खनिज संपदा से संपन्न झारखंड के लाखों मजदूर परिवार आज भी रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, जिसे एक “दर्द भरी सच्चाई” बताया गया है। इस विडंबना को उजागर करते हुए कहा गया है कि कोरोना महामारी के दौरान विशेष व्यवस्था से हवाई जहाज के माध्यम से अपने राज्य लौटे मजदूर अब एक बार फिर पैसेंजर ट्रेन पकड़कर दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। यह केवल एक मजदूर की कहानी नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों गरीब मजदूर परिवारों की पीड़ा और संघर्ष को दर्शाती है। झारखंड की भूमि कोयला, लोहा, तांबा, यूरेनियम और बॉक्साइट जैसे बहुमूल्य खनिज भंडारों से भरी है, और देश के विकास में इसकी खदानों, जंगलों तथा मेहनतकश मजदूरों का बड़ा योगदान रहा है। दुखद है कि इतनी अपार प्राकृतिक संपदा के बावजूद, यहां के अनेक नौजवान और मजदूर रोजगार पाने के लिए अपना घर-गांव छोड़कर अन्य राज्यों में भटकने को विवश हैं। कोरोना संकट के समय, जब मजदूर विशेष व्यवस्था से वापस आए थे, तब उम्मीद जगी थी कि उन्हें अपने ही राज्य में सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, पर वर्षों बाद भी यह स्थिति पूरी तरह नहीं बदली। वृहद झारखंड मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष और खरसावां विधानसभा 57 से पूर्व प्रत्याशी बिरसा सोय ने इस स्थिति पर सवाल उठाया है कि जिस धरती की खनिज संपदा से बड़े-बड़े उद्योग चलते हैं, उसी धरती के बेटे-बेटियां रोजगार के लिए बाहर क्यों भटकें। उन्होंने झारखंड में बदलाव लाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं: बंद पड़े उद्योगों को फिर से शुरू किया जाए, खनिज आधारित नए उद्योग स्थापित किए जाएं, स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाए, और उद्योगों व कंपनियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, गांव स्तर पर कृषि, वन उत्पाद, तसर, हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है। बिरसा सोय के अनुसार, झारखंड का सच्चा विकास केवल खनिज निकालने से नहीं होगा, बल्कि तब होगा जब यहां के गरीब मजदूर, किसान, आदिवासी और मूलवासी परिवारों के जीवन में खुशहाली आएगी। उनका सपना है कि जिस दिन झारखंड का मजदूर रोजी-रोटी के लिए बाहर जाने के बजाय अपने गांव में सम्मान के साथ काम करेगा, उसी दिन “अबुआ झारखंड — खुशहाल झारखंड” का सपना सच होगा।
खनिज संपदा से संपन्न झारखंड के लाखों मजदूर परिवार आज भी रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, जिसे एक “दर्द भरी सच्चाई” बताया गया है। इस विडंबना को उजागर करते हुए कहा गया है कि कोरोना महामारी के दौरान विशेष व्यवस्था से हवाई जहाज के माध्यम से अपने राज्य लौटे मजदूर अब एक बार फिर पैसेंजर ट्रेन पकड़कर दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। यह केवल एक मजदूर की कहानी नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों गरीब मजदूर परिवारों की पीड़ा और संघर्ष को दर्शाती है। झारखंड की भूमि कोयला, लोहा, तांबा, यूरेनियम और बॉक्साइट जैसे बहुमूल्य खनिज भंडारों से भरी है, और देश के विकास में इसकी खदानों, जंगलों तथा मेहनतकश मजदूरों का बड़ा योगदान रहा है। दुखद है कि इतनी अपार प्राकृतिक संपदा के बावजूद, यहां के अनेक नौजवान और मजदूर रोजगार पाने के लिए अपना घर-गांव छोड़कर अन्य राज्यों में भटकने को विवश हैं। कोरोना संकट के समय, जब मजदूर विशेष व्यवस्था से वापस आए थे, तब उम्मीद जगी थी कि उन्हें अपने ही राज्य में सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, पर वर्षों बाद भी यह स्थिति पूरी तरह नहीं बदली। वृहद झारखंड मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष और खरसावां विधानसभा 57 से पूर्व प्रत्याशी बिरसा सोय ने इस स्थिति पर सवाल उठाया है कि जिस धरती की खनिज संपदा से बड़े-बड़े उद्योग चलते हैं, उसी धरती के बेटे-बेटियां रोजगार के लिए बाहर क्यों भटकें। उन्होंने झारखंड में बदलाव लाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं: बंद पड़े उद्योगों को फिर से शुरू किया जाए, खनिज आधारित नए उद्योग स्थापित किए जाएं, स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाए, और उद्योगों व कंपनियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, गांव स्तर पर कृषि, वन उत्पाद, तसर, हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है। बिरसा सोय के अनुसार, झारखंड का सच्चा विकास केवल खनिज निकालने से नहीं होगा, बल्कि तब होगा जब यहां के गरीब मजदूर, किसान, आदिवासी और मूलवासी परिवारों के जीवन में खुशहाली आएगी। उनका सपना है कि जिस दिन झारखंड का मजदूर रोजी-रोटी के लिए बाहर जाने के बजाय अपने गांव में सम्मान के साथ काम करेगा, उसी दिन “अबुआ झारखंड — खुशहाल झारखंड” का सपना सच होगा।
