपरि हैं।

3 hrs ago
user_जितेंद्र राय
जितेंद्र राय
रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago
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सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाने के थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करना महंगा पड़ गया है। न्यायालय ने इटवा थाने की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पीड़ित युवक को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश पारित किया है, साथ ही संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। यह मामला एक एससी/एसटी अधिनियम से संबंधित था, जिसमें अभियुक्त अनिल सोनी की गिरफ्तारी पर माननीय हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से रोक लगाई थी। इसके बावजूद थाना प्रभारी ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना और विधि के शासन की अवमानना माना गया। न्यायालय ने इस घटना को पुलिस की गंभीर लापरवाही करार दिया, मानो उसके लिए न्यायालय का आदेश केवल एक कागज़ का टुकड़ा भर हो। जमानत मिलने के बाद, अभियुक्त ने पुनः इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने पाया कि गिरफ्तारी पर स्पष्ट रोक के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई की थी। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक माह के भीतर पीड़ित व्यक्ति को ₹5 लाख का मुआवजा अदा करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यदि उचित समझे, तो यह राशि संबंधित दोषी अधिकारी से वसूल कर सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी उन्नाव पुलिस के विरुद्ध इसी प्रकार के मामले में ₹10 लाख का मुआवजा लगाया जा चुका है। इस निर्णय का विधिक महत्व यह है कि न्यायालय के आदेश केवल कागज़ के टुकड़े नहीं होते, बल्कि उनका पालन प्रत्येक सरकारी अधिकारी के लिए बाध्यकारी है। यह फैसला उन थाना प्रभारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो कभी-कभी अधिवक्ताओं या न्यायालय की शक्ति को कमतर आंकते हैं, और यह बताता है कि कानून व संविधान के समक्ष प्रत्येक अधिकारी जवाबदेह है। न्यायालय ने जोर दिया कि किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा संरक्षित है) का उल्लंघन होने पर राज्य उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। यह तर्क कि 'मुझे न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं थी', विशेषकर तब जब आदेश की सूचना उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया हो, सामान्यतः स्वीकार्य नहीं होता। अवैध गिरफ्तारी केवल एक विभागीय त्रुटि नहीं, बल्कि नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का गंभीर हनन भी है। अधिवक्ता सत्येंद्र नाथ श्रीवास्तव के अनुसार, विधि का शासन तभी सार्थक है जब न्यायालय के आदेशों का सम्मान किया जाए; यदि राज्य के अधिकारी स्वयं न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने लगें, तो नागरिकों की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार गंभीर खतरे में पड़ जाते हैं। यह निर्णय उन सभी मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है जहाँ न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासनिक मनमानी या अधिकारों का दुरुपयोग किया जाता है, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि न्याय और संविधान सर्वोपरि हैं।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • सतना के जिला अस्पताल के अंदर एक व्यक्ति अपनी बाइक लेकर पहली मंजिल तक पहुँच गया। बताया गया कि उसका एक गंभीर मरीज अस्पताल के पहली मंजिल पर भर्ती था, जिसे रीवा रेफर किया गया था। स्ट्रेचर समय पर न मिलने के कारण वह व्यक्ति पीछे के गेट से अस्पताल में घुस गया। वह रैंप के सहारे पहली मंजिल पर स्थित आइसोलेशन वार्ड तक पहुँच कर मरीज को बाइक पर ले जाने का प्रयास करने लगा। हालांकि, मरीज की गंभीर हालत के चलते उसे बाइक पर नहीं ले जाया जा सका। यह घटना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि यह जिला अस्पताल है या सैर-सपाटे की जगह। मामले की जानकारी मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने तत्काल गंभीर मरीज को रीवा रेफर करवाया। इसके साथ ही उन्होंने उस व्यक्ति की बाइक जब्त करने का आदेश दिया और अस्पताल पुलिस चौकी को सूचित किया। इस लापरवाही के लिए गेट पर तैनात दो सुरक्षा कर्मियों को सेवा से पृथक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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    सतना के जिला अस्पताल के अंदर एक व्यक्ति अपनी बाइक लेकर पहली मंजिल तक पहुँच गया। बताया गया कि उसका एक गंभीर मरीज अस्पताल के पहली मंजिल पर भर्ती था, जिसे रीवा रेफर किया गया था। स्ट्रेचर समय पर न मिलने के कारण वह व्यक्ति पीछे के गेट से अस्पताल में घुस गया।

वह रैंप के सहारे पहली मंजिल पर स्थित आइसोलेशन वार्ड तक पहुँच कर मरीज को बाइक पर ले जाने का प्रयास करने लगा। हालांकि, मरीज की गंभीर हालत के चलते उसे बाइक पर नहीं ले जाया जा सका। यह घटना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि यह जिला अस्पताल है या सैर-सपाटे की जगह।

