*झूलेलाल जयन्ती पर विशेष* (हीरालाल भूरानी) झूलेलाल सिन्धी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं जिन्हें 'इष्ट देव' कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरुण (जल देवता) का अवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज भी पूजता है। उनका विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है। जल-ज्योति, वरुणावतार, झुलेलाल सिधियों के ईष्ट देव हैं जिनके आगे दामन फैलाकर सिंधी यही मंगल कामना करते हैं कि सारे विश्व में सुख-शांति, अमन-चैन, कायम रहे और चारों दिशाओं में हरियाली और खुशहाली बनी रहे। "चेट्रीचंडु" जिसे झूलेलाल जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह सिंधी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह तिथि हिंदू पंचांग पर आधारित है और चैत्र शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाई जाती है। (सिंधी भाषा में चैत्र को चेट्र कहते हैं) चेट्रीचंडु साई उडेरोलाल का जन्मदिन भी है, जिन्हें झूलेलाल के नाम से जाना जाता है जो भगवान विष्णु के वरुणवतार माने जाते है। आयोलाल झूलेलाल की संक्षिप्त कथा इस प्रकार कही जाती है भगवान झूलेलाल की कथा के अनुसार, 11वीं सदी में जब सिंध प्रदेश में हिंदुओं पर तत्कालीन क्रूर बादशाह मिरख शाह का अत्याचार बढ़ा, और धर्मातरण के लिए दबाव बढ़ा तब सिंध के मूल निवासी सिंधी जो हिन्दू धर्मावलंबी थे अपने धर्म रक्षा और प्राण रक्षा के लिए सिंधु नदी के किनारे पहुंचे, और प्रार्थना करने लगे, लगातार चालीस दिनों की प्रार्थना के बाद सिंधुनदी से झूलेलाल जी मछली पर बैठकर प्रगट हुए, जब झूलेलाल साई प्रगट हुए तब नदी के किनारे प्रार्थना कर रहे सिन्धियों ने उनके आने की खुशी और स्वागत में नारे लगाए "आयो लाल, सभई चओ झूलेलाल" जिसका अर्थ है झूलेलाल स्वामी आ गए, सभी बोलिए जय झूलेलाल, और तभी से सिंधी समाज उन्हें जल के देवता के रूप में पूजता आ रहा है. फिर झूलेलाल साई नीले घोड़े पर सवार हो कर हाथ में तलवार और अस्त्र शस्त्र धारण कर बादशाह मिरख शाह के पास गए और उसको समझाया कि सभी को स्वधर्म का पालन करने का अधिकार है और जबरन धर्मान्तरण या कोई भी दबाव गलत है, उनके दिव्य रूप से प्रभावित होकर मिरख शाह झूलेलाल साई का शरणागत हो गया और नीति पूर्वक राजकाज करने लगा, इस प्रकार भगवान साई झूलेलाल ने लोगों की रक्षा की, सिंधी अपने घरों में चालीस दिन तक मिट्टी की घाघर (मटकी) में जल भर कर रखते हैं और पूजा पाठ करते हैं, चालीस दिन बाद धूमधाम से कलश और झूलेलाल साई की पालकी यात्रा निकाली जाती है जिसे बहराणा साहेब कहते हैं, और नदी तालाब झील में मटकी, झूलेलाल और जल देवता का पूजन कर मटकी विसर्जित की जाती है। भगवान झूलेलाल को आम तौर पर दाढ़ी वाले दिव्य रूप में दर्शाया जाता है। वे कमल के फूल पर पालथी मारे बैठे होते हैं, जो पल्ले (मछली) पर टिका होता है, मछली सिंधु नदी पर तैरती हुई दिखाई देती है। उनके पास एक पवित्र पुस्तक और एक माला भी होती है। वे मोर पंख वाला सुनहरा मुकुट पहनते है और शाही कपड़े पहनते हैं। भगवान झूलेलाल को उडेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाई, पल्लेवारों ,ज्योतिनवारों और अमरलाल आदि नामों से भी जाना जाता है। "झूलेलाल चालीसा'"'"' चालीसा" एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है हमारी पूजन विधि का, हम अपने आराध्य की कृपा पाने के लिए अनेकानेक प्रकार से सिमरन, हवन पूजन, सत्संग, ध्यान आदि करते हैं। कई बार कई कारणों से हम ये सब नियमित नहीं कर पाते, ऐसे में हम बहुत थोड़े समय में बिना किसी सामग्री के भी "चालीसा" पाठ कर के अपना जीवन सफल बना सकते हैं। हम सिंधी लोग संपूर्ण विश्व में मूलतः विश्वबन्धुत्व सरल और सहयोगी स्वभाव के साथ-साथ स्वावलंबी और सर्वधर्म समभाव रखने वाले समाज के रूप में जाने जाते हैं। आदिशक्ति भगवान श्री हरि शिव, राम, कृष्ण, श्री झूलेलाल जी की प्रमुखता से पूजा की जाती है। सिंधियों के आराध्य देव "भगवान झूलेलाल" हैं जो वरूणावतार हैं। हम लोग वर्ष में एक बार "चालीहा" पूजन करते हैं जो चालीस दिनों तक चलता है, घरों और देवालयों में कलश स्थापना की जाती है जिसे "घाघर" कहते हैं इंटरनेट पर अनेक लोगों की पोस्ट की हुई "झूलेलाल चालीसा" उपलब्ध है। झूलेलाल जी के अवतरण दिवस को सिंधी समाज चेटीचंड के रूप में मनाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार सिंध का शासक मिरख शाह अपनी प्रजा पर अत्याचार करने लगा था जिसके कारण सिंधी समाज ने कठिन जप-तप और साधना की। तब सिंधु नदी में से एक बहुत बड़े नर मत्स्य पर बैठे हुए भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और कहा मैं 8 दिन बाद जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से प्रजा को मुक्ति दिलाउंगा। चेत्र माह की द्वितीया को एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम उडेरोलाल रखा गया। अपने चमत्कारों के कारण बाद में उन्हें झूलेलाल, लालसाई, के नाम से सिंधी समाज और ख्वाजा खिज जिन्दह पीर के नाम से मुसलमान भी पूजने लगे। चेटीचंड के दिन श्रद्धालु बहिराणा साहिब बनाते हैं। शोभा यात्रा में "छेज' (जो कि सिंध में डांडिया की तरह लोकनृत्य होता है) के साथ झूलेलाल की महिमा के गीत गाते हैं। ताहिरी (मीठे चावल), छोले, (उबले नमकीन चने) और शरबत का प्रसाद बांटा जाता है। शाम को बहिराणा साहिब का विसर्जन कर दिया जाता है। झूलेलाल जी के मुख्य - मुख्य उपदेश निम्नलिखित *सच्चाई और न्याय* 1. सच्चाई का पालन करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को सच्चाई का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने. कहा कि सच्चाई ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। 2. न्याय के लिए लड़ेंः झूलेलाल जी ने लोगों को न्याय के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि न्याय के बिना जीवन अधूरा है। *एकता और सहयोग* 1. एकता में बल हैः झूलेलाल जी ने लोगों को एकता के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एकता में बल है और इससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। 2. सहयोग करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सहयोग से हम अपने समाज को मजबूत बना सकते हैं। *करुणा और दया* 1. करुणा का पालन करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को करुणा का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि करुणा से हम दूसरों की मदद कर सकते हैं। 2. दया का पालन करें: झूलेलाल जी ने लोगों को दया का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दया से हम दूसरों के प्रति सहानुभूति रख सकते हैं। *आत्म-सुधार* 1. आत्म-सुधार करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को आत्म-सुधार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्म-सुधार से हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। 2. स्वाध्याय करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को स्वाध्याय करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय से हम अपने ज्ञान को बढ़ा सकते हैं। इन उपदेशों को अपनाकर, हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और झूलेलाल जी के आदर्शों को अपना सकते हैं। ********
*झूलेलाल जयन्ती पर विशेष* (हीरालाल भूरानी) झूलेलाल सिन्धी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं जिन्हें 'इष्ट देव' कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरुण (जल देवता) का अवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज भी पूजता है। उनका विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है। जल-ज्योति, वरुणावतार, झुलेलाल सिधियों के ईष्ट देव हैं जिनके आगे दामन फैलाकर सिंधी यही मंगल कामना करते हैं कि सारे विश्व में सुख-शांति, अमन-चैन, कायम रहे और चारों दिशाओं में हरियाली और खुशहाली बनी रहे। "चेट्रीचंडु" जिसे झूलेलाल जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह सिंधी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह तिथि हिंदू पंचांग पर आधारित है और चैत्र शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाई जाती है। (सिंधी भाषा में चैत्र को चेट्र कहते हैं) चेट्रीचंडु साई उडेरोलाल का जन्मदिन भी है, जिन्हें झूलेलाल के नाम से जाना जाता है जो भगवान विष्णु के वरुणवतार माने जाते है। आयोलाल झूलेलाल की संक्षिप्त कथा इस प्रकार कही जाती है भगवान झूलेलाल की कथा के अनुसार, 11वीं सदी में जब सिंध प्रदेश में हिंदुओं पर तत्कालीन क्रूर बादशाह मिरख शाह का अत्याचार बढ़ा, और धर्मातरण के लिए दबाव बढ़ा तब सिंध के मूल निवासी सिंधी जो हिन्दू