जमशेदपुर : राष्ट्र निर्माण के संकल्प संग आगे बढ़ रही टाटा स्टील 26 अगस्त 1907 का दिन भारतीय औद्योगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। यह केवल एक कंपनी की स्थापना का दिन नहीं, बल्कि उस स्वप्न के साकार होने की शुरुआत थी, जिसमें भारत को आधुनिक औद्योगिक शक्ति बनाने की आकांक्षा छिपी थी। जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने ऐसे समय में भारत में इस्पात संयंत्र स्थापित करने की कल्पना की, जब देश औद्योगिक रूप से पिछड़ा माना जाता था और विदेशी विशेषज्ञ भारत में बड़े स्टील प्लांट की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं थे। उनके लिए इस्पात केवल एक उत्पाद नहीं था, बल्कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव था। इसी दूरदर्शी सोच से टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर टाटा स्टील का रूप लिया। इसके साथ ही जमशेदपुर का विकास हुआ, जो आज भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। टाटा स्टील और जमशेदपुर की कहानी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी है। यह कहानी बताती है कि किसी उद्योग की सफलता केवल उत्पादन और मुनाफे से नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़े लोगों, शहर और समाज की प्रगति से भी मापी जाती है।टाटा स्टील की सबसे विशिष्ट पहचान उसकी सामाजिक प्रतिबद्धता रही है। आज जब कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर उद्योग जगत की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जाता है, टाटा समूह ने इसकी भावना को बहुत पहले ही अपने कार्यों में शामिल कर लिया था। कंपनी ने अपने कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार काम किया। जमशेदपुर में विकसित संस्थान और सुविधाएं इस सोच का उदाहरण हैं। बेहतर आवास, अस्पताल, शिक्षा, खेल मैदान, पेयजल, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं के विकास ने इस शहर को देश के अन्य औद्योगिक नगरों से अलग पहचान दी। कंपनी की सामाजिक पहलों का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि समुदायों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में टाटा स्टील के सामाजिक प्रयासों से 57 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने का दावा कंपनी ने किया है। यह आंकड़ा उसके सामाजिक सरोकारों के व्यापक दायरे को दर्शाता है। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य से लेकर महिलाओं के सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तक अनेक क्षेत्रों में पहल की जा रही है।एक सदी से अधिक की यात्रा में टाटा स्टील ने अनेक वैश्विक चुनौतियों का सामना किया। दो विश्व युद्ध, आर्थिक मंदियां, बाजार में उतार-चढ़ाव, तकनीकी परिवर्तन और इस्पात उद्योग में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बावजूद कंपनी ने नवाचार और तकनीकी क्षमता को अपनी ताकत बनाया। आज इस्पात उद्योग के सामने चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि उत्पादन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की भी है। जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन के दौर में दुनिया भर की कंपनियां हरित प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रही हैं। टाटा स्टील ने भी 2045 तक नेट जीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है। कलिंगनगर में आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने की उत्पादन क्षमता, लुधियाना में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस की दिशा में पहल तथा यूरोप में पोर्ट टैलबोट जैसे संयंत्रों में तकनीकी बदलाव इसी परिवर्तन का हिस्सा हैं। इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस जैसी तकनीकें इस्पात उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भविष्य के लिए नई जिम्मेदारी टाटा स्टील की आगामी यात्रा केवल उत्पादन क्षमता, कारोबार और बाजार विस्तार तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में उद्योगों के सामने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। ऐसे में टिकाऊ विकास, ऊर्जा दक्षता, पुनर्चक्रण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कम कार्बन वाली तकनीकों पर जोर आवश्यक होगा। 