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क्या आप मुझे बता सकते हैं ये"पेड मीडिया"क्या है,और यह क्या करती है? . लोकतंत्र आने से पहले राजा बाहुबल-सैन्य बल से सत्ता में आता था, और वास्तव में राज्य को कंट्रोल करता था। राजा की शक्ति का स्त्रोत सेना थी, और धनिक वर्ग का सेना पर कोई नियंत्रण नहीं था। इसके अलावा अदालतें भी पूर्णतया राजा के अधीन थी। अत: राजा की स्थिति हर हाल में मजबूत रहती थी। . दुसरे शब्दों में, यदि धनिकों के सम्बन्ध राजा से बिगड़ जाते थे तो राजा को निकालने के लिए साजिश / हत्या आदि के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं था। तब वे किसी ऐसे व्यक्ति को फंडिंग देना शुरू करते थे जो राजा का तख्ता पलट सके। . लेकिन वोटिंग राइट्स आने के बाद राज्य के नागरिको की राय निर्णायक बन गयी। नागरिको की राय जिस आदमी के पक्ष में होगी, वह व्यक्ति राजा बन जाएगा। मीडिया नागरिको की राय बनाने में सबसे महत्त्वपूर्ण है, अत: धनिकों ने मीडिया को फैलाना और इसे कंट्रोल करना शुरू किया। मुख्यधारा के मीडिया पर धनिकों का हमेशा से 100% नियंत्रण रहा है, और आज भी उनका इस पर 100% नियंत्रण है। , . व्यवसायिक रूप से यह घाटे का व्यवसाय है। किन्तु राजनैतिक फायदे के लिए धनिक वर्ग मीडिया समूहों को घाटे में चलने के बावजूद भुगतान करते है। वे मीडिया के माध्यम से अवाम को कंट्रोल करते है और अवाम पर कंट्रोल होने से लोकतंत्र का राजा एवं राजवर्ग (पीएम-सीएम-सांसद-विधायक-मंत्री आदि) उनके कंट्रोल में रहता है। और राजा को कंट्रोल करने के बाद वे राजा से उन क़ानूनो गेजेट में प्रकाशित करवाने में सफल हो जाते है जो धनिक वर्ग को अतिरिक्त मुनाफा दे !! . पेड मीडिया क्या है ? . मीडिया में आप जो कुछ भी देखते-सुनते-पढ़ते हो उसके लिए किसी न किसी के द्वारा पे ( Pay ) किया जाता है। इसीलिए यह पेड मीडिया है। . यहाँ सबसे जरुरी बात यह है कि — जब पेड मीडिया सच्ची और अच्छी ख़बरें दिखाता है तब भी इसके लिए किसी न किसी के द्वारा भुगतान किया जाता है। इसे फिर से पढ़िए — जब पेड मीडिया सच्ची और अच्छी ख़बरें दिखाता है तब भी इसके लिए किसी न किसी के द्वारा भुगतान किया जाता है। . मतलब खबर सच्ची है या झूठी है, घृणा फैलाती है या सौहार्द, गंभीर है या कॉमेडी, अश्लील है या शालीन, उकसाऊ है या औचित्यपूर्ण इससे कोई सरोकार नहीं होता है। मीडिया में जो भी चीज आएगी उसकी पेमेंट की जायेगी। बिना पेमेंट कुछ भी आता नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई नेता वाकयी में ईमानदार है और मीडिया रिपोर्ट कर रहा है कि वह ईमानदार है तो इसके लिए किसी न किसी ने इसके लिए पेमेंट की है। यदि कोई उद्योगपति बेईमान है और मीडिया रिपोर्ट कर रहा है कि उसने इतनी टेक्स चोरी की है, तो टेक्स चोरी सच्चाई है, लेकिन यह खबर मीडिया में सिर्फ तब आएगी जब कोई न कोई इस खबर को दिखाने के लिए पेमेंट करें। . यदि सीएम ने किसी जगह का उद्घाटन किया है और अख़बार ने इसकी फोटो छापी है तो इसके लिए पेमेंट की गयी है। पेमेंट कौन कर रहा है, वह