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भितरवार में दो दिन पहले अज्ञात चोरों ने तहसील कार्यालय के पास लगी स्वान कनेक्टिविटी की नेटवर्क केबल लाइन काट कर चुरा ली थी। इस घटना के बाद से तहसील कार्यालय, रजिस्ट्रार ऑफिस, पुलिस थाने सहित ई-फाइलिंग और अन्य ऑनलाइन पर निर्भर दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया था। अपने आवश्यक ऑनलाइन कार्यों के लिए आने वाले लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा था, जिससे वे काफी परेशान थे। केबल चोरी होने के कारण रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री से लेकर लोक सेवा केंद्र और पुलिस थाने तक सभी जगह कामकाज प्रभावित हो गया था। यहाँ तक कि पुलिस थाने में भी कनेक्टिविटी न होने की स्थिति में एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पा रही थी, जिससे अधिकारी-कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग भी परेशान थे। दो दिन तक चले इस व्यवधान के बाद, शुक्रवार की सुबह ग्वालियर से अमोल सेंगर (आर एफ इंजीनियरिंग) और अमित अग्रवाल (नेटवर्क इंजीनियर) सहित एक इंजीनियर व टेक्नीशियन टीम भितरवार पहुंची। इस टीम ने तहसील कार्यालय के पास स्वान कनेक्टिविटी नेटवर्क की तकनीकी खामियों को दूर करते हुए चोरी हुई केबल लाइन की जगह नई कनेक्टिविटी केबल लाइन डाली। शुक्रवार दोपहर लगभग 12 बजे नई केबल लाइन डालने के बाद तहसील कार्यालय से अन्य कार्यालयों के लिए जाने वाली कनेक्टिविटी शुरू हो सकी। इसके साथ ही लोक सेवा केंद्र, उप पंजीयक कार्यालय, तहसील कार्यालय की नकल शाखा के अलावा तहसील परिसर में स्थित अन्य सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज सामान्य हो पाया। इस प्रकार, कनेक्टिविटी केबल चोरी होने के ठीक दो दिन बाद स्वान का नेटवर्क चालू हो सका और प्रभावित सरकारी दफ्तरों में एक बार फिर काम शुरू हुआ।

2 hrs ago
user_KK Sharma पत्रकार दैनिक भारत मत समाचार
KK Sharma पत्रकार दैनिक भारत मत समाचार
पत्रकार भितरवार, ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago
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भितरवार में दो दिन पहले अज्ञात चोरों ने तहसील कार्यालय के पास लगी स्वान कनेक्टिविटी की नेटवर्क केबल लाइन काट कर चुरा ली थी। इस घटना के बाद से तहसील कार्यालय, रजिस्ट्रार ऑफिस, पुलिस थाने सहित ई-फाइलिंग और अन्य ऑनलाइन पर निर्भर दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया था। अपने आवश्यक ऑनलाइन कार्यों के लिए आने वाले लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा था, जिससे वे काफी परेशान थे। केबल चोरी होने के कारण रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री से लेकर लोक सेवा केंद्र और पुलिस थाने तक सभी जगह कामकाज प्रभावित हो गया था। यहाँ तक कि पुलिस थाने में भी कनेक्टिविटी न होने की स्थिति में एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पा रही थी, जिससे अधिकारी-कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग भी परेशान थे। दो दिन तक चले इस व्यवधान के बाद, शुक्रवार की सुबह ग्वालियर से अमोल सेंगर (आर एफ इंजीनियरिंग) और अमित अग्रवाल (नेटवर्क इंजीनियर) सहित एक इंजीनियर व टेक्नीशियन टीम भितरवार पहुंची। इस टीम ने तहसील कार्यालय के पास स्वान कनेक्टिविटी नेटवर्क की तकनीकी खामियों को दूर करते हुए चोरी हुई केबल लाइन की जगह नई कनेक्टिविटी केबल लाइन डाली। शुक्रवार दोपहर लगभग 12 बजे नई केबल लाइन डालने के बाद तहसील कार्यालय से अन्य कार्यालयों के लिए जाने वाली कनेक्टिविटी शुरू हो सकी। इसके साथ ही लोक सेवा केंद्र, उप पंजीयक कार्यालय, तहसील कार्यालय की नकल शाखा के अलावा तहसील परिसर में स्थित अन्य सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज सामान्य हो पाया। इस प्रकार, कनेक्टिविटी केबल चोरी होने के ठीक दो दिन बाद स्वान का नेटवर्क चालू हो सका और प्रभावित सरकारी दफ्तरों में एक बार फिर काम शुरू हुआ।