राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायत करोंदी में श्मशान घाट तक जाने वाले मुख्य सरकारी रास्ते और श्मशान की भूमि पर कुछ दबंग लोगों द्वारा कथित अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सरकारी भूमि को खेत में तब्दील कर दिया गया है, जिसके चलते अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों के दौरान ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ग्रामीण शव को कंधे पर उठाकर घुटनों तक गहरे कीचड़ और पानी से भरे खेतों के बीच से श्मशान ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बारिश के कारण क्षेत्र में बनी ऐसी स्थिति के बीच लोगों को अंतिम संस्कार की लकड़ी और अन्य सामग्री भी सिर पर ढोकर ले जानी पड़ रही है। इसके अलावा, शव यात्रा के दौरान विश्राम करने और पानी पिलाने के लिए बनी पारंपरिक जगह को भी तोड़े जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि जब वे सरकारी रास्ता खाली कराने की मांग करते हैं, तो उन्हें मारपीट और जान से मारने की धमकियां मिलती हैं और कई बार शव यात्रा को रोकने का प्रयास भी किया जाता है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और बाहर से आए लोगों ने भी नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और श्मशान घाट तक जाने के लिए एक सुरक्षित व पक्का रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है।
राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायत करोंदी में श्मशान घाट तक जाने वाले मुख्य सरकारी रास्ते और श्मशान की भूमि पर कुछ दबंग लोगों द्वारा कथित अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सरकारी भूमि को खेत में तब्दील कर दिया गया है, जिसके चलते अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों के दौरान ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ग्रामीण शव को कंधे पर उठाकर घुटनों तक गहरे कीचड़ और पानी से भरे खेतों के बीच से श्मशान ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बारिश के कारण क्षेत्र में बनी ऐसी स्थिति के बीच लोगों को अंतिम संस्कार की लकड़ी और अन्य सामग्री भी सिर पर ढोकर ले जानी पड़ रही है। इसके अलावा, शव यात्रा के दौरान विश्राम करने और पानी पिलाने के लिए बनी पारंपरिक जगह को भी तोड़े जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि जब वे सरकारी रास्ता खाली कराने की मांग करते हैं, तो उन्हें मारपीट और जान से मारने की धमकियां मिलती हैं और कई बार शव यात्रा को रोकने का प्रयास भी किया जाता है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और बाहर से आए लोगों ने भी नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और श्मशान घाट तक जाने के लिए एक सुरक्षित व पक्का रास्ता उपलब्ध कराने की मांग की है।
- दतिया में जारी चुनावी सरगर्मियों के बीच आजाद समाज पार्टी का पक्ष सामने आया है। एडवोकेट रायसिंह बौद्ध ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के जरिए दतिया की चुनावी जंग और पार्टी की स्थिति पर अपने विचार साझा किए हैं।1
- राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले मुंडला नारायण गांव के निवासी रोहित पटेल ने गांव के मुख्य रास्ते की बदहाली को लेकर गंभीर समस्या उठाई है। मंडावर से 3 किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित इस गांव में 10 परिवारों के लगभग 50 लोग निवास करते हैं। रोहित पटेल के अनुसार, गांव से 400 मीटर तक का रास्ता अत्यधिक खराब स्थिति में है, जिसके कारण बारिश के मौसम में वहां से पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत न्यूनियहेडी के सरपंच महेश यादव कोई भी कार्य नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि सरपंच स्वयं इसी गांव से संबंध रखते हैं, फिर भी सड़क की दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।2
- गुना जिले के भिंडरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम भिंडरा में सड़क की दयनीय स्थिति के चलते ग्रामीण स्वयं ही सड़क सुधारने के कार्य में जुट गए हैं। बरसात के मौसम में सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे पैदल चलना भी अत्यंत कठिन हो गया है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण विवश होकर ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और निजी खर्च से रोडा (गिट्टी) डलवाना शुरू कर दिया है ताकि आवागमन को सुगम बनाया जा सके। ग्रामीणों के अनुसार, इस मार्ग से स्कूली बच्चे, किसान, बुजुर्ग और महिलाएं प्रतिदिन गुजरते हैं। सड़क पर भारी कीचड़ होने के कारण अक्सर दोपहिया वाहन फिसल जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि स्थायी निर्माण नहीं हुआ, तो आगामी दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। प्रशासन की इस अनदेखी पर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अब जिला प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि शासन के कार्यों को अब आम नागरिक अपने संसाधनों से पूरा करने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीण अब संबंधित अधिकारियों से स्थल निरीक्षण कर जल्द समस्या के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।4
- दतिया के नेशनल हाईवे-44 पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के हजारों समर्थकों ने भारी विरोध प्रदर्शन करते हुए जाम लगा दिया है। यह विरोध भाजपा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद शुरू हुआ है। घटनास्थल पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तैनात किए गए हैं।1
- हिमाचल प्रदेश में एक झरने ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया है। देखते ही देखते झरने का पानी खतरनाक सैलाब में बदल गया और स्थिति भयावह हो गई। इस प्राकृतिक घटना ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया, जिससे आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।1
- मध्य प्रदेश के इटारसी में एक युवक ट्रेन की छत पर चढ़ गया, जिसके बाद एक बड़ा हादसा हो गया। ट्रेन की छत पर चढ़ते ही युवक का संपर्क ओएचई (OHE) लाइन से हो गया, जिसके छूते ही यह दुर्घटना घटी।1