अलग मसला है। लेकिन पेमेंट नहीं हुआ है तो फोटो अखबार में आने वाली नहीं है। यदि किसी टीवी / अख़बार ने कोई सर्वे प्रकाशित किया है तो इसके लिए पेमेंट की गयी है। यदि मीडिया ने किसी व्यक्ति के ट्विट का स्क्रीन शॉट छापा है या टीवी स्क्रीन पर दिखाया है तो इसके लिए भी पेमेंट करनी पड़ेगी। . यदि पेड मीडिया में यह रिपोर्ट हो रहा है कि — बेरोजगारी बढ़ रही है, तो इसके लिए पेमेंट की जायेगी। और यदि उसी दिन किसी अन्य मीडिया में यह आया है कि बेरोजगारी घट रही है तो इसके लिए भी पेमेंट हुयी है। मतलब बिना पेमेंट के एक कार्टून तक मीडिया में प्रकाशित नहीं होता है। पेमेंट कौन कर रहा है यह अलग बात है। लेकिन यह एक तथ्य है कि पेमेंट बिना मुख्यधारा की मीडिया में कुछ भी रिपोर्ट नहीं होता है। . पेड मीडिया के इन सभी स्त्रोतों में विज्ञापनो की स्थिति अलग है। क्योंकि जब आप अमूल का विज्ञापन देखते है तो आपको पता होता है कि पेमेंट अमूल ने की है। लेकिन विज्ञापन के अलावा जितना भी आप देख रहे है उसके लिए भी पेमेंट की जा रही है, और आपको पता भी नहीं है कि पेमेंट कौन कर रहा है !! . पेड न्यूज क्या है ? . मान लीजिए कि नेता X बयान देता है — नागरिकता संशोधन बिल संविधान के खिलाफ है और ये मुसलमानो के खिलाफ भी है, तो मिडिया में यह बयान सिर्फ तब आएगा जब मिडिया को इसके लिए पेमेंट की जाए। इस तरह मीडिया में आने के साथ ही यह बयान पेड न्यूज हो जाता है। यदि पेमेंट नहीं हुयी है तो यह बयान पेड मिडिया में नहीं आएगा, और तब यह पेड न्यूज नहीं है !! . और जब इसी समय कोई नेता Y कहता है कि — यह बिल संवैधानिक है और भारत के मुसलमानो को इससे कोई खतरा नहीं है तो यह बयान भी मिडिया में सिर्फ तब आएगा जब इसके लिए कोई पेमेंट करे। पेमेंट नहीं होने पर यह यह बयान मिडिया में नहीं आएगा। चाहे बयान खुद गृह मंत्री या प्रधानमंत्री ने ही क्यों न दिया हो। जितनी बार यह बयान दिखाने के लिए पेमेंट की जायेगी उतनी ही बार यह बयान दिखाया जाएगा। . इस तरह पेड मीडिया एक स्टेज है जहाँ आप पेड मीडिया के स्पोंसर्स द्वारा बनाए गए स्टेज पर पेड न्यूज Vs पेड न्यूज का एक अंतहीन सिलसिला देखते रहते है। और आप इससे बच नहीं सकते। उनके स्टेज हर जगह इसके लिए आपका पीछा करते है। अखबार, मैगजीन, पाठ्यपुस्तकें, फ़िल्में, ज्ञान बाटनें वाली किताबें, भाषण, फेसबुक-व्हाट्स एप, यू ट्यूब ( यह नया है ) आदि। उनका प्रयास यह रहता है कि आप उनसे जुड़े रहे ताकि आपका इनपुट वे डिसाइड कर सके। . दुसरे शब्दों में पेड मीडिया सच्ची खबरें भी दिखाता है, और झूठी भी। लेकिन हर स्थिति में उन्हें कोई न कोई पेमेंट करता है। इसीलिए मीडिया के लिए सही शब्द पेड मीडिया ( Paid Media ) है। . भारत में मीडिया गोरे लेकर आये थे, और 1947 तक यह उनके नियंत्रण में रहा। 1950 से 1990 तक भी भारतीय धनिकों के माध्यम से इसे गोरे ही कंट्रोल कर रहे थे। बाद में इंदिरा जी ने मीडिया को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश की लेकिन असफल रही। 