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जयराम महतो पर गिर सकती है गाज? वीडियो डिलीट कराने में जुटे नेता-मंत्री || सदन के बाहर आते ही जयराम ने खोल दिया सारा पोल।। #tigerjairammahato #jlkm
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जयराम महतो पर गिर सकती है गाज? वीडियो डिलीट कराने में जुटे नेता-मंत्री || सदन के बाहर आते ही जयराम ने खोल दिया सारा पोल।। #tigerjairammahato #jlkm
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- महुआडांड़ (लातेहार) 2024 में मां की मृत्यु के बाद 10 वर्षीय करण तिर्की और कोमल तिर्की का जीवन संकट में पड़ गया। पिता दीपक तिर्की इस घटना के बाद घर छोड़कर चले गए घर में केवल बुजुर्ग दादा और दादी रह गए, जो बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ हैं। ऐसी स्थिति में दोनों बच्चों को उनकी बुआ के घर रहना पड़ा। हालांकि, बुआ के परिवार में पहले से मौजूद जिम्मेदारियों के बीच बच्चों का रहना धीरे-धीरे पारिवारिक विवाद का कारण बनने लगा। स्थिति बिगड़ती देख बुआ ने सामाजिक सहयोग की तलाश की और आर पी एस सेवा संस्थान से संपर्क किया। संस्थान ने मामले की गंभीरता को समझते हुए दोनों बच्चों को अपने संरक्षण में ले लिया और उन्हें आश्रय प्रदान किया। संस्था द्वारा बच्चों की देखभाल, शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।1
- विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।1
- ✍रंजन चौधरी सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है। यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जिह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अद्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं। झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।1
- विश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत गुरहा कला पंचायत के मल्लाह टोली स्थित राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय में गुरुवार को विद्यालय प्रबंधन समिति का चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराया गया। इस दौरान कुल सोलह सदस्यों की उपस्थिति में सर्वसम्मति से समिति का गठन किया गया।1
- डुमरी टोल प्लाजा के पास आज का दुखद घटना तीन गाड़ियां टकरा गई जिससे दो गाड़िया पुरी तरह जल कर राख हो गई एक टेलर को स्थानीय लोगों के प्रयास से इंजन वाले हिस्से को बचा लिया गया, चालक का अभी कोई पता नहीं1
- इचाक पुलिस को बड़ी सफलता, चोरी के जेवरात बरामद — एक आरोपी गिरफ्तार1
- बरवाडीह(लातेहार): लातेहार जिला अंतर्गत बरवाडीह प्रखंड के केचकी पंचायत स्थित ग्राम केचकी में बखोरीडेरा स्कूल से औरंगा नदी तक बन रही पीसीसी सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता की ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से बाहर से मंगाई गई “राजन मार्का” ईंट को सोलिंग में लगाया जा रहा है, जो मानक के अनुरूप नहीं है। साथ ही, ईंट सोलिंग भी नियमों के अनुसार नहीं की गई है और पीसीसी ढलाई में भी गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण भी नहीं हुआ है, लेकिन योजना स्थल पर लगाया गया शिलापट्ट पहले ही हटा दिया गया है, जिसे लेकर लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिलापट्ट हटाना पूरी तरह गलत है और इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। मौके पर ग्रामीणों रनवीर सिंह, सहादेव यादव, सुशील सिंह, आशिष सिंह, श्रीराम सिंह, लालधारी यादव, योगेंद्र यादव, चंदन सिंह, शीला देवी, सुनीता देवी, सुमन देवी, बाबूराम सिंह, सोनू यादव, सूरज यादव, गुड्डू यादव, कोमल सिंह, गुलशन सिंह, बनवारी यादव, आशिष यादव, शांति देवी समेत कई लोगों ने विरोध जताते हुए पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखी।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि कोई भी ईमानदार अधिकारी मौके पर आकर जांच करें तो सच्चाई सामने आ जाएगी।1
- उसकी मासूम आवाज़ में छुपी समझदारी ने सबका ध्यान खींच लिया — आप भी सुनिए आखिर उसने क्या कहा!1
- भाजपा के प्रदेश बैठकें एवं कार्यक्रम प्रभारी स्वामी देवेन्द्र प्रकाश ने उमेडण्डा स्थित खुशबू के शोकसंतप्त परिजनों से मिलकर आर्थिक सहायता एवं सांत्वना प्रदान किया। मौके पर स्वामी देवेंद्र प्रकाश ने दलित युवती खुश्बू की निर्मम हत्या को आधुनिक समाज का घृणित कलंक बताते हुए कहा की आज हम देश को हक़ हुकूक़ का क़ानूनरूपी संविधान देनेवाले डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहे हैं लेकिन खुश्बू की आत्मा न्याय की उम्मीद लगाये होगी। उन्होंने कहा की आज बाबा साहेब की जयंती में हम खुशबू को न्याय दिलाने का संकल्प लेते हैं जो आर्थिक सहायता या फोटो खिंचाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मैं खुश्बू के परिजनों के साथ निरंतर सडक से न्यायालय तक हत्यारों को कड़ी सजा दिलाने केलिये दृढ़ संकल्पित हूँ। उन्होंने समाज की इस बेटी को न्याय दिलाने तक चैन की सांस नहीं लेने की बात कही। मौके पर बिंदू शाहदेव, विजय साहू, विकास साहू, अर्जुन महतो, पवन महतो, राजू राम, तारकेश्वर भारती समेत दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।1