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Suresh Chandra Agrawal: सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 आशा से आसमान दो राजाओं में युद्ध हुआ।विजयी राजा ने हारे हुए राजा के किले को घेर लिया और उसके सभी विश्वासपात्र अधिकारियों को बंदी बनाकर कारागृह में डाल दिया।उन कैदियों में पराजित राजा का युवा मंत्री और उसकी पत्नी भी थे। दोनों को किले के एक विशेष हिस्से में कैद कर रखा गया था। कैदखाने के दरोगा ने उन्हें आकर समझाया कि हमारे राजा की गुलामी स्वीकार कर लो नहीं तो कैद में ही भूखे-प्यासे तड़प-तड़पकर मर जाओगे। किन्तु स्वाभिमानी मंत्री को गुलामी स्वीकार नहीं थी,इसलिए चुप रहा। दरोगा चला गया। इन दोनों को जिस भवन में रखा गया था,उसमें सौ दरवाजे थे। सभी दरवाजों पर बड़े-बड़े ताले लगे हुए थे। मंत्री की पत्नी का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था और वह बहुत घबरा गई थी,किन्तु मंत्री शांत था। उसने पत्नी को दिलासा देते हुए कहा-निराश मत हो। गहरे अंधकार में भी रोशनी की एक किरण अवश्य होती है।ऐसा कहकर वह एक-एक दरवाजे को धकेलकर देखने लगा। दरवाजा नहीं खुला। लगभग बीस-पच्चीस दरवाजे देखे,किन्तु कोई भी दरवाजा नहीं खुला। मंत्री थक गया और उसकी पत्नी की निराशा बढ़ती गई। वह बोली-तुम्हारा दिमाग तो ठीक है? इतने बड़े-बड़े ताले लगे हैं,भला तुम्हारे धक्कों से वे दरवाजे कैसे खुलेंगे? किन्तु मंत्री हताश नहीं हुआ और वह उसी लगन से दरवाजों को धकेलता रहा। उसने निन्यानवें दरवाजे धकेले,किन्तु एक भी नहीं खुला। पत्नी ने चिढ़कर उसे बैठा दिया। किन्तु थोड़ी देर बाद वह पुनः खड़ा हुआ और सौवें दरवाजे को धक्का दिया। धक्का देते ही उसकी चूलें चरमराई। मंत्री को अनुमान हो गया कि यह दरवाजा खुल सकता है। उसने दोगुने उत्साह से दरवाजे को धक्का देना शुरू किया और थोड़ी देर में वह खुल गया। मंत्री ने शांत भाव से जवाब दिया-इसलिए कि जिंदगी में कभी सारे दरवाजे बंद नहीं हुआ करते। उस दरवाजे से निकलकर मंत्री और उसकी पत्नी ने कैद से आजादी पा ली। जो धैर्य  के साथ आगे बढ़ता जाता है,जीत उसकी ही होती है। 🌹🌹🌹🌹प्रेम से बोलो राधे राधे 🌹🌹🌹🙏 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 7 *श्लोक:* 23 *श्लोक:* अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भ‍वत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भ‍क्ता यान्ति मामपि ॥ २३ ॥ *अनुवाद:* अल्पबुद्धि वाले व्यक्ति देवताओं की पूजा करते हैं और उन्हें प्राप्त होने वाले फल सीमित तथा क्षणिक होते हैं। देवताओं की पूजा करने वाले देवलोक को जाते हैं, किन्तु मेरे भक्त अन्तत: मेरे परमधाम को प्राप्त होते हैं। *तात्पर्य:* भगवद्गीता के कुछ भाष्यकार कहते हैं कि देवता की पूजा करने वाला व्यक्ति परमेश्वर के पास पहुँच सकता है, किन्तु यहाँ यह स्पष्ट कहा गया है कि देवताओं के उपासक भिन्न लोक को जाते हैं, जहाँ विभिन्न देवता स्थित हैं—ठीक उसी प्रकार जिस तरह सूर्य की उपासना करने वाला सूर्य को या चन्द्रमा का उपासक चन्द्रमा को प्राप्त होता है। इसी प्रकार यदि कोई इन्द्र जैसे देवता की पूजा करना चाहता है, तो उसे पूजे जाने वाले उसी देवता का लोक प्राप्त होगा। ऐसा नहीं है कि जिस किसी भी देवता की पूजा करने से भगवान् को प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ पर इसका निषेध किया गया है, क्योंकि यह स्पष्ट कहा गया है कि देवताओं के उपासक भौतिक जगत् के अन्य लोकों को जाते हैं, किन्तु भगवान् का भक्त भगवान् के ही परमधाम को जाता है। यहाँ यह प्रश्न उठाया जा सकता है कि यदि विभिन्न देवता परमेश्वर के शरीर के विभिन्न अंग हैं, तो उन सबकी पूजा करने से एक ही जैसा फल मिलना चाहिए। किन्तु देवताओं