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झारखंड के जामताड़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ मोनू टुडू नामक एक मरीज को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाई। गंभीर स्थिति में मोनू टुडू को ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करते हुए गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
Sunil Kumar journalist
झारखंड के जामताड़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ मोनू टुडू नामक एक मरीज को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाई। गंभीर स्थिति में मोनू टुडू को ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश, रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करते हुए गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
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- झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच बेहराडीह की एक युवती द्वारा भागकर शादी करने और उसका वीडियो वायरल करने के बाद, उसके परिवार ने एक असाधारण कदम उठाया है। युवती ने वायरल वीडियो में स्पष्ट किया था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और अगर उसके पति के परिवार को कोई परेशानी होती है, तो उसके अपने परिवार वाले दोषी होंगे। इस घटना के बाद, युवती के परिवार वालों ने गिरिडीह के सरिया स्थित प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी तट राजदह धाम में अपनी बेटी का प्रतीकात्मक पिंडदान विधि-विधान से कर दिया है। युवती के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी 20 जून 2026 को तय थी और विवाह की सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी थीं। लेकिन 12 जून 2026 की रात, बेटी मौका पाकर घर से फरार हो गई, जिससे पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पिता ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी के इस कदम से उन्हें सामाजिक और मानसिक रूप से गहरा आघात लगा है। इसी भावनात्मक पीड़ा के चलते, उन्होंने परिवार और गाँव समाज के लोगों के साथ मिलकर सरिया स्थित राजदह धाम पहुँचकर अपनी जीवित बेटी का प्रतीकात्मक पिंडदान किया। चूंकि हिंदू धर्म में पिंडदान सामान्यतः मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है, ऐसे में जीवित बेटी का प्रतीकात्मक पिंडदान किए जाने की यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, जहाँ कुछ लोग इसे पिता की भावनात्मक पीड़ा का परिणाम मान रहे हैं, वहीं कुछ अन्य इसे बदलते सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों से जोड़कर देख रहे हैं।1
- झारखंड के कोडरमा में कोर्ट के आदेश पर सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है। इस अभियान के तहत गरीब, दलित और मजदूर परिवारों के घर तोड़े जा रहे हैं। हालांकि, इस पर यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि जिन परिवारों के घर टूट रहे हैं, उनके पुनर्वास के लिए प्रशासन द्वारा क्या व्यवस्था की गई है। यह स्वीकार किया गया है कि कानून का पालन करना आवश्यक है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है कि कोई भी परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश न हो। प्रशासन और सरकार से यह मांग की जा रही है कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अतिक्रमण से प्रभावित हुए इन परिवारों के लिए उचित और तत्काल व्यवस्था करें।1