धर्म की राजधानी हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के अवसर पर आस्था का एक अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने माँ गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। शनिवार रात से ही शुरू हुआ स्नान रविवार सुबह तक हरिद्वार की गलियों, पार्किंग स्थलों, राष्ट्रीय राजमार्गों और गंगा के घाटों को श्रद्धालुओं से भर चुका था। हालाँकि सीमित संसाधनों के बावजूद जिला और पुलिस प्रशासन ने इस विशाल स्नान पर्व को सफलतापूर्वक संपन्न कराया, फिर भी जाम, गंदगी, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी ने बड़े सवाल खड़े किए और श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ाई। हर की पैड़ी के साथ-साथ कुशावर्त घाट, सुभाष घाट, गऊघाट, रामघाट, श्रवणनाथ घाट, विष्णुघाट, बिरला घाट, दक्ष घाट, सतीघाट, नीलधारा, लोकनाथ घाट, शालिग्राम घाट, नारायण स्वामी घाट, शिव की पैड़ी, सप्तऋषि घाट, परमार्थ निकेतन घाट और ठोकर नंबर एक से दस तक के सभी स्नान घाटों पर लाखों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने पीपल पूजन, तर्पण, पिंडदान, नारायणी शिला पूजा, तीर्थ पुरोहितों से संकल्प, दान-दक्षिणा कर अपने और पूर्वजों के मोक्ष तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। लाखों की भीड़ के बावजूद, जिला और पुलिस प्रशासन की यह बड़ी उपलब्धि रही कि उन्होंने सीमित संसाधनों में इस विशाल स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराया और कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। हालाँकि, इस सफल आयोजन के बीच कई ऐसी कमियाँ भी उजागर हुईं, जिनसे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सबक लेना आवश्यक है। सबसे बड़ी समस्या नेशनल हाईवे पर ई-रिक्शा, थ्री-व्हीलर और भारी वाहनों के कारण उत्पन्न हुई, जहां ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर सवारियां भरते और यू-टर्न लेते दिखे, जिससे बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सिर पर सामान ढोकर लंबी दूरी तक पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा। इसके समाधान के लिए ई-रिक्शा को निर्धारित पार्किंग तक सीमित करने और भारी वाहनों को रात्रि में निकालने जैसे सुझाव दिए गए हैं। दूसरा, हर की पैड़ी सहित कई घाटों पर सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं दिखी, जहां पॉलिथीन और कूड़े के ढेर दिखाई दिए, जिससे गंगा में गंदगी जाने का खतरा बना रहा; इसके लिए विशेष सफाई कर्मचारियों की तैनाती और त्वरित कूड़ा एकत्रण की वकालत की गई। तीसरा, इतने बड़े स्नान पर्व के दौरान भी हर की पैड़ी क्षेत्र में लगभग 50 से 60 अवैध फड़ और कैनी भीड़ के बीच अवरोध बने रहे, जिससे श्रद्धालुओं को निकलने में कठिनाई हुई और हादसे की आशंका बनी रही; ऐसे में स्नान घाटों को पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त रखने की आवश्यकता महसूस की गई। चौथी कमी समाजसेवा के दावों की परीक्षा में थी, क्योंकि बैठकों में दिखने वाले कई लोग आयोजनों में सहयोग करते नहीं दिखे; प्रशासन को अखाड़ों के स्वयंसेवकों, ट्रस्टों, वास्तविक समाजसेवियों, एनसीसी और भारत स्काउट गाइड जैसे संगठनों को बैरिकेडिंग व घाटों पर जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव दिया गया है। पांचवीं बड़ी परेशानी पानी की भारी कमी थी, जहां पार्किंग स्थलों पर और नेशनल हाईवे पर पैदल चल रहे श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पानी के टैंकर और पेयजल व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। अंत में, महिलाओं को शौचालय व्यवस्था की अपर्याप्तता के कारण सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ी, जिससे उन्हें खुले में जाने के लिए विवश होना पड़ा और उन्हें शर्म व असुविधा का सामना करना पड़ा; भविष्य के आयोजनों में महिलाओं की गरिमा और सुविधा