के उपासक अल्पज्ञ होते हैं, क्योंकि वे यह नहीं जानते कि शरीर के किस अंग को भोजन दिया जाय। उनमें से कुछ इतने मूर्ख होते हैं कि वे यह दावा करते हैं कि अंग अनेक हैं, अत: भोजन देने के ढंग अनेक हैं। किन्तु यह बहुत उचित नहीं है। क्या कोई कानों या आँखों से शरीर को भोजन पहुँचा सकता है? वे यह नहीं जानते कि ये देवता भगवान् के विराट शरीर के विभिन्न अंग हैं और वे अपने अज्ञानवश यह विश्वास कर बैठते हैं कि प्रत्येक देवता पृथक् ईश्वर है तथा परमेश्वर का प्रतियोगी है। न केवल सारे देवता, अपितु सामान्य जीव भी परमेश्वर के अंग (अंश) हैं। श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि ब्राह्मण परमेश्वर के सिर हैं, क्षत्रिय उनकी बाहें हैं, वैश्य उनकी कटि तथा शूद्र उनके पाँव हैं, और इन सबके अलग-अलग कार्य हैं। यदि कोई देवताओं को तथा अपने आपको परमेश्वर का अंश मानता है तो उसका ज्ञान पूर्ण है। किन्तु यदि वह इसे नहीं समझता तो उसे भिन्न लोकों की प्राप्ति होती है, जहाँ देवतागण निवास करते हैं। यह वह गन्तव्य नहीं है, जहाँ भक्तगण जाते हैं। देवताओं से प्राप्त वर नाशवान होते हैं, क्योंकि इस भौतिक जगत् के भीतर सारे लोक, सारे देवता तथा उनके सारे उपासक नाशवान हैं। अत: इस श्लोक में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे देवताओं की उपासना से प्राप्त होने वाले सारे फल नाशवान होते हैं, अत: ऐसी पूजा केवल अल्पज्ञों द्वारा की जाती है। चूँकि परमेश्वर की भक्ति में कृष्णभावनामृत में संलग्न व्यक्ति ज्ञान से पूर्ण दिव्य आनन्दमय लोक की प्राप्ति करता है अत: उसकी तथा देवताओं के सामान्य उपासक की उपलब्धियाँ पृथक्-पृथक् होती हैं। परमेश्वर असीम हैं, उनका अनुग्रह अनन्त है, उनकी दया भी अनन्त है। अत: परमेश्वर की अपने शुद्धभक्तों पर कृपा भी असीम होती है। 🌹🌹🌹🌹जय श्री कृष्ण 🌹🌹🌹🌹 1. कृष्ण: कृष्ण भारत की सात प्राचीन और पवित्र नगरियों में से एक है मथुरा। मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। किसी ने कृष्ण के मामा कंस को बताया कि वसुदेव और देवकी की संतान ही उसकी मृत्यु का कारण होगी अत: उसने वसुदेव और देवकी दोनों को जेल में बंद कर दिया। कंस उक्त दोनों की संतान के उत्पन्न होते ही मार डालता था। भविष्यवाणी के अनुसार विष्णु को देवकी के गर्भ से कृष्ण के रूप में जन्म लेना था, तो उन्होंने अपने 8वें अवतार के रूप में 8वें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के 28वें द्वापर में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के 7 मुहूर्त निकल गए और 8वां उपस्थित हुआ तभी आधी रात के समय सबसे शुभ लग्न उपस्थित हुआ। उस लग्न पर केवल शुभ ग्रहों की दृष्टि थी। रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में लगभग 3112 ईसा पूर्व (अर्थात आज से 5126 वर्ष पूर्व) को हुआ हुआ। ज्योतिषियों के अनुसार रात 12 बजे उस वक्त शून्य काल था। 2. यमुना के पार गोकुल: यमुना के पार गोकुल जब कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल के सभी संतरी माया द्वारा गहरी नींद में सो गए। जेल के दरवाजे स्वत: ही खुल गए। उस वक्त भारी बारिश हो रही थी। यमुना में उफान था। उस बारिश में ही वसुदेव ने नन्हे कृष्ण को एक टोकरी में रखा और उस टोकरी को लेकर वे जेल से बाहर निकल आए। कुछ दूरी पर ही यमुना नदी थी। उन्हें उस पार जाना था लेकिन कैसे? तभी चमत्कार हुआ। यमुना के जल ने भगवान के चरण छुए और फिर उसका जल दो हिस्सों में बंट गया और इस पार से उस पार रास्ता बन गया। कहते हैं कि वसुदेव कृष्ण को यमुना के उस पार गोकुल में अपने मित्र नंदगोप के यहां ले गए। वहां पर नंद की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या उत्पन्न हुई थी। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को ले गए। गोकुल मां यशोदा का मायका था और नंदगांव में उनका ससुराल। श्रीकृष्ण का लालन-पालन यशोदा व नंद ने किया। गोकुल यमुना के तट पर बसा एक गांव है, जहां सभी नंदों की गायों का निवास स्थान था। नंद मथुरा के आसपास गोकुल और नंदगांव में रहने वाले आभीर गोपों के मुखिया थे। यहीं पर वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी ने बलराम को जन्म दिया था। बलराम देवकी के 7वें गर्भ में थे जिन्हें योगमाया ने आकर्षित करके रोहिणी के गर्भ में डाल दिया था। यह स्थान गोप लोगों का था। मथुरा से गोकुल की दूरी महज 12 किलोमीटर है। *कई रोगों से पाना है मुक्ति? तो जानिए गर्म दूध के साथ गुड़ के सेवन के फायदे* 1. रोजाना गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से आपके शरीर से अशुद्धियां निकल जाती है। जिससे आपको कोई बीमारी नहीं होगी। 2. अगर आप दूध के साथ चीनी का इस्तेमाल करते है तो इसकी जगह आप गुड़ का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपका वजन कंट्रोल में रहेगा। 3. अगर आपको पाचन संबधी कोई भी समस्या है तो गर्म-गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से आपको पेट संबंधी हर समस्या से निजात मिल जाता है। 4. अगर रोजाना गुड़ का एक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा। 5. गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से आपकी त्वचा मुलायम होने के साथ-साथ त्वचा संबंधी समस्या नहीं होती हैं। 6. गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से 🌹आपके बाल भी हेल्दी रहेंगे। 7. गर्म दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से आपको पीरियड के समय के दर्द से निजात मिल सकती है।

on 24 October
user_Suresh Chandra Agrawal
Suresh Chandra Agrawal
Chomu, Jaipur•
on 24 October

Suresh Chandra Agrawal: सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 आशा से आसमान दो राजाओं में युद्ध हुआ।विजयी राजा ने हारे हुए राजा के किले को घेर लिया और उसके सभी विश्वासपात्र अधिकारियों को बंदी बनाकर कारागृह में डाल दिया।उन कैदियों में पराजित राजा का युवा मंत्री और उसकी पत्नी भी थे। दोनों को किले के एक विशेष हिस्से में कैद कर रखा गया था। कैदखाने के दरोगा ने उन्हें आकर समझाया कि हमारे राजा की गुलामी स्वीकार कर लो नहीं तो कैद में ही भूखे-प्यासे तड़प-तड़पकर मर जाओगे। किन्तु स्वाभिमानी मंत्री को गुलामी स्वीकार नहीं थी,इसलिए चुप रहा। दरोगा चला गया। इन दोनों को जिस भवन में रखा गया था,उसमें सौ दरवाजे थे। सभी दरवाजों पर बड़े-बड़े ताले लगे हुए थे। मंत्री की पत्नी का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था और वह बहुत घबरा गई थी,किन्तु मंत्री शांत था। उसने पत्नी को दिलासा देते हुए कहा-निराश मत हो। गहरे अंधकार में भी रोशनी की एक किरण अवश्य होती है।ऐसा कहकर वह एक-एक दरवाजे को धकेलकर देखने लगा। दरवाजा नहीं खुला। लगभग बीस-पच्चीस दरवाजे देखे,किन्तु कोई भी दरवाजा नहीं खुला। मंत्री थक गया और उसकी पत्नी की निराशा बढ़ती गई। वह बोली-तुम्हारा दिमाग तो ठीक है? इतने बड़े-बड़े ताले लगे हैं,भला तुम्हारे धक्कों से वे दरवाजे कैसे खुलेंगे? किन्तु मंत्री हताश नहीं हुआ और वह उसी लगन से दरवाजों को धकेलता रहा। उसने निन्यानवें दरवाजे धकेले,किन्तु एक भी नहीं खुला। पत्नी ने चिढ़कर उसे बैठा दिया। किन्तु थोड़ी देर बाद वह पुनः खड़ा हुआ और सौवें दरवाजे को धक्का दिया। धक्का देते ही उसकी चूलें चरमराई। मंत्री को अनुमान हो गया कि यह दरवाजा खुल सकता है। उसने दोगुने उत्साह से दरवाजे को धक्का देना शुरू किया और थोड़ी देर में वह खुल गया। मंत्री ने शांत भाव से जवाब दिया-इसलिए कि जिंदगी में कभी सारे दरवाजे बंद नहीं हुआ करते। उस दरवाजे से निकलकर मंत्री और उसकी पत्नी ने कैद से आजादी पा ली। जो धैर्य  के साथ आगे बढ़ता जाता है,जीत उसकी ही होती है। 