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • नरवर नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक छोटा तालाब को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। वन विभाग द्वारा झील संवर्धन योजना के तहत विकसित किए गए इस तालाब के मुख्य मार्ग पर गेट और बाउंड्री वॉल बनाने की तैयारी से नगरवासियों में भारी नाराजगी है। नागरिकों ने इसे वन विभाग की मनमानी बताया है और राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि पर अतिक्रमण करने की कोशिश करार दिया है। इसी कड़ी में, गुरुवार को बड़ी संख्या में नागरिकों ने अनुविभागीय अधिकारी करैरा को आवेदन सौंपा, जिसमें वन विभाग को रास्ता अवरुद्ध करने से तत्काल रोकने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि छोटा तालाब नगर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, जिसका उपयोग प्रतिदिन सैकड़ों लोग घूमने, बैठने और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के लिए करते हैं। यदि प्रवेश द्वार पर गेट और चारों ओर बाउंड्री बन जाती है, तो आम जनता का स्वतंत्र आवागमन बुरी तरह प्रभावित होगा। नागरिकों में विशेष रोष तालाब के रास्ते के साथ-साथ कब्रिस्तान के रास्ते पर भी बाउंड्री बनाने की तैयारी को लेकर है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में शासन की झील संवर्धन योजना के तहत छोटा तालाब के विकास को स्वीकृति मिली थी, जिसके बाद नगर परिषद ने यहाँ लगभग 50 लाख रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण, पेवर ब्लॉक और प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य करवाए थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा क्षेत्र राजस्व विभाग की भूमि पर स्थित है और इसका संचालन-संधारण नगर परिषद द्वारा ही किया जा रहा है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में एसडीएम के आदेश पर वन एवं राजस्व विभाग का संयुक्त सीमांकन किया गया था, जिसमें तालाब तक जाने वाला मार्ग राजस्व भूमि में पाया गया था।
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    नरवर नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक छोटा तालाब को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। वन विभाग द्वारा झील संवर्धन योजना के तहत विकसित किए गए इस तालाब के मुख्य मार्ग पर गेट और बाउंड्री वॉल बनाने की तैयारी से नगरवासियों में भारी नाराजगी है। नागरिकों ने इसे वन विभाग की मनमानी बताया है और राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि पर अतिक्रमण करने की कोशिश करार दिया है।

इसी कड़ी में, गुरुवार को बड़ी संख्या में नागरिकों ने अनुविभागीय अधिकारी करैरा को आवेदन सौंपा, जिसमें वन विभाग को रास्ता अवरुद्ध करने से तत्काल रोकने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि छोटा तालाब नगर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, जिसका उपयोग प्रतिदिन सैकड़ों लोग घूमने, बैठने और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के लिए करते हैं। यदि प्रवेश द्वार पर गेट और चारों ओर बाउंड्री बन जाती है, तो आम जनता का स्वतंत्र आवागमन बुरी तरह प्रभावित होगा। नागरिकों में विशेष रोष तालाब के रास्ते के साथ-साथ कब्रिस्तान के रास्ते पर भी बाउंड्री बनाने की तैयारी को लेकर है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में शासन की झील संवर्धन योजना के तहत छोटा तालाब के विकास को स्वीकृति मिली थी, जिसके बाद नगर परिषद ने यहाँ लगभग 50 लाख रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण, पेवर ब्लॉक और प्रकाश व्यवस्था जैसे कार्य करवाए थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा क्षेत्र राजस्व विभाग की भूमि पर स्थित है और इसका संचालन-संधारण नगर परिषद द्वारा ही किया जा रहा है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में एसडीएम के आदेश पर वन एवं राजस्व विभाग का संयुक्त सीमांकन किया गया था, जिसमें तालाब तक जाने वाला मार्ग राजस्व भूमि में पाया गया था।
    user_Deepak Journalist
    Deepak Journalist
    TV News Anchor नरवर, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • भुवनेश्वर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। शहर में आज रात जमकर बारिश हुई, जिसके बाद फिर से धूप निकलने से गर्मी बढ़ गई। स्थिति यह है कि रात को जहां बारिश का तांडव देखने को मिल रहा है, वहीं दिन में धूप के कारण गर्मी का तांडव शुरू हो जाता है।
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    भुवनेश्वर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। शहर में आज रात जमकर बारिश हुई, जिसके बाद फिर से धूप निकलने से गर्मी बढ़ गई। स्थिति यह है कि रात को जहां बारिश का तांडव देखने को मिल रहा है, वहीं दिन में धूप के कारण गर्मी का तांडव शुरू हो जाता है।
    user_दिगेन्द्र कुमार बाजपेई
    दिगेन्द्र कुमार बाजपेई
    Local News Reporter पिछोर (डबरा), ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    50 min ago