को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया है। इन चुनौतियों के बीच, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित स्वयं पूरी रात और तड़के सुबह तक स्नान व्यवस्था की निगरानी करते हुए बेहद गंभीर और सतर्क दिखाई दिए। हर की पैड़ी पुलिस चौकी से उन्होंने लगातार प्रमुख स्नान घाटों पर नजर बनाए रखी और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उनके इस समर्पण को कई लोगों ने "मां गंगा के दरबार में एक सेवक की मौन प्रार्थना" के रूप में देखा, जिसका परिणाम यह रहा कि सीमित संसाधनों, रिकॉर्ड तोड़ भीड़ और भारी दबाव के बावजूद प्रशासन इस विशाल स्नान पर्व को सकुशल संपन्न करा पाया। हालाँकि यातायात, पेयजल, सफाई, शौचालय और अतिक्रमण जैसी कमियां भविष्य के लिए गंभीर चिंतन का विषय बनी हुई हैं, जिला प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व की मैदानी मौजूदगी ने हालात को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महापर्व करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक तो बना, पर साथ ही इसने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े किए। माँ गंगा के दरबार में आने वाला श्रद्धालु केवल पुण्य कमाने नहीं आता, बल्कि वह व्यवस्था, सम्मान, स्वच्छता और सुरक्षा की अपेक्षा भी रखता है। यदि जाम पर नियंत्रण, अतिक्रमण पर अंकुश, पेयजल, शौचालय और सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए, तो हरिद्वार वास्तव में धर्म, आस्था और उत्कृष्ट प्रबंधन का आदर्श उदाहरण बन सकता है। स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ के अनुसार, "तीर्थ की पवित्रता बनाए रखना केवल प्रशासन का नहीं, हम सभी का सामूहिक दायित्व है।" यह महापर्व इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, माँ गंगा की कृपा और श्रद्धालुओं का सहयोग मिलकर करोड़ों की भीड़ को भी अनुशासन और शांति के साथ पुण्य स्नान पूर्ण करा सकते हैं।
धर्म की राजधानी हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के अवसर पर आस्था का एक अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने माँ गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। शनिवार रात से ही शुरू हुआ स्नान रविवार सुबह तक हरिद्वार की गलियों, पार्किंग स्थलों, राष्ट्रीय राजमार्गों और गंगा के घाटों को श्रद्धालुओं से भर चुका था। हालाँकि सीमित संसाधनों के बावजूद जिला और पुलिस प्रशासन ने इस विशाल स्नान पर्व को सफलतापूर्वक संपन्न कराया, फिर भी जाम, गंदगी, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी ने बड़े सवाल खड़े किए और श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ाई। हर की पैड़ी के साथ-साथ कुशावर्त घाट, सुभाष घाट, गऊघाट, रामघाट, श्रवणनाथ घाट, विष्णुघाट, बिरला घाट, दक्ष घाट, सतीघाट, नीलधारा, लोकनाथ घाट, शालिग्राम घाट, नारायण स्वामी घाट, शिव की पैड़ी, सप्तऋषि घाट, परमार्थ निकेतन घाट और ठोकर नंबर एक से दस तक के सभी स्नान घाटों पर लाखों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने पीपल पूजन, तर्पण, पिंडदान, नारायणी शिला पूजा, तीर्थ पुरोहितों से संकल्प, दान-दक्षिणा कर अपने और पूर्वजों के मोक्ष तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन
गंगा स्नान और दान-पुण्य से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। लाखों की भीड़ के बावजूद, जिला और पुलिस प्रशासन की यह बड़ी उपलब्धि रही कि उन्होंने सीमित संसाधनों में इस विशाल स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराया और कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। हालाँकि, इस सफल आयोजन के बीच कई ऐसी कमियाँ भी उजागर हुईं, जिनसे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सबक लेना आवश्यक है। सबसे बड़ी समस्या नेशनल हाईवे पर ई-रिक्शा, थ्री-व्हीलर और भारी वाहनों के कारण