🌹🌹🌹🌹प्रेम से बोलो राधे राधे 🌹🌹🌹🙏 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 7 *श्लोक:* 23 *श्लोक:* अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भ‍वत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भ‍क्ता यान्ति मामपि ॥ २३ ॥ *अनुवाद:* अल्पबुद्धि वाले व्यक्ति देवताओं की पूजा करते हैं और उन्हें प्राप्त होने वाले फल सीमित तथा क्षणिक होते हैं। देवताओं की पूजा करने वाले देवलोक को जाते हैं, किन्तु मेरे भक्त अन्तत: मेरे परमधाम को प्राप्त होते हैं। *तात्पर्य:* भगवद्गीता के कुछ भाष्यकार कहते हैं कि देवता की पूजा करने वाला व्यक्ति परमेश्वर के पास पहुँच सकता है, किन्तु यहाँ यह स्पष्ट कहा गया है कि देवताओं के उपासक भिन्न लोक को जाते हैं, जहाँ विभिन्न देवता स्थित हैं—ठीक उसी प्रकार जिस तरह सूर्य की उपासना करने वाला सूर्य को या चन्द्रमा का उपासक चन्द्रमा को प्राप्त होता है। इसी प्रकार यदि कोई इन्द्र जैसे देवता की पूजा करना चाहता है, तो उसे पूजे जाने वाले उसी देवता का लोक प्राप्त होगा। ऐसा नहीं है कि जिस किसी भी देवता की पूजा करने से भगवान् को प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ पर इसका निषेध किया गया है, क्योंकि यह स्पष्ट कहा गया है कि देवताओं के उपासक भौतिक जगत् के अन्य लोकों को जाते हैं, किन्तु भगवान् का भक्त भगवान् के ही परमधाम को जाता है। यहाँ यह प्रश्न उठाया जा सकता है कि यदि विभिन्न देवता परमेश्वर के शरीर के विभिन्न अंग हैं, तो उन सबकी पूजा करने से एक ही जैसा फल मिलना चाहिए। किन्तु देवताओं के उपासक अल्पज्ञ होते हैं, क्योंकि वे यह नहीं जानते कि शरीर के किस अंग को भोजन दिया जाय। उनमें से कुछ इतने मूर्ख होते हैं कि वे यह दावा करते हैं कि अंग अनेक हैं, अत: भोजन देने के ढंग अनेक हैं। किन्तु यह बहुत उचित नहीं है। क्या कोई कानों या आँखों से शरीर को भोजन पहुँचा सकता है? वे यह नहीं जानते कि ये देवता भगवान् के विराट शरीर के विभिन्न अंग हैं और वे अपने अज्ञानवश यह विश्वास कर बैठते हैं कि प्रत्येक देवता पृथक् ईश्वर है तथा परमेश्वर का प्रतियोगी है। न केवल सारे देवता, अपितु सामान्य जीव भी परमेश्वर के अंग (अंश) हैं। श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि ब्राह्मण परमेश्वर के सिर हैं, क्षत्रिय उनकी बाहें हैं, वैश्य उनकी कटि तथा शूद्र उनके पाँव हैं, और इन सबके अलग-अलग कार्य हैं। यदि कोई देवताओं को तथा अपने आपको परमेश्वर का अंश मानता है तो उसका ज्ञान पूर्ण है। किन्तु यदि वह इसे नहीं समझता तो उसे भिन्न लोकों की प्राप्ति होती है, जहाँ देवतागण निवास करते हैं। यह वह गन्तव्य नहीं है, जहाँ भक्तगण जाते हैं। देवताओं से प्राप्त वर नाशवान होते हैं, क्योंकि इस भौतिक जगत् के भीतर सारे लोक, सारे देवता तथा उनके सारे उपासक नाशवान हैं। अत: इस श्लोक में स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे देवताओं की उपासना से प्राप्त होने वाले सारे फल नाशवान होते हैं, अत: ऐसी पूजा केवल अल्पज्ञों द्वारा की जाती है। चूँकि परमेश्वर की भक्ति में कृष्णभावनामृत में संलग्न व्यक्ति ज्ञान से पूर्ण दिव्य आनन्दमय लोक की प्राप्ति करता है अत: उसकी तथा देवताओं के सामान्य उपासक की उपलब्धियाँ पृथक्-पृथक् होती हैं। परमेश्वर असीम हैं, उनका अनुग्रह अनन्त है, उनकी दया भी अनन्त है। अत: परमेश्वर की अपने शुद्धभक्तों पर कृपा भी असीम होती है। 