1990 से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने आना शुरू किया और भारत का मीडिया फिर से उनके कंट्रोल में आ गया। आज भारत का पेड मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के नियंत्रण में है, और पूरी पेमेंट वे ही करते है। . पेड मीडिया के अंग : . कक्षा 1 से स्नातकोत्तर तक की सामाजिक विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीती विज्ञान, लोक प्रशासन की सभी पुस्तकें पेड मीडिया है। सभी फ़िल्में, धारावारिक, वृत्त चित्र पेड मीडिया है। समाज-राजनीती-अर्थशास्त्र पर लिखी गयी मुख्यधारा की सभी पुस्तकें पेड पुस्तके है। यदि इन विषयों पर लिखी गयी किसी पुस्तक को पुरूस्कार मिला है तो यह डबल पेड है। मुख्यधारा के सभी अख़बार, मनोरंजन चैनल, न्यूज चेनल पेड मीडिया है। टीवी-अखबार में आने वाले सभी बुद्धिजीवी पेड बुद्धिजीवी है। सभी पत्रकार पेड पत्रकार है। सभी सम्पादक पेड सम्पादक है। सभी क़ानून-संविधान विशेषग्य पेड विशेषग्य है। . तो व्यक्ति के विचार, धारणाओ, निष्कर्षो की बेसिक सप्लाई लाइन पेड मीडिया है। यह कभी सही है कभी गलत है। लेकिन आप ऊपर दिए गए स्त्रोतों से जितना भी ले रहे है, या जितना भी आपने आज तक ग्रहण किया है उसके लिए किसी न किसी ने भुगतान किया है। और वे आपसे यह जानकारी छुपा लेते है कि इसके लिए भुगतान कौन कर रहा है !! यह इनपुट धीरे धीरे व्यक्ति की बुनियादी विचार प्रक्रिया में शामिल हो जाता है और व्यक्ति जब खुद को अभिव्यक्त करता है तो उसका आउटपुट पेड मीडिया का रिफ्लेक्शन होता है। .

19 hrs ago
user_Sonu Kumar
Sonu Kumar
गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार•
19 hrs ago
29802dab-aaca-4bfb-9261-04430a1bd5e4

क्या आप मुझे बता सकते हैं ये"पेड मीडिया"क्या है,और यह क्या करती है? . लोकतंत्र आने से पहले राजा बाहुबल-सैन्य बल से सत्ता में आता था, और वास्तव में राज्य को कंट्रोल करता था। राजा की शक्ति का स्त्रोत सेना थी, और धनिक वर्ग का सेना पर कोई नियंत्रण नहीं था। इसके अलावा अदालतें भी पूर्णतया राजा के अधीन थी। अत: राजा की स्थिति हर हाल में मजबूत रहती थी। . दुसरे शब्दों में, यदि धनिकों के सम्बन्ध राजा से बिगड़ जाते थे तो राजा को निकालने के लिए साजिश / हत्या आदि के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं था। तब वे किसी ऐसे व्यक्ति को फंडिंग देना शुरू करते थे जो राजा का तख्ता पलट सके। . लेकिन वोटिंग राइट्स आने के बाद राज्य के नागरिको की राय निर्णायक बन गयी। नागरिको की राय जिस आदमी के पक्ष में होगी, वह व्यक्ति राजा बन जाएगा। मीडिया नागरिको की राय बनाने में सबसे महत्त्वपूर्ण है, अत: धनिकों ने मीडिया को फैलाना और इसे कंट्रोल करना शुरू किया। मुख्यधारा के मीडिया पर धनिकों का हमेशा से 100% नियंत्रण रहा है, और आज भी उनका इस पर 100% नियंत्रण है। , . व्यवसायिक रूप से यह घाटे का व्यवसाय है। किन्तु राजनैतिक फायदे के लिए धनिक वर्ग मीडिया समूहों को घाटे में चलने के बावजूद भुगतान करते है। वे मीडिया के माध्यम से अवाम को कंट्रोल करते है और अवाम पर कंट्रोल होने से लोकतंत्र का राजा