राजस्थान की सबसे महंगी पगड़ी है! यह किसी शोरूम, दुकान, सुपरमार्केट में नहीं मिलती है, 200 रुपये के इस सफेद कपड़े को 10 लाख की कीमत तक पहुंचाने में इस बच्चे के अपने ही परिवार, समाज के लोग शामिल होते है। इस महंगी पगड़ी में धर्म, संस्कृति की लंबी-लंबी नैतिकता की मूंछे उलझी हुई होती है। सफेद लिबास में समाज के पंच व खादी में तब्दील हुए सूती कपड़ा पहने जनप्रतिनिधि आते है और 200 रुपये की इस पगड़ी को 10 लाख की करके चले जाते है। जवां बेटे की लाश को कंधा देना बाप के लिए सबसे बड़ा बोझ तो सभी ने सुना है लेकिन कच्चे माथे पर लाखों के इस बोझ पर कभी गौर किया क्या? शायद आपको इस छोटे से बालक के सिर पर रखी सफेद पगड़ी बिल्कुल सामान्य और हल्की लग रही होगी, क्योंकि इसका दंश शायद आपने झेला नहीं, दर्द को समझा नहीं, पीड़ा को पहचाना नहीं होगा। इस सामान्य सी पगड़ी के नीचे परिवार की समस्त जिम्मेदारी, 12 दिन तक शोक सभा में बैठकर समाज के पंच-पटेलों ने सांप जैसी लपलपाती जीभ से जिस डोडा, अमल चटकारे लेकर गुलछर्रे उड़ाये हैं उसका क़र्ज़ सूद सहित चुकाने की जिम्मेदारी दफन है, जिसे आप नहीं देख पा रहे हो। यह पगड़ी दिखने में सामान्य है ओर बाजार में 200-500 में मिल जायेगी, लेकिन आज यह कम-से-कम 10 लाख रूपये की है, इससे ज्यादा की भी हो सकती है। मारवाड़ में सामान्य से सामान्य घर में मृतक की शोकसभा में बैठकर 2.50 लाख से 3.00 लाख रुपए का डोडा, अमल फूल देते हैं और उपर से 4-5 लाख रुपये का घी, चीनी, बेसन, आटा इत्यादि चटकर जाते हैं। अगर थोड़ा सा ठीक घर हो तो यह राशि बढ़ जाती है। इस बच्चे की मासूमियत से स्पष्ट झलक रहा है कि समाज के सपौले और पेटारूओं ने इसे नशा अमल डोडा के कर्ज़ तले दबा दिया है, इसका जीवन सूद सहित कर्ज चुकाने करने बीत जायेगा। आज जो चटकारों की व्यवस्था के लिए पैसों की व्यवस्था करवा रहे हैं वो कल जमीन या गहने गिरवी रखकर चटकारे लेकर निकल लेंगे और फिर क़र्ज़ का कू चक्कर शुरू होगा, जिससे बाहर निकलना असंभव है। सिवाय जमीन बेचने के। आज के हिमायती कल इस बच्चे की शिक्षा के लिए एक रूपये की व्यवस्था नहीं करवायेंगे। किसी भी परिवार को इस स्थिति में पहुंचाने के जिम्मेदार अपने ही परिवार, समाज के चौधरी और रिश्तेदार होते हैं जो खा-पीकर पिछवाड़े पर हाथ झड़कार निकल लेते हैं। हम सबने सुना है कि एक बाप के लिए सबसे बड़ा बोझ जवान बेटे को कंधा देना है लेकिन कच्चे माथे पर लाखों के इस बोझ पर कभी गौर किया क्या? अगर नहीं किया है तो आज ही करें। अपनी आत्मा पर हाथ रखकर आप आज ही #नशा त्यागने का संकल्प लें। अगर समाज में अमल डोडा खाने वाला ही नहीं बचेगा तभी बंद होगा। आपकी इस छोटे से निर्णय से कई परिवार इस बौझ से बच जायेंगे, बच्चों की शिक्षा नहीं छूटेगी, जमीन, गहने नहीं बिकेंगे। युवा शक्ति देश का भविष्य है, इसे नशे से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। आओ मिलकर संकल्प लें — नशा छोड़ें, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें। 🚫 नशा मुक्त समाज ✅ स्वस्थ युवा – मजबूत भारत
राजस्थान की सबसे महंगी पगड़ी है! यह किसी शोरूम, दुकान, सुपरमार्केट में नहीं मिलती है, 200 रुपये के इस सफेद कपड़े को 10 लाख की कीमत तक पहुंचाने में इस बच्चे के अपने ही परिवार, समाज के लोग शामिल होते है। इस महंगी पगड़ी में धर्म, संस्कृति की लंबी-लंबी नैतिकता की मूंछे उलझी हुई होती है। सफेद लिबास में समाज के पंच व खादी में तब्दील हुए सूती कपड़ा पहने जनप्रतिनिधि आते है और 200 रुपये की इस पगड़ी को 10 लाख की करके चले जाते है। जवां बेटे की लाश को कंधा देना बाप के लिए सबसे बड़ा बोझ तो सभी ने सुना है लेकिन कच्चे माथे पर लाखों के इस बोझ पर कभी गौर किया क्या? शायद आपको इस छोटे से बालक के सिर पर रखी सफेद पगड़ी बिल्कुल सामान्य और हल्की लग रही होगी, क्योंकि इसका दंश शायद आपने झेला नहीं, दर्द को समझा नहीं, पीड़ा को पहचाना नहीं होगा। इस सामान्य सी पगड़ी के नीचे परिवार की समस्त जिम्मेदारी, 12 दिन तक शोक सभा में बैठकर समाज के पंच-पटेलों ने सांप जैसी लपलपाती जीभ से जिस डोडा, अमल चटकारे लेकर गुलछर्रे उड़ाये हैं उसका क़र्ज़ सूद सहित चुकाने की जिम्मेदारी दफन है, जिसे आप नहीं देख पा रहे हो। यह पगड़ी दिखने में सामान्य है ओर बाजार में 200-500 में मिल जायेगी, लेकिन आज यह कम-से-कम 10 लाख रूपये की है, इससे ज्यादा की भी हो सकती है। मारवाड़ में सामान्य से सामान्य घर में मृतक की शोकसभा में बैठकर 2.50 लाख से 3.00 लाख रुपए का डोडा, अमल फूल देते हैं और उपर से 4-5 लाख रुपये का घी, चीनी, बेसन, आटा इत्यादि चटकर जाते हैं। अगर थोड़ा सा ठीक घर हो तो यह राशि बढ़ जाती है। इस बच्चे की मासूमियत से स्पष्ट झलक रहा है कि समाज के सपौले और पेटारूओं ने इसे नशा अमल डोडा के कर्ज़ तले दबा दिया है, इसका जीवन सूद सहित कर्ज चुकाने करने बीत जायेगा। आज जो चटकारों की व्यवस्था के लिए पैसों की व्यवस्था करवा रहे हैं वो कल जमीन या गहने गिरवी रखकर चटकारे लेकर निकल लेंगे और फिर क़र्ज़ का कू चक्कर शुरू होगा, जिससे बाहर निकलना असंभव है। सिवाय जमीन बेचने के। आज के हिमायती कल इस बच्चे की शिक्षा के लिए एक रूपये की व्यवस्था नहीं करवायेंगे। किसी भी परिवार को इस स्थिति में पहुंचाने के जिम्मेदार अपने ही परिवार, समाज के चौधरी और रिश्तेदार होते हैं जो खा-पीकर पिछवाड़े पर हाथ झड़कार निकल लेते हैं। हम सबने सुना है कि एक बाप के लिए सबसे बड़ा बोझ जवान बेटे को कंधा देना है लेकिन कच्चे माथे पर लाखों के इस बोझ पर कभी गौर किया क्या? अगर नहीं किया है तो आज ही करें। अपनी आत्मा पर हाथ रखकर आप आज ही #नशा त्यागने का संकल्प लें। अगर समाज में अमल डोडा खाने वाला ही नहीं बचेगा तभी बंद होगा। आपकी इस छोटे से निर्णय से कई परिवार इस बौझ से बच जायेंगे, बच्चों की शिक्षा नहीं छूटेगी, जमीन, गहने नहीं बिकेंगे। युवा शक्ति देश का भविष्य है, इसे नशे से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। आओ मिलकर संकल्प लें — नशा छोड़ें, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ें। 🚫 नशा मुक्त समाज ✅ स्वस्थ युवा – मजबूत भारत
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- “न्याय की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं” – समाजसेवी रामेश्वर बाबल के तीखे तेवर, कातिल को सलाखों के पीछे भेजने की चेतावनी खानुवाली की बहन सुदेश कुमारी की मौत को लेकर इलाके में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में समाजसेवी रामेश्वर बाबल ने बेहद तीखे और आक्रामक तेवर दिखाते हुए साफ कहा कि अब यह लड़ाई न्याय मिलने तक रुकने वाली नहीं है। बाबल ने कहा कि जिस व्यक्ति की लापरवाही और लालच के कारण एक मासूम परिवार उजड़ गया, वह आज खुलेआम घूम रहा है, लोगों को धमकियां दे रहा है और अपने रसूख के दम पर पूरे सिस्टम को दबाने की कोशिश कर रहा है। रामेश्वर बाबल ने सवाल उठाते हुए कहा कि आज से पहले भी पता नहीं इस कातिल ने कितने ऐसे कृत्य किए होंगे, कितने घर उजाड़े होंगे और कितने बच्चों को अनाथ किया होगा। अगर समय रहते ऐसे लोगों पर लगाम नहीं लगाई गई तो यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है, क्योंकि अगर आज आवाज नहीं उठी तो कल किसी और की बारी होगी। बाबल ने पुलिस प्रशासन से कड़े शब्दों में मांग करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए और दोषी को तुरंत गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोप हैं, वह खुलेआम घूम रहा है और लोगों को डराने-धमकाने का काम कर रहा है, यह कानून व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि बहन सुदेश कुमारी का परिवार एक साधारण और गरीब परिवार है, जिनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन अब समाज उनके साथ खड़ा है। बाबल ने भावुक होकर कहा कि इस मासूम बच्ची का अब पूरा समाज ही परिवार है, और जब तक उसकी मां को न्याय नहीं मिल जाता तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाई सुभाष सुथार और उसके बच्चों की पूरी दुनिया उजड़ चुकी है। एक मां के जाने के बाद उस परिवार की हालत क्या होती है, यह वही लोग समझ सकते हैं जिन्होंने यह दर्द झेला है। ऐसे में समाज का कर्तव्य है कि वह इस परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे। रामेश्वर बाबल ने आरोप लगाया कि आरोपी ने सरकारी अस्पताल से रेफर कार्ड भी बनवा लिया, जिससे साफ लगता है कि पूरे सरकारी तंत्र को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर सच को दबाने के लिए सत्ता, पैसा और सिस्टम का इस्तेमाल किया गया तो जनता इसका जवाब देना भी जानती है। बाबल ने सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि डॉक्टर राजेश गौड चाहे अपने कितने भी दलाल और समर्थक खड़े कर ले, लेकिन सच को ज्यादा समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज पूरी ताकत के साथ इस लड़ाई में खड़ा है और दोषी को सलाखों के पीछे भेजकर ही दम लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब सिर्फ एक विरोध नहीं बल्कि न्याय की निर्णायक लड़ाई बन चुका है। जब तक बहन सुदेश कुमारी को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा, चाहे कितनी भी ताकतें इसके सामने क्यों न खड़ी हो जाएं।1
