संतान सप्तमी व्रत का निर्णय संतान सप्तमी व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास शुक्लपक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है जिसे मुक्ताभरण सप्तमी संतान सप्तमी व्रत का निर्णय संतान सप्तमी व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास शुक्लपक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है जिसे मुक्ताभरण सप्तमी भी कहते हैं। इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन कर उन्हें नैवेद्य के रूप में मीठी पूरी अर्थात मालपुआ का भोग लगाया जाता है । इस बार यह तिथि काशी के हृषीकेश पंचांग के अनुसार दिनांक 17 सितंबर गुरुवार को प्रातः काल 10 बजकर 28 मिनट से अगले दिन 18 सितम्बर 2026 के दिन 12 बजकर 16 मिनट तक है। निर्णय सिंधु ग्रन्थ का मत है- सप्तमीपूर्वयुता ग्राह्या (षण्मुन्यो: इति युग्मवाक्यात्। ) अर्थात् सप्तमी तिथि पहले दिन वाली ग्रहण करना चाहिए इस दृष्टि से संतान सप्तमी का व्रत 17 सितंबर को रखना चाहिए। क्योंकि संतान सप्तमी के व्रत का पूजन मध्यान्ह काल में किया जाता है और 17 सितंबर को 10 बजकर 28 मिनट से लेकर अगले दिन 18 सितंबर 12:16 बजे तक सप्तमी प्राप्त हो रही है। तो 17 तारीख को मध्यान्ह में किसी भी समय इसका पूजन किया जा सकता है। किंतु यदि सूर्यउदययुक्त तिथि देखें तो सप्तमी 18 सितंबर को प्राप्त हो रही है। जो कि 18 सितंबर को मध्यान्ह के लगभग 12 बज कर कुछ मिनट तक ही है। यदि मातायें इस व्रत को उत्तम संतान की प्राप्ति हेतु एवं संतान की दीर्घायु की कामना से तथा संतान के स्वास्थ्य हेतु यह व्रत 18 सितंबर को करना चाहे तो निश्चित रूप से उन्हें 18 सितंबर को मध्यान्ह काल में 12:00 बजे के पहले ही अपना पूजन कार्य पूर्ण करना अनिवार्य होगा। काशी के ऋषिकेश पंचांग तथा जबलपुर के लोकविजय पंचांग के अनुसार संतान सप्तमी 17 सितंबर को दी गई है। जबकि अन्य पंचांगों में संतान सप्तमी 18 सितंबर की भी दी गई है। ऐसी स्थिति में निर्णय सिंधु में एक ही निर्णय प्राप्त होता है कि पूर्व वाली तिथि लेना चाहिए इस दृष्टि से 17 सितंबर को ही माताओं के लिये यह व्रत श्रेयस्कर है। 18 सितंबर को भी इस व्रत को किया जा सकता है । क्योंकि 18 सितंबर को व्रत का किसी प्रकार से निषेध नहीं बतलाया गया है। जिनके जीवन में संतान सुख न हो और जिनकी संतान रोगी हो या संतान के जीवन में बार-बार कष्ट आ रहे हो तो ऐसी संतान की माताओं को संतान सप्तमी का व्रत अवश्य रूप से करना चाहिए। ऐसा करने से उनकी संतान संबंधी समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं साथ ही दिनांक 17 सितंबर गुरुवार को भगवान कार्तिकेय के दर्शन करने से ब्रह्म हत्या जैसे पापों से मुक्ति मिलती है इस दिन भगवान कार्तिकेय के दर्शन करने का बडा महत्व है। और भगवान विश्वकर्मा का भी पूजन इसी दिन शुभ कारक है। आचार्य पंडित सोहन शास्त्री परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर
संतान सप्तमी व्रत का निर्णय संतान सप्तमी व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास शुक्लपक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है जिसे मुक्ताभरण सप्तमी संतान सप्तमी व्रत का निर्णय संतान सप्तमी व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास शुक्लपक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है जिसे मुक्ताभरण सप्तमी भी कहते हैं। इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन कर उन्हें नैवेद्य के रूप में मीठी पूरी अर्थात मालपुआ का भोग लगाया जाता है । इस बार यह तिथि काशी के हृषीकेश पंचांग के अनुसार दिनांक 17 सितंबर गुरुवार को प्रातः काल 10 बजकर 28 मिनट से अगले दिन 18 सितम्बर 2026 के दिन 12 बजकर 16 मिनट तक है। निर्णय सिंधु ग्रन्थ का मत है- सप्तमीपूर्वयुता ग्राह्या (षण्मुन्यो: इति युग्मवाक्यात्। ) अर्थात् सप्तमी तिथि पहले दिन वाली ग्रहण करना चाहिए इस दृष्टि से संतान सप्तमी का व्रत 17 सितंबर को रखना चाहिए। क्योंकि संतान सप्तमी के व्रत का पूजन