धर्मावलंबी थे अपने धर्म रक्षा और प्राण रक्षा के लिए सिंधु नदी के किनारे पहुंचे, और प्रार्थना करने लगे, लगातार चालीस दिनों की प्रार्थना के बाद सिंधुनदी से झूलेलाल जी मछली पर बैठकर प्रगट हुए, जब झूलेलाल साई प्रगट हुए तब नदी के किनारे प्रार्थना कर रहे सिन्धियों ने उनके आने की खुशी और स्वागत में नारे लगाए "आयो लाल, सभई चओ झूलेलाल" जिसका अर्थ है झूलेलाल स्वामी आ गए, सभी बोलिए जय झूलेलाल, और तभी से सिंधी समाज उन्हें जल के देवता के रूप में पूजता आ रहा है. फिर झूलेलाल साई नीले घोड़े पर सवार हो कर हाथ में तलवार और अस्त्र शस्त्र धारण कर बादशाह मिरख शाह के पास गए और उसको समझाया कि सभी को स्वधर्म का पालन करने का अधिकार है और जबरन धर्मान्तरण या कोई भी दबाव गलत है, उनके दिव्य रूप से प्रभावित होकर मिरख शाह झूलेलाल साई का शरणागत हो गया और नीति पूर्वक राजकाज करने लगा, इस प्रकार भगवान साई झूलेलाल ने लोगों की रक्षा की, सिंधी अपने घरों में चालीस दिन तक मिट्टी की घाघर (मटकी) में जल भर कर रखते हैं और पूजा पाठ करते हैं, चालीस दिन बाद धूमधाम से कलश और झूलेलाल साई की पालकी यात्रा निकाली जाती है जिसे बहराणा साहेब कहते हैं, और नदी तालाब झील में मटकी, झूलेलाल और जल देवता का पूजन कर मटकी विसर्जित की जाती है। भगवान झूलेलाल को आम तौर पर दाढ़ी वाले दिव्य रूप में दर्शाया जाता है। वे कमल के फूल पर पालथी मारे बैठे होते हैं, जो पल्ले (मछली) पर टिका होता है, मछली सिंधु नदी पर तैरती हुई दिखाई देती है। उनके पास एक पवित्र पुस्तक और एक माला भी होती है। वे मोर पंख वाला सुनहरा मुकुट पहनते है और शाही कपड़े पहनते हैं। भगवान झूलेलाल को उडेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाई, पल्लेवारों ,ज्योतिनवारों और अमरलाल आदि नामों से भी जाना जाता है। "झूलेलाल चालीसा'"'"' चालीसा" एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है हमारी पूजन विधि का, हम अपने आराध्य की कृपा पाने के लिए अनेकानेक प्रकार से सिमरन, हवन पूजन, सत्संग, ध्यान आदि करते हैं।
कई बार कई कारणों से हम ये सब नियमित नहीं कर पाते, ऐसे में हम बहुत थोड़े समय में बिना किसी सामग्री के भी "चालीसा" पाठ कर के अपना जीवन सफल बना सकते हैं। हम सिंधी लोग संपूर्ण विश्व में मूलतः विश्वबन्धुत्व सरल और सहयोगी स्वभाव के साथ-साथ स्वावलंबी और सर्वधर्म समभाव रखने वाले समाज के रूप में जाने जाते हैं। आदिशक्ति भगवान श्री हरि शिव, राम, कृष्ण, श्री झूलेलाल जी की प्रमुखता से पूजा की जाती है। सिंधियों के आराध्य देव "भगवान झूलेलाल" हैं जो वरूणावतार हैं। हम लोग वर्ष में एक बार "चालीहा" पूजन करते हैं जो चालीस दिनों तक चलता है, घरों और देवालयों में कलश स्थापना की जाती है जिसे "घाघर" कहते हैं इंटरनेट पर अनेक लोगों की पोस्ट की हुई "झूलेलाल चालीसा" उपलब्ध है। झूलेलाल जी के अवतरण दिवस को सिंधी समाज चेटीचंड के रूप में मनाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार सिंध का शासक मिरख शाह अपनी प्रजा पर अत्याचार करने लगा था जिसके कारण सिंधी समाज ने कठिन जप-तप और साधना की। तब सिंधु नदी में से एक बहुत बड़े नर मत्स्य पर बैठे हुए भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और कहा मैं 8 दिन बाद जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से प्रजा को मुक्ति दिलाउंगा। चेत्र माह की द्वितीया को एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम उडेरोलाल रखा गया। अपने चमत्कारों के कारण बाद में उन्हें झूलेलाल, लालसाई, के नाम से सिंधी समाज और ख्वाजा खिज जिन्दह पीर के नाम से मुसलमान भी पूजने लगे। चेटीचंड के दिन श्रद्धालु बहिराणा साहिब बनाते हैं। शोभा यात्रा में "छेज' (जो कि सिंध में डांडिया की तरह लोकनृत्य होता है) के साथ झूलेलाल की महिमा के गीत गाते हैं। ताहिरी (मीठे चावल), छोले, (उबले नमकीन चने) और शरबत का प्रसाद बांटा जाता है। शाम को बहिराणा साहिब का विसर्जन कर दिया जाता है। झूलेलाल जी के मुख्य - मुख्य उपदेश निम्नलिखित *सच्चाई और न्याय* 1. सच्चाई का पालन करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को सच्चाई का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने. कहा कि सच्चाई ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। 