हरियाणा के 2 लाख 45 हजार युवा इस समय गहरे मानसिक और आर्थिक सदमे में हैं, क्योंकि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) ने 'प्रशासनिक मजबूरियों' का हवाला देकर HTET परीक्षा को 20 दिन के लिए टाल दिया है। JPH न्यूज़ की एक विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, 25 मई को बोर्ड द्वारा 13 और 14 जून को परीक्षा की 100% तैयारियों का दावा किया गया था, लेकिन 29 मई को यह अचानक स्थगित कर दी गई, जिससे बोर्ड की साख और परीक्षा की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट इसे एक 'राजनैतिक ड्रामा' करार देती है, जो एक 'स्क्रिप्ट' के तहत खेला गया। पूरी क्रोनोलॉजी पर गौर करें तो, 25 मई 2026 को तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 820 केंद्रों पर HTET परीक्षा की पूर्ण तैयारियों का दावा किया था। मात्र दो दिन बाद, 27 मई को, डॉ. पवन शर्मा को अचानक हटा दिया गया और उनकी जगह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ ने राजनीतिक दलबल के बीच नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। इसके ठीक 48 घंटे के भीतर, 29 मई को, सत्तारूढ़ दल से जुड़े छात्र संगठन ABVP के एक प्रतिनिधिमंडल ने नए अध्यक्ष से मिलकर परीक्षा स्थगित करने की मांग की, और उसी दिन बोर्ड की बैठक बुलाकर 13-14 जून की परीक्षा रद्द कर दी गई, जिसके लिए नई तारीखें 4 और 5 जुलाई घोषित की गईं। JPH न्यूज़ इस पर सवाल उठाता है कि यदि 25 मई को तैयारियां पूरी थीं, तो नए अध्यक्ष के आते ही ऐसी कौन सी 'प्रशासनिक आफत' आ गई, और ABVP की मांग पहले क्यों नहीं उठी, क्या यह सब 'पटकथा' का हिस्सा था? इस फैसले से लाखों परीक्षार्थियों को दोहरा नुकसान हुआ है – मानसिक अवसाद और आर्थिक चोट। भीषण गर्मी में लाइब्रेरी, कोचिंग सेंटर और किराए के कमरों में दिन-रात एक कर तैयारी कर रहे छात्रों के हौसले टूट गए हैं। उन्हें अब 20 दिन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा, जिसमें ₹5,000 से ₹8,000 प्रति माह कमरा और लाइब्रेरी का किराया शामिल है। कई छात्रों के जून के लिए कराए गए बसों/ट्रेनों के रिजर्वेशन भी बेकार हो गए हैं, जिससे उनकी पढ़ाई की एकाग्रता और 'स्टडी ग्राफ' पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के अनुसार, स्वायत्त संस्थाओं के फैसलों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, हालांकि बोर्ड के पास 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला देकर परीक्षा टालने का कानूनी अधिकार है। लेकिन 'रातों-रात अध्यक्ष बदलना' और 'तुरंत परीक्षा टालना' इस फैसले को जनता की नजरों में पूरी तरह संदिग्ध बनाता है। JPH न्यूज़ ने निष्कर्ष निकाला है कि यह पहली बार नहीं है जब हरियाणा के युवाओं के साथ ऐसा मज़ाक हुआ है, लेकिन इस बार जिस तरह से एक ब्यूरोक्रेटिक प्रक्रिया को 'पॉलिटिकल इवेंट' में बदला गया है, उसने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि राजनीतिक दबाव में परीक्षा की तिथियां इसी तरह बदलती रहीं, तो हरियाणा के युवाओं का सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। JPH न्यूज़ नए अध्यक्ष से सीधे सवाल करता है कि इस 'पॉलिटिकल गेम' में ढाई लाख नौजवानों की क्या गलती थी, क्योंकि 'प्रशासनिक कारण' केवल एक पर्दा है।
हरियाणा के 2 लाख 45 हजार युवा इस समय गहरे मानसिक और आर्थिक सदमे में हैं, क्योंकि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) ने 'प्रशासनिक मजबूरियों' का हवाला देकर HTET परीक्षा को 20 दिन के लिए टाल दिया है। JPH न्यूज़ की एक विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, 25 मई को बोर्ड द्वारा 13 और 14 जून को परीक्षा की 100% तैयारियों का दावा किया गया था, लेकिन 29 मई को यह अचानक स्थगित कर दी गई, जिससे बोर्ड की साख और परीक्षा की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट इसे एक 'राजनैतिक ड्रामा' करार देती है, जो एक 'स्क्रिप्ट' के तहत खेला गया। पूरी क्रोनोलॉजी पर गौर करें तो, 25 मई 2026 को तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 820 केंद्रों पर HTET परीक्षा की पूर्ण तैयारियों का दावा किया था। मात्र दो दिन बाद, 27 मई को, डॉ. पवन शर्मा को अचानक हटा दिया गया और उनकी जगह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शंकर लाल धूपड़ ने राजनीतिक दलबल के बीच नए अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। इसके ठीक 48 घंटे के भीतर, 29 मई को, सत्तारूढ़ दल से जुड़े छात्र संगठन ABVP के एक