- सरायकेला के चांडिल प्रखंड स्थित भुईयाडीह में गैलेक्सी कंपनी में हुए विस्फोट के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला है। विस्फोट के उपरांत ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन से सुरक्षा, उचित मुआवजा और प्रभावितों के लिए रोजगार की मांग उठाई थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन शुरू कर दिया, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। आंदोलन को यह अस्थायी विराम कंपनी प्रबंधन द्वारा की गई वार्ता और दिए गए लिखित आश्वासन के बाद मिला है।1
- जमशेदपुर के नागाडीह मैदान में एक बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे दो बदमाशों को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ी घटना टल गई है।1
- चक्रधरपुर में आगामी मुहर्रम पर्व के शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और विधि-व्यवस्था के अनुरूप आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में, रविवार को अनुमण्डल पदाधिकारी पोड़ाहाट चक्रधरपुर, सहायक पुलिस अधीक्षक-सह-अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी चक्रधरपुर तथा एक प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी ने विभिन्न मुहर्रम जुलूस मार्गों का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान, अधिकारियों ने मार्गों पर विधि-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के पश्चात, संबंधित विभागों को जुलूस मार्गों पर मौजूद गड्ढों को शीघ्र भरने और आवश्यक मरम्मत कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, पर्व के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने के लिए भी संबंधित विभागों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे प्रशासन की मुहर्रम पर्व को लेकर सतर्कता स्पष्ट होती है।1
- झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में लगभग 3,500 संविदा आधारित स्वास्थ्य अनुबंधकर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले दिन, जिले भर से बड़ी संख्या में अनुबंधकर्मी चाईबासा स्थित सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे और कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। इन अनुबंधकर्मियों की प्रमुख मांगों में पिछले छह माह से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मानदेय वृद्धि का भुगतान, और उनकी अन्य लंबित समस्याओं का समाधान शामिल है। इस संबंध में, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने अनुबंधकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगें जायज हैं। उन्होंने जानकारी दी कि लंबित मानदेय भुगतान के लिए स्वास्थ्य सचिव को एक पत्र भेजा गया है, और उम्मीद जताई है कि भुगतान की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।1
- झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी, सिल्ली में बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाया। उन्होंने यह खास दिन बच्चों संग बिताकर अपनी खुशी साझा की।1
- मौसम विभाग ने झारखंड के निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी जारी की है। यह अपडेट राज्य के लोगों से इसे अवश्य देखने का आग्रह करती है, जिससे इसकी गंभीरता और प्रासंगिकता का संकेत मिलता है।1
- सरायकेला-टाटा मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित कोलाबिरा में हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोटरसाइकिल चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना तब हुई जब हाथीटांड निवासी शंभू चरण महतो टाटा से सरायकेला की ओर अपनी मोटरसाइकिल पर रापचा निवासी फूलसरी महतो के साथ आ रहे थे। कोलाबिरा के पास पीछे से आ रहे एक 10 चक्का हाईबा ट्रक ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे फूलसरी महतो की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक अपने वाहन सहित मौके से फरार हो गया, वहीं शंभू चरण महतो गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण आक्रोशित हो गए और मुख्य सड़क को जाम कर दिया। उन्होंने मृतक को मुआवजे की मांग करते हुए उच्च अधिकारियों से वार्तालाप करने पर जोर दिया। इसी बीच, स्थानीय ग्रामीणों ने मोटरसाइकिल से पीछा कर दुगनी में फरार हुए हाईबा ट्रक को पकड़ लिया। सरायकेला पुलिस के मौके पर पहुंचने और काफी समझाने के बावजूद, ग्रामीणों ने शव को उठाने नहीं दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि यातायात पुलिस द्वारा छोटे वाहनों के कागजों की बारीकी से जांच की जाती है, लेकिन बड़े ओवरलोड वाहन बेहिचक और तेज रफ्तार से दौड़ते रहते हैं, जिस पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। इसी कारण आए दिन ऐसे सड़क हादसे हो रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।4