लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत होती है, लेकिन जब यहीं के जिम्मेदार भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं। लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत होती है, लेकिन जब यहीं के जिम्मेदार भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं। मामला बलरामपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बरदर का है जहां भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यहां के सचिव पर आरोप है कि उन्होंने घर बैठे-बैठे ही पंचों के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी खजाने पर हाथ साफ कर दिया है बलरामपुर के बरदर पंचायत में इन दिनों विकास की बयार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की दुर्गंध फैल रही है। आरोप सीधे पंचायत सचिव विष्णुपद मण्डल पर हैं। वार्ड क्रमांक 8 के निर्वाचित पंच सुदामा नागवंशी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए उच्चाधिकारियों के पास मोर्चा खोल दिया है पंच सुदामा का आरोप है कि अगस्त 2025 में ज्वाइनिंग के बाद से सचिव महोदय ने नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया है। पंचायत राज के नियमों के मुताबिक हर माह सूचना पंजी के माध्यम से बैठक अनिवार्य है लेकिन बरदर में सचिव की अपनी ही समानांतर सरकार चल रही है। आरोप है कि शुरुआती एक बैठक के बाद आज तक कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई, लेकिन कागजों पर सारे प्रस्ताव पास होते रहे। आखिर कैसे आरोप है कि सचिव साहब घर बैठे ही पंचों के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं और सरकारी राशि का आहरण कर रहे हैं। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना मां चण्डी के धाम में देखने को मिला। 15वें वित्त की राशि से यहां एक सबमर्सिबल पंप लगाने के नाम पर 96,000 रुपये की मोटी रकम ऑनलाइन निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कार्य और भुगतान की भनक तक निर्वाचित पंचों को नहीं लगने दी गई। पंचों का सीधा आरोप है कि यह जनता की गाढ़ी कमाई का "बंदरबांट" है, जिसे गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया। .जब इस गंभीर मामले की गूँज जनपद सीईओ दीपराज कांत के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने सख्त रुख अपनाने का दावा किया है। सीईओ का कहना है कि उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और इसके लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जा रही है
लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत होती है, लेकिन जब यहीं के जिम्मेदार भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं। लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ग्राम पंचायत होती है, लेकिन जब यहीं के जिम्मेदार भक्षक बन जाएं, तो विकास की उम्मीदें दम तोड़ने लगती हैं। मामला बलरामपुर जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बरदर का है जहां भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यहां के सचिव पर आरोप है कि उन्होंने घर बैठे-बैठे ही पंचों के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी खजाने पर हाथ साफ कर दिया है बलरामपुर के बरदर पंचायत में इन दिनों विकास की बयार नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की दुर्गंध फैल रही है। आरोप सीधे पंचायत सचिव विष्णुपद मण्डल पर हैं। वार्ड क्रमांक 8 के निर्वाचित पंच सुदामा नागवंशी ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए उच्चाधिकारियों के पास मोर्चा खोल दिया है पंच सुदामा का आरोप है कि अगस्त 2025 में ज्वाइनिंग के बाद से सचिव महोदय ने नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया है। पंचायत राज के नियमों के मुताबिक हर माह सूचना पंजी के माध्यम से बैठक अनिवार्य है लेकिन बरदर में सचिव की अपनी ही समानांतर सरकार चल रही है। आरोप है कि शुरुआती एक बैठक के बाद आज तक कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई, लेकिन कागजों पर सारे प्रस्ताव पास होते रहे। आखिर कैसे आरोप है कि सचिव साहब घर बैठे ही पंचों के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं और सरकारी राशि का आहरण कर रहे हैं। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना मां चण्डी के धाम में देखने को मिला। 15वें वित्त की राशि से यहां एक सबमर्सिबल पंप लगाने के नाम पर 96,000 रुपये की मोटी रकम ऑनलाइन निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कार्य और भुगतान की भनक तक निर्वाचित पंचों को नहीं लगने दी गई। पंचों का सीधा आरोप है कि यह जनता की गाढ़ी कमाई का "बंदरबांट" है, जिसे गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया। .जब इस गंभीर मामले की गूँज जनपद सीईओ दीपराज कांत के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने सख्त रुख अपनाने का दावा किया है। सीईओ का कहना है कि उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और इसके लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जा रही है
- User3438Balrampur, Chhattisgarh👏15 hrs ago
- दूसरे अयस्क अवैध महुआ से बानी साराब को नास्त किया गढ़वा पुलिस देखे समाचार बिस्तार से :- महुआ दारू (देशी शराब) में अवैध रूप से नशा या मात्रा बढ़ाने के लिए अक्सर हानिकारक और ज़हरीले पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो जानलेवा हो सकते हैं। अवैध शराब में मुख्य रूप से ये चीज़ें मिलाई जाती हैं: यूरिया (Urea): इसे नशा तेज़ी से बढ़ाने और फर्मेंटेशन (खमीर) की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए मिलाया जाता है [1]. ऑक्सीटोसिन (Oxytocin): यह भी महुआ के जल्दी सड़ने और नशा बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है [2]. नौसादर (Ammonium Chloride): इसका इस्तेमाल अक्सर कड़वाहट और तीखापन बढ़ाने के लिए किया जाता है [1]. फिटकरी (Alum): इसे शराब को साफ (Transparent) करने के लिए मिलाते हैं [2]. सल्फ्यूरिक एसिड या अन्य केमिकल: कई बार जल्दी नशा बढ़ाने के लिए बेहद खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं, जो ज़हरीली शराब का मुख्य कारण बनते हैं [2]. चेतावनी: अवैध या कच्ची शराब पीना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद यूरिया और अन्य रसायन शरीर के अंगों (जैसे किडनी, लिवर) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्या आप यह जानकारी किसी जागरूकता अभियान के लिए या स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पूछ रहे हैं?2