एवं राजवर्ग (पीएम-सीएम-सांसद-विधायक-मंत्री आदि) उनके कंट्रोल में रहता है। और राजा को कंट्रोल करने के बाद वे राजा से उन क़ानूनो गेजेट में प्रकाशित करवाने में सफल हो जाते है जो धनिक वर्ग को अतिरिक्त मुनाफा दे !! . पेड मीडिया क्या है ? . मीडिया में आप जो कुछ भी देखते-सुनते-पढ़ते हो उसके लिए किसी न किसी के द्वारा पे ( Pay ) किया जाता है। इसीलिए यह पेड मीडिया है। . यहाँ सबसे जरुरी बात यह है कि — जब पेड मीडिया सच्ची और अच्छी ख़बरें दिखाता है तब भी इसके लिए किसी न किसी के द्वारा भुगतान किया जाता है। इसे फिर से पढ़िए — जब पेड मीडिया सच्ची और अच्छी ख़बरें दिखाता है तब भी इसके लिए किसी न किसी के द्वारा भुगतान किया जाता है। . मतलब खबर सच्ची है या झूठी है, घृणा फैलाती है या सौहार्द, गंभीर है या कॉमेडी, अश्लील है या शालीन, उकसाऊ है या औचित्यपूर्ण इससे कोई सरोकार नहीं होता है। मीडिया में जो भी चीज आएगी उसकी पेमेंट की जायेगी। बिना पेमेंट कुछ भी आता नहीं है। उदाहरण के लिए यदि कोई नेता वाकयी में ईमानदार है और मीडिया रिपोर्ट कर रहा है कि वह ईमानदार है तो इसके लिए किसी न किसी ने इसके लिए पेमेंट की है। यदि कोई उद्योगपति बेईमान है और मीडिया रिपोर्ट कर रहा है कि उसने इतनी टेक्स चोरी की है, तो टेक्स चोरी सच्चाई है, लेकिन यह खबर मीडिया में सिर्फ तब आएगी जब कोई न कोई इस खबर को दिखाने के लिए पेमेंट करें। . यदि सीएम ने किसी जगह का उद्घाटन किया है और अख़बार ने इसकी फोटो छापी है तो इसके लिए पेमेंट की गयी है। पेमेंट कौन कर रहा है, वह अलग मसला है। लेकिन पेमेंट नहीं हुआ है तो फोटो अखबार में आने वाली नहीं है। यदि किसी टीवी / अख़बार ने कोई सर्वे प्रकाशित किया है तो इसके लिए पेमेंट की गयी है। यदि मीडिया ने किसी व्यक्ति के ट्विट का स्क्रीन शॉट छापा है या टीवी स्क्रीन पर दिखाया है तो इसके लिए भी पेमेंट करनी पड़ेगी। . यदि पेड मीडिया में यह रिपोर्ट हो रहा है कि — बेरोजगारी बढ़ रही है, तो इसके लिए पेमेंट की जायेगी। और यदि उसी दिन किसी अन्य मीडिया में यह आया है कि बेरोजगारी घट रही है तो इसके लिए भी पेमेंट हुयी है। मतलब बिना पेमेंट के एक कार्टून तक मीडिया में प्रकाशित नहीं होता है। पेमेंट कौन कर रहा है यह अलग बात है। लेकिन यह एक तथ्य है कि पेमेंट बिना मुख्यधारा की मीडिया में कुछ भी रिपोर्ट नहीं होता है। . पेड मीडिया के इन सभी स्त्रोतों में विज्ञापनो की स्थिति अलग है। क्योंकि जब आप अमूल का विज्ञापन देखते है तो आपको पता होता है कि पेमेंट अमूल ने की है। लेकिन विज्ञापन के अलावा जितना भी आप देख रहे है उसके लिए भी पेमेंट की जा रही है, और आपको पता भी नहीं है कि पेमेंट कौन कर रहा है !! . पेड न्यूज क्या है ? . मान लीजिए कि नेता X बयान देता है — नागरिकता संशोधन बिल संविधान के खिलाफ है और ये मुसलमानो के खिलाफ भी है, तो मिडिया में यह बयान सिर्फ तब आएगा जब मिडिया को इसके लिए पेमेंट की जाए। इस तरह मीडिया में आने के साथ ही यह बयान पेड न्यूज हो जाता है। यदि पेमेंट नहीं हुयी है तो यह बयान पेड मिडिया