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सात करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल जसवंत प्रदर्शनी मैदान (रिपोर्टर अनिल जटिया) सात करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल जसवंत प्रदर्शनी मैदान (रिपोर्टर अनिल जटिया) राहुल मदेरणा की मांग: सात करोड़ से विकसित जसवंत प्रदर्शनी मैदान को मिले नियमित सफाई और रखरखाव की सुविधा रखरखाव और हरियाली के अभाव में बेनूर हो रहा ऐतिहासिक परिसर, जलभराव-कचरे से परेशान शहरवासी भरतपुर- शहर के ऐतिहासिक महाराजा जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला मैदान के विकास पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नियमित रखरखाव, सफाई, जल निकासी और हरियाली के अभाव में यह परिसर बदहाल होता जा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क, लाइट और अन्य विकास कार्य तो किए गए लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के बाद जिस नियमित देखरेख की जरूरत थी, वह नजर नहीं आ रही है। स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा का कहना है कि यदि इस पूरे परिसर की नियमित सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और पौधारोपण पर ध्यान दिया जाए तो यही मैदान भरतपुर के सबसे सुंदर और उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो सकता है। -कचरा, गंदा पानी और जलभराव से परेशानी नुमाइश मैदान में जगह-जगह खुले में कचरा और सामग्री पड़ी दिखाई देती है। कई स्थानों पर पानी जमा रहता है और बारिश के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। मैदान के बड़े हिस्से में कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी रहती है। मदेरणा के अनुसार कभी कोई पशु मर जाए तो समय पर उसे हटाने की व्यवस्था नहीं होने से दुर्गंध और गंदगी की स्थिति भी बन जाती है। ऐसे वातावरण में मैदान का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होती है। -सड़क बनी, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में सड़क और अन्य निर्माण कार्य किए गए लेकिन पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है। मदेरणा का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक परिसर का विकास केवल सड़क और निर्माण कार्य तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि जल निकासी की व्यवस्था नहीं होगी तो बारिश के समय करोड़ों रुपये से विकसित किया गया परिसर भी कीचड़ और पानी में बदल जाएगा। -लाइटें लगीं, लेकिन नियमित रोशनी का अभाव मैदान में लाइटें लगाई गई हैं लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार सामान्य दिनों में इनका नियमित उपयोग नहीं होता। उनका कहना है कि मेले के दौरान तो प्रकाश व्यवस्था दिखाई देती है लेकिन बाकी समय मैदान में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रोशनी उपलब्ध नहीं रहती। स्टेडियम में जलभराव के कारण कई लोग इस मैदान में सुबह-शाम वॉक करने आते हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं भी शामिल हैं। ऐसे में नियमित प्रकाश व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। -पुराने गेटों का भी नहीं हुआ जीर्णोद्धार मैदान की पहचान रहे पुराने गेटों की स्थिति भी चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार विकास कार्यों के बावजूद पुराने गेटों का समुचित जीर्णोद्धार नहीं किया गया। कहीं गेट टूटे हुए हैं तो कहीं उनकी हालत जर्जर है। मदेरणा का कहना है कि जिस परिसर का ऐतिहासिक महत्व इतना बड़ा है, वहां प्रवेश द्वार भी उसी इतिहास और पहचान को दर्शाने वाले होने चाहिए। मैदान के लिए एक सुंदर और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार विकसित किया जाना चाहिए। -हरियाली के नाम पर लगभग कुछ नहीं स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा ने मैदान की हरियाली और पौधारोपण को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा खुला परिसर होने के बावजूद यहां व्यवस्थित रूप से पेड़-पौधे, लॉन या हरित क्षेत्र विकसित नहीं किया गया है। यदि मैदान के चारों ओर और अंदर पर्याप्त संख्या में छायादार एवं स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं, हरित पट्टी विकसित की जाए और बैठने की व्यवस्था की जाए तो यह स्थान बेहद खूबसूरत बन सकता है। उनका सुझाव है कि यहां ग्रीन बेल्ट, पौधारोपण, वॉकिंग ट्रैक और बैठने के लिए बेंच विकसित की जाएं, जिससे यह केवल साल में लगने वाले मेले का मैदान ना रहकर पूरे वर्ष शहरवासियों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल बन सके। -महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति को भी मिले पहचान जिस महाराजा के नाम पर करीब एक सदी से यह प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता आ रहा है, उनकी स्मृति को भी परिसर में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा या स्मृति