लखनऊ, उत्तर प्रदेश की कवयित्री सोनी शुक्ला क्रांति ने एक गीत के माध्यम से अमर शहीद भरत तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस गीत में भरत तिवारी को मातृभूमि का लाल और शौर्य की नई कहानी बताया गया है, जिनकी वाणी जन-जन के मन में गूँजती है। कवयित्री ने कहा कि उन्होंने सरहद पर भारत की मर्यादा और आन की रक्षा की और हँसते-हँसते वतन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। गीत के अनुसार, भरत तिवारी ने अपने लहू से इस माटी की हरियाली को सींचा और तूफानों की बेचैनी को भी हँसते हुए झेला। उनके शौर्य से दुश्मन भी थर्राते थे, क्योंकि वे सिंह के समान शूरवीर थे, जो भारत माँ के आँचल के सबसे बड़े रखवाले बन गए। कवयित्री ने यह दृढ़ता से कहा है कि उनका नाम इस वीर प्रसूता माटी में सदा गूँजेगा और उनकी गाथा हर आने वाली पीढ़ी में अमर रहेगी। उनके सम्मान में नमन करते हुए, यह गीत भरत तिवारी के त्याग और बलिदान को युग-युग तक सबका दम और प्रेरणा स्रोत बताता है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश की कवयित्री सोनी शुक्ला क्रांति ने एक गीत के माध्यम से अमर शहीद भरत तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस गीत में भरत तिवारी को मातृभूमि का लाल और शौर्य की नई कहानी बताया गया है, जिनकी वाणी जन-जन के मन में गूँजती है। कवयित्री ने कहा कि उन्होंने सरहद पर भारत की मर्यादा और आन की रक्षा की और हँसते-हँसते वतन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। गीत के अनुसार, भरत तिवारी ने अपने लहू से इस माटी की हरियाली को सींचा और तूफानों की बेचैनी को भी हँसते हुए झेला। उनके शौर्य से दुश्मन भी थर्राते थे, क्योंकि वे सिंह के समान शूरवीर थे, जो भारत माँ के आँचल के सबसे बड़े रखवाले बन गए। कवयित्री ने यह दृढ़ता से कहा है कि उनका नाम इस वीर प्रसूता माटी में सदा गूँजेगा और उनकी गाथा हर आने वाली पीढ़ी में अमर रहेगी। उनके सम्मान में नमन करते हुए, यह गीत भरत तिवारी के त्याग और बलिदान को युग-युग तक सबका दम और प्रेरणा स्रोत बताता है।
- चिकित्सकों को जीवन बचाने के उनके कार्य के लिए भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब सरकारी अस्पतालों में मरीज और उनके परिजन उपेक्षा, अभद्र व्यवहार या संवेदनहीनता का सामना करते हैं, तो यह विश्वास टूट जाता है। हालांकि सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव होता है, फिर भी मरीजों के साथ सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार करना उनकी अहम जिम्मेदारी है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पताल जनता के टैक्स से चलते हैं और वहां मिलने वाली हर सेवा नागरिक का अधिकार है, न कि कोई एहसान। स्वास्थ्य व्यवस्था को तभी बेहतर माना जाएगा जब इलाज के साथ-साथ मरीज को सम्मान और संवेदनशील व्यवहार भी प्राप्त हो।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी में एक 21 वर्षीय युवती ने अपने माता-पिता और बहन के शादी में जाने के बाद घर में अकेला पाकर आत्महत्या कर ली। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें युवती ने लिखा था, "मम्मी-पापा बहुत जी लिया, अब मन भर गया"। नोट में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि "मेरी मौत के पीछे कोई नहीं है"।1
- कानपुर में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अजय ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया है कि वह 'बाबा पर हुए हमले' के मामले के बाद से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। सूत्रों के अनुसार, उसकी गिरफ्तारी रतनलाल नगर स्थित एक धुलाई केंद्र से की गई। गिरफ्तारी के दौरान, मौके पर मौजूद राहगीरों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस गिरफ्तारी और मामले के संबंध में एक विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।2
- राजधानी लखनऊ के थाना ठाकुरगंज क्षेत्र स्थित पंपिंग स्टेशन के पास शनिवार, 27 जून 2026 को सुबह लगभग 5:30 बजे एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल (UP 32 LL 9468) दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में मोटरसाइकिल चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एक स्कूटी से तत्काल केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। हालांकि, इलाज के दौरान घायल युवक की दुखद मृत्यु हो गई। इस घटना ने एक बार फिर समय पर आपातकालीन सहायता और एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1