महिलाओं के सम्मान पर राजनीति देश नहीं करेगा बर्दाश्त! नारी शक्ति के अधिकारों का विरोध विपक्ष की मातृशक्ति के अपमान वाली मानसिकता उजागर करता है। नारी किसी भी समाज की आधारशिला होती है। जिस समाज में महिलाओं को सम्मान, अधिकार और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, वही समाज वास्तव में प्रगति करता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नारी शक्ति का सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त है। फिर भी जब महिलाओं के अधिकारों और उनकी भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति होती है तो यह चिंता का विषय बन जाता है। आज देश नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है जहां नारी शक्ति को केवल सुरक्षा नहीं बल्कि अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति देने पर जोर दिया जा रहा है। यह सोच भारत की परंपरा और आधुनिकता दोनों का समन्वय है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य स्पष्ट है कि महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिले और वे केवल सहभागी नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता बनें। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। यह परिवर्तन केवल कागजों तक सीमित नहीं है बल्कि जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिलाएं आज प्रशासन, विज्ञान, खेल, व्यापार और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब अवसर और विश्वास मिलता है तो नारी शक्ति किसी भी चुनौती को पार कर सकती है। ऐसे समय में जब देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है तब विपक्ष के कुछ राजनीतिक दलों द्वारा इसका विरोध करना उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है। विपक्ष को यह समझना चाहिए था कि नारी शक्ति के अधिकार और उनकी निर्णयों में भागीदारी हमारी लोकतांत्रिक संस्कृति को और सशक्त करती है। यह केवल महिलाओं का विषय नहीं है बल्कि पूरे समाज के संतुलित और समावेशी विकास का प्रश्न है। हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री के रूप में मेरा मानना है कि नारी शक्ति का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि यह हमारे सामाजिक मूल्यों के खिलाफ भी है। हमारी सरकार नारी शक्ति के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के लिए पूरी तरह संकल्पित है और इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। यह भी आवश्यक है कि हम केवल सरकार पर निर्भर न रहें बल्कि समाज के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी समझें। जब तक हम अपनी सोच में बदलाव नहीं लाएंगे तब तक वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है। हमें अपनी बेटियों को शिक्षा के साथ साथ आत्मविश्वास और निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी देनी होगी। परिवार और समाज का सहयोग ही महिलाओं को आगे बढ़ने की सच्ची ताकत देता है। आज देश की जनता जागरूक है और वह यह समझती है कि कौन नारी सम्मान के साथ खड़ा है और कौन इसके खिलाफ। आने वाला समय यह तय करेगा कि समाज किस दिशा में आगे बढ़ेगा लेकिन यह निश्चित है कि नारी शक्ति को अब रोका नहीं जा सकता। अंततः यही कहना उचित होगा कि जब नारी सशक्त होगी तभी राष्ट्र सशक्त होगा। महिलाओं को समान अधिकार और निर्णय लेने की भागीदारी देना केवल एक नीति नहीं बल्कि एक मजबूत और समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला है।
महिलाओं के सम्मान पर राजनीति देश नहीं करेगा बर्दाश्त! नारी शक्ति के अधिकारों का विरोध विपक्ष की मातृशक्ति के अपमान वाली मानसिकता उजागर करता है। नारी किसी भी समाज की आधारशिला होती है। जिस समाज में महिलाओं को सम्मान, अधिकार और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, वही समाज वास्तव में प्रगति करता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नारी शक्ति का सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त है। फिर भी जब महिलाओं के अधिकारों और उनकी भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति होती है तो यह चिंता का विषय बन जाता है। आज देश नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है जहां नारी शक्ति को केवल सुरक्षा नहीं बल्कि अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति देने पर जोर दिया जा रहा है। यह सोच भारत की परंपरा और आधुनिकता दोनों का समन्वय है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य स्पष्ट है कि महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिले और वे केवल सहभागी नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता बनें। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। यह परिवर्तन केवल कागजों तक सीमित नहीं है बल्कि जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिलाएं आज प्रशासन, विज्ञान, खेल, व्यापार और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब अवसर और विश्वास मिलता है तो नारी शक्ति किसी भी चुनौती को पार कर सकती है। ऐसे समय में जब देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है तब विपक्ष के कुछ राजनीतिक दलों द्वारा इसका विरोध करना उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है। विपक्ष को यह समझना चाहिए था कि नारी शक्ति के अधिकार और उनकी निर्णयों में भागीदारी हमारी लोकतांत्रिक संस्कृति को और सशक्त करती है। यह केवल महिलाओं का विषय नहीं है बल्कि पूरे समाज के संतुलित और समावेशी विकास का प्रश्न है। हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री के रूप में मेरा मानना है कि नारी शक्ति का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि यह हमारे सामाजिक मूल्यों के खिलाफ भी है। हमारी सरकार नारी शक्ति के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के लिए पूरी तरह संकल्पित है और इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। यह भी आवश्यक है कि हम केवल सरकार पर निर्भर न रहें बल्कि समाज के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी समझें। जब तक हम अपनी सोच में बदलाव नहीं लाएंगे तब तक वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है। हमें अपनी बेटियों को शिक्षा के साथ साथ आत्मविश्वास और निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी देनी होगी। परिवार और समाज का सहयोग ही महिलाओं को आगे बढ़ने की सच्ची ताकत देता है। आज देश की जनता जागरूक है और वह यह समझती है कि कौन नारी सम्मान के साथ खड़ा है और कौन इसके खिलाफ। आने वाला समय यह तय करेगा कि समाज किस दिशा में आगे बढ़ेगा लेकिन यह निश्चित है कि नारी शक्ति को अब रोका नहीं जा सकता। अंततः यही कहना उचित होगा कि जब नारी सशक्त होगी तभी राष्ट्र सशक्त होगा। महिलाओं को समान अधिकार और निर्णय लेने की भागीदारी देना केवल एक नीति नहीं बल्कि एक मजबूत और समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला है।
- कॉर्पोरेट जगत में नारी उत्पीड़न व धर्मांतरण के षड्यंत्रों पर लगे लगाम : बजरंग बागड़ा*, टीसीएस जैसे मामलों से आहत विहिप ने भेजा फिक्की जैसे प्रमुख व्यावसायिक संघों को पत्र विश्व हिंदू परिषद के महासचिव श्री बजरंग बागड़ा ने व्यापार और उद्योग से जुड़े शीर्ष निकायों से कॉर्पोरेट जगत में काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की.... देखिए राजपथ न्यूज़ पर....1
- प्रेमानंद महाराज पर अभद्र टिप्पणी करने वाले अधिकारी को निलंबित करने की उठी मांग। श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्ख याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रेमानंद महाराज जी ने करोड़ों युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। इस बिषय पर आज वृन्दावन स्थित राधा नंद गिरी आश्रम में साधु संतों की अहम बैठक हुई ,बैठक में महामंडलेश्वर राधा नंद गिरी ने कहा कि प्रेमानंद महाराज जी हमारे ब्रिज भूमि की धरोहर हैं, उनके खिलाफ जिस अधिकारी ने अभद्र टिप्पणी की है ,उस अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि प्रेमानंद महाराज जी ने करोड़ों युवाओं को सद मार्ग दिखाया है और बुरी आदतों से दूर किया है, ऐसे दिव्य संत के बारे में यह टिप्पणी बहुत ही अशोभनीय है। बांके बिहारी की पत्नी इंदुलेखा जी ने कहा कि जिस भी अधिकारी ने यह गलत टिप्पणी की है वह निंदा का विषय है, ऐसे अधिकारी तो नास्तिक ही हो सकते हैं। प्रेमानंद जी के खिलाफ आईपीएस अधिकारी की टिप्पणी से साधु संतों में भारी रोष व्याप्त है और यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन भी किया जा सकता है।1
- Post by Sonu Kanaujiya1
- Post by Harshikesh Raj1
- Post by MOHD Ahsan. 95406238261
- Post by Pro hindustan tv1
- गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र स्थित एक मार्केट में अचानक भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें देखते ही देखते तेज़ी से फैल गईं, जिससे आसपास के दुकानदारों और लोगों में दहशत का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया। दमकल कर्मी लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया जा रहा है।1
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री श्री अमित शाह से अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने हिन्दू मंदिरो को भारत सरकार के प्रबंधन तथा मंदिरो के धनराशि पर से सरकार की नियंत्रण से सरकार को मुक्त करने की अनुरोध एब मांग किया है। इसका अर्थ है के सरकार का मंदिरों के प्रबंधन और आर्थिक नियंत्रण से हट जाना, और मंदिरों को हिंदू समाज या ट्रस्ट के हाथ में देना। डॉ सिद्धार्थ ने कहा के अगर सरकार कहती है के मंदिरों में भ्रष्टाचार और गलत प्रबंधन की शिकायतें थीं, तो ये कया दुसरे पंथो के धर्मस्थल में नहीं होता, सरकार कया सिर्फ सनातनीओ को भ्रष्टाचारी कह रहे ? डॉ सिद्धार्थ ने और क्या कया कहा यह जांनने के लिए पूरी खबर व वीडियो देखिये..1