स्थल बनाया जा सकता है। प्रवेश द्वार पर ऐतिहासिक जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाए, जिससे यहां आने वाले लोगों को मेले के इतिहास और इसकी परंपरा की जानकारी मिल सके। -हर मंगलवार हाट, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव नुमाइश मैदान में प्रत्येक मंगलवार साप्ताहिक हाट लगती है। इसमें छोटे दुकानदार, गरीब और मध्यम वर्गीय व्यापारी अपने सामान की बिक्री के लिए आते हैं। किसान और आम नागरिक भी यहां खरीदारी करते हैं लेकिन बारिश के दौरान जलभराव के कारण व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाट के लिए व्यवस्थित जगह, जल निकासी, साफ-सफाई, प्रकाश और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। -अक्टूबर में फिर लगेगा ऐतिहासिक मेला हर वर्ष दशहरे के आसपास यहां जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता है। मेले में छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी दूर-दराज से आते हैं। उनके लिए भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित परिसर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आगामी मेले से पहले मैदान की व्यापक सफाई, जल निकासी और आवश्यक मरम्मत का काम कराया जाना चाहिए ताकि मेले के समय केवल अस्थायी सजावट करके व्यवस्था संभालने की नौबत ना आए। -चौपाटी के रूप में भी विकसित हो सकता है मैदान राहुल मदेरणा का कहना है कि इतने बड़े परिसर को साल में सिर्फ एक बार लगने वाले मेले तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थायी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां व्यवस्थित चौपाटी, छोटे दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान, वॉकिंग ट्रैक, हरियाली, बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए तो यह शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। -प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा, रुपेश खंडेलवाल, सुशांत गुप्ता, उमेश तिवारी, मनोज खण्डेलवाल ने जिला प्रशासन और भरतपुर विकास प्राधिकरण से मांग की है कि जसवंत प्रदर्शनी मैदान का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और निम्न कार्य प्राथमिकता से कराए जाएं। पूरे परिसर की विशेष सफाई कराई जाए, खुले में पड़ा कचरा और अनावश्यक सामग्री हटाई जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, पुराने गेटों का जीर्णोद्धार कराया जाए, मैदान की लाइटें नियमित रूप से चालू रखी जाएं, बड़े स्तर पर पौधरोपण कर हरित क्षेत्र विकसित किया जाए, वॉकिंग ट्रैक और बैठने की व्यवस्था बनाई जाए, महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा एवं स्मृति स्थल विकसित किया जाए, एक आकर्षक और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाए, आगामी जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले से पहले पूरे परिसर को साफ और व्यवस्थित किया जाए। मदेरणा का कहना है कि सात करोड़ रुपये खर्च करके किसी सार्वजनिक परिसर को विकसित करना पहला कदम है लेकिन उसकी असली सफलता उसके नियमित रखरखाव और जनता के उपयोग में है। यदि साफ-सफाई, हरियाली, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था पर लगातार ध्यान दिया जाए तो यही ऐतिहासिक मैदान भरतपुर की खूबसूरत पहचान बन सकता है। प्रशासन को चाहिए कि करोड़ों रुपये से तैयार किए गए इस परिसर को उपेक्षा के कारण खराब होने देने के बजाय इसकी नियमित देखरेख की स्थायी व्यवस्था करे।

2 hrs ago
user_Anil Jatiya news repotar
Anil Jatiya news repotar
Local News Reporter प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
2 hrs ago
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सात करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल जसवंत प्रदर्शनी मैदान (रिपोर्टर अनिल जटिया) सात करोड़ खर्च के बाद भी बदहाल जसवंत प्रदर्शनी मैदान (रिपोर्टर अनिल जटिया) राहुल मदेरणा की मांग: सात करोड़ से विकसित जसवंत प्रदर्शनी मैदान को मिले नियमित सफाई और रखरखाव की सुविधा रखरखाव और हरियाली के अभाव में बेनूर हो रहा ऐतिहासिक परिसर, जलभराव-कचरे से परेशान शहरवासी भरतपुर- शहर के ऐतिहासिक महाराजा जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला मैदान के विकास पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नियमित रखरखाव, सफाई, जल निकासी और हरियाली के अभाव में यह परिसर बदहाल होता जा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क, लाइट और अन्य विकास कार्य तो किए गए लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के बाद जिस नियमित देखरेख की जरूरत थी, वह नजर नहीं आ रही है। स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा का कहना है कि यदि इस पूरे परिसर की नियमित सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और पौधारोपण पर ध्यान दिया जाए तो यही मैदान भरतपुर के सबसे सुंदर और उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो सकता है। -कचरा, गंदा पानी और जलभराव से परेशानी नुमाइश मैदान में जगह-जगह खुले में कचरा और सामग्री पड़ी दिखाई देती है। कई स्थानों पर पानी जमा रहता है और बारिश के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। मैदान के बड़े हिस्से में कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी रहती है। मदेरणा के अनुसार कभी कोई पशु मर जाए तो समय पर उसे हटाने की व्यवस्था नहीं होने से दुर्गंध और गंदगी की स्थिति भी बन जाती है। ऐसे वातावरण में मैदान का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होती है। -सड़क बनी, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में सड़क और अन्य निर्माण कार्य किए गए लेकिन पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता

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है। मदेरणा का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक परिसर का विकास केवल सड़क और निर्माण कार्य तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि जल निकासी की व्यवस्था नहीं होगी तो बारिश के समय करोड़ों रुपये से विकसित किया गया परिसर भी कीचड़ और पानी में बदल जाएगा। -लाइटें लगीं, लेकिन नियमित रोशनी का अभाव मैदान में लाइटें लगाई गई हैं लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार सामान्य दिनों में इनका नियमित उपयोग नहीं होता। उनका कहना है कि मेले के दौरान तो प्रकाश व्यवस्था दिखाई देती है लेकिन बाकी समय मैदान में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त रोशनी उपलब्ध नहीं रहती। स्टेडियम में जलभराव के कारण कई लोग इस मैदान में सुबह-शाम वॉक करने आते हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं भी शामिल हैं। ऐसे में नियमित प्रकाश व्यवस्था सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। -पुराने गेटों का भी नहीं हुआ जीर्णोद्धार मैदान की पहचान रहे पुराने गेटों की स्थिति भी चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार विकास कार्यों के बावजूद पुराने गेटों का समुचित जीर्णोद्धार नहीं किया गया। कहीं गेट टूटे हुए हैं तो कहीं उनकी हालत जर्जर है। मदेरणा का कहना है कि जिस परिसर का ऐतिहासिक महत्व इतना बड़ा है, वहां प्रवेश द्वार भी उसी इतिहास और पहचान को दर्शाने वाले होने चाहिए। मैदान के लिए एक सुंदर और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार विकसित किया जाना चाहिए। -हरियाली के नाम पर लगभग कुछ नहीं स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा ने मैदान की हरियाली और पौधारोपण को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा खुला परिसर होने के बावजूद यहां व्यवस्थित रूप से पेड़-पौधे, लॉन या हरित क्षेत्र विकसित नहीं किया गया है। यदि मैदान के चारों ओर और अंदर पर्याप्त संख्या में छायादार एवं स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं, हरित पट्टी विकसित की जाए और बैठने की व्यवस्था की जाए तो यह स्थान बेहद

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खूबसूरत बन सकता है। उनका सुझाव है कि यहां ग्रीन बेल्ट, पौधारोपण, वॉकिंग ट्रैक और बैठने के लिए बेंच विकसित की जाएं, जिससे यह केवल साल में लगने वाले मेले का मैदान ना रहकर पूरे वर्ष शहरवासियों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल बन सके। -महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति को भी मिले पहचान जिस महाराजा के नाम पर करीब एक सदी से यह प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता आ रहा है, उनकी स्मृति को भी परिसर में प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा या स्मृति स्थल बनाया जा सकता है। प्रवेश द्वार पर ऐतिहासिक जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाए, जिससे यहां आने वाले लोगों को मेले के इतिहास और इसकी परंपरा की जानकारी मिल सके। -हर मंगलवार हाट, फिर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव नुमाइश मैदान में प्रत्येक मंगलवार साप्ताहिक हाट लगती है। इसमें छोटे दुकानदार, गरीब और मध्यम वर्गीय व्यापारी अपने सामान की बिक्री के लिए आते हैं। किसान और आम नागरिक भी यहां खरीदारी करते हैं लेकिन बारिश के दौरान जलभराव के कारण व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाट के लिए व्यवस्थित जगह, जल निकासी, साफ-सफाई, प्रकाश और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। -अक्टूबर में फिर लगेगा ऐतिहासिक मेला हर वर्ष दशहरे के आसपास यहां जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेला आयोजित होता है। मेले में छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी दूर-दराज से आते हैं। उनके लिए भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित परिसर उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आगामी मेले से पहले मैदान की व्यापक सफाई, जल निकासी और आवश्यक मरम्मत का काम कराया जाना चाहिए ताकि मेले के समय केवल अस्थायी सजावट करके व्यवस्था संभालने की नौबत ना आए। -चौपाटी के रूप में भी विकसित हो सकता है मैदान राहुल मदेरणा