🌹🌹🌹🌹जय श्री कृष्ण 🌹🌹🌹🌹 1. कृष्ण: कृष्ण भारत की सात प्राचीन और पवित्र नगरियों में से एक है मथुरा। मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। किसी ने कृष्ण के मामा कंस को बताया कि वसुदेव और देवकी की संतान ही उसकी मृत्यु का कारण होगी अत: उसने वसुदेव और देवकी दोनों को जेल में बंद कर दिया। कंस उक्त दोनों की संतान के उत्पन्न होते ही मार डालता था। भविष्यवाणी के अनुसार विष्णु को देवकी के गर्भ से कृष्ण के रूप में जन्म लेना था, तो उन्होंने अपने 8वें अवतार के रूप में 8वें मनु वैवस्वत के मन्वंतर के 28वें द्वापर में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के 7 मुहूर्त निकल गए और 8वां उपस्थित हुआ तभी आधी रात के समय सबसे शुभ लग्न उपस्थित हुआ। उस लग्न पर केवल शुभ ग्रहों की दृष्टि थी। रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में लगभग 3112 ईसा पूर्व (अर्थात आज से 5126 वर्ष पूर्व) को हुआ हुआ। ज्योतिषियों के अनुसार रात 12 बजे उस वक्त शून्य काल था। 2. यमुना के पार गोकुल: यमुना के पार गोकुल जब कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल के सभी संतरी माया द्वारा गहरी नींद में सो गए। जेल के दरवाजे स्वत: ही खुल गए। उस वक्त भारी बारिश हो रही थी। यमुना में उफान था। उस बारिश में ही वसुदेव ने नन्हे कृष्ण को एक टोकरी में रखा और उस टोकरी को लेकर वे जेल से बाहर निकल आए। कुछ दूरी पर ही यमुना नदी थी। उन्हें उस पार जाना था लेकिन कैसे? तभी चमत्कार हुआ। यमुना के जल ने भगवान के चरण छुए और फिर उसका जल दो हिस्सों में बंट गया और इस पार से उस पार रास्ता बन गया। कहते हैं कि वसुदेव कृष्ण को यमुना के उस पार गोकुल में अपने मित्र नंदगोप के यहां ले गए। वहां पर नंद की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या उत्पन्न हुई थी। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को ले गए। गोकुल मां यशोदा का मायका था और नंदगांव में उनका ससुराल। श्रीकृष्ण का लालन-पालन यशोदा व नंद ने किया। गोकुल यमुना के तट पर बसा एक गांव है, जहां सभी नंदों की गायों का निवास स्थान था। नंद मथुरा के आसपास गोकुल और नंदगांव में रहने वाले आभीर गोपों के मुखिया थे। यहीं पर वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी ने बलराम को जन्म दिया था। बलराम देवकी के 7वें गर्भ में थे जिन्हें योगमाया ने आकर्षित करके रोहिणी के गर्भ में डाल दिया था। यह स्थान गोप लोगों का था। मथुरा से गोकुल की दूरी महज 12 किलोमीटर है। *कई रोगों से पाना है मुक्ति? तो जानिए गर्म दूध के साथ गुड़ के सेवन के फायदे* 1. रोजाना गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से आपके शरीर से अशुद्धियां निकल जाती है। जिससे आपको कोई बीमारी नहीं होगी। 2. अगर आप दूध के साथ चीनी का इस्तेमाल करते है तो इसकी जगह आप गुड़ का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपका वजन कंट्रोल में रहेगा। 3. अगर आपको पाचन संबधी कोई भी समस्या है तो गर्म-गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से आपको पेट संबंधी हर समस्या से निजात मिल जाता है। 4. अगर रोजाना गुड़ का एक छोटा पीस अदरक के साथ मिला कर खाया जाए तो जोड़ों में मजबूती आएगी और दर्द दूर होगा। 5. गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से आपकी त्वचा मुलायम होने के साथ-साथ त्वचा संबंधी समस्या नहीं होती हैं। 6. गर्म दूध और गुड़ का सेवन करने से 🌹आपके बाल भी हेल्दी रहेंगे। 7. गर्म दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से आपको पीरियड के समय के दर्द से निजात मिल सकती है।

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जब हिंदुस्तान में धारा 370 हट सकती है  तो  गोमाता के हत्यारो की गर्दन भी कट सकती हैं 