उत्पन्न हुई, जहां ई-रिक्शा चालक बीच सड़क पर सवारियां भरते और यू-टर्न लेते दिखे, जिससे बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सिर पर सामान ढोकर लंबी दूरी तक पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा। इसके समाधान के लिए ई-रिक्शा को निर्धारित पार्किंग तक सीमित करने और भारी वाहनों को रात्रि में निकालने जैसे सुझाव दिए गए हैं। दूसरा, हर की पैड़ी सहित कई घाटों पर सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं दिखी, जहां पॉलिथीन और कूड़े के ढेर दिखाई दिए, जिससे गंगा में गंदगी जाने का खतरा बना रहा; इसके लिए विशेष सफाई कर्मचारियों की तैनाती और त्वरित कूड़ा एकत्रण की वकालत की गई। तीसरा, इतने बड़े स्नान पर्व के दौरान भी हर की पैड़ी क्षेत्र में लगभग 50 से 60 अवैध फड़ और कैनी भीड़ के बीच अवरोध बने रहे, जिससे श्रद्धालुओं को
निकलने में कठिनाई हुई और हादसे की आशंका बनी रही; ऐसे में स्नान घाटों को पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त रखने की आवश्यकता महसूस की गई। चौथी कमी समाजसेवा के दावों की परीक्षा में थी, क्योंकि बैठकों में दिखने वाले कई लोग आयोजनों में सहयोग करते नहीं दिखे; प्रशासन को अखाड़ों के स्वयंसेवकों, ट्रस्टों, वास्तविक समाजसेवियों, एनसीसी और भारत स्काउट गाइड जैसे संगठनों को बैरिकेडिंग व घाटों पर जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव दिया गया है। पांचवीं बड़ी परेशानी पानी की भारी कमी थी, जहां पार्किंग स्थलों पर और नेशनल हाईवे पर पैदल चल रहे श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पानी के टैंकर और पेयजल व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। अंत में, महिलाओं को शौचालय व्यवस्था की अपर्याप्तता के कारण सर्वाधिक परेशानी उठानी पड़ी, जिससे उन्हें खुले में जाने के लिए विवश होना पड़ा और उन्हें शर्म व असुविधा का सामना करना पड़ा; भविष्य के आयोजनों में महिलाओं की गरिमा और सुविधा को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया है। इन चुनौतियों के बीच, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित स्वयं पूरी रात और तड़के सुबह तक स्नान व्यवस्था की निगरानी करते हुए बेहद गंभीर और सतर्क दिखाई दिए। हर की पैड़ी पुलिस चौकी से उन्होंने लगातार प्रमुख स्नान घाटों पर नजर बनाए रखी और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उनके इस समर्पण को कई लोगों ने "मां गंगा के
दरबार में एक सेवक की मौन प्रार्थना" के रूप में देखा, जिसका परिणाम यह रहा कि सीमित संसाधनों, रिकॉर्ड तोड़ भीड़ और भारी दबाव के बावजूद प्रशासन इस विशाल स्नान पर्व को सकुशल संपन्न करा पाया। हालाँकि यातायात, पेयजल, सफाई, शौचालय और अतिक्रमण जैसी कमियां भविष्य के लिए गंभीर चिंतन का विषय बनी हुई हैं, जिला प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व की मैदानी मौजूदगी ने हालात को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महापर्व करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक तो बना, पर साथ ही इसने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े किए। माँ गंगा के दरबार में आने वाला श्रद्धालु केवल पुण्य कमाने नहीं आता, बल्कि वह व्यवस्था, सम्मान, स्वच्छता और सुरक्षा की अपेक्षा भी रखता है। यदि जाम पर नियंत्रण, अतिक्रमण पर अंकुश, पेयजल, शौचालय और सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए, तो हरिद्वार वास्तव में धर्म, आस्था और उत्कृष्ट प्रबंधन का आदर्श उदाहरण बन सकता है। स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ के अनुसार, "तीर्थ की पवित्रता बनाए रखना केवल प्रशासन का नहीं, हम सभी का सामूहिक दायित्व है।" यह महापर्व इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, माँ गंगा की कृपा और श्रद्धालुओं का सहयोग मिलकर करोड़ों की भीड़ को भी अनुशासन और शांति के साथ पुण्य स्नान पूर्ण करा सकते हैं।