मामले की जानकारी मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने तत्काल गंभीर मरीज को रीवा रेफर करवाया। इसके साथ ही उन्होंने उस व्यक्ति की बाइक जब्त करने का आदेश दिया और अस्पताल पुलिस चौकी को सूचित किया। इस लापरवाही के लिए गेट पर तैनात दो सुरक्षा कर्मियों को सेवा से पृथक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
    user_प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    Newspaper publisher रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने सरकार से मांग की है कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक वर्ग से हटाया जाए। पार्टी का तर्क है कि देश में ब्राह्मण अब अल्पसंख्यक हो गए हैं, और इसी कारण ब्राह्मणों तथा ठाकुरों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाना चाहिए।
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    भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने सरकार से मांग की है कि मुस्लिमों को अल्पसंख्यक वर्ग से हटाया जाए। पार्टी का तर्क है कि देश में ब्राह्मण अब अल्पसंख्यक हो गए हैं, और इसी कारण ब्राह्मणों तथा ठाकुरों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाना चाहिए।
    user_जितेंद्र राय
    जितेंद्र राय
    रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • चित्रकूट के रामघाट से रोहित गुप्ता ने अपने घर के पास सड़क की खराब हालत को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि सड़क में बहुत गहरे गड्ढे हैं, जिसके कारण वहां से गुजरने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गुप्ता ने अधिकारियों से जल्द से जल्द सड़क का निर्माण कराने की अपील की है।
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    चित्रकूट के रामघाट से रोहित गुप्ता ने अपने घर के पास सड़क की खराब हालत को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि सड़क में बहुत गहरे गड्ढे हैं, जिसके कारण वहां से गुजरने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गुप्ता ने अधिकारियों से जल्द से जल्द सड़क का निर्माण कराने की अपील की है।
    user_Rohit Gupta
    Rohit Gupta
    करवी, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद, वहाँ की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति एक ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है, जिसमें मौके की वास्तविक स्थिति और लोगों की राय जानने का प्रयास किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, धाम में काम कर रहे कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपना कार्य करने के लिए पर्याप्त सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसी वजह से, गैवीनाथ धाम पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को भी आने-जाने में, भीड़ को नियंत्रित करने में, और अन्य सभी तरह की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रकाश पाठक द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में इन गंभीर मुद्दों को उजागर किया गया है, और दर्शकों से इस पूरी स्थिति पर अपनी राय कमेंट कर साझा करने का आग्रह भी किया गया है।
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    बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद, वहाँ की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति एक ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है, जिसमें मौके की वास्तविक स्थिति और लोगों की राय जानने का प्रयास किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, धाम में काम कर रहे कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपना कार्य करने के लिए पर्याप्त सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसी वजह से, गैवीनाथ धाम पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को भी आने-जाने में, भीड़ को नियंत्रित करने में, और अन्य सभी तरह की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रकाश पाठक द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में इन गंभीर मुद्दों को उजागर किया गया है, और दर्शकों से इस पूरी स्थिति पर अपनी राय कमेंट कर साझा करने का आग्रह भी किया गया है।
    user_Prakash Pathak Satna
    Prakash Pathak Satna
    Social Media Manager बीरसिंहपुर, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • चित्रकूट जिले की कर्वी तहसील के अंतर्गत आने वाले कोलाउंहा गांव में भीषण गंदगी जमा हो गई है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। गांव के निवासी गंदे नाले और नालियों की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामवासियों के अनुसार, इस स्थिति के लिए गांव के प्रधान, सचिव और उनके सफ़ाई कर्मचारी जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे गांव सुधार के लिए किसी भी प्रकार से कार्यरत नहीं हैं। लोगों का कहना है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गांव में साफ़-सफ़ाई की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। गांववालों ने कलेक्टर और उनकी टीम से इस गंभीर मुद्दे पर गौर करने और आवश्यक कार्रवाई करने की उम्मीद जताई है, ताकि कोलाउंहा गांव को गंदगी की समस्या से निजात मिल सके।
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    चित्रकूट जिले की कर्वी तहसील के अंतर्गत आने वाले कोलाउंहा गांव में भीषण गंदगी जमा हो गई है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। गांव के निवासी गंदे नाले और नालियों की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

ग्रामवासियों के अनुसार, इस स्थिति के लिए गांव के प्रधान, सचिव और उनके सफ़ाई कर्मचारी जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे गांव सुधार के लिए किसी भी प्रकार से कार्यरत नहीं हैं। लोगों का कहना है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गांव में साफ़-सफ़ाई की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

