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झारखंड में बिजली और पानी की गंभीर समस्या को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने रांची में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जिला स्कूल से डीसी कार्यालय तक मार्च निकालकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई, जिसमें केंद्रीय मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। महिला मोर्चा ने सिर पर खाली घड़ा रखकर अनोखा विरोध जताया, आरोप है कि राज्य में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
Deepak Kumar
झारखंड में बिजली और पानी की गंभीर समस्या को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने रांची में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जिला स्कूल से डीसी कार्यालय तक मार्च निकालकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई, जिसमें केंद्रीय मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। महिला मोर्चा ने सिर पर खाली घड़ा रखकर अनोखा विरोध जताया, आरोप है कि राज्य में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
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- कुड़ू थाना क्षेत्र के अंतर्गत बरवाटोली के दोबा गांव में एक महिला को जिंदा जला दिया गया। बताया गया है कि घटना रात के समय हुई थी, जिसकी तस्वीरें भी रात को ही ली गईं। गांव के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला है कि इस महिला को कहीं बाहर से बलात्कार करके लाया गया था। इसके बाद, उसे रस्सी से बांधा गया और फिर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात में गांव में घूमकर रोते हुए एक हल्की परछाई दिखाई देती है।3
- लोहरदगा जिले से जुड़ी सभी खबरों को अपलोड तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।1
- झारखंड के लोहरदगा जिले के कुरु प्रखंड के चंडू गांव से संबंधित एक मामला सामने आया है।1
- एक बयान में ईसाई समुदाय पर आरक्षण और रीति-रिवाजों को छीनने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके चलते 'डीलिस्टिंग' की पुरज़ोर मांग की गई है। इस दौरान यह बात सामने रखी गई कि 'हमारा आरक्षण' का लाभ उठाते हुए ईसाई समुदाय के 10 से अधिक सदस्य विधायक बन चुके हैं। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि 'डीलिस्टिंग' होनी चाहिए।1
- लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड अंतर्गत झालजमीरा के घाटा गगेया में जनी शिकार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह एक ऐसी परंपरा है जो आदिवासी समाज की महिलाओं की वीरता को दर्शाती है और हर 12 वर्ष पर एक बार मनाई जाती है। इस आयोजन के तहत, आदिवासी समाज की महिलाएं रोहतासगढ़ आक्रमण को याद करते हुए शिकार खेलने निकलीं। महिलाओं के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में, वे पुरुषों का वेश धारण कर जंगल में शिकार खेलती हैं और फिर अपने गांव लौटती हैं। गांव लौटने पर समाज द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाता है और सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर खुशियां मनाई जाती हैं।1
- लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत बालू ग्राम में एक भुईयां परिवार ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आने के बाद प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। परिवार का आरोप है कि कुछ दबंगों ने उनकी पूर्वजों की भूमि पर कब्जा कर लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजा बालू स्थित खाता संख्या 106 के प्लॉट संख्या 2214, 2215 और 2216 (कुल 51 डिसमिल) पूर्व में बैजू भुईयां के नाम दर्ज थी। बाद में राजस्व अभिलेखों में यह भूमि खाता संख्या 267 में दर्ज की गई, जिसमें प्लॉट संख्या 3458 (21 डिसमिल), 3456 (31 डिसमिल), 3457 (1 डिसमिल) और 3459 (1 डिसमिल) शामिल हैं। वर्तमान में यह भूमि बैजू भुईयां के पौत्र पुसन भुईयां और घसन भुईयां के नाम पर दर्ज बताई जाती है। भुईयां परिवार का आरोप है कि कुछ व्यक्तियों ने भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया है, और रामेश्वर प्रसाद साव तथा बलराम साव के नाम से लगान रसीदें भी कटवाई जा रही हैं। परिवार का कहना है कि भूमि के बड़े हिस्से पर मकान बनाकर स्थायी कब्जा कर लिया गया है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि अभी भी भुईयां परिवार के नाम पर दर्ज है। पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) को कई बार आवेदन दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने, कथित रूप से गलत तरीके से किए गए म्यूटेशन और लगान रसीदों को निरस्त करने, अपनी पुश्तैनी भूमि वापस दिलाने और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। भुईयां परिवार ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेने को विवश होंगे। यह मामला ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। 'जोहार झारखंड' ने कहा है कि इस मामले पर प्रशासनिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।2
- लातेहार सदर प्रखंड की ईचाक पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से हो रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर दर्जनों ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य पर सरकारी धन का निजी हित में उपयोग करने का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनसे धोखे से ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए, जिनका संबंध इस शिकायत से था। उपायुक्त लातेहार को सौंपे गए पहले आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली का निर्माण पंचायत समिति सदस्य के घर के पास किया जा रहा है, जिससे मुख्य रूप से एक निजी परिसर को लाभ मिल रहा है, जबकि इसका उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का उपयोग जनहित के बजाय निजी हित साधने के लिए हो रहा है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यस्थल, निर्माण गुणवत्ता और आवश्यकता की जांच की मांग की है, साथ ही अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील भी की है। शिकायतकर्ताओं में हकीम अंसारी, मोहम्मद खुर्शीद अंसारी, मोहम्मद अख्तर, मोहम्मद अब्दुल मोबिन, नौशाद आलम, अब्बास अंसारी, तजमुल अंसारी और ताईबुल अंसारी सहित कई ग्रामीण शामिल हैं, और इस आवेदन की प्रतिलिपि उप विकास आयुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी भेजी गई है। इस बीच, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने उपायुक्त को एक और आवेदन सौंपकर बताया कि लातेहार कचहरी में उन्हें गांव के ही खुर्शीद अंसारी पिता इसरायल अंसारी ने जमीन संबंधी दस्तावेज बताकर धोखे से हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान ले लिए थे। इन ग्रामीणों ने कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति को समझ नहीं पाए। उन्हें बाद में पता चला कि जिन कागजातों पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे, वे 15वें वित्त आयोग की योजना से संबंधित शिकायत पत्र थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पंचायत समिति सदस्य रवि कौशल के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने स्वयं कोई शिकायत की है। इन ग्रामीणों ने उपायुक्त से उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान को निरस्त करने और इस बात की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है कि किन परिस्थितियों में उनके हस्ताक्षरों का उपयोग शिकायत पत्र में किया गया। नाली निर्माण में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और शिकायत पत्रों पर धोखे से हस्ताक्षर कराने के इन परस्पर विरोधी दावों के बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन को दोनों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि नाली निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप सही हैं या शिकायत पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।2
- एक चौंकाने वाला आरोप सामने आया है जिसमें दावा किया गया है कि 'हमारा औकात है किसी भी घर को खाली करवा देंगे' जैसी धमकी दी गई है। आरोप लगाया गया है कि यह धमकी लोगों पर अनुचित दबाव बनाने के इरादे से दी गई थी, और इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए कथित तौर पर झूठे छेड़खानी के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनकी मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।1