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का कहना है कि इतने बड़े परिसर को साल में सिर्फ एक बार लगने वाले मेले तक सीमित रखने के बजाय इसे स्थायी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां व्यवस्थित चौपाटी, छोटे दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थान, वॉकिंग ट्रैक, हरियाली, बैठने की व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था की जाए तो यह शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। -प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग स्थानीय निवासी राहुल मदेरणा, रुपेश खंडेलवाल, सुशांत गुप्ता, उमेश तिवारी, मनोज खण्डेलवाल ने जिला प्रशासन और भरतपुर विकास प्राधिकरण से मांग की है कि जसवंत प्रदर्शनी मैदान का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और निम्न कार्य प्राथमिकता से कराए जाएं। पूरे परिसर की विशेष सफाई कराई जाए, खुले में पड़ा कचरा और अनावश्यक सामग्री हटाई जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, पर्याप्त नालियां और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, पुराने गेटों का जीर्णोद्धार कराया जाए, मैदान की लाइटें नियमित रूप से चालू रखी जाएं, बड़े स्तर पर पौधरोपण कर हरित क्षेत्र विकसित किया जाए, वॉकिंग ट्रैक और बैठने की व्यवस्था बनाई जाए, महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा एवं स्मृति स्थल विकसित किया जाए, एक आकर्षक और व्यवस्थित मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाए, आगामी जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले से पहले पूरे परिसर को साफ और व्यवस्थित किया जाए। मदेरणा का कहना है कि सात करोड़ रुपये खर्च करके किसी सार्वजनिक परिसर को विकसित करना पहला कदम है लेकिन उसकी असली सफलता उसके नियमित रखरखाव और जनता के उपयोग में है। यदि साफ-सफाई, हरियाली, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था पर लगातार ध्यान दिया जाए तो यही ऐतिहासिक मैदान भरतपुर की खूबसूरत पहचान बन सकता है। प्रशासन को चाहिए कि करोड़ों रुपये से तैयार किए गए इस परिसर को उपेक्षा के कारण खराब होने देने के बजाय इसकी नियमित देखरेख की स्थायी व्यवस्था करे।

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    प्रकाश दोसावत
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    21 hrs ago
  • प्रेम संबंध निभाने के लिए पति को देती रही नींद की गोली एक अनोखा किस्सा जिसने शादी के रिश्तें को तार तार कर दिया प्रेमिका हो तो ऐसी हो घरवालों की ख़ुशी के लिए शादी दूसरे से लेकिन संबंध ससुराल में भी प्रेमी से बनाती थी 45 दिन की शादी में प्रेमी का वादा न तोड़ी दूसरे की पत्नी बनने के बाद भी! शादी के बाद भी प्रेमी से किया वादा निभाया, 45 दिन में 23 अगस्त को खुल गया पूरा राज झांसी–भांडेर: झांसी के एक युवक और मध्य प्रदेश के भांडेर की युवती की शादी 24 जून 2026 को परिवार की मर्जी से हुई थी। बताया जा रहा है कि युवती इस शादी से पूरी तरह सहमत नहीं थी और शादी से पहले उसने अपने प्रेमी से कथित तौर पर वादा किया था कि परिवार की खुशी के लिए शादी तो कर लेगी, लेकिन पति को करीब नहीं आने देगी। आरोप है कि शादी के बाद युवती अपने प्रेमी को ससुराल बुलाने लगी। पति को कथित तौर पर नींद की गोली देने के बाद वह प्रेमी के साथ रात बिताती थी। बताया जा रहा है कि प्रेमी को रात करीब 10 बजे ससुराल बुलाया जाता था और सुबह करीब 4 बजे वह वहां से चला जाता था। परिजनों और पति की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, करीब 45 दिनों की शादी के दौरान कई बार प्रेमी को ससुराल बुलाया गया और लगभग 20 दिनों तक दोनों के बीच संबंध रहे। इसी दौरान 23 अगस्त को पति ने कथित तौर पर प्रेमी को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, पत्नी और प्रेमी की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष तथा पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही माना जाना चाहिए घटना के सामने आने के बाद लोग शादी, आपसी सहमति और रिश्तों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शादी के महज 45 दिनों के भीतर ही पति को पत्नी और उसके कथित प्रेमी के संबंधों की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
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    प्रेम संबंध निभाने के लिए पति को देती रही नींद की गोली एक अनोखा किस्सा जिसने शादी के रिश्तें को तार तार कर दिया 
