भारतीय संगीत परंपरा के आत्मशुद्धि, मानसिक संतुलन और आंतरिक चेतना जगाने के विचार को मूर्त रूप देते हुए, राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने खैरागढ़ उपजेल में कैदियों के लिए एक विशेष संगीत-चिकित्सा सत्र का आयोजन किया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति ने जेल परिसर को आध्यात्मिक और चिंतनशील वातावरण में बदल दिया, जिससे कैदियों ने आत्मिक शांति का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने अपने भावपूर्ण सितार वादन से ऐसा संगीतमय माहौल निर्मित किया कि उपस्थित कैदी पूरे मनोयोग से प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। उनके चेहरों पर शांति, प्रसन्नता और भावनात्मक संतुलन के भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिए, और कुछ समय के लिए वे अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर सकारात्मकता व आत्मिक आनंद से जुड़ते नजर आए। शीर्ष श्रेणी के तबला वादक अवध सिंह ने अपने संवेदनशील, सशक्त और लयबद्ध वादन से सितार प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया, जिससे सितार और तबले की उत्कृष्ट जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने संगीत-चिकित्सा के क्षेत्र में अपने दीर्घकालिक शोध अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में उन्होंने कारागार में बंद कैदियों पर संगीत के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया था। इस शोध का उद्देश्य यह समझना था कि संगीत किस प्रकार कैदियों की मानसिक स्थिति, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, तनाव, व्यवहार तथा सकारात्मक सोच को प्रभावित करता है। शोध के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि संगीत व्यक्ति के भीतर संचित तनाव और नकारात्मक भावनाओं को कम करने, आत्मचिंतन को प्रोत्साहित करने तथा मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन स्थापित करने में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाता है। उनके अनुसार, संगीत-चिकित्सा केवल एक कलात्मक गतिविधि नहीं बल्कि मानव मन के पुनर्संयोजन और व्यक्तित्व के सकारात्मक पुनर्निर्माण की एक सशक्त प्रक्रिया है। प्रो. शर्मा ने जोर देकर कहा कि विशेष रूप से कारागार जैसे संवेदनशील परिवेश में संगीत व्यक्तियों के भीतर संवेदनशीलता, आत्मबोध और सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाओं को जागृत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने बताया कि कला और संगीत में ऐसी परिवर्तनकारी शक्ति निहित है जो व्यक्ति के अंतर्मन को स्पर्श कर उसके दृष्टिकोण, भावनात्मक स्थिति और जीवन के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित न रहकर, मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, मानवीय संवेदनाओं के विकास और सुधारात्मक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। ऐसे प्रयास भविष्य में संगीत-चिकित्सा को पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्संरचना के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, यह सिद्ध करते हुए कि संगीत मानव मन के उपचार, संवेदनात्मक पुनर्जागरण और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की सार्वभौमिक एवं सशक्त भाषा है।
भारतीय संगीत परंपरा के आत्मशुद्धि, मानसिक संतुलन और आंतरिक चेतना जगाने के विचार को मूर्त रूप देते हुए, राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने खैरागढ़ उपजेल में कैदियों के लिए एक विशेष संगीत-चिकित्सा सत्र का आयोजन किया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति ने जेल परिसर को आध्यात्मिक और चिंतनशील वातावरण में बदल दिया, जिससे कैदियों ने आत्मिक शांति का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने अपने भावपूर्ण सितार वादन से ऐसा संगीतमय माहौल निर्मित किया कि उपस्थित कैदी पूरे मनोयोग से प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। उनके चेहरों पर शांति, प्रसन्नता और भावनात्मक संतुलन के
भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिए, और कुछ समय के लिए वे अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर सकारात्मकता व आत्मिक आनंद से जुड़ते नजर आए। शीर्ष श्रेणी के तबला वादक अवध सिंह ने अपने संवेदनशील, सशक्त और लयबद्ध वादन से सितार प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया, जिससे सितार और तबले की उत्कृष्ट जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने संगीत-चिकित्सा के क्षेत्र में अपने दीर्घकालिक शोध अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में उन्होंने कारागार में बंद कैदियों पर संगीत के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया था। इस शोध का उद्देश्य यह समझना था कि संगीत किस प्रकार कैदियों की
मानसिक स्थिति, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, तनाव, व्यवहार तथा सकारात्मक सोच को प्रभावित करता है। शोध के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि संगीत व्यक्ति के भीतर संचित तनाव और नकारात्मक भावनाओं को कम करने, आत्मचिंतन को प्रोत्साहित करने तथा मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन स्थापित करने में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाता है। उनके अनुसार, संगीत-चिकित्सा केवल एक कलात्मक गतिविधि नहीं बल्कि मानव मन के पुनर्संयोजन और व्यक्तित्व के सकारात्मक पुनर्निर्माण की एक सशक्त प्रक्रिया है। प्रो. शर्मा ने जोर देकर कहा कि विशेष रूप से कारागार जैसे संवेदनशील परिवेश में संगीत व्यक्तियों के भीतर संवेदनशीलता, आत्मबोध और सकारात्मक परिवर्तन की संभावनाओं को जागृत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने बताया कि
