नीमच जिले के जावद नगर परिषद में 32 वर्षों की गौरवमयी, निष्ठापूर्ण और अनुकरणीय सेवा पूर्ण करने के बाद श्री शंकर लाल गायरी सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी विदाई के अवसर पर धनगर गायरी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने एक भव्य विदाई व सम्मान समारोह का आयोजन किया, जिसमें श्री गायरी का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान धनगर गायरी समाज, जावद के पदाधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने श्री शंकर लाल गायरी की दीर्घकालीन और उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना की। समाज के प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें परंपरागत रूप से साफा बांधकर, शाल ओढ़ाकर, पुष्पमाला पहनाकर स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। समारोह को संबोधित करते हुए समाज के प्रदेश प्रवक्ता श्री रमेश धनगर ने कहा कि शंकर लाल जी ने अपने 32 वर्षों के सेवाकाल में सदैव समाज और नगर हित को सर्वोपरि रखा। उनकी कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली और मिलनसार स्वभाव नई पीढ़ी के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा का केंद्र है, जिस पर समाज को गर्व है। इस गौरवपूर्ण समारोह में धनगर गायरी समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और समाजसेवी सम्मिलित हुए, जिनमें श्री शंभू लाल धनगर (समिति अध्यक्ष, नीमच सिटी), श्री गोविंद धनगर (तहसील अध्यक्ष, पालसोडा), श्री कुलदीप धनगर (समाजसेवी), श्री गोपाल धनगर (बोरखेड़ी), श्री ओंकारलाल धनगर (वरिष्ठ समाजसेवी, नीमच सिटी), श्री मुकेश धनगर (जीरन), श्री मनीष धनगर (पालसोड़ा) और श्री राधेश्याम धनगर (कनावटी) सहित बड़ी संख्या में समाजजन और नगरवासी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने श्री शंकर लाल गायरी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखमय सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी।
नीमच जिले के जावद नगर परिषद में 32 वर्षों की गौरवमयी, निष्ठापूर्ण और अनुकरणीय सेवा पूर्ण करने के बाद श्री शंकर लाल गायरी सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी विदाई के अवसर पर धनगर गायरी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने एक भव्य विदाई व सम्मान समारोह का आयोजन किया, जिसमें श्री गायरी का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान धनगर गायरी समाज, जावद के पदाधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने श्री शंकर लाल गायरी की दीर्घकालीन और उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना की। समाज के प्रतिनिधि मंडल ने उन्हें परंपरागत रूप से साफा बांधकर, शाल ओढ़ाकर, पुष्पमाला पहनाकर स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। समारोह को संबोधित करते हुए समाज के प्रदेश प्रवक्ता श्री रमेश धनगर ने कहा कि शंकर लाल जी ने अपने 32 वर्षों के सेवाकाल में सदैव समाज और नगर हित को सर्वोपरि रखा। उनकी कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली और मिलनसार स्वभाव नई पीढ़ी के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा का केंद्र है, जिस पर समाज को गर्व है। इस गौरवपूर्ण समारोह में धनगर गायरी समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और समाजसेवी सम्मिलित हुए, जिनमें श्री शंभू लाल धनगर (समिति अध्यक्ष, नीमच सिटी), श्री गोविंद धनगर (तहसील अध्यक्ष, पालसोडा), श्री कुलदीप धनगर (समाजसेवी), श्री गोपाल धनगर (बोरखेड़ी), श्री ओंकारलाल धनगर (वरिष्ठ समाजसेवी, नीमच सिटी), श्री मुकेश धनगर (जीरन), श्री मनीष धनगर (पालसोड़ा) और श्री राधेश्याम धनगर (कनावटी) सहित बड़ी संख्या में समाजजन और नगरवासी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने श्री शंकर लाल गायरी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखमय सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामना करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी।
- नीमच जिले के कुकड़ेश्वर में कुशवाह समाज द्वारा एक संयुक्त सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में उन सभी विद्यार्थियों को शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने कक्षा 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। विद्यार्थियों के साथ-साथ, प्रगतिशील किसानों, विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और समाज के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भी विशेष सम्मान किया गया, जिससे कुकड़ेश्वर में कुशवाह समाज का यह प्रतिभा सम्मान समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।1
- नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने झंझारवाड़ा उद्योग क्षेत्र का दौरा कर निरीक्षण किया।1
- दतिया में बुधवार, 29 मई 2026 को मांझी समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। समाज ने विंध्य क्षेत्र के धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची क्रमांक-12 से हटाने और उन्हें मूल मांझी जनजाति के रूप में मान्यता देने की मांग की। उनका कहना है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों में इन जातियों को मांझी जनजाति का अभिन्न हिस्सा माना गया है। ज्ञापन में बताया गया कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख द्वारा 7 जनवरी 1950 को जारी परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS-49 में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को मांझी जाति के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग मध्यप्रदेश के आयुक्त द्वारा जारी पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी इन समुदायों को मूल रूप से मांझी जनजाति में समाहित माना गया है। समाज ने यह भी दावा किया कि 13 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश विधानसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न क्रमांक-1121 के उत्तर में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने भी स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश क्षेत्र के केवट, धीमर, मल्लाह एवं भोई समुदाय मांझी जनजाति के ही अंग हैं। मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया एवं टीकमगढ़ जिलों में "मांझी" नाम से कोई पृथक जाति मौजूद नहीं है। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह एवं भोई समुदाय को ही मूल मांझी जनजाति के रूप में जाना और पहचाना जाता है। समाजजनों ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उपलब्ध ऐतिहासिक एवं शासकीय दस्तावेजों का गहन परीक्षण कर इन समुदायों को ओबीसी सूची से हटाकर उन्हें मूल मांझी जनजाति के समस्त अधिकार प्रदान किए जाएं। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। जिला कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उसे शासन स्तर तक उचित कार्रवाई हेतु भेजने का आश्वासन दिया।2
- नीमच में स्कीम नंबर 36-ए स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथा की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शनिवार को मंत्री नारायणसिंह कुशवाह कथा पंडाल पहुंचे। इस अवसर पर आयोजन समिति ने मंत्री का स्वागत किया। मंत्री कुशवाह ने व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली और समिति को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समिति सदस्य मौजूद रहे।1
- नीमच से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ सड़क निर्माण कार्य के दौरान हुई एक दुर्घटना में एक युवक की जान चली गई। बताया जा रहा है कि यह घटना नीमच सिटी थाना क्षेत्र के बोरदिया गांव से अपने गांव आमलीखेड़ा लौट रहे रघुवीर सिंह के साथ हुई, जब वे अपनी मेडिकल दुकान बंद कर घर जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, जिस मार्ग से रघुवीर सिंह गुजर रहे थे, वहाँ सड़क निर्माण कार्य चल रहा था और सड़क के ठीक बीचों-बीच मिट्टी का एक ढेर पड़ा हुआ था। इसी दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर उस मिट्टी के ढेर पर चढ़ गई, जिससे रघुवीर सिंह लगभग 10 फीट दूर जा गिरे और उनके सिर में गंभीर चोट आई। हादसे के बाद, मौके पर मौजूद राहगीरों ने तत्काल मानवता का परिचय देते हुए उन्हें एक निजी वाहन से जिला अस्पताल पहुँचाया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने रघुवीर सिंह का उपचार शुरू किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान ही उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई, और उनके अंकल बलवंत सिंह भी तुरंत अस्पताल पहुँचे। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। फिलहाल, इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और पुलिस मामले की गहनता से जाँच कर रही है। इस घटना ने सड़क निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1