- अंबिकापुर: मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा दुकान में भीषण आग के बाद जर्जर हुए भवन को 24 घंटे के भीतर ढहाने का नोटिस जारी अंबिकापुर नगर निगम ने ब्रह्मपारा क्षेत्र में राम मंदिर के पास स्थित व्यावसायिक परिसर में हुई भीषण आगजनी के बाद एक बड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा दुकान और गोदाम वाले इस भवन को पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर दिया है। छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 310 के तहत जारी इस आदेश में भवन स्वामी मुकेश अग्रवाल को निर्देशित किया गया है कि वे इस खतरनाक ढांचे को तत्काल प्रभाव से हटा लें। यह कार्रवाई 23 अप्रैल को दुकान और गोदाम में लगी उस विनाशकारी आग के बाद की गई है, जिसने पूरी इमारत की नींव हिला दी थी। विस्तृत विवरण के अनुसार, 23 अप्रैल को ब्रह्मपारा स्थित मुकेश प्लास्टिक और पटाखा दुकान में लगी भीषण आग के कारण उत्पन्न हुए अत्यधिक ताप और दबाव ने भवन के स्ट्रक्चर को बुरी तरह प्रभावित किया है। तकनीकी मुआयने में यह बात सामने आई है कि आग की तपिश से भवन के मुख्य कॉलम और बीम के भीतर लगा स्टील अपनी मजबूती खो चुका है और काफी कमजोर हो गया है। इस कारण भवन का एक बड़ा हिस्सा एक तरफ झुक गया है, जिससे इसके किसी भी समय ढहने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने माना है कि यह भवन अब सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है और इससे जन-धन की भारी हानि होने की संभावना है। नगर पालिक निगम अंबिकापुर के आयुक्त ने नोटिस के माध्यम से भवन स्वामी को स्पष्ट चेतावनी दी है कि सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर इस असुरक्षित और अनुपयुक्त भवन को सुरक्षित तरीके से हटा लिया जाए। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि तय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो नगर निगम अपनी टीम भेजकर खुद भवन को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। ऐसी स्थिति में ध्वस्तीकरण के दौरान आने वाला पूरा खर्च और उसकी वसूली भवन स्वामी से ही की जाएगी। वर्तमान में ब्रह्मपारा और राम मंदिर के आसपास के इस इलाके में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके। 1
- West Bengal Politics: Dum Dum में BJP की मेगा रैली, जीत का दावा तेज West Bengal के Dum Dum में BJP की विशाल रैली, जनता का जबरदस्त समर्थन1
- Post by Gurumer Singh1
- भीषण गर्मी को देखते हुये विश्रामपुर थाना गेट के पास पनशाला खुला। युवा समाजसेवी गोपाल सोनी के सौजन्य से पनशाला खोला गया। पनशाला का उद्घाटन थाना प्रभारी ऋषिकेश कुमार दुबे,राजनेता ओमप्रकाश गुप्ता गुड्डू,पंकज कुमार लाल,राजन पांडेय,एएसआई अखलेश यादव व युवा समाजसेवी गोपाल सोनी ने संयुक्त रूप से फीता काट कर किया।1
- Post by SK Paswan1
- जॉब का झांसा देकर महिला और नाबालिग से छेड़खानी, फर्जी नाम बताकर बुलाया, फिर कार में की बदसलूकी रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने के बहाने एक महिला और नाबालिग बालिका को झांसे में लेकर उनके साथ छेड़खानी करने वाले एक शातिर आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए फर्जी नाम का सहारा लिया था, लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच और मुस्तैदी के आगे उसकी चालाकी धरी की धरी रह गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी सुरेन्द्र बेहरा (34 वर्ष), निवासी ग्राम रायकेरा, ने पीड़िताओं को अपना नाम ‘विजय’ बताया था। उसने बेहतर नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिला और नाबालिग को मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद आरोपी उन्हें अपनी कार में बिठाकर ले गया और सुनसान रास्ते पर उनके साथ अभद्र व्यवहार और छेड़खानी शुरू कर दी। किसी तरह आरोपी के चंगुल से छूटकर पीड़िताओं ने थाने पहुँचकर आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशिक्षु डीएसपी एवं थाना प्रभारी घरघोड़ा अजय नागवंशी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। आरोपी ने ‘विजय’ नाम का फर्जी मुखौटा पहन रखा था, लेकिन जिस मोबाइल नंबर से उसने संपर्क किया था, पुलिस ने उसे ट्रैक करना शुरू किया। तकनीकी विश्लेषण के जरिए पुलिस असली आरोपी सुरेन्द्र बेहरा तक पहुँच गई। पुलिस ने रायकेरा में दबिश देकर सुरेन्द्र को हिरासत में लिया। जब पीड़िताओं के सामने उसकी पहचान कराई गई, तो उन्होंने तुरंत उसे पहचान लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कार और आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है। आरोपी के विरुद्ध महिला सुरक्षा और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “आरोपी ने नाम बदलकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश की, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उसे दबोच लिया गया। महिला सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी असामाजिक तत्व के खिलाफ रायगढ़ पुलिस इसी तरह की सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।”1
- Dum Dum में BJP की ऐतिहासिक रैली, Bengal में सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज1
- Post by Gurumer Singh1