26 अगस्त 1907 को शुरू हुई यात्रा ने भारत को यह विश्वास दिया था कि देश अपने बल पर विश्वस्तरीय उद्योग खड़े कर सकता है। आज 119 वर्ष बाद टाटा स्टील उसी विश्वास को नई तकनीक, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। जमशेदजी टाटा का सपना था कि उद्योग राष्ट्र की समृद्धि का माध्यम बने। टाटा स्टील की यात्रा में इस विचार की निरंतरता दिखाई देती है। इसलिए टाटा स्टील की कहानी केवल एक इस्पात कंपनी की कहानी नहीं है। यह उस विचार की कहानी है जिसमें उद्योग को राष्ट्र निर्माण का साधन माना गया, कर्मचारी को विकास का सहभागी समझा गया और समाज तथा पर्यावरण को जिम्मेदारी का हिस्सा बनाया गया। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यही दृष्टि टाटा स्टील को भविष्य की ओर बढ़ने की दिशा देती है। फौलाद बनाने वाली यह कंपनी अब आर्थिक विकास के साथ एक ऐसे टिकाऊ भविष्य के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है, जिसमें उद्योग, समाज और प्रकृति—तीनों की प्रगति साथ-साथ हो। वरुण कुमार लेखक एवं कवि
जमशेदपुर : राष्ट्र निर्माण के संकल्प संग आगे बढ़ रही टाटा स्टील 26 अगस्त 1907 का दिन भारतीय औद्योगिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। यह केवल एक कंपनी की स्थापना का दिन नहीं, बल्कि उस स्वप्न के साकार होने की शुरुआत थी, जिसमें भारत को आधुनिक औद्योगिक शक्ति बनाने की आकांक्षा छिपी थी। जमशेदजी नसरवानजी टाटा ने ऐसे समय में भारत में इस्पात संयंत्र स्थापित करने की कल्पना की, जब देश औद्योगिक रूप से पिछड़ा माना जाता था और विदेशी विशेषज्ञ भारत में बड़े स्टील प्लांट की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं थे। उनके लिए इस्पात केवल एक उत्पाद नहीं था, बल्कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव था। इसी दूरदर्शी सोच से टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर टाटा स्टील का रूप लिया। इसके साथ ही जमशेदपुर का विकास हुआ, जो आज भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। टाटा स्टील और जमशेदपुर की कहानी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी है। यह कहानी बताती है कि किसी उद्योग की सफलता केवल उत्पादन और मुनाफे से नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़े लोगों, शहर और समाज की प्रगति से भी मापी जाती है।टाटा स्टील की सबसे विशिष्ट पहचान उसकी सामाजिक प्रतिबद्धता रही है। आज जब कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर उद्योग जगत की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जाता है, टाटा समूह ने इसकी भावना को बहुत पहले ही अपने कार्यों में शामिल कर लिया था। कंपनी ने अपने कर्मचारियों के साथ-साथ आसपास के समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार काम किया। जमशेदपुर में विकसित संस्थान और सुविधाएं इस सोच का उदाहरण हैं। बेहतर आवास, अस्पताल, शिक्षा, खेल मैदान, पेयजल, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं के विकास ने इस शहर को देश के अन्य औद्योगिक नगरों से अलग पहचान दी। कंपनी की सामाजिक पहलों का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि समुदायों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में टाटा स्टील के सामाजिक प्रयासों से 57 लाख से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने का दावा कंपनी ने किया है। यह आंकड़ा उसके सामाजिक सरोकारों के व्यापक दायरे को दर्शाता है। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य से लेकर महिलाओं के सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तक अनेक क्षेत्रों में पहल की जा रही है।एक सदी से
अधिक की यात्रा में टाटा स्टील ने अनेक वैश्विक चुनौतियों का सामना किया। दो विश्व युद्ध, आर्थिक मंदियां, बाजार में उतार-चढ़ाव, तकनीकी परिवर्तन और इस्पात उद्योग में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बावजूद कंपनी ने नवाचार और तकनीकी क्षमता को अपनी ताकत बनाया। आज इस्पात उद्योग के सामने चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि उत्पादन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की भी है। जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन के दौर में दुनिया भर की कंपनियां हरित प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रही हैं। टाटा स्टील ने भी 2045 तक नेट जीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है। कलिंगनगर में आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने की उत्पादन क्षमता, लुधियाना में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस की दिशा में पहल तथा यूरोप में पोर्ट टैलबोट जैसे संयंत्रों में तकनीकी बदलाव इसी परिवर्तन का हिस्सा हैं। इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस जैसी तकनीकें इस्पात उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भविष्य के लिए नई जिम्मेदारी टाटा स्टील की आगामी यात्रा केवल उत्पादन क्षमता, कारोबार और बाजार विस्तार तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में उद्योगों के सामने आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। ऐसे में टिकाऊ विकास, ऊर्जा दक्षता, पुनर्चक्रण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कम कार्बन वाली तकनीकों पर जोर आवश्यक होगा। 