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कैंसर का इलाज अक्सर लंबा, कठिन और महंगा होता है, और ब्रेस्ट कैंसर आज भारतीय महिलाओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। हालांकि, इस बीमारी के इलाज से पहले की जांच प्रक्रिया ही सबसे बड़ी चुनौती पेश करती है, क्योंकि डर, झिझक और असहजता जैसी कई वजहों से महिलाएं अक्सर जांच कराने से कतराती हैं और इसे टाल देती हैं। अब बेंगलुरु का एक स्टार्टअप इस पूरी पुरानी सोच को बदल रहा है। इस स्टार्टअप ने एक ऐसी अभिनव तकनीक विकसित की है, जहाँ बिना दर्द, बिना रेडिएशन और बिना छुए ही ब्रेस्ट कैंसर की जांच संभव है। यह छोटा सा डिवाइस समय रहते इस गंभीर बीमारी का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
ठा शंभू सिंह तंवर पत्रकार
कैंसर का इलाज अक्सर लंबा, कठिन और महंगा होता है, और ब्रेस्ट कैंसर आज भारतीय महिलाओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। हालांकि, इस बीमारी के इलाज से पहले की जांच प्रक्रिया ही सबसे बड़ी चुनौती पेश करती है, क्योंकि डर, झिझक और असहजता जैसी कई वजहों से महिलाएं अक्सर जांच कराने से कतराती हैं और इसे टाल देती हैं। अब बेंगलुरु का एक स्टार्टअप इस पूरी पुरानी सोच को बदल रहा है। इस स्टार्टअप ने एक ऐसी अभिनव तकनीक विकसित की है, जहाँ बिना दर्द, बिना रेडिएशन और बिना छुए ही ब्रेस्ट कैंसर की जांच संभव है। यह छोटा सा डिवाइस समय रहते इस गंभीर बीमारी का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों पर भूमि स्वामित्व को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट का हवाला देते हुए, जीतू पटवारी ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री के परिवार के पास 245 प्लॉट में कुल 335 एकड़ जमीन है। इस रिपोर्ट के अनुसार, नीलेश यादव के पास 108 एकड़, गोविंद यादव के पास 47 एकड़, स्वयं मोहन यादव के पास 17 एकड़, सीमा यादव के पास 11 एकड़, वैभव यादव के पास 17 एकड़, शालिनी यादव के पास 10 एकड़, नारायण यादव के पास 19 एकड़, नंदलाल यादव के पास 17 एकड़, कलावती के पास 17 एकड़, अभय यादव के पास 16 एकड़ और रेखा यादव के पास 6 एकड़ जमीन बताई गई है। पटवारी ने यह भी बताया कि इस मामले में चार रियल एस्टेट कंपनियों का जिक्र हुआ है, और इनमें सीमा यादव तथा मोहन यादव की बहुमत हिस्सेदारी है। इसके अतिरिक्त, मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव और पुत्र वैभव से 25 एकड़ जमीन जुड़ी हुई है, वहीं मोहन यादव की बहन कलावती की भाभी सुनीता से 47 एकड़ जमीन जुड़ी हुई है। परिवार के करीबी रिश्तेदारों की तीन अलग-अलग कंपनियों में भी बड़ी हिस्सेदारी बताई गई है। आरोप है कि मोहन यादव के मंत्री रहने और फिर मुख्यमंत्री बनने के दौरान कई सारे रोड प्रोजेक्ट्स इन्हीं जमीनों के आसपास से गुजरे हैं।1
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- बड़ौद में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा मंगलवार को आजीविका मिशन भवन में एक चिन्हांकन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना था, जिसका शुभारंभ जनपद पंचायत बड़ौद के अध्यक्ष श्यामसिंह परिहार ने किया। शिविर के दौरान, दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सहायक उपकरणों के लिए पंजीयन व चिन्हांकन किया गया। सामाजिक सुरक्षा अधिकारी भारत विजयपुरिया ने बताया कि एडीप योजना एवं राष्ट्रीय वायोश्री योजना के तहत आयोजित इस शिविर के दूसरे दिन कुल 50 हितग्राहियों का पंजीयन किया गया। पात्र हितग्राहियों के लिए कृत्रिम हाथ, कृत्रिम पैर, कैलीपर सहित अन्य आवश्यक सहायक उपकरण चिह्नित किए गए हैं। विजयपुरिया ने आगे जानकारी दी कि चिन्हांकित हितग्राहियों को आगामी चरण में ये आवश्यक उपकरण प्रदान किए जाएंगे, जिससे उनका जीवन अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सके। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह परिहार, खंड पंचायत अधिकारी शंकरलाल नगदिया, सामाजिक न्याय विभाग के सहायक ग्रेड-3 नीलेश झासिया, जनपद पंचायत के विकास लोहार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे। यह शिविर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।4
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