कला और संगीत में ऐसी परिवर्तनकारी शक्ति निहित है जो व्यक्ति के अंतर्मन को स्पर्श कर उसके दृष्टिकोण, भावनात्मक स्थिति और जीवन के प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित न रहकर, मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, मानवीय संवेदनाओं के विकास और सुधारात्मक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। ऐसे प्रयास भविष्य में संगीत-चिकित्सा को पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्संरचना के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, यह सिद्ध करते हुए कि संगीत मानव मन के उपचार, संवेदनात्मक पुनर्जागरण और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की सार्वभौमिक एवं सशक्त भाषा है।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी दो हजार छब्बीस परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए हैं। यह परीक्षा 21 जून, रविवार को केसीजी जिले में दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। अभ्यर्थियों को सुबह 11 बजे से परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिलना शुरू हो जाएगा, लेकिन दोपहर 1:30 बजे के बाद प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे। यह जानकारी 20 जून शनिवार को सुबह 8 बजे मिली। एनटीए ने अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र, स्व-घोषणा पत्र, फोटोयुक्त पहचान पत्र और पारदर्शी पानी की बोतल साथ लाने का निर्देश दिया है। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को परीक्षा केंद्र में ले जाना प्रतिबंधित है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें।1
- राजधानी रायपुर के कोर्ट परिसर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कथित तौर पर फर्जी वकीलों के एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह कोर्ट आने वाले आम लोगों को निशाना बनाता था, खुद को वकील बताकर उनसे केस लड़ने, जमानत कराने या कानूनी मदद दिलाने के नाम पर पैसे ऐंठने की कोशिश करता था। वकील संघ ने सक्रियता दिखाते हुए ऐसे ही एक आरोपी को पकड़ लिया, जो कोर्ट परिसर में पक्षकारों को झांसे में लेकर ठगी कर रहा था। इस घटना के बाद वकील संघ ने आम जनता से अपील की है कि वे कोर्ट में किसी भी व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें। संघ ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी वकील से काम कराने से पहले उसकी पहचान, नाम, बार काउंसिल रजिस्ट्रेशन और वकील संघ से पुष्टि अवश्य करें। वकील संघ ने इस बात पर जोर दिया है कि ऐसे फर्जी लोग न केवल आम लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था की छवि को भी खराब करते हैं। इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दे दी गई है, और आगे की जांच के बाद ही गिरोह में शामिल अन्य लोगों का खुलासा हो सकेगा। यह मामला कोर्ट जाने वाले आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यदि कोई व्यक्ति खुद को वकील बताकर जल्द काम कराने या गारंटी देने का दावा करता है, तो लोगों को सावधान रहना चाहिए और तुरंत वकील संघ या पुलिस को इसकी सूचना देनी चाहिए।1
- देश की शिक्षा व्यवस्था पर लगातार बड़े सवाल उठाने वाले राहुल गांधी और कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार का 'खटाखट मॉडल' बुरी तरह विफल हो गया है, जहाँ सरकारी कॉलेजों की छतें ढह रही हैं। यह स्थिति जमीनी हकीकत से उनके "जीरो कनेक्ट" का जीता-जागता सबूत है, जिसके चलते बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके विपरीत, भाजपा शासित बिहार की महिलाओं ने स्वयं राहुल गांधी के सामने बताया कि वहाँ के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर, किताबें और पढ़ाई पहले से कहीं बेहतर हुई है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव आए हैं। इसलिए, राहुल गांधी को अब अधूरे तथ्यों पर आधारित "डर की राजनीति" बंद करनी चाहिए और वास्तविक जमीनी हकीकत को स्वीकार करना चाहिए।1
- शासन के निर्देशानुसार, नगर परिषद लांजी में 15, 16 और 17 जून 2026 को जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित पात्र लोगों के लिए एक विशेष शिविर अभियान चलाया गया। मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री मयूर वाहने के मार्गदर्शन में, नगर परिषद लांजी के प्रांगण में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए, जिनमें स्वास्थ्य विभाग लांजी, महिला बाल विकास, कृषि विभाग, राजस्व विभाग, वित्त विभाग और अन्य विभाग शामिल थे। इस शिविर में प्राप्त अधिक से अधिक आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया। अभियान के समापन पर, यानी 17 जून 2026 को, नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती रेखा ताराचंद कालबेले, उपाध्यक्ष श्री संदीप रामटेककर और सीएमओ श्री मयूर वाहने के हाथों पात्र हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। शिविर