- हरिद्वार में आयोजित सोमवती स्नान पर्व में अब श्रद्धालुओं की तेजी से वापसी शुरू हो गई है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है। सोमवती अमावस्या आज सुबह 8:24 बजे तक ही थी, जिसके कारण श्रद्धालुओं ने रात से ही स्नान करना शुरू कर दिया था। इस व्यवस्था के चलते हरकी पैड़ी और अन्य घाटों पर एक साथ अधिक दबाव नहीं बना। यात्रियों का आगमन अब कम हो गया है, जबकि वापसी प्रक्रिया तेज हो गई है। पार्किंग स्थलों से वाहनों की निकासी के साथ ही उन पर भी दबाव घटने लगा है। पुलिस प्रशासन अब वापसी मार्गों को सुचारू बनाए रखने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है। अनुमान है कि शाम तक धर्मनगरी हरिद्वार में भीड़ का दबाव काफी कम हो जाएगा।1
- आज लक्सर में उत्तराखंड सरकार के पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी। उन्होंने विभिन्न जन-समस्याओं को लेकर सरकार पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए तीखा निशाना साधा। रविंद्र सिंह आनंद ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री धामी लक्सर की जनता से वोट मांगने का हक खो चुके हैं।1
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे 'ऑपरेशन प्रहार' अभियान के तहत देहरादून पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में पटेलनगर क्षेत्र से एक महिला को अवैध गांजे के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, ब्रह्मपुरी कालाग्राउंड के पास चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर 60 वर्षीय महिला को पकड़ा गया, जिसके कब्जे से 1 किलो 29 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ। आरोपी महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री के "ड्रग्स फ्री देवभूमि" विजन को साकार करने के उद्देश्य से दून पुलिस द्वारा जनपदभर में नशा तस्करों के विरुद्ध यह लगातार अभियान चलाया जा रहा है।1
- हरिद्वार जिला पंचायत कार्यालय सभागार में बोर्ड की बैठक संपन्न हो गई है, जिसमें कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी मिल गई। इस बैठक में मुख्य रूप से सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के उपचार के लिए एक एंबुलेंस सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, जिला अध्यक्ष ने शिक्षा के क्षेत्र में जिले के हर कोने में छात्रों की पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी खोलने की बात कही। बोर्ड बैठक में पारित हुए अन्य प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी के लिए पूरी रिपोर्ट देखने का आह्वान किया गया है।1
- रुड़की के बिन्डूखड़क स्थित भागीरथ दिव्यांग सेवा संस्थान ने अपना 42वां वार्षिकोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया। संस्थान के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ. पहल सिंह सैनी ने बताया कि प्रतिवर्ष गुरु की स्मृति में भंडारे का आयोजन किया जाता है, जो पिछले इकतालीस वर्षों से लगातार हो रहा है। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न प्रदेशों से हजारों की संख्या में भक्तगण पहुंचकर शोभा बढ़ाते हैं। डॉ. पहल सिंह सैनी ने वार्षिकोत्सव में पहुंचे सभी भक्तों का हार्दिक आभार प्रकट किया। उत्तराखंड दिव्यांग सशक्तिकरण संगठन हरिद्वार के जिलाध्यक्ष पवन धीमान ने डॉ. पहल सिंह सैनी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा किया जा रहा नर सेवा, नारायण सेवा का कार्य शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि डॉ. सैनी पोलियो, अधरंग और लकवा जैसी बीमारियों का निशुल्क इलाज करते हैं, जिससे अब तक लाखों लोगों को जीवन दान मिल चुका है, और इससे बड़ा कोई पुण्य का कार्य नहीं हो सकता। वार्षिकोत्सव में हवन-यज्ञ का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश, प्रदेश