मध्यान्ह काल में किया जाता है और 17 सितंबर को 10 बजकर 28 मिनट से लेकर अगले दिन 18 सितंबर 12:16 बजे तक सप्तमी प्राप्त हो रही है। तो 17 तारीख को मध्यान्ह में किसी भी समय इसका पूजन किया जा सकता है। किंतु यदि सूर्यउदययुक्त तिथि देखें तो सप्तमी 18 सितंबर को प्राप्त हो रही है। जो कि 18 सितंबर को मध्यान्ह के लगभग 12 बज कर कुछ मिनट तक ही है। यदि मातायें इस व्रत को उत्तम संतान की प्राप्ति हेतु एवं संतान की दीर्घायु की कामना से तथा संतान के स्वास्थ्य हेतु यह व्रत 18 सितंबर को करना चाहे तो निश्चित रूप से उन्हें 18 सितंबर को मध्यान्ह काल में 12:00 बजे के पहले ही अपना पूजन कार्य पूर्ण करना अनिवार्य होगा। काशी के ऋषिकेश पंचांग तथा जबलपुर के लोकविजय पंचांग के अनुसार संतान सप्तमी 17 सितंबर को दी गई है। जबकि अन्य पंचांगों में संतान सप्तमी 18 सितंबर की भी दी गई है। ऐसी स्थिति में निर्णय सिंधु में एक ही निर्णय प्राप्त होता है कि पूर्व वाली तिथि लेना चाहिए इस दृष्टि से 17 सितंबर को ही माताओं के लिये यह व्रत श्रेयस्कर है। 18 सितंबर को भी इस व्रत को किया जा सकता है । क्योंकि 18 सितंबर को व्रत का किसी प्रकार से निषेध नहीं बतलाया गया है। जिनके जीवन में संतान सुख न हो और जिनकी संतान रोगी हो या संतान के जीवन में बार-बार कष्ट आ रहे हो तो ऐसी संतान की माताओं को संतान सप्तमी का व्रत अवश्य रूप से करना चाहिए। ऐसा करने से उनकी संतान संबंधी समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं साथ ही दिनांक 17 सितंबर गुरुवार को भगवान कार्तिकेय के दर्शन करने से ब्रह्म हत्या जैसे पापों से मुक्ति मिलती है इस दिन भगवान कार्तिकेय के दर्शन करने का बडा महत्व है। और भगवान विश्वकर्मा का भी पूजन इसी दिन शुभ कारक है। आचार्य पंडित सोहन शास्त्री परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर
- *हनुमानजी की भक्ति में रंगे रामभक्त, संगीतमय सुंदरकांड पाठ में उमड़ी श्रद्धा*। गोटेगांव। श्री राम रामायण समिति द्वारा पिछले 40 वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर *हनुमानजी की भक्ति में रंगे रामभक्त, संगीतमय सुंदरकांड पाठ में उमड़ी श्रद्धा*। गोटेगांव। श्री राम रामायण समिति द्वारा पिछले 40 वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर श्री रामचरितमानस अखंड पाठ की परंपरा निभाई जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को हनुमानजी को प्रिय संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन नरेंश, सतीश, महेश नामदेव जी के व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर किया गया। सुंदरकांड पाठ के दौरान रामभक्तों ने भजनों और संगीतमय प्रस्तुति के साथ श्रद्धापूर्वक पाठ किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान श्रीराम एवं हनुमानजी की आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।1
- नरसिंहपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: शातिर मोटरसाइकिल चोर गिरफ्तार, 7 लाख कीमत की 11 बाइक बरामद नरसिंहपुर: जिले में चोरी की वारदातों पर प्रभावी अंकुश लगाने और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत नरसिंहपुर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना स्टेशनगंज पुलिस ने दो शातिर चोरों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी की 11 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। बरामद वाहनों की कुल अनुमानित कीमत करीब 7 लाख रुपये बताई जा रही है।1
- EXPRESS MP CG NEWS1