में नहीं आएगा, और तब यह पेड न्यूज नहीं है !! . और जब इसी समय कोई नेता Y कहता है कि — यह बिल संवैधानिक है और भारत के मुसलमानो को इससे कोई खतरा नहीं है तो यह बयान भी मिडिया में सिर्फ तब आएगा जब इसके लिए कोई पेमेंट करे। पेमेंट नहीं होने पर यह यह बयान मिडिया में नहीं आएगा। चाहे बयान खुद गृह मंत्री या प्रधानमंत्री ने ही क्यों न दिया हो। जितनी बार यह बयान दिखाने के लिए पेमेंट की जायेगी उतनी ही बार यह बयान दिखाया जाएगा। . इस तरह पेड मीडिया एक स्टेज है जहाँ आप पेड मीडिया के स्पोंसर्स द्वारा बनाए गए स्टेज पर पेड न्यूज Vs पेड न्यूज का एक अंतहीन सिलसिला देखते रहते है। और आप इससे बच नहीं सकते। उनके स्टेज हर जगह इसके लिए आपका पीछा करते है। अखबार, मैगजीन, पाठ्यपुस्तकें, फ़िल्में, ज्ञान बाटनें वाली किताबें, भाषण, फेसबुक-व्हाट्स एप, यू ट्यूब ( यह नया है ) आदि। उनका प्रयास यह रहता है कि आप उनसे जुड़े रहे ताकि आपका इनपुट वे डिसाइड कर सके। . दुसरे शब्दों में पेड मीडिया सच्ची खबरें भी दिखाता है, और झूठी भी। लेकिन हर स्थिति में उन्हें कोई न कोई पेमेंट करता है। इसीलिए मीडिया के लिए सही शब्द पेड मीडिया ( Paid Media ) है। . भारत में मीडिया गोरे लेकर आये थे, और 1947 तक यह उनके नियंत्रण में रहा। 1950 से 1990 तक भी भारतीय धनिकों के माध्यम से इसे गोरे ही कंट्रोल कर रहे थे। बाद में इंदिरा जी ने मीडिया को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश की लेकिन असफल रही। 1990 से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने आना शुरू किया और भारत का मीडिया फिर से उनके कंट्रोल में आ गया। आज भारत का पेड मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के नियंत्रण में है, और पूरी पेमेंट वे ही करते है। . पेड मीडिया के अंग : . कक्षा 1 से स्नातकोत्तर तक की सामाजिक विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीती विज्ञान, लोक प्रशासन की सभी पुस्तकें पेड मीडिया है। सभी फ़िल्में, धारावारिक, वृत्त चित्र पेड मीडिया है। समाज-राजनीती-अर्थशास्त्र पर लिखी गयी मुख्यधारा की सभी पुस्तकें पेड पुस्तके है। यदि इन विषयों पर लिखी गयी किसी पुस्तक को पुरूस्कार मिला है तो यह डबल पेड है। मुख्यधारा के सभी अख़बार, मनोरंजन चैनल, न्यूज चेनल पेड मीडिया है। टीवी-अखबार में आने वाले सभी बुद्धिजीवी पेड बुद्धिजीवी है। सभी पत्रकार पेड पत्रकार है। सभी सम्पादक पेड सम्पादक है। सभी क़ानून-संविधान विशेषग्य पेड विशेषग्य है। . तो व्यक्ति के विचार, धारणाओ, निष्कर्षो की बेसिक सप्लाई लाइन पेड मीडिया है। यह कभी सही है कभी गलत है। लेकिन आप ऊपर दिए गए स्त्रोतों से जितना भी ले रहे है, या जितना भी आपने आज तक ग्रहण किया है उसके लिए किसी न किसी ने भुगतान किया है। और वे आपसे यह जानकारी छुपा लेते है कि इसके लिए भुगतान कौन कर रहा है !! यह इनपुट धीरे धीरे व्यक्ति की बुनियादी विचार प्रक्रिया में शामिल हो जाता है और व्यक्ति जब खुद को अभिव्यक्त करता है तो उसका आउटपुट पेड मीडिया का रिफ्लेक्शन होता है। .

