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कटंगी में नाजिया इलाही द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर खासा बवाल मच गया है। इस मामले में स्थानीय मुस्लिम समाज ने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

1 day ago
user_Dev Anand
Dev Anand
कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
1 day ago

कटंगी में नाजिया इलाही द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर खासा बवाल मच गया है। इस मामले में स्थानीय मुस्लिम समाज ने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मुस्लिम समाज ने पैगंबर साहब पर कथित टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए भरवेली थाने में अपनी नाराजगी व्यक्त की है। समाज ने इस मामले में नाजिया खान की तत्काल गिरफ्तारी और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग की है।
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    मुस्लिम समाज ने पैगंबर साहब पर कथित टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए भरवेली थाने में अपनी नाराजगी व्यक्त की है। समाज ने इस मामले में नाजिया खान की तत्काल गिरफ्तारी और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग की है।
    user_Samarpit sahu
    Samarpit sahu
    पत्रकार बालाघाट, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • बालाघाट जिले में धान की खेती में आधुनिक और जल संरक्षण आधारित तकनीकों को प्रोत्साहित करने के लिए 26 जून को एक पहल की गई। बालाघाट विकासखंड के ग्राम चीचगांव में जनपद सदस्य, एकता संघ जिला बालाघाट के अध्यक्ष और किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष महेश शरणागत के कृषि खेत में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) यानी बोवार पद्धति से सुपर सीडर मशीन के माध्यम से धान की बुवाई की गई। इस अवसर पर, किसान नेता महेश शरणागत ने ज़िले के किसानों से डीएसआर पद्धति अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पहले अधिकांश किसान छिड़काव या बोवार पद्धति से ही धान की खेती करते थे, जिससे खेतों की मेड़ों में रुका पानी धीरे-धीरे ज़मीन में रिसकर भूजल स्तर को बनाए रखता था। इससे गांवों के कुओं और बोरवेल में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता था, साथ ही खेतों की मिट्टी भी भुरभुरी एवं उपजाऊ बनी रहती थी। हालांकि, उनके अनुसार, रोपा पद्धति के बढ़ते प्रचलन के कारण अब खेतों में अत्यधिक कीचड़ किया जाता है, जिससे मेड़ों का पानी ज़मीन में समाहित होने के बजाय सीधे नदी-नालों में बह जाता है। इसका परिणाम यह हुआ है कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और खेतों की मिट्टी कठोर होती जा रही है, जिसके कारण उड़द, अलसी, पोपट और चना जैसी उतेरा एवं दलहनी फसलों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। श्री शरणागत ने किसानों से डीएसआर (बोवार) पद्धति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यह तकनीक खेती की लागत कम करती है, पानी की बचत करती है, मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाए रखती है और खरीफ के बाद रबी एवं उतेरा फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह पद्धति किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी क्रम में, ग्राम मगरदर्रा में भी किसानों के खेतों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई कराई गई। इस दौरान कृषक अशोक उइके, बस्तीराम उइके, रामन चौधरी, राजेश राहंगडाले, छमन बाई ऐड़े सहित अन्य किसानों ने भी इस तकनीक को अपनाते हुए अपने खेतों में धान की बुवाई की। बालाघाट के ग्राम गोंगलई में भी डीएसआर (बोवार) पद्धति से धान की बुवाई को बढ़ावा मिला है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएसआर तकनीक जल संरक्षण, कम लागत, श्रम की बचत और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक प्रभावी विकल्प है। ज़िले में इस तकनीक के प्रति किसानों का बढ़ता रुझान भविष्य में कृषि को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
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    बालाघाट जिले में धान की खेती में आधुनिक और जल संरक्षण आधारित तकनीकों को प्रोत्साहित करने के लिए 26 जून को एक पहल की गई। बालाघाट विकासखंड के ग्राम चीचगांव में जनपद सदस्य, एकता संघ जिला बालाघाट के अध्यक्ष और किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष महेश शरणागत के कृषि खेत में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) यानी बोवार पद्धति से सुपर सीडर मशीन के माध्यम से धान की बुवाई की गई। इस अवसर पर, किसान नेता महेश शरणागत ने ज़िले के किसानों से डीएसआर पद्धति अपनाने की अपील की।

उन्होंने बताया कि पहले अधिकांश किसान छिड़काव या बोवार पद्धति से ही धान की खेती करते थे, जिससे खेतों की मेड़ों में रुका पानी धीरे-धीरे ज़मीन में रिसकर भूजल स्तर को बनाए रखता था। इससे गांवों के कुओं और बोरवेल में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता था, साथ ही खेतों की मिट्टी भी भुरभुरी एवं उपजाऊ बनी रहती थी। हालांकि, उनके अनुसार, रोपा पद्धति के बढ़ते प्रचलन के कारण अब खेतों में अत्यधिक कीचड़ किया जाता है, जिससे मेड़ों का पानी ज़मीन में समाहित होने के बजाय सीधे नदी-नालों में बह जाता है। इसका परिणाम यह हुआ है कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और खेतों की मिट्टी कठोर होती जा रही है, जिसके कारण उड़द, अलसी, पोपट और चना जैसी उतेरा एवं दलहनी फसलों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।