26 अगस्त 1907 को शुरू हुई यात्रा ने भारत को यह विश्वास दिया था कि देश अपने बल पर विश्वस्तरीय उद्योग खड़े कर सकता है। आज 119 वर्ष बाद टाटा स्टील उसी विश्वास को नई तकनीक, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। जमशेदजी टाटा का सपना था कि उद्योग राष्ट्र की समृद्धि का माध्यम बने। टाटा स्टील की यात्रा में इस विचार की निरंतरता दिखाई देती है। इसलिए टाटा स्टील की कहानी केवल एक इस्पात कंपनी की कहानी नहीं है। यह उस विचार की कहानी है जिसमें उद्योग को राष्ट्र निर्माण का साधन माना गया, कर्मचारी को विकास का सहभागी समझा गया और समाज तथा पर्यावरण को जिम्मेदारी का हिस्सा बनाया गया। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यही दृष्टि टाटा स्टील को भविष्य की ओर बढ़ने की दिशा देती है। फौलाद बनाने वाली यह कंपनी अब आर्थिक विकास के साथ एक ऐसे टिकाऊ भविष्य के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है, जिसमें उद्योग, समाज और प्रकृति—तीनों की प्रगति साथ-साथ हो। वरुण कुमार लेखक एवं कवि
- सरायकेला में राखी बाजार गुलजार, चौक-चौराहों पर सजी आकर्षक राखियों की दुकानें। शुरू ऐप न्यूज़ चैनल सरायकेला से रवि गुप्ता की रिपोर्ट । भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन नजदीक आते ही सरायकेला नगर पंचायत क्षेत्र में राखी बाजार सजकर तैयार हो गया है। नगर के विभिन्न चौक-चौराहों पर टेंट लगाकर राखियों की आकर्षक दुकानें सजाई गई हैं, जहां बहनों के लिए तरह-तरह की रंग-बिरंगी और फैंसी राखियां उपलब्ध हैं। दुकानों में साधारण राखियों से लेकर आकर्षक डिजाइन वाली फैंसी राखियों की खूब मांग देखी जा रही है। जानकारी के अनुसार बाजार में राखियों की कीमत करीब 5 रुपये से लेकर 100 रुपये तक है। बच्चों और युवतियों के लिए भी अलग-अलग डिजाइन और पसंद के अनुसार राखियां उपलब्ध हैं। राखी के साथ-साथ मिठाइयों की दुकानों पर भी चहल-पहल बढ़ गई है। विभिन्न दुकानों में करीब 10 रुपये से 30 रुपये तक की कीमत में तरह-तरह की मिठाइयां उपलब्ध हैं। रक्षाबंधन को लेकर बाजार में खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है। भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास की डोर बांधने के लिए पसंदीदा राखियां खरीद रही हैं, वहीं भाई भी बहनों के लिए उपहार और मिठाइयों की खरीदारी में जुटे हैं।4
- सरायकेला में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की निकली भव्य जुलूस , पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद सरायकेला - ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर बुधवार को सरायकेला में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अकीदत के साथ त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने पैगंबर मोहम्मद की सीरत और उनकी शिक्षाओं को याद किया तथा परिवार, दोस्तों और अपने चाहने वालों को मुबारकबाद दी। राजबांध से निकला विशाल जुलूस ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के मौके पर सरायकेला के राजबांध से विशाल 'जुलूस ए मोहम्मदी ' निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में बड़े बुजुर्ग एवं बच्चे शामिल हुए। जुलूस ने पूरे सरायकेला शहर का भ्रमण किया। इस दौरान लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। भाईचारे और शांति का दिया संदेश जुलूस के दौरान लोगों ने आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। लोगों ने पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं को याद करते हुए समाज में शांति और एकता बनाए रखने का संकल्प लिया। पूरे शहर में पर्व को लेकर उत्सवी माहौल बना रहा। वहीं पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रही।4
