मैहर सिविल अस्पताल बना ‘सफेद हाथी’ ऑक्सीजन प्लांट बंद, लिफ्ट ठप — मरीजों की सांसें सिस्टम के भरोसे मैहर। जिस अस्पताल पर जिले की जनता की सेहत टिकी है, वही आज लापरवाही और बदइंतजामी की मिसाल बन चुका है। सुविधाएं मौजूद, मशीनें मौजूद, बजट खर्च—लेकिन संचालन शून्य! सवाल सीधा है: क्या मैहर का सिविल अस्पताल सिर्फ उद्घाटन और फोटो सेशन के लिए है? 🔴 *दो-दो ऑक्सीजन प्लांट, फिर भी किराए की सांस*! कोरोना काल में जनभागीदारी से करीब 50 लाख की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगा। उसके बाद शासकीय स्वास्थ्य विभाग ने दूसरा प्लांट भी स्थापित किया। लेकिन आज दोनों प्लांट सालों से बंद पड़े धूल खा रहे हैं। जब प्लांट बंद ही रखने थे, तो जनता के पैसे से यह दिखावा क्यों? मरीजों का इलाज आज भी किराए की ऑक्सीजन सिलेंडरों से—यह सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है? 🔴 *इमरजेंसी लिफ्ट भी ‘कोमा’ में* आपातकालीन लिफ्ट वर्षों से बंद पड़ी है। हालात इतने बदतर कि उसे पैक कर दिया गया। गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से ढोया जाता है—किसी हादसे का इंतजार है क्या? 🔴 *ICU की हालत शर्मनाक* आईसीयू में बेड पर ढंग की चादर तक नहीं। फटे गद्दे, जर्जर हालात। मरीज अपने घर से चादर लाएं या फटे बिस्तर पर जिंदगी से जंग लड़ें—यही विकल्प बचा है। यह जिला स्तर का अस्पताल है या उपेक्षा का प्रतीक? 🔴 *जवाबदेही से भागता सिस्टम* अस्पताल की देखरेख रोगी कल्याण समिति के जिम्मे है। मशीनें टूट रहीं, प्लांट बंद, लिफ्ट ठप—लेकिन कार्रवाई शून्य। अंदरखाने चर्चा है कि अस्पताल में वीआईपी आवाजाही बनी रहती है, मगर जमीनी समस्याओं पर ठोस निर्णय कोई नहीं लेता। ❗ *जनता पूछ रही है*: लाखों-करोड़ों का हिसाब कौन देगा? बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट कब चालू होंगे? लिफ्ट कब दुरुस्त होगी? ICU की बदहाली कब खत्म होगी? मैहर का सिविल अस्पताल आज सुविधाओं के बावजूद बदइंतजामी का शिकार है। अगर यही हाल रहा, तो “जिला अस्पताल” का तमगा सिर्फ बोर्ड पर रह जाएगा, जमीन पर नहीं। अब वक्त है कि जिम्मेदार विभाग जागे—वरना जनता का आक्रोश ही असली इलाज बनेगा।
मैहर सिविल अस्पताल बना ‘सफेद हाथी’ ऑक्सीजन प्लांट बंद, लिफ्ट ठप — मरीजों की सांसें सिस्टम के भरोसे मैहर। जिस अस्पताल पर जिले की जनता की सेहत टिकी है, वही आज लापरवाही और बदइंतजामी की मिसाल बन चुका है। सुविधाएं मौजूद, मशीनें मौजूद, बजट खर्च—लेकिन संचालन शून्य! सवाल सीधा है: क्या मैहर का सिविल अस्पताल सिर्फ उद्घाटन और फोटो सेशन के लिए है? 🔴 *दो-दो ऑक्सीजन प्लांट, फिर भी किराए की सांस*! कोरोना काल में जनभागीदारी से करीब 50 लाख की लागत
से ऑक्सीजन प्लांट लगा। उसके बाद शासकीय स्वास्थ्य विभाग ने दूसरा प्लांट भी स्थापित किया। लेकिन आज दोनों प्लांट सालों से बंद पड़े धूल खा रहे हैं। जब प्लांट बंद ही रखने थे, तो जनता के पैसे से यह दिखावा क्यों? मरीजों का इलाज आज भी किराए की ऑक्सीजन सिलेंडरों से—यह सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है? 🔴 *इमरजेंसी लिफ्ट भी ‘कोमा’ में* आपातकालीन लिफ्ट वर्षों से बंद पड़ी है। हालात इतने बदतर कि उसे पैक कर दिया गया। गंभीर मरीजों
को सीढ़ियों से ढोया जाता है—किसी हादसे का इंतजार है क्या? 🔴 *ICU की हालत शर्मनाक* आईसीयू में बेड पर ढंग की चादर तक नहीं। फटे गद्दे, जर्जर हालात। मरीज अपने घर से चादर लाएं या फटे बिस्तर पर जिंदगी से जंग लड़ें—यही विकल्प बचा है। यह जिला स्तर का अस्पताल है या उपेक्षा का प्रतीक? 🔴 *जवाबदेही से भागता सिस्टम* अस्पताल की देखरेख रोगी कल्याण समिति के जिम्मे है। मशीनें टूट रहीं, प्लांट बंद, लिफ्ट ठप—लेकिन कार्रवाई शून्य। अंदरखाने चर्चा है कि अस्पताल में
वीआईपी आवाजाही बनी रहती है, मगर जमीनी समस्याओं पर ठोस निर्णय कोई नहीं लेता। ❗ *जनता पूछ रही है*: लाखों-करोड़ों का हिसाब कौन देगा? बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट कब चालू होंगे? लिफ्ट कब दुरुस्त होगी? ICU की बदहाली कब खत्म होगी? मैहर का सिविल अस्पताल आज सुविधाओं के बावजूद बदइंतजामी का शिकार है। अगर यही हाल रहा, तो “जिला अस्पताल” का तमगा सिर्फ बोर्ड पर रह जाएगा, जमीन पर नहीं। अब वक्त है कि जिम्मेदार विभाग जागे—वरना जनता का आक्रोश ही असली इलाज बनेगा।
- Post by Rudra Pratap Singh Parihar1
- मैहर: आदिवासियों की साढ़े तीन हेक्टेयर जमीन हड़पने का पर्दाफाश; EOW ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला रीवा/मैहर: मध्य प्रदेश के मैहर जिले में आदिवासियों की बेशकीमती जमीन को फर्जीवाड़े के जरिए बेचने और करोड़ों रुपये के गबन का एक बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने इस संबंध में राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला? EOW रीवा के एसपी डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि मामला मैहर जिले के ग्राम बदनपुर का है। यहाँ अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के समीप स्थित आदिवासियों की लगभग 3.5 हेक्टेयर (साढ़े तीन हेक्टेयर) जमीन को फर्जी तरीके से हड़प लिया गया।1
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- मैहर - फर्जी वारिसाना एंव ऋण पुस्तिका तैयार कर आदिवासियों की जमीन हड़प कर अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी मैहर को बेचने के मामले में EOW रीवा में 9 से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज। कार्रवाई के बारे में जानकारी देते EOW रीवा के एसपी डॉ.अरविंद सिंह ठाकुर2
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- Post by Pushpendra Kumar Ravi1
- Post by बलराम सिंह राजपूत2
- शिवपाल यादव उत्तर प्रदेश1