अभियान में सभी विभागीय स्टॉलों के साथ-साथ नगर परिषद लांजी के कर्मचारी श्री रणदीप मोनू वराडे, श्री विनोद रहमतकर, श्री संतोष भार्गव, श्रीमती वंदना भार्गव, श्रीमती जयवती कच्छवाहे, श्री लक्ष्मीकांत सोनवाने, श्री गोविंद राउत, श्री उपकेन्द्र वराडे, श्री श्याम vagare, श्री तेजराम आसटकर, श्री छगन मिश्रा, श्रीमती रेखा नागपुर, श्री काजू दुर्गकार और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- दुर्ग में एक बेहद चौंकाने वाली और क्रूर घटना सामने आई है, जहां एक डॉक्टर ने, जिस पर लोग विश्वास करते हैं, उसी ने अपने ही घर में काम करने वाली नौकरानी की बेरहमी से हत्या कर दी। जानकारी के अनुसार, डॉक्टर ने अपनी घरेलू कामगार का गला रेत दिया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। यह घटना डॉक्टर जैसे भरोसेमंद पेशे से जुड़े व्यक्ति द्वारा किए गए निर्मम कृत्य पर गहरे सवाल खड़े करती है।1
- दुर्ग जिले के कैलाश नगर क्षेत्र में लोहे के सेंट्रिंग प्लेट की चोरी और विरोध करने पर मारपीट के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने त्वरित विवेचना और मुखबिर सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ा, जिनके कब्जे से चोरी की गई लगभग 50,000 रुपये मूल्य की सेंट्रिंग प्लेट बरामद की गई। प्रार्थी प्रमोद तिवारी ने थाना जामुल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 19.06.2026 को लगभग दोपहर 12:00 बजे कैलाश नगर स्थित उनके प्लॉट से रूपेश निषाद उर्फ रूपा और उसके साथी ने लगभग 50,000 रुपये मूल्य की लोहे की सेंट्रिंग प्लेट चुरा ली थी। जब प्रार्थी ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और मौके से फरार हो गए। जामुल पुलिस ने प्रार्थी की रिपोर्ट पर अपराध क्रमांक 425/2026, धारा 331(4), 305, 115(2), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर आरोपियों रूपेश निषाद उर्फ रूपा (उम्र 22 वर्ष, निवासी अटल आवास, जवाहर नगर, थाना वैशाली नगर, जिला दुर्ग) और अशोक यादव (उम्र 45 वर्ष, निवासी अटल आवास, जवाहर नगर, थाना वैशाली नगर, जिला दुर्ग) को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया और उनकी निशानदेही पर चोरी की गई सेंट्रिंग प्लेट बरामद की गई। आरोपियों को 20.06.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। घटना लोहे की सेंट्रिंग प्लेट चुराकर अवैध लाभ कमाने की नीयत से अंजाम दी गई थी। इस पूरी कार्यवाही में थाना जामुल पुलिस टीम और विवेचना में संलग्न अधिकारी-कर्मचारियों की सराहनीय भूमिका रही, जिन्होंने त्वरित सूचना संकलन और प्रभावी कार्रवाई कर आरोपियों को धर दबोचा। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की चोरी, मारपीट या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना या डायल-112 पर दें, ताकि अपराधियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्यवाही की जा सके।3
- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तिल्दा इलाके से एक बेहद रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। सासाहोली गांव के सरस्वती स्कूल के बाहर मामूली सी बात पर दो नाबालिग छात्रों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। महज 'मोटा' कहने के विवाद में हुए इस हमले में 16 वर्षीय एक छात्र की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जबकि दूसरा छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र अमन यदु (16 वर्ष) और 15 वर्षीय आरोपी छात्र एक ही स्कूल में पढ़ते थे। कुछ दिनों पहले एक छात्र ने दूसरे को 'मोटा' कहकर चिढ़ाया था, जो बात दूसरे छात्र के दिल में गहरी चुभ गई और उसने मन में बदले की भावना पाल ली थी। किसे पता था कि बच्चों का यह आपसी मनमुटाव एक दिन खूनी अंजाम तक पहुंच जाएगा। स्कूल की छुट्टी होते ही दोनों छात्र गेट के बाहर आमने-सामने आ गए। उनके बीच पहले तीखी बहस हुई और देखते ही देखते वे गाली-गलौज पर उतर आए। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्साए एक छात्र ने घर से छिपाकर लाया सब्जी काटने वाला चाकू निकाला और दूसरे छात्र पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। खुद पर हमला होते देख दूसरे छात्र ने भी हिम्मत दिखाई और किसी तरह चाकू छीन लिया। इसके बाद उसने भी पलटवार करते हुए पहले छात्र पर बेरहमी से वार करना शुरू कर दिया। दोनों तरफ से हुए इस जानलेवा हमले में 16 वर्षीय अमन यदु, जो राजकुमार यदु का पुत्र था, की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही तिल्दा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने खून से लथपथ अमन के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय आरोपी छात्र को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। इस वारदात के बाद से सासाहोली गांव और स्कूल के आसपास के इलाके में भारी तनाव और सनसनी का माहौल है, और स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे इस खूनी मंजर को देखकर बुरी तरह डरे व सहमे हुए हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने स्कूली बच्चों के भीतर पनप रहे गुस्से और हिंसक मानसिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।1
- राजनांदगांव के मनगटा रिसॉर्ट में हुई मुस्कान की मौत के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। इस घटना में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।1