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  • Post by अनार जीत दास पेंटर
    4
    Post by अनार जीत दास पेंटर
    user_अनार जीत दास पेंटर
    अनार जीत दास पेंटर
    Painter सिंहवारा, दरभंगा, बिहार•
    3 hrs ago
  • दरभंगा:_ सदर SDM विकास कुमार बोले पेट्रोल की कमी नहीं है कुछ पंप बंद होने के कारण ये स्थिति हुई !
    1
    दरभंगा:_ सदर SDM विकास कुमार बोले पेट्रोल की कमी नहीं है कुछ पंप बंद होने के कारण ये स्थिति हुई !
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    पत्रकार Darbhanga, Bihar•
    22 min ago
  • दरभंगा: जिले में आम जनता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी लोग रसोई गैस (LPG) की किल्लत से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि अब पेट्रोल के लिए हाहाकार मच गया है। सुबह से ही शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। • प्रशासन के दावे फेल, दिनभर बंद रहे पंप :- दरअसल, सुबह जब लोग अपनी गाड़ियों में ईंधन भराने निकले, तो अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ताले लटके मिले। पेट्रोल न मिलने से नाराज और परेशान लोग एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काटते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि एक तरफ जहां एसडीएम (SDM) ने मीडिया और जनता के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि शहर में पेट्रोल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सुचारू है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखी। दिनभर पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग बूंद-बूंद तेल के लिए तरसते रहे। • लहेरियासराय पेट्रोल पंप पर दिखा बेकाबू नजारा :- किल्लत का सबसे बुरा असर लहेरियासराय इलाके में देखने को मिला। यहाँ के पेट्रोल पंप पर सुबह से ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटके हुए थे। शाम को जैसे ही यहाँ तेल का टैंकर पहुँचा और बिक्री शुरू हुई, लोगों का सब्र टूट गया। देखते ही देखते पेट्रोल पंप पर गाड़ियों की बेकाबू भीड़ जमा हो गई। दोपहिया और चार पहिया वाहनों की इतनी लंबी कतार Sare गई कि मुख्य सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। तेल लेने की जल्दबाजी में लोगों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। • शाम को खुला पंप, तो उमड़ी भारी भीड़ :- दिनभर की किल्लत के बाद शाम को जैसे ही कुछ पेट्रोल पंपों के शटर खुले, वहां लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। पेट्रोल लेने के लिए गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे ट्रैफ़िक व्यवस्था भी चरमरा गई। हर कोई जल्द से जल्द अपनी गाड़ी की टंकी फुल करवा लेना चाहता था, जिसके कारण पंपों पर देर रात तक अफरा-तफरी मची रही।
    1
    दरभंगा: जिले में आम जनता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी लोग रसोई गैस (LPG) की किल्लत से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि अब पेट्रोल के लिए हाहाकार मच गया है। सुबह से ही शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
• प्रशासन के दावे फेल, दिनभर बंद रहे पंप :-
दरअसल, सुबह जब लोग अपनी गाड़ियों में ईंधन भराने निकले, तो अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ताले लटके मिले। पेट्रोल न मिलने से नाराज और परेशान लोग एक पंप से दूसरे पंप के चक्कर काटते नजर आए।
