बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा की शुरुआत 17 फरवरी से मुजफ्फरपुर सहित पूरे राज्य में हो चुकी है, जो 25 फरवरी तक चलेगी। मुजफ्फरपुर जिले में 82 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला प्रशासन ने परीक्षा को शांतिपूर्ण, कदाचारमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस वर्ष प्रशासन की सख्ती स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले केंद्र में प्रवेश अनिवार्य किया गया है। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से प्रारंभ होगी, जिसके लिए अधिकतम 9:00 बजे तक प्रवेश की अनुमति है। वहीं द्वितीय पाली दोपहर 2:00 बजे से होगी और 1:30 बजे के बाद किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा। निर्धारित समय के बाद आने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था अनुशासन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त लेकिन आवश्यक कदम है। वर्षों से परीक्षा में कदाचार और अव्यवस्था की खबरें शिक्षा प्रणाली की साख पर सवाल खड़े करती रही हैं। ऐसे में समयबद्ध प्रवेश और कठोर निगरानी व्यवस्था प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, पेजर, इलेक्ट्रॉनिक घड़ी, स्मार्ट वॉच, मैग्नेटिक वॉच, कैलकुलेटर, इरेज़र सहित सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इतना ही नहीं, परीक्षा कक्ष में न तो परीक्षार्थी और न ही वीक्षक मोबाइल फोन लेकर जा सकेंगे। जूता-मोजा पहनकर आने पर भी रोक लगाई गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, प्रशासनिक सख्ती के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। समय सीमा का पालन जरूरी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के सामने यातायात, दूरी और संसाधनों की चुनौतियाँ भी हैं। ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को समय से पहले केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। यह परीक्षा केवल छात्रों की शैक्षणिक क्षमता का परीक्षण नहीं है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। यदि परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष वातावरण में संपन्न होती है, तो यह न केवल विद्यार्थियों के भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश होगा, बल्कि राज्य की शिक्षा प्रणाली के लिए भी एक नई मिसाल कायम करेगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने संकल्प को कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर उतार पाता है। शिक्षा की असली जीत तभी होगी जब मेहनत, ईमानदारी और पारदर्शिता को ही सफलता का आधार बनाया जाएगा।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा की शुरुआत 17 फरवरी से मुजफ्फरपुर सहित पूरे राज्य में हो चुकी है, जो 25 फरवरी तक चलेगी। मुजफ्फरपुर जिले में 82 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला प्रशासन ने परीक्षा को शांतिपूर्ण, कदाचारमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस वर्ष प्रशासन की सख्ती स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। परीक्षार्थियों को परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले केंद्र में प्रवेश अनिवार्य किया गया है। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से प्रारंभ होगी, जिसके लिए अधिकतम 9:00 बजे तक प्रवेश की अनुमति है। वहीं द्वितीय पाली दोपहर 2:00 बजे से होगी और 1:30 बजे के बाद किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा। निर्धारित समय के बाद आने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था अनुशासन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त लेकिन आवश्यक कदम है। वर्षों से परीक्षा में कदाचार और अव्यवस्था की खबरें शिक्षा प्रणाली की साख पर सवाल खड़े करती रही हैं। ऐसे में समयबद्ध प्रवेश और कठोर निगरानी व्यवस्था प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, पेजर, इलेक्ट्रॉनिक घड़ी, स्मार्ट वॉच, मैग्नेटिक वॉच, कैलकुलेटर, इरेज़र सहित सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इतना ही नहीं, परीक्षा कक्ष में न तो परीक्षार्थी और न ही वीक्षक मोबाइल फोन लेकर जा सकेंगे। जूता-मोजा पहनकर आने पर भी रोक लगाई गई है। इन प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, प्रशासनिक सख्ती के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। समय सीमा का पालन जरूरी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के सामने यातायात, दूरी और संसाधनों की चुनौतियाँ भी हैं। ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को समय से पहले केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। यह परीक्षा केवल छात्रों की शैक्षणिक क्षमता का परीक्षण नहीं है, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। यदि परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष वातावरण में संपन्न होती है, तो यह न केवल विद्यार्थियों के भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश होगा, बल्कि राज्य की शिक्षा प्रणाली के लिए भी एक नई मिसाल कायम करेगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने संकल्प को कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर उतार पाता है। शिक्षा की असली जीत तभी होगी जब मेहनत, ईमानदारी और पारदर्शिता को ही सफलता का आधार बनाया जाएगा।
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