गांववालों ने कलेक्टर और उनकी टीम से इस गंभीर मुद्दे पर गौर करने और आवश्यक कार्रवाई करने की उम्मीद जताई है, ताकि कोलाउंहा गांव को गंदगी की समस्या से निजात मिल सके।
    user_Anandraj pandey
    Anandraj pandey
    Karwi, Chitrakoot•
    3 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित NRC (पोषण पुनर्वास केंद्र) योजना के तहत, चित्रकूट सोनेपुर जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में अति कुपोषित बच्चों का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। आरबीएसके प्रभारी डॉक्टर पवन सिंह ने शनिवार दोपहर 12:00 बजे मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयुक्त जिला चिकित्सालय में यह केंद्र खुला हुआ है, जहाँ गंभीर रूप से कमजोर अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है। यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है, जिसमें भर्ती बच्चे के साथ उसकी माँ और एक अटेंडेंट को भी निःशुल्क इलाज और भोजन प्रदान किया जाता है। डॉक्टर पवन सिंह ने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 45 बच्चों को केंद्र में भर्ती किया जा चुका है और यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है, खासकर गर्मियों के कारण इसमें और वृद्धि होती है। पोषण पुनर्वास केंद्र में 28 दिन से लेकर 5 वर्ष तक के अति कुपोषित बच्चों का उपचार किया जाता है।
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    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित NRC (पोषण पुनर्वास केंद्र) योजना के तहत, चित्रकूट सोनेपुर जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में अति कुपोषित बच्चों का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। आरबीएसके प्रभारी डॉक्टर पवन सिंह ने शनिवार दोपहर 12:00 बजे मीडिया को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयुक्त जिला चिकित्सालय में यह केंद्र खुला हुआ है, जहाँ गंभीर रूप से कमजोर अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है।

यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है, जिसमें भर्ती बच्चे के साथ उसकी माँ और एक अटेंडेंट को भी निःशुल्क इलाज और भोजन प्रदान किया जाता है। डॉक्टर पवन सिंह ने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 45 बच्चों को केंद्र में भर्ती किया जा चुका है और यह संख्या धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है, खासकर गर्मियों के कारण इसमें और वृद्धि होती है। पोषण पुनर्वास केंद्र में 28 दिन से लेकर 5 वर्ष तक के अति कुपोषित बच्चों का उपचार किया जाता है।
    user_दिनेश सिंह कुशवाहा
    दिनेश सिंह कुशवाहा
    Classified ads newspaper publisher करवी, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • गुनौर क्षेत्र में भीषण गर्मी के प्रकोप के कारण पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है। इसी गंभीर समस्या को लेकर गुनौर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के तहत कार्यकर्ताओं ने अपने सिर पर मटके रखकर पूरे नगर का भ्रमण किया। इस नगर भ्रमण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और नगरीय प्रशासन को पेयजल की विकट समस्या के प्रति जागरूक करना था। इसके साथ ही, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में पेयजल के भीषण संकट को दूर करने की मांग करते हुए, सागर कमिश्नर के नाम एक ज्ञापन गुनौर तहसीलदार को सौंपा।
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    गुनौर क्षेत्र में भीषण गर्मी के प्रकोप के कारण पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है। इसी गंभीर समस्या को लेकर गुनौर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।

इस विरोध प्रदर्शन के तहत कार्यकर्ताओं ने अपने सिर पर मटके रखकर पूरे नगर का भ्रमण किया। इस नगर भ्रमण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और नगरीय प्रशासन को पेयजल की विकट समस्या के प्रति जागरूक करना था। इसके साथ ही, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में पेयजल के भीषण संकट को दूर करने की मांग करते हुए, सागर कमिश्नर के नाम एक ज्ञापन गुनौर तहसीलदार को सौंपा।
    user_Sitaram ray
    Sitaram ray
    Video Creator सिमरिया, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान बेला हिनौती ओवरब्रिज के नीचे से बृजेश सिंह उर्फ बाबा (45 वर्ष) नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी, जो ग्राम नरौरा, थाना चोरहटा, जिला रीवा का निवासी है, के कब्जे से 115 नग नशीली कफ सिरप और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह के निर्देशों और थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में बेला चौकी प्रभारी सहित एक पुलिस टीम ने यह कार्रवाई सफलतापूर्वक अंजाम दी। गिरफ्तारी के बाद, पुलिस आरोपी को रामपुर बाघेलान थाना ले आई है जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
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    सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान बेला हिनौती ओवरब्रिज के नीचे से बृजेश सिंह उर्फ बाबा (45 वर्ष) नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी, जो ग्राम नरौरा, थाना चोरहटा, जिला रीवा का निवासी है, के कब्जे से 115 नग नशीली कफ सिरप और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह के निर्देशों और थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में बेला चौकी प्रभारी सहित एक पुलिस टीम ने यह कार्रवाई सफलतापूर्वक अंजाम दी। गिरफ्तारी के बाद, पुलिस आरोपी को रामपुर बाघेलान थाना ले आई है जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
    user_प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    प्रखर प्रवक्ता न्यूज
    Newspaper publisher रघुराजनगर नगरीय, सतना, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
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