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    user_Prjapati Daksh jitendra
    Prjapati Daksh jitendra
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    17 hrs ago
  • 2 अप्रैल 2026 को श्री हनुमान जन्मोत्सव सीताराम जी का मंदिर करतारपुरा में भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है दिनांक 31 अप्रैल 2026 को सीताराम जी के मंदिर से से वाहन रैली निकाली गई काफी संख्या में श्रद्धालु आए और जय जय सियाराम के नारे लगाते हुए नाचते गए हर कॉलोनीयो में वाहन रैली निकाली गई है
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    user_PRAVEEN BADAYA
    PRAVEEN BADAYA
    Jaipur, Rajasthan•
    15 hrs ago
  • ट्रेन में मचा बवाल! लड़कियों की लड़ाई छुड़ाने गया युवक, खुद ही पिट गया 😳 सोशल मीडिया पर एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ट्रेन के अंदर दो लड़कियों के बीच मामूली कहासुनी अचानक जबरदस्त झगड़े में बदल जाती है। देखते ही देखते दोनों के बीच बाल खींचना, थप्पड़ और धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है, जिससे पूरा डिब्बा अफरा-तफरी में बदल जाता है। स्थिति को संभालने के लिए एक युवक बीच-बचाव करने पहुंचता है, लेकिन हालात ऐसे बिगड़ते हैं कि वह खुद ही इस लड़ाई का शिकार बन जाता है। वीडियो देखकर लोग हैरान हैं और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। 📌 यह वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। #Deshtak #TrainFight #ViralVideo #GirlsFight #BreakingNews #TrendingNow #PublicFight #IndianViral #ShockingVideo #SocialMediaViral #EntertainmentNews #OMGVideo #MustWatch 📢 नोटः यह जानकारी वायरल रिपोर्ट्स और मीडिया सूत्रों पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं
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    ट्रेन में मचा बवाल! लड़कियों की लड़ाई छुड़ाने गया युवक, खुद ही पिट गया 😳
सोशल मीडिया पर एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ट्रेन के अंदर दो लड़कियों के बीच मामूली कहासुनी अचानक जबरदस्त झगड़े में बदल जाती है। देखते ही देखते दोनों के बीच बाल खींचना, थप्पड़ और धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है, जिससे पूरा डिब्बा अफरा-तफरी में बदल जाता है।
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#Deshtak #TrainFight #ViralVideo #GirlsFight #BreakingNews #TrendingNow #PublicFight #IndianViral #ShockingVideo #SocialMediaViral #EntertainmentNews #OMGVideo #MustWatch
📢 नोटः यह जानकारी वायरल रिपोर्ट्स और मीडिया सूत्रों पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं
    user_Ppsingh (Deshtak.com)
    Ppsingh (Deshtak.com)
    Media company आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • जयपुर के आर्मी कैंट एरिया के सुनसान और जंगलनुमा इलाके में देर रात एक अज्ञात युवक का शव मिलने से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बनीपार्क थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। बनीपार्क थाना प्रभारी अंजु कुमारी ने बताया रेलवे ट्रैक के पास शव मिलने की जीआरपी पुलिस ने सूचना दी। मौके पर देखा कि एक शव मिला,जो पूरी तरह से सड़ चुका था। शव पर कीड़े लगे हुए थे। शव करीब 15 दिन पुराना बताया जा रहा है। काफी हद तक पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में मिला है। लंबे समय तक खुले जंगल क्षेत्र में पड़े रहने के कारण बॉडी की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