प्रतिनिधिमंडल ने नए अध्यक्ष से मिलकर परीक्षा स्थगित करने की मांग की, और उसी दिन बोर्ड की बैठक बुलाकर 13-14 जून की परीक्षा रद्द कर दी गई, जिसके लिए नई तारीखें 4 और 5 जुलाई घोषित की गईं। JPH न्यूज़ इस पर सवाल उठाता है कि यदि 25 मई को तैयारियां पूरी थीं, तो नए अध्यक्ष के आते ही ऐसी कौन सी 'प्रशासनिक आफत' आ गई, और ABVP की मांग पहले क्यों नहीं उठी, क्या यह सब 'पटकथा' का हिस्सा था? इस फैसले से लाखों परीक्षार्थियों को दोहरा नुकसान हुआ है – मानसिक अवसाद और आर्थिक चोट। भीषण गर्मी में लाइब्रेरी, कोचिंग सेंटर और किराए के कमरों में दिन-रात एक कर तैयारी कर रहे छात्रों के हौसले टूट गए हैं। उन्हें अब 20 दिन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा, जिसमें ₹5,000 से ₹8,000 प्रति माह कमरा और लाइब्रेरी का किराया शामिल है। कई छात्रों के जून के लिए कराए गए बसों/ट्रेनों के रिजर्वेशन भी बेकार हो गए हैं, जिससे उनकी पढ़ाई की एकाग्रता और 'स्टडी ग्राफ' पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के अनुसार, स्वायत्त संस्थाओं के फैसलों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, हालांकि बोर्ड के पास 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला देकर परीक्षा टालने का कानूनी अधिकार है। लेकिन 'रातों-रात अध्यक्ष बदलना' और 'तुरंत परीक्षा टालना' इस फैसले को जनता की नजरों में पूरी तरह संदिग्ध बनाता है। JPH न्यूज़ ने निष्कर्ष निकाला है कि यह पहली बार नहीं है जब हरियाणा के युवाओं के साथ ऐसा मज़ाक हुआ है, लेकिन इस बार जिस तरह से एक ब्यूरोक्रेटिक प्रक्रिया को 'पॉलिटिकल इवेंट' में बदला गया है, उसने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि राजनीतिक दबाव में परीक्षा की तिथियां इसी तरह बदलती रहीं, तो हरियाणा के युवाओं का सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। JPH न्यूज़ नए अध्यक्ष से सीधे सवाल करता है कि इस 'पॉलिटिकल गेम' में ढाई लाख नौजवानों की क्या गलती थी, क्योंकि 'प्रशासनिक कारण' केवल एक पर्दा है।
- भिवानी में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की जिला कमेटी ने शहर में एक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल, डीजल और गैस के बढ़ते दामों के साथ-साथ किसानों के लिए खरीफ सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था न होने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।1
- भोले बाबा के भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि जब नंदी जी महाराज घर पर आते हैं, तो यह क्या संदेश लेकर आता है।1
- भिवानी में कामरेड ओमप्रकाश ने महंगाई के मुद्दे को लेकर जिला उपायुक्त (डीसी) को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन महंगाई के विरोध में दिया गया।1
- शहीद भगतसिंह के प्रपौत्र युग्वेंदर सिंह सिन्धु ने युवाओं से रक्तदान करने की भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि 13 जून 2026 को विश्व रक्तदाता दिवस की पूर्व संध्या पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया। युग्वेंदर सिंह सिन्धु ने जोर देकर कहा कि रक्तदान करना शहीदों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है, क्योंकि यह किसी के अनमोल जीवन को बचाने में सहायक होता है।1
- निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ आयुष्मान कार्ड धारकों से भी पैसे वसूले गए। इस घटना ने एक बार फिर निजी स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर किया है। इस गंभीर मामले में, कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री राजेश नागर ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने नोडल अधिकारी विनोद शर्मा को निलंबित कर दिया और संबंधित अस्पताल पर भी कड़ी गाज़ गिरी, जो दिखाता है कि इस धोखाधड़ी पर प्रशासन ने सख्ती बरती है।1
- भिवानी में आयोजित ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में मंत्री राजेश नागर ने शिकायत सुनी।1
- भिवानी के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब शहर में ही स्पाइन और सर्वाइकल से संबंधित समस्याओं के लिए एक बड़े और विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।1
- एक फौजी की बेटी की पुकार अब बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बन गई है, जिसे समाज के मुँह पर एक सीधा तमाचा बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि फौजी की बेटी ने ऐसा क्या माँग लिया कि उनकी इस बहादुर पहल की अब हर तरफ बात हो रही है।1