और विश्व की शांति की कामना की गई। इस दौरान रक्तदान शिविर लगाया गया, लोगों को निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं और बेटियों को साइकिलें भी भेंट की गईं। इस वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में विधायक ममता राकेश, पूर्व मेयर गौरव गोयल, राज्य मंत्री धर्म सिंह जाटव और जसवंत सिंह सैनी (जो मंत्री उत्तर प्रदेश और राज्य मंत्री के रूप में उल्लिखित हैं), राज्य मंत्री श्यामवीर सैनी, पूर्व विधायक कुमार प्रणव सिंह चैंपियन, वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी सुभाष नंबरदार, पूर्व मंत्री राम सिंह सैनी, रानी देवयानी, चौधरी धारा सिंह, वीरेंद्र प्रधान और परवेज अंसारी जैसे कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इन सभी अतिथियों का डॉ. पहल सिंह सैनी द्वारा सम्मान किया गया।1
- हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के अवसर पर आज श्रद्धालु हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान कर रहे हैं। स्नान की प्रक्रिया देर रात से ही शुरू हो गई थी, जिसमें पौ फटते ही और तेजी आई। सोमवती अमावस्या का यह विशेष योग सुबह 8:23 बजे तक ही है, जिसके बाद श्रद्धालुओं की वापसी शुरू होने की उम्मीद है। स्नान को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद बना रहा। तड़के ही एसएसपी ने हरकी पैड़ी का दौरा कर सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नगरीय क्षेत्र में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पुलिस ने श्रद्धालुओं को ललतारों पुल के रास्ते गंगा पार भेजा। हालांकि इससे शहर में भीड़ का दबाव कम हुआ, लेकिन स्थानीय निवासियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों को पहचान पत्र या अन्य आधार दिखाकर निकलने देने के सुझावों पर इस बार भी अमल नहीं किया गया। अभी तक स्नान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहा है, और श्रद्धालुओं की वापसी शुरू होने से प्रशासन ने भी बड़ी राहत महसूस की है।1
- सोमवती अमावस्या स्नान के पावन अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। ब्रह्म मुहूर्त में आस्था की डुबकी लगाने के लिए, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हर की पौड़ी के पास स्थित सभी घाटों पर अपना डेरा डाल लिया है।1
- देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सोमवार को "यात्री सुविधा दिवस-2026" का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों का स्वागत करना और उन्हें एयरपोर्ट पर उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं तथा हाल ही में हुए विकास कार्यों के बारे में जानकारी देना था। इस कार्यक्रम का लक्ष्य यात्रियों को बेहतर सेवाओं, सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं और नवीनतम तकनीकी सुविधाओं के प्रति जागरूक करना भी था। एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि यात्रियों की सहूलियत के लिए हाल के वर्षों में कई आधुनिक व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं, जिनमें डिजी यात्रा, वाई-फाई, किड्स जोन और अन्य यात्री अनुकूल सुविधाएं प्रमुख हैं। इन नवाचारों के परिणामस्वरूप यात्रियों को अब तेज, सुरक्षित और बेहद सुगम यात्रा का अनुभव मिल रहा है। कार्यक्रम के दौरान, एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से उनकी यात्रा के अनुभव पर फीडबैक भी लिया। साथ ही, उन्हें एयरपोर्ट पर चल रहे विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराना एयरपोर्ट प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।1
- बैरागीवाला हत्याकांड के संबंध में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अन्य फरार आरोपियों की भी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, और उन्हें भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।1