- छात्र आंदोलन पटना में छात्रों का समर्थन करने के बाद जब मौर्यलोक के परिसर में चाऊमीन खाने बैठा तब चुपके से पीछा करते आई बिहार की नकारा पुलिस ताकि वह हमें डिटेन कर जेल भेज सके लेकिन इन्हें पता नहीं कि ये इनके बस की बात नहीं है और अंततः इन पुलिस वालों को खाली हाथ लौटना पड़ा . 🤴SSR 😎 छात्र आंदोलन पटना में छात्रों का समर्थन करने के बाद जब मौर्यलोक के परिसर में चाऊमीन खाने बैठा तब चुपके से पीछा करते आई बिहार की नकारा पुलिस ताकि वह हमें डिटेन कर जेल भेज सके लेकिन इन्हें पता नहीं कि ये इनके बस की बात नहीं है और अंततः इन पुलिस वालों को खाली हाथ लौटना पड़ा . 🤴SSR 😎 #studentprotest #biharnews #patna #bpsc #bihar1
- गम्हरिया में उपद्रवियों पर अब सख्ती, शराब दुकानों के बाहर खुद मोर्चे पर उतरे एसडीपीओ गम्हरिया में उपद्रवियों पर अब सख्ती, शराब दुकानों के बाहर खुद मोर्चे पर उतरे एसडीपीओ गम्हरिया क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर उपद्रव और शराब दुकानों के बाहर होने वाली भीड़ को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। शिकायत मिलने के बाद सरायकेला एसडीपीओ स्वयं गम्हरिया पहुंचे और शराब दुकानों के बाहर स्थिति का जायजा लेते हुए भीड़ को नियंत्रित करने के निर्देश दिए। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बिगाड़ने या सार्वजनिक स्थल पर उपद्रव करने वालों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आम लोगों की सुरक्षा और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पुलिस की निगरानी भी बढ़ाई जा रही है। 📍 गम्हरिया | सरायकेला-खरसावां #Gamharia #Saraikela #PoliceAction #SDPO #JharkhandNews #GamhariaNews #BreakingNews #DalmaNewsLive1
- 🚨जगन्नाथपुर के कंसलपोस गांव में सांप के काटने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत जगन्नाथपुर के कंसलपोस गांव में मंगलवार की रात घर में सो रहे की सांप के काटने से मौत हो गई। घटना रात करीब साढ़े 11 बजे की है। गुरा सिंकू घर के फर्श पर सो रहा था। इसी दौरान अचानक सांप ने उसे काट लिया, जिससे उसकी नींद खुल गई। उसने घटना की जानकारी अपने पिता को दी। इसके बाद परिजन उसे तत्काल जगन्नाथपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सक ने जांच के बाद बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए उसे चाईबासा सदर अस्पताल रेफर कर दिया। #जगन्नाथपुर #कंसलपोस #सांपकेकाटनेसेमौत #12वर्षीयबच्चा #सर्पदंश #सर्पदंशसेमौत #पश्चिमीसिंहभूम #चाईबासा #झारखंड #जगन्नाथपुरसमाचार #KolhanBreakingNews1
- jharkhand | chandil : चांडिल डैम के सभी 13 रेडियल गेट खुले, निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा.... #viral #flood jharkhand | chandil : चांडिल डैम के सभी 13 रेडियल गेट खुले, निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा.... बिष्णु पद महापात्र 📲 9934893057 (wa) सरायकेला-खरसवां जिले में लगातार वर्षा के कारण चांडिल डैम के सभी 13 रेडियल गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। इससे निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है | Floodsituation | chandildam | suryodaysamvaad1
- *नवनियुक्त कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोनाराम सिंकु के स्वागत में उमड़ा कांग्रेस का जनसैलाब, दिखी संगठन की ताकत* चाईबासा : जिला कांग्रेस कमिटी, पश्चिमी सिंहभूम के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष, जगन्नाथपुर के विधायक-सह-उप मुख्य सचेतक, सत्तारूढ़ दल सोनाराम सिंकु के स्वागत-अभिनंदन समारोह में बुधवार को कांग्रेसजनों का जबरदस्त उत्साह और जोश देखने को मिला। कांग्रेस भवन, चाईबासा में आयोजित समारोह में जिलेभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के स्वागत को लेकर पूरा चाईबासा कांग्रेस के झंडों, बैनरों एवं स्वागत पोस्टरों से पटा नजर आया। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं मार्गों पर लगे झंडे-बैनर और स्वागत पोस्टर कार्यक्रम की भव्यता तथा कांग्रेसजनों के उत्साह को बयां कर रहे थे। पूरा शहर कांग्रेसमय दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम की शुरुआत पोस्ट ऑफिस चौक से पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच निकले भव्य स्वागत जुलूस से हुई। जुलूस में कांग्रेसजनों ने नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सोनाराम सिंकु का गर्मजोशी से स्वागत किया। जुलूस भगवान बिरसा मुंडा तथा शहीद राम भगवान केरकेट्टा की आदमकद प्रतिमा के समक्ष पहुंचा, जहां माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद जुलूस मुख्य मार्ग होते हुए स्टेट बैंक, सदर थाना चौक एवं शहीद पार्क चौक पहुंचा। यहां वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए शहीद स्मारक पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद जुलूस कांग्रेस भवन पहुंचा, जहां वह स्वागत-अभिनंदन समारोह में परिवर्तित हो गया।