2. न्याय के लिए लड़ेंः झूलेलाल जी ने लोगों को न्याय के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि न्याय के बिना जीवन अधूरा है। *एकता और सहयोग* 1. एकता में बल हैः झूलेलाल जी ने लोगों को एकता के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एकता में बल है और इससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। 2. सहयोग करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सहयोग से हम अपने समाज को मजबूत बना सकते हैं। *करुणा और दया* 1. करुणा का पालन करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को करुणा का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि करुणा से हम दूसरों की मदद कर सकते हैं। 2. दया का पालन करें: झूलेलाल जी ने लोगों को दया का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दया से हम दूसरों के प्रति सहानुभूति रख सकते हैं। *आत्म-सुधार* 1. आत्म-सुधार करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को आत्म-सुधार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्म-सुधार से हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। 2. स्वाध्याय करेंः झूलेलाल जी ने लोगों को स्वाध्याय करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय से हम अपने ज्ञान को बढ़ा सकते हैं। इन उपदेशों को अपनाकर, हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और झूलेलाल जी के आदर्शों को अपना सकते हैं। ********
- दिल्ली जयपुर हाईवे पर कापड़ीवास ओल्ड राव के सामने स्थित सिगनेचर ग्लोबल सोसाइटी में मिट्टी खुदाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया जिनमें से 7 की मौत हुई मौत परिजनों ने लगाए बड़े आरोप सुनिए....1
- सोडावास. सोडावास कस्बे के सबसे अधिक बुजुर्ग 106 वर्षीय रामसिंह बोहरा समाजसेवी का सोमवार प्रातः 6:15 बजे निधन हो गया । उनके निधन पर पूरा कस्बा उनके घर से श्मशान घाट तक एकत्रित होकर पहुंचा। अंतिम संस्कार में सोडावास सरपंच सरजीत चौधरी, जांगिड़ समाज के राष्ट्रीय प्रधान रामपाल जांगिड़, पूर्व सरपंच सूरजभान बोहरा, किसान महापंचायत के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी एवं कार्यकारणी के सदस्य, मुंडावर पूर्व प्रधान रोहिताश चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल शर्मा, पंजाब नेशनल बैंक के सुरेंद्र जाट, वीरेंद्र जाट अध्यापक, बाबा मनिराम गौशाला के अध्यक्ष रोहिताश जाट व समस्त कार्यकर्ता सहित ग्रामीण मौजूद रहे।1
- सिमरू की ढाणी खोर्रा2
- Post by Voice of Labour1
- Post by महेंद्र सिंह1
- जयपुर बाईपास पर परिवहन विभाग की वाहन चेकिंग के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार विभागीय गाड़ी की टक्कर से एक बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और गुस्साए लोगों ने हंगामा कर दिया। जानकारी के अनुसार परिवहन निरीक्षक शकीला बानो अपनी टीम के साथ हाईवे पर वाहनों की जांच कर रही थीं। इसी दौरान परिवहन विभाग की गाड़ी की टक्कर से एक बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए और आक्रोशित लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों ने एक व्यक्ति को पकड़ लिया, जिस पर अवैध वसूली के पैसे लेकर भागने का आरोप लगाया गया। गुस्साए लोगों ने उसकी पिटाई कर दी और मौके पर मौजूद परिवहन निरीक्षक को भी खरी-खोटी सुनाई। परिवहन निरीक्षक शकीला बानो का कहना है कि बाइक सवार अचानक गाड़ी के सामने आ गया, जिससे यह हादसा हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद मचा हंगामा हादसे की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। लोगों ने अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए विरोध जताया और एक व्यक्ति की पिटाई भी कर दी। बाद में पुलिस ने पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।1
- हमारी नूँह प्रशासन से मांग है कि ऐसे पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। अगर ट्रक चालक ने किसी तरह का वॉइलेशन किया था, तो उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन जिस तरह से पुलिसकर्मियों ने गुंडागर्दी दिखाते हुए नुकीली धातु से ट्रक को पलटवाया और ड्राइवर को गंभीर चोट पहुंचाई, यह निंदनीय है।1
- राजस्थान विधानसभा में पूर्व केबिनेट मंत्री हेमसिंह भड़ाना को श्रद्धांजलि दी1