- Post by Bikaner local news1
- बीकानेर पत्रकार इकबाल खान: बीकानेर शहर में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए पुलिस ने यातायात नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। शहर के कई प्रमुख चौराहों और मुख्य मार्गों पर वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों, सीट बेल्ट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों और तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस नियम तोड़ने वाले चालकों के चालान भी काट रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। आमजन से भी अपील की गई है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित वाहन चलाएं।1
- Post by Vinod Rajput1
- भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर जिस बाबा को अमृतसर से रेस्क्यू कर अपना घर आश्रम पठान वाली में छोड़ा था आज उसकी मौत हो चुकी है भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के संस्थापक राजेंद्र आलसिखा ने उसका अंतिम संस्कार करवा है अंतिम संस्कार सद्भावना नगर के शमशान भूमि में किया था अंतिम संस्कार पुरे हिंदू रीति रिवाज से किया था1
- देशभर के 15 चुनिंदा विशेषज्ञों में मिला स्थान, अब राष्ट्रीय स्तर पर तय करेंगे बड़ी परियोजनाओं का पर्यावरणीय भविष्य सीमांत शहर श्रीगंगानगर के लिए एक और गौरव का क्षण सामने आया है। शहर के प्रतिष्ठित वास्तु इंजीनियर इंजिनियर पवन के. गोयल को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा गठित ‘विशेषज्ञ मूल्यांकन कमेटी’ का सदस्य मनोनीत किया गया है। देशभर से चुने गए कुल 15 विशेषज्ञों में उनका चयन होना न केवल उनके लंबे अनुभव की पहचान है, बल्कि श्रीगंगानगर के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सोमवार को सुखाडिया सर्किल स्थित होटल प्रतीक प्लाजा में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पवन गोयल ने अपनी नियुक्ति से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह कमेटी देशभर में बनने वाली बड़ी विकास परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने से पहले उनका गहन तकनीकी मूल्यांकन करती है। कमेटी हवाई अड्डों, राष्ट्रीय राजमार्गों, टाउनशिप, खनन परियोजनाओं, बिजली संयंत्रों, इंडस्ट्रियल पार्क, बहुमंजिला भवनों और सीवरेज योजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन कर सरकार को स्वीकृति या अस्वीकृति की सिफारिश देती है। पवन गोयल ने कहा कि इस जिम्मेदारी के साथ वे श्रीगंगानगर क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने लालगढ़ एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लेकर भी सकारात्मक पहल करने की बात कही, ताकि क्षेत्र के विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे। वर्ष 1982 से इंजीनियरिंग और वास्तु विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय पवन गोयल अपने काम और शोध के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई मंचों पर सम्मानित हो चुके हैं। वर्ष 2011 में उन्हें राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा ‘ब्रह्मर्षि अलंकरण’ से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वे वास्तु और जियो विज्ञान विषय पर सात पुस्तकों के लेखक भी हैं, जो देशभर के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। प्रेस वार्ता के दौरान उनके पुत्र आर्किटेक्ट अंजनेश गोयल, राजकुमार जैन और सौरभ जैन भी मौजूद रहे। पवन गोयल ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित सभी गंगानगर वासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि पूरे श्रीगंगानगर का है। आने वाले समय में वे अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से देश के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास करेंगे।1
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