समारोह में पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर दास ने स्वागत भाषण दिया। मंच संचालन कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रखंड अध्यक्ष विजय सिंह सामड ने किया। कांग्रेस भवन में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सोनाराम सिंकु का कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ, फूल-माला एवं अंगवस्त्र भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान पूरा परिसर कांग्रेसजनों के उत्साह, नारों और जयघोष से गूंज उठा।नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के स्वागत में उमड़ी भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के उत्साह ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकजुटता और ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कांग्रेसजनों ने अपने भव्य स्वागत कार्यक्रम के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों को भी संगठन की मजबूती और जमीनी पकड़ का स्पष्ट संदेश दिया। समारोह को संबोधित करते हुए सोनाराम सिंकु ने कांग्रेस के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व तथा जिले के सभी कांग्रेसजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी का वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करेंगे। कार्यकर्ताओं का सम्मान, संगठन की मजबूती और जनता के मुद्दों की लड़ाई उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर व्यापक अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश महासचिव संगठन एवं प्रशिक्षण सुनित शर्मा ने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और जनअधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने वाली विचारधारा है। पश्चिमी सिंहभूम में संगठन को और मजबूत करते हुए आम जनता की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। कांग्रेस जिला प्रभारी-सह-प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र सोनकर ने विश्वास व्यक्त किया कि सोनाराम सिंकु के नेतृत्व में पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस को नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कांग्रेस को गांव से लेकर बूथ स्तर तक मजबूत करने तथा जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। समारोह को पूर्व विधायक देवेंद्र नाथ चाम्पिया, प्रदेश कांग्रेस सचिव मायाधर बेहरा, राम सिंह सावैयां, सयुंक्त सचिव नितिमा बारी, पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष अम्बर राय चौधरी, वरीय कांग्रेसी राजेश शुक्ला, कैरा बिरुवा, अनुप्रिया सोय, मासूम रजा, रितेश तामसोय, प्रमुख बुधराम पूर्ति, प्रखंड अध्यक्ष दिकु सावैयां, ललित दोराईबुरु, सीताराम गोप एवं सेवादल मुख्य संगठक लक्ष्मण हासदा ने भी संबोधित किया। कांग्रेसजनों ने नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सोनाराम सिंकु को शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए उनके नेतृत्व में संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने तथा कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर जय प्रकाश महतो, सैमसन सुंडी, पूरेन्द्र हेम्ब्रम, रंजीत यादव, इम्तियाज खान, कविश रजा, अशरफुल होदा, सूरज तामसोय, हसलुद्दीन खान, सूरज मुखी, मो. इमरान अहमद, अशोक बारिक, पुरुषोत्तम दास पान, नूतन बिरुवा, हरि राव, राखी सलूजा, राधा मोहन बनर्जी, सनातन बिरुवा, राजेश चौरसिया, अमित मुखी, इरशाद अहमद, मिली बिरुवा, शरण पान, घनश्याम गागराई, मो. फिरोज अहमद, पटना ईचागुटू, मोहन सिंह हेम्ब्रम, महेश प्रसाद साहू, सोमा पूर्ति, विजय सिंह तुबिद प्रखंड अध्यक्ष मंजीत प्रधान, शैलेश गोप, सुखलाल हेम्ब्रम, चंद्र भूषण बिरुवा, जय प्रकाश लागुरी, संजय हेम्ब्रम, सिकुर गोप, राहुल पूर्ति, जदोराय मुंडरी, सोनाराम कोडाह, सकारी दोंगो, विजय भेंगरा एवं कार्यालय सचिव सुशील दास सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित थे।2
- पूरे पुलिस एसोशिएशन को धो 😡 डाला विधायक जयराम महतो ने.... हम लालखंड (तोपचांची), के मिट्टी से आते है डरते नहीं है...।। पूरे पुलिस एसोशिएशन को धो 😡 डाला विधायक जयराम महतो ने.... हम लालखंड (तोपचांची), के मिट्टी से आते है डरते नहीं है...।।1