महिपाल सिंह मकराना जी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ने की खबर सुनकर मन बेहद व्यथित है। महिपाल सिंह मकराना जी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ने की खबर सुनकर मन बेहद व्यथित है। निरंतर अन्न त्याग कर पैदल यात्रा करना कोई साधारण बात नहीं, यह अपने समाज और युवाओं के भविष्य के लिए किया जा रहा एक महान त्याग और कठिन तप है। ऐसे संघर्ष में उनका बार-बार अस्वस्थ होना हम सभी के लिए चिंता का विषय है। महिपाल सिंह मकराना जी, आप समाज की अनमोल धरोहर हैं। आपका स्वस्थ रहना इस संघर्ष की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आपको शीघ्र स्वस्थ करें और आपको इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की शक्ति प्रदान करें। अब समय केवल देखने का नहीं, बल्कि उनके इस त्याग और संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े होने का है। आइए, उनके साहस और संकल्प का सम्मान करें और इस अभियान में अपना पूरा समर्थन दें। ईश्वर आपको शीघ्र स्वस्थ करें। हम सब आपके साथ हैं।
महिपाल सिंह मकराना जी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ने की खबर सुनकर मन बेहद व्यथित है। महिपाल सिंह मकराना जी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ने की खबर सुनकर मन बेहद व्यथित है। निरंतर अन्न त्याग कर पैदल यात्रा करना कोई साधारण बात नहीं, यह अपने समाज और युवाओं के भविष्य के लिए किया जा रहा एक महान त्याग और कठिन तप है। ऐसे संघर्ष में उनका बार-बार अस्वस्थ होना हम सभी के लिए चिंता का विषय है। महिपाल सिंह मकराना जी, आप
समाज की अनमोल धरोहर हैं। आपका स्वस्थ रहना इस संघर्ष की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आपको शीघ्र स्वस्थ करें और आपको इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की शक्ति प्रदान करें। अब समय केवल देखने का नहीं, बल्कि उनके इस त्याग और संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े होने का है। आइए, उनके साहस और संकल्प का सम्मान करें और इस अभियान में अपना पूरा समर्थन दें। ईश्वर आपको शीघ्र स्वस्थ करें। हम सब आपके साथ हैं।
- बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहजनवा में पैदल मार्च, 90 दिनों में दोषियों को फांसी देने की उठाई मांग बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहजनवा में पैदल मार्च, 90 दिनों में दोषियों को फांसी देने की उठाई मांग सहजनवा, गोरखपुर। बहन-बेटियों और मासूम बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे हत्या एवं दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के विरोध में शनिवार को दलित शोषित कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में सहजनवा में जनजागरण पैदल मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लेकर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। पैदल मार्च भीटी चौराहे से प्रारंभ होकर सहजनवा थाना होते हुए पूरे सहजनवा बाजार में निकाला गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर महिला सुरक्षा के समर्थन में नारे लगाए तथा लोगों को जागरूक किया। मार्च के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि बहन-बेटियों और बच्चों के साथ हत्या, दुष्कर्म तथा अन्य जघन्य अपराध करने वाले दोषियों को 90 दिनों के भीतर फांसी की सजा सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सहजनवा, खजनी, चित्रकूट सहित देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार सामने आ रही घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई से ही समाज में न्याय का विश्वास मजबूत होगा। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने एक स्वर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अपराधियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने की मांग दोहराई।4
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- गोरखपुर दीपिका हत्याकांड: CM को सौंपा गया ज्ञापन, पीड़ित परिवार के लिए 7 बड़ी मांगें | Gorakhpur News1
- जमीनी विवाद में दो पक्षों में हुई लड़ाई नाबालिग लड़की को भी छेड़ने से बाज नहीं आये हमलावर। उत्तर प्रदेश में कानून का राज है, किसी भी सूरत में अपराधियों को छोड़ा नहीं जाएगा, ऐसा राग अलापने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ को आईना दिखाने का काम किया है इस अधिवक्ता ने। एक साथ पुलिस कार्यप्रणाली को नंगा करके रख दिया।।1
- हिंदी शब्दों को प्रथमिकता दें जो शब्द हिंदी में उपलब्ध हैं उसी का उपयोग करें1
- नील गाय का बढ़ता आतंक, किसान परेशान निगरानी करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है। नेवास गोरखपुर। पाली क्षेत्र में नीलगायों का बढ़ता आतंक किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हासपार्टी, सजनापार, नेवास, गोविंदपुर, तिवरान, पनिका और इटार समेत कई गांवों में नीलगायों के झुंड खेतों में घुसकर धान और अन्य फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही रात होती है, नीलगायों के झुंड खेतों में पहुंच जाते हैं। फसल बचाने के लिए किसान टॉर्च, डंडे और शोर-शराबे के सहारे पूरी रात खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है। किसान विनोद, महेश, रामलखन, कन्हैया, गोविंद, कमल और बिनय कपूर सहित कई किसानों ने बताया कि नीलगायों के कारण आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि नीलगायों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनकी मेहनत बर्बाद होने से बच सके।1