  • दतिया जिले के भांडेर में एक अवैध हथियार फैक्ट्री पकड़ी गई है। इस खबर की जानकारी 'तहलका न्यूज' द्वारा दी गई है।
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    दतिया जिले के भांडेर में एक अवैध हथियार फैक्ट्री पकड़ी गई है। इस खबर की जानकारी 'तहलका न्यूज' द्वारा दी गई है।
    user_Shahid Qureshi
    Shahid Qureshi
    दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के डबरा में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ सैलून में बाल कटवा रहे एक नाबालिग गुरमंत सिंह का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि कुछ अज्ञात युवकों ने गुरमंत सिंह के साथ मारपीट की और उसे जबरन अपने साथ ले गए। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन सिटी थाना पहुँचे, जबकि पुलिस तत्काल नाबालिग की तलाश में जुट गई है। पुलिस इस पूरे मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और सभी संभावित पहलुओं पर गहनता से पड़ताल जारी है।
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    मध्य प्रदेश के डबरा में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ सैलून में बाल कटवा रहे एक नाबालिग गुरमंत सिंह का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि कुछ अज्ञात युवकों ने गुरमंत सिंह के साथ मारपीट की और उसे जबरन अपने साथ ले गए।

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन सिटी थाना पहुँचे, जबकि पुलिस तत्काल नाबालिग की तलाश में जुट गई है। पुलिस इस पूरे मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और सभी संभावित पहलुओं पर गहनता से पड़ताल जारी है।
    user_Ashish shukla
    Ashish shukla
    Social Media Manager पिछोर (डबरा), ग्वालियर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में शासकीय लोकार्पण कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक स्तर पर एक आपत्ति सामने आई है। ASP नेता दामोदर यादव ने इन कार्यक्रमों में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।
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    मध्य प्रदेश में शासकीय लोकार्पण कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक स्तर पर एक आपत्ति सामने आई है। ASP नेता दामोदर यादव ने इन कार्यक्रमों में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।
    user_Hindi Varta News
    Hindi Varta News
    Local News Reporter दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • दतिया में पुलिस ने श्री पीताम्बरा पीठ के नाम पर श्रद्धालुओं से कथित तौर पर ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान आगर मालवा जिले के नलखेड़ा निवासी सुनील शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी सुनील शर्मा श्रद्धालुओं को मिर्ची हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बहाने झांसे में लेकर उनसे आर्थिक ठगी करता था। इस मामले की जांच के दौरान, साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी सुनील शर्मा को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे, और रिमांड के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जो धार्मिक आस्था का दुरुपयोग करके श्रद्धालुओं को ठगने का काम कर रहे थे। पुलिस ने बताया है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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    दतिया में पुलिस ने श्री पीताम्बरा पीठ के नाम पर श्रद्धालुओं से कथित तौर पर ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान आगर मालवा जिले के नलखेड़ा निवासी सुनील शर्मा के रूप में हुई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी सुनील शर्मा श्रद्धालुओं को मिर्ची हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बहाने झांसे में लेकर उनसे आर्थिक ठगी करता था। इस मामले की जांच के दौरान, साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद, आरोपी सुनील शर्मा को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे, और रिमांड के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जो धार्मिक आस्था का दुरुपयोग करके श्रद्धालुओं को ठगने का काम कर रहे थे। पुलिस ने बताया है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    user_P Goyal
    P Goyal
    दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • दतिया कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म के एक आरोपी को घटना के मात्र 3 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