प्रेमिका हो तो ऐसी  हो घरवालों की ख़ुशी के लिए शादी दूसरे से लेकिन संबंध ससुराल में भी प्रेमी से बनाती थी 45 दिन की शादी में प्रेमी का वादा न तोड़ी दूसरे की पत्नी बनने के बाद भी! शादी के बाद भी प्रेमी से किया वादा निभाया, 45 दिन में 23 अगस्त को खुल गया पूरा राज
झांसी–भांडेर: झांसी के एक युवक और मध्य प्रदेश के भांडेर की युवती की शादी 24 जून 2026 को परिवार की मर्जी से हुई थी। बताया जा रहा है कि युवती इस शादी से पूरी तरह सहमत नहीं थी और शादी से पहले उसने अपने प्रेमी से कथित तौर पर वादा किया था कि परिवार की खुशी के लिए शादी तो कर लेगी, लेकिन पति को करीब नहीं आने देगी।
आरोप है कि शादी के बाद युवती अपने प्रेमी को ससुराल बुलाने लगी। पति को कथित तौर पर नींद की गोली देने के बाद वह प्रेमी के साथ रात बिताती थी। बताया जा रहा है कि प्रेमी को रात करीब 10 बजे ससुराल बुलाया जाता था और सुबह करीब 4 बजे वह वहां से चला जाता था।
परिजनों और पति की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, करीब 45 दिनों की शादी के दौरान कई बार प्रेमी को ससुराल बुलाया गया और लगभग 20 दिनों तक दोनों के बीच संबंध रहे। इसी दौरान 23 अगस्त को पति ने कथित तौर पर प्रेमी को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, पत्नी और प्रेमी की ओर से लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष तथा पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही माना जाना चाहिए
घटना के सामने आने के बाद लोग शादी, आपसी सहमति और रिश्तों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शादी के महज 45 दिनों के भीतर ही पति को पत्नी और उसके कथित प्रेमी के संबंधों की जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
    user_News
    News
    Piploda, Ratlam•
    1 hr ago
  • डिप्टी सीएम के भाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस, सियासी गलियारे में हड़कंप, रामपुरा नगर परिषद पर लगे गंभीर आरोप, मुद्दा जनहित का हैं या मामला हैं कुछ ओर? मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री के गृह नगर रामपुरा जिला नीमच में उनके बड़े भाई और समाजसेवी मुरली देवड़ा ने मंगलवार को रामपुरा स्थित डाक बंगले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर परिषद पर भ्रष्टाचार व धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं। बड़ी संख्या में उपस्थित पत्रकारों के बीच ​समाजसेवी देवड़ा का कहना है कि, बीते वर्ष प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रामपुरा के विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ की घोषणा की थी, जिसकी पहली किस्त के रूप में नगर परिषद को 75 लाख मिले थे। ​मुरली देवड़ा का दावा है कि, इस 75 लाख की राशि के उपयोग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता की गई है। ​उप मुख्यमंत्री के अपने गृह नगर में उनके ही भाई द्वारा नगर परिषद की घेराबंदी करने से स्थानीय राजनीति और जनहित के मुद्दों को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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    डिप्टी सीएम के भाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस,

सियासी गलियारे में हड़कंप,

रामपुरा नगर परिषद पर लगे गंभीर आरोप,
मुद्दा जनहित का हैं या मामला हैं कुछ ओर?
मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री के गृह नगर रामपुरा जिला नीमच में उनके बड़े भाई और समाजसेवी मुरली देवड़ा ने मंगलवार को रामपुरा स्थित डाक बंगले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर परिषद पर भ्रष्टाचार व धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
बड़ी संख्या में उपस्थित पत्रकारों के बीच ​समाजसेवी देवड़ा का कहना है कि, बीते वर्ष प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रामपुरा के विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ की घोषणा की थी, जिसकी पहली किस्त के रूप में नगर परिषद को 75 लाख मिले थे।
​मुरली देवड़ा का दावा है कि, इस 75 लाख की राशि के उपयोग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता की गई है।
​उप मुख्यमंत्री के अपने गृह नगर में उनके ही भाई द्वारा नगर परिषद की घेराबंदी करने से स्थानीय राजनीति और जनहित के मुद्दों को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
    user_वि के (बंटी)राठौर
    वि के (बंटी)राठौर
    Newspaper publisher नीमच, नीमच, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • अरनोद नगर पालिका चुनाव को लेकर प्रशासन अलर्ट, मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का लिया जायजा
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    अरनोद नगर पालिका चुनाव को लेकर प्रशासन अलर्ट, मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का लिया जायजा
    user_Baba
    Baba
    अरनोद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    6 hrs ago
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