श्री शरणागत ने किसानों से डीएसआर (बोवार) पद्धति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यह तकनीक खेती की लागत कम करती है, पानी की बचत करती है, मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाए रखती है और खरीफ के बाद रबी एवं उतेरा फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह पद्धति किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी क्रम में, ग्राम मगरदर्रा में भी किसानों के खेतों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई कराई गई। इस दौरान कृषक अशोक उइके, बस्तीराम उइके, रामन चौधरी, राजेश राहंगडाले, छमन बाई ऐड़े सहित अन्य किसानों ने भी इस तकनीक को अपनाते हुए अपने खेतों में धान की बुवाई की। बालाघाट के ग्राम गोंगलई में भी डीएसआर (बोवार) पद्धति से धान की बुवाई को बढ़ावा मिला है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएसआर तकनीक जल संरक्षण, कम लागत, श्रम की बचत और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक प्रभावी विकल्प है। ज़िले में इस तकनीक के प्रति किसानों का बढ़ता रुझान भविष्य में कृषि को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
    user_ASHISH NEWARE Journalist
    ASHISH NEWARE Journalist
    बालाघाट, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • बिरसा मुंडा बलिदान दिवस के अवसर पर, अजाक्स जिला इकाई सिवनी द्वारा एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी "भारत की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति में महापुरुषों का योगदान" विषय पर केंद्रित थी, जिसकी शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश जाटव, विशेष गढ़पाले (आईएएस), लालजीराम मीणा और आर.के. ददौरिया सहित अन्य वक्ताओं ने शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार राजनेगी के नेतृत्व में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, युवा और समाजजन उपस्थित रहे।
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    बिरसा मुंडा बलिदान दिवस के अवसर पर, अजाक्स जिला इकाई सिवनी द्वारा एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी "भारत की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति में महापुरुषों का योगदान" विषय पर केंद्रित थी, जिसकी शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा और डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ हुई।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश जाटव, विशेष गढ़पाले (आईएएस), लालजीराम मीणा और आर.के. ददौरिया सहित अन्य वक्ताओं ने शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार राजनेगी के नेतृत्व में यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, युवा और समाजजन उपस्थित रहे।
    user_BRMG SEONI
    BRMG SEONI
    सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक के दौरान, कलेक्टर ने कार्यक्रम की तैयारियों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
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    मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक के दौरान, कलेक्टर ने कार्यक्रम की तैयारियों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
    user_Devendra thakur
    Devendra thakur
    Salesperson सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मुख्यमंत्री ने एक 'लाड़ली बहना' के साथ सेल्फी ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, "आइए-आइए... कैसे लेते हैं सेल्फी?"
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    मुख्यमंत्री ने एक 'लाड़ली बहना' के साथ सेल्फी ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, "आइए-आइए... कैसे लेते हैं सेल्फी?"
    user_BS News Network
    BS News Network
    Local News Reporter सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • सिवनी जिले की केदारपुर समिति में खाद के भीषण संकट से किसानों में गहरा आक्रोश पनप रहा है। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन टोकन कट जाने के बावजूद उन्हें न तो यूरिया मिल रही है और न ही डीएपी खाद उपलब्ध हो पा रही है। इस गंभीर समस्या के बीच, किसानों पर निर्धारित कीमतों के बजाय अत्यधिक महंगी दरों पर डीएपी खाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस समय चल रहे खरीफ सीजन में खाद की यह कमी सीधे तौर पर उनकी खेती को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। इस स्थिति से त्रस्त होकर, किसानों ने अब जिला कलेक्टर सिवनी को एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया है। किसानों की यह चिंता स्पष्ट है कि क्या उन्हें इस बार समय पर खाद मिल पाएगी या हर साल की तरह इस बार भी उन्हें इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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    सिवनी जिले की केदारपुर समिति में खाद के भीषण संकट से किसानों में गहरा आक्रोश पनप रहा है। किसानों का आरोप है कि ऑनलाइन टोकन कट जाने के बावजूद उन्हें न तो यूरिया मिल रही है और न ही डीएपी खाद उपलब्ध हो पा रही है। इस गंभीर समस्या के बीच, किसानों पर निर्धारित कीमतों के बजाय अत्यधिक महंगी दरों पर डीएपी खाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

