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हाथी ताला से बाकाना कुआं तक रोड की हालत खराब है बहुत कोई वजह से करने भी नहीं आता कैसी है कैसी नहीं है रोड कभी आया ही नहीं है कोई हो सकता है कोई जल्दी से जल्दी कार्रवाई करके रोड बना दे डबल लाइन हर यात्री को जाने आने में प्रॉब्लम होती है
Harish Jat
हाथी ताला से बाकाना कुआं तक रोड की हालत खराब है बहुत कोई वजह से करने भी नहीं आता कैसी है कैसी नहीं है रोड कभी आया ही नहीं है कोई हो सकता है कोई जल्दी से जल्दी कार्रवाई करके रोड बना दे डबल लाइन हर यात्री को जाने आने में प्रॉब्लम होती है
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- जैसलमेर की अनमोल विरासत 'ओरण और गोचर' भूमि को सोलर कंपनियों के आवंटन से बचाने की जंग अब निर्णायक मोड पर पहुंच गई है। मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट से महज 100 मीटर दूर वीर आलाजी मंदिर परिसर में आयोजित महापडाव में हजारों ग्रामीणों, पशुपालकों और मातृशक्ति ने हुंकार भरी।1
- जालौर बुधवार को आने वाले गर्मी को मौसम को देखते हुए भारतीय किसान संघ द्वारा पशु पक्षियों के लिए पीने के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है, वहीं शहर में अन्य सामाजिक संस्थाएं भी पशु-पक्षियों के लिए पानी पीने के लिए व्यवस्था करने में आगे आ रही है गर्मी को देखते हुए शहर के विभिन्न गली मोहल्ले में पानी की टंकियां रखवाई गई है1
- "बाप धरने पर और बेटा सेटिंग में... यह दोहरा खेल नहीं चलेगा!" — महंत वीरम भारती जैसलमेर की पावन धरा पर महंत वीरम भारती ने अपने बेबाक अंदाज में समाज के उन लोगों को आईना दिखाया जो संघर्ष के नाम पर केवल दिखावा करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि हक की लड़ाई ईमानदारी से लड़ी जाती है, दोगली नीति से नहीं।1
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- जैसलमेर कलेक्टर हटाओ, जैसलमेर बचाओ तख्तियां हाथों में लेकर जैसलमेर की महिला शक्ति सड़कों पर उतरी। अपने हक, अपने शहर और अपनी आवाज के लिए महिलाओं ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। नारी शक्ति का संदेश साफ है — जैसलमेर की सुरक्षा, सम्मान और विकास से कोई समझौता नहीं।1
- सिरोही। जिले में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए आज सिरोही स्वास्थ्य भवन में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खराड़ी ने की। बैठक में जिले के समस्त ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभिन्न योजनाओं की प्रगति, लक्ष्य प्राप्ति, लंबित प्रकरणों तथा फील्ड स्तर पर आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा के दौरान लाडो प्रोत्साहन योजना, मां योजना, मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना, दिव्यांग प्रमाण पत्र, टीबी मुक्त योजना, सिलिकोसिस योजना, हृष्ठ्य एप, परिवार कल्याण कार्यक्रम तथा ऋष्ट हि कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। सीएमएचओ डॉ. खराड़ी ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र लाभार्थियों को समय पर लाभ प्रदान किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक जांचें सुनिश्चित करने, टीबी मुक्त अभियान में सक्रिय रूप से स्क्रीनिंग एवं उपचार पूर्ण कराने, तथा सिलिकोसिस पीड़ितों के प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए। बैठक में एप के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्टिंग की प्रगति की भी समीक्षा की गई और डेटा की शुद्धता एवं समयबद्ध अपलोडिंग पर जोर दिया गया। परिवार कल्याण एवं कार्यक्रम के तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। सीएमएचओ ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में नियमित मॉनिटरिंग करें, योजनाओं की जमीनी स्थिति पर नजर रखें तथा आमजन को योजनाओं की जानकारी देकर अधिक से अधिक लाभार्थियों को जोड़ा जाए। बैठक का उद्देश्य जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना तथा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना रहा।2
- आठ साल पुराने हत्या के एक मामले में पोकरण की एडीजे कोर्ट ने आरोपी पत्नी और साले को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला 2017 का है।1
- गौवंश के हक पर डाका डालने वाली ताकतों को बेनकाब करना अब ज़रूरी है! सनातनी होने का दिखावा और असलियत में गौ-भूमि का सौदा... ये पाखंड नहीं तो क्या है" - रविन्द्र सिंह भाटी1
- सीमावर्ती जैसलमेर में ग्रामीणों ने ओरण, गोचर और चारागाह भूमि के संरक्षण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोगों ने एकजुट होकर इन पारंपरिक और जीवनदायी भूमि को सुरक्षित रखने की आवाज बुलंद की। इस दौरान सुमेर सिंह भाटी (सांवता) और भोपाल सिंह झालोरा सहित स्थानीय प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि ओरण, गोचर और चारागाह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन भूमियों को अतिक्रमण और अन्य उपयोग से बचाने तथा इन्हें राजस्व रिकॉर्ड में सुरक्षित दर्ज करने की मांग की। यह आंदोलन क्षेत्र की आस्था, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।3