- पटवारियों को अलग रखने की मांग, मुख्यमंत्री और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026” योजना के तहत होने वाले निष्पादन, ई-केवाईसी, पंजीयन एवं व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े कार्यों से पटवारी संवर्ग को पृथक रखने की मांग की है। इस संबंध में जिला पटवारी संघ नरसिंहपुर की ओर से मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन एवं कलेक्टर नरसिंहपुर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में जिला अध्यक्ष राहुल पटेल ने कहा कि पटवारी संघ स्वामित्व योजना का विरोध नहीं करता। संघ का मानना है कि योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को उनकी संपत्ति संबंधी अधिकारों का अभिलेख मिलने तथा ऋण आदि की सुविधा प्राप्त होने में मदद मिलेगी। हालांकि योजना के क्रियान्वयन में पटवारियों को दिए जा रहे अतिरिक्त दायित्वों को लेकर संघ ने आपत्ति जताई है। संघ के अनुसार ग्रामीण आबादी क्षेत्र की भूमि का स्वरूप सामान्य राजस्व कृषि भूमि से अलग है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण एवं मानचित्रण पंचायत राज व्यवस्था के मार्गदर्शन में किया गया था। इस दौरान राजस्व विभाग के पटवारियों ने आवश्यक नक्शा, नाप एवं तकनीकी कार्यों में सहयोग किया। पटवारी संघ का कहना है कि पटवारियों की भूमिका मुख्य रूप से सहयोगात्मक एवं अभिलेखीय/मैदानी सहायता तक सीमित रही है। अब योजना के अंतर्गत ई-केवाईसी, पंजीयन एवं व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े कार्यों को पटवारियों पर डालने का संघ ने विरोध किया है। संघ ने शासन से मांग की है कि पटवारी संवर्ग को इन अतिरिक्त कार्यों एवं व्यक्तिगत दायित्व से अलग रखा जाए। पटवारियों को अलग रखने की मांग, मुख्यमंत्री और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने “स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026” योजना के तहत होने वाले निष्पादन, ई-केवाईसी, पंजीयन एवं व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े कार्यों से पटवारी संवर्ग को पृथक रखने की मांग की है। इस संबंध में जिला पटवारी संघ नरसिंहपुर की ओर से मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन एवं कलेक्टर नरसिंहपुर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में जिला अध्यक्ष राहुल पटेल ने कहा कि पटवारी संघ स्वामित्व योजना का विरोध नहीं करता। संघ का मानना है कि योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को उनकी संपत्ति संबंधी अधिकारों का अभिलेख मिलने तथा ऋण आदि की सुविधा प्राप्त होने में मदद मिलेगी। हालांकि योजना के क्रियान्वयन में पटवारियों को दिए जा रहे अतिरिक्त दायित्वों को लेकर संघ ने आपत्ति जताई है। संघ के अनुसार ग्रामीण आबादी क्षेत्र की भूमि का स्वरूप सामान्य राजस्व कृषि भूमि से अलग है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण एवं मानचित्रण पंचायत राज व्यवस्था के मार्गदर्शन में किया गया था। इस दौरान राजस्व विभाग के पटवारियों ने आवश्यक नक्शा, नाप एवं तकनीकी कार्यों में सहयोग किया। पटवारी संघ का कहना है कि पटवारियों की भूमिका मुख्य रूप से सहयोगात्मक एवं अभिलेखीय/मैदानी सहायता तक सीमित रही है। अब योजना के अंतर्गत ई-केवाईसी, पंजीयन एवं व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े कार्यों को पटवारियों पर डालने का संघ ने विरोध किया है। संघ ने शासन से मांग की है कि पटवारी संवर्ग को इन अतिरिक्त कार्यों एवं व्यक्तिगत दायित्व से अलग रखा जाए।4
- सत्यधारा घाट दृश्य नर्मदे हर जिंदगी भर 🙏 नरसिंहपुर जिला1
- उमरिया- दर्द से तड़पती रही प्रसूता नही पहुची एंबुलेस महिला को पिक अप से अस्पताल लेकर पहुची महिला1
- नरसिंहपुर से सतीश स्काई इंडिया टीवी चैनल विश्वकर्मा की रिपोर्ट नरसिहपुर पुलिस की बड़ी सफलता: 02 शातिर मोटरसाइकिल चोर गिरफ्तार, 07 चोरी की बाइक बरामद चाचा भतिजे करते थे मोटरसाइकिल चोरी 1
- सराफा बाजार गोटेगांव में विधि-विधान से विराजे प्रथम पूज्य गणपति गोटेगांव। सराफा बाजार में गणेशोत्सव के अवसर सराफा बाजार गोटेगांव में विधि-विधान से विराजे प्रथम पूज्य गणपति गोटेगांव। सराफा बाजार में गणेशोत्सव के अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन कर स्थापना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की आरती कर सुख-समृद्धि और नगर की खुशहाली की कामना की। स्थापना के बाद सराफा बाजार गणपति बप्पा के जयकारों से गूंज उठा। 🙏🌺1