इस समय चल रहे खरीफ सीजन में खाद की यह कमी सीधे तौर पर उनकी खेती को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। इस स्थिति से त्रस्त होकर, किसानों ने अब जिला कलेक्टर सिवनी को एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया है। किसानों की यह चिंता स्पष्ट है कि क्या उन्हें इस बार समय पर खाद मिल पाएगी या हर साल की तरह इस बार भी उन्हें इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
    user_News Nation 81
    News Nation 81
    Dist.News रिपोर्टर 9584667143 सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के बिंझलगांव के प्रगतिशील कृषक अनिल बुधाना पिछले पाँच वर्षों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुके हैं, जो स्वयं इसे अपनाने के साथ-साथ आसपास के गाँवों के किसानों को भी रासायनिक खेती से हटकर जैविक पद्धतियों की ओर निरंतर प्रेरित कर रहे हैं। अनिल बुधाना ने अपने निवास पर ही वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत इकाइयों के साथ-साथ जैविक कीटनाशक निर्माण इकाई भी स्थापित की है। इन इकाइयों से तैयार जैविक उत्पादों का उपयोग वे न केवल अपनी खेती में करते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है और लागत कम होती है, बल्कि वे इन्हें अन्य किसानों को भी उचित मूल्य पर उपलब्ध कराते हैं। प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार को उन्होंने एक अभियान का रूप दे दिया है, जिसके तहत वे किसानों के घर जाकर वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करने में सहयोग करते हैं, केंचुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराते हैं और खाद तैयार होने तक नियमित तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं। वे समय-समय पर कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना के विकासखंड तकनीकी प्रबंधक अजय बिजेवार से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। नवीन तकनीकों को सीखकर वे उन्हें सरल भाषा में किसानों तक पहुँचाते हैं, जिससे प्राकृतिक खेती का विस्तार गाँव-गाँव तक हो रहा है। अनिल बुधाना का मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा का एक प्रभावी माध्यम है, और उनका कहना है कि रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके किसान कम लागत में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उनके प्रयासों के फलस्वरूप, बिंझलगांव सहित पूरे लांजी विकासखंड में अनिल बुधाना की पहचान अब प्राकृतिक खेती के एक अग्रदूत के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके समर्पण और निरंतर प्रयासों से प्रेरित होकर, अनेक किसान अब स्वयं जैविक खाद तैयार कर प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी यह पहल जिले में प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
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    बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के बिंझलगांव के प्रगतिशील कृषक अनिल बुधाना पिछले पाँच वर्षों से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुके हैं, जो स्वयं इसे अपनाने के साथ-साथ आसपास के गाँवों के किसानों को भी रासायनिक खेती से हटकर जैविक पद्धतियों की ओर निरंतर प्रेरित कर रहे हैं।

अनिल बुधाना ने अपने निवास पर ही वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत इकाइयों के साथ-साथ जैविक कीटनाशक निर्माण इकाई भी स्थापित की है। इन इकाइयों से तैयार जैविक उत्पादों का उपयोग वे न केवल अपनी खेती में करते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है और लागत कम होती है, बल्कि वे इन्हें अन्य किसानों को भी उचित मूल्य पर उपलब्ध कराते हैं। प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार को उन्होंने एक अभियान का रूप दे दिया है, जिसके तहत वे किसानों के घर जाकर वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करने में सहयोग करते हैं, केंचुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराते हैं और खाद तैयार होने तक नियमित तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं।

वे समय-समय पर कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना के विकासखंड तकनीकी प्रबंधक अजय बिजेवार से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। नवीन तकनीकों को सीखकर वे उन्हें सरल भाषा में किसानों तक पहुँचाते हैं, जिससे प्राकृतिक खेती का विस्तार गाँव-गाँव तक हो रहा है। अनिल बुधाना का मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा का एक प्रभावी माध्यम है, और उनका कहना है कि रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके किसान कम लागत में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

उनके प्रयासों के फलस्वरूप, बिंझलगांव सहित पूरे लांजी विकासखंड में अनिल बुधाना की पहचान अब प्राकृतिक खेती के एक अग्रदूत के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके समर्पण और निरंतर प्रयासों से प्रेरित होकर, अनेक किसान अब स्वयं जैविक खाद तैयार कर प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी यह पहल जिले में प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
    user_ASHISH NEWARE Journalist
    ASHISH NEWARE Journalist
    बालाघाट, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद, प्रशासन ने बालाघाट में सक्रियता दिखाते हुए तीन कोचिंग सेंटरों की जांच की है। इस जांच के दौरान, इन कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा से जुड़ी कई खामियां सामने आईं। नतीजतन, प्रशासन ने भोपाल एकेडमी और लक्ष्य एकेडमी को इन सुरक्षा संबंधी कमियों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए हैं।
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    लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद, प्रशासन ने बालाघाट में सक्रियता दिखाते हुए तीन कोचिंग सेंटरों की जांच की है। इस जांच के दौरान, इन कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा से जुड़ी कई खामियां सामने आईं। नतीजतन, प्रशासन ने भोपाल एकेडमी और लक्ष्य एकेडमी को इन सुरक्षा संबंधी कमियों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए हैं।
    user_Samarpit sahu
    Samarpit sahu
    पत्रकार बालाघाट, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • सिवनी में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद का आठवां स्थापना दिवस बड़े ही श्रद्धापूर्वक तरीके से मनाया गया।
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    सिवनी में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद का आठवां स्थापना दिवस बड़े ही श्रद्धापूर्वक तरीके से मनाया गया।
    user_Devendra thakur
    Devendra thakur
    Salesperson सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
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