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    दतिया कोतवाली पुलिस ने दुष्कर्म के एक आरोपी को घटना के मात्र 3 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
    user_MBKS डिजिटल न्यूज़
    MBKS डिजिटल न्यूज़
    Newspaper publisher दतिया नगर, दतिया, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • दतिया में मांझी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची क्रमांक 12 से तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति, जिसमें धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदाय शामिल हैं, को विलोपित करने की मांग की गई है। मांझी समाज के पदाधिकारियों ने अपने तर्क के समर्थन में 07 जनवरी 1950 को जारी तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख के परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS 49 का हवाला दिया, जिसमें मांझी जाति के समक्ष धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग मध्य प्रदेश के आयुक्त के पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को मूल रूप से मांझी जनजाति में समाहित होना स्वीकार किया गया है। यह मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है, जहाँ 13 मार्च 2023 को अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121 के जवाब में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश के केवट, धीमर, मल्लाह और भोई मांझी जनजाति में ही समाहित हैं और यही मूल मांझी जनजाति है। मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट ने बताया कि रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया और टीकमगढ़ जैसे विंध्यप्रदेश के जिलों में 'मांझी' नाम की कोई अलग जाति नहीं मिलती है; धीमर, केवट, मल्लाह और भोई ही यहाँ मूल समाहित मांझी जनजाति के रूप में मान्य हैं, और ये विंध्यप्रदेश के पुकारू शब्द हैं। समाज ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि संदर्भित दस्तावेजों का गहन अवलोकन कर अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची क्रमांक 12 से इन समुदायों को विलोपित किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे, जिस पर कलेक्टर ने ज्ञापन लेकर इसे उचित माध्यम से शासन को भेजने का आश्वासन दिया।
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    दतिया में मांझी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची क्रमांक 12 से तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति, जिसमें धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदाय शामिल हैं, को विलोपित करने की मांग की गई है।

मांझी समाज के पदाधिकारियों ने अपने तर्क के समर्थन में 07 जनवरी 1950 को जारी तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख के परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS 49 का हवाला दिया, जिसमें मांझी जाति के समक्ष धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग मध्य प्रदेश के आयुक्त के पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को मूल रूप से मांझी जनजाति में समाहित होना स्वीकार किया गया है।

यह मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है, जहाँ 13 मार्च 2023 को अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121 के जवाब में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश के केवट, धीमर, मल्लाह और भोई मांझी जनजाति में ही समाहित हैं और यही मूल मांझी जनजाति है। मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट ने बताया कि रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया और टीकमगढ़ जैसे विंध्यप्रदेश के जिलों में 'मांझी' नाम की कोई अलग जाति नहीं मिलती है; धीमर, केवट, मल्लाह और भोई ही यहाँ मूल समाहित मांझी जनजाति के रूप में मान्य हैं, और ये विंध्यप्रदेश के पुकारू शब्द हैं।

समाज ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि संदर्भित दस्तावेजों का गहन अवलोकन कर अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची क्रमांक 12 से इन समुदायों को विलोपित किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे, जिस पर कलेक्टर ने ज्ञापन लेकर इसे उचित माध्यम से शासन को भेजने का आश्वासन दिया।
    user_Safik kazi Midia
    Safik kazi Midia
    Local News Reporter दतिया, दतिया, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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