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    जयपुर के आर्मी कैंट एरिया के सुनसान और जंगलनुमा इलाके में देर रात एक अज्ञात युवक का शव मिलने से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बनीपार्क थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। बनीपार्क थाना प्रभारी अंजु कुमारी ने बताया रेलवे ट्रैक के पास शव मिलने की जीआरपी पुलिस ने सूचना दी। मौके पर देखा कि एक शव मिला,जो पूरी तरह से सड़ चुका था। शव पर कीड़े लगे हुए थे। शव करीब 15 दिन पुराना बताया जा रहा है। काफी हद तक पूरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में मिला है। लंबे समय तक खुले जंगल क्षेत्र में पड़े रहने के कारण बॉडी की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
    user_Vijender Singh Singh
    Vijender Singh Singh
    Jaipur, Rajasthan•
    22 hrs ago
  • श्री हनुमान जी महाराज सेवा मंडल जयपुर द्वारा सामूहिक 21 वीं ध्वज पद यात्रा जयपुर से रवाना होकर अलवर तिराहा पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया
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    श्री हनुमान जी महाराज सेवा मंडल जयपुर द्वारा सामूहिक 21 वीं ध्वज पद यात्रा जयपुर से रवाना होकर अलवर तिराहा पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया
    user_Breaking Live News
    Breaking Live News
    Shahpura, Jaipur•
    3 hrs ago
  • Post by Yogesh Kumar Gupta
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    Post by Yogesh Kumar Gupta
    user_Yogesh Kumar Gupta
    Yogesh Kumar Gupta
    पत्रकार बस्सी, जयपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
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    Post by Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    user_Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    रिपोर्टर विराटनगर, जयपुर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गौमाता और योगी आदित्यनाथ की माताजी पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मौलाना को गिरफ्तार कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी मौलाना अब्दुल्ला सलीम को यूपी पुलिस ने बिहार के पूर्णिया से दबोचा। इसके लिए यूपी एसटीएफ की टीम विशेष अभियान चलाकर बिहार पहुंची और आरोपी को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि मौलाना अब्दुल सालिम चतुर्वेदी अररिया जिले के जोकीहाट का निवासी है। इस मामले में पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और जांच जारी है। #CMYogi #Maulana #UPSTF #UPPolice #BreakingNews #IndiaNews #DeshTak
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    उत्तर प्रदेश में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गौमाता और योगी आदित्यनाथ की माताजी पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में मौलाना को गिरफ्तार कर लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी मौलाना अब्दुल्ला सलीम को यूपी पुलिस ने बिहार के पूर्णिया से दबोचा। इसके लिए यूपी एसटीएफ की टीम विशेष अभियान चलाकर बिहार पहुंची और आरोपी को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि मौलाना अब्दुल सालिम चतुर्वेदी अररिया जिले के जोकीहाट का निवासी है।
इस मामले में पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और जांच जारी है।
#CMYogi #Maulana #UPSTF #UPPolice #BreakingNews #IndiaNews #DeshTak
    user_Ppsingh (Deshtak.com)
    Ppsingh (Deshtak.com)
    Media company आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    1 day ago
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