हैरानी की बात यह रही कि एक तरफ जहां एसडीएम (SDM) ने मीडिया और जनता के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि शहर में पेट्रोल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सुचारू है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखी। दिनभर पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग बूंद-बूंद तेल के लिए तरसते रहे।
• लहेरियासराय पेट्रोल पंप पर दिखा बेकाबू नजारा :-
किल्लत का सबसे बुरा असर लहेरियासराय इलाके में देखने को मिला। यहाँ के पेट्रोल पंप पर सुबह से ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटके हुए थे। शाम को जैसे ही यहाँ तेल का टैंकर पहुँचा और बिक्री शुरू हुई, लोगों का सब्र टूट गया। देखते ही देखते पेट्रोल पंप पर गाड़ियों की बेकाबू भीड़ जमा हो गई। दोपहिया और चार पहिया वाहनों की इतनी लंबी कतार Sare गई कि मुख्य सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। तेल लेने की जल्दबाजी में लोगों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
• शाम को खुला पंप, तो उमड़ी भारी भीड़ :-
दिनभर की किल्लत के बाद शाम को जैसे ही कुछ पेट्रोल पंपों के शटर खुले, वहां लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। पेट्रोल लेने के लिए गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे ट्रैफ़िक व्यवस्था भी चरमरा गई। हर कोई जल्द से जल्द अपनी गाड़ी की टंकी फुल करवा लेना चाहता था, जिसके कारण पंपों पर देर रात तक अफरा-तफरी मची रही।
    user_JAN PAD Digital News
    JAN PAD Digital News
    Media company बहादुरपुर, दरभंगा, बिहार•
    1 hr ago
  • Post by 24 Dainik Bihar Gramin
    1
    Post by 24 Dainik Bihar Gramin
    user_24 Dainik Bihar Gramin
    24 Dainik Bihar Gramin
    Darbhanga, Bokaro•
    4 hrs ago
  • Post by RAMAN CHOUDHARY
    1
    Post by RAMAN CHOUDHARY
    user_RAMAN CHOUDHARY
    RAMAN CHOUDHARY
    Social worker Hayaghat, Darbhanga•
    5 hrs ago
  • Darbhanga में Motto Motors Electric Scooter शोरूम का भव्य उद्घाटन, विधायक ईश्वर मंडल व उपमहापौर नाजिया हसन रहीं मौजूद, देखिए! #grandopeningcelebration #grandopeningday #grandopeningsoon #opening #openingnight #openingsoon #openingday #BREAKING #darbhanga #BiharNews #darbhangadiaries #darbhanganews #breakingnews #bigupdate #bihardarbhanga #breakingnewstoday #mithila #darbhangasamachar #darbhangamithila #bihar #darbhanga_mithila #Newsupdate #Bihar #new #news #grandopening #pepejeans #smart #jeans #shirts #trending
    1
    Darbhanga में Motto Motors Electric Scooter शोरूम का भव्य उद्घाटन, विधायक ईश्वर मंडल व उपमहापौर नाजिया हसन रहीं मौजूद, देखिए!
#grandopeningcelebration #grandopeningday #grandopeningsoon #opening #openingnight #openingsoon #openingday #BREAKING #darbhanga #BiharNews #darbhangadiaries #darbhanganews #breakingnews #bigupdate #bihardarbhanga #breakingnewstoday #mithila #darbhangasamachar #darbhangamithila #bihar #darbhanga_mithila #Newsupdate #Bihar #new #news #grandopening #pepejeans #smart #jeans #shirts #trending
    user_Darbhanga Samachar
    Darbhanga Samachar
    Photographer गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    7 hrs ago
  • Post by Deepak kumar Jha
    1
    Post by Deepak kumar Jha
    user_Deepak kumar Jha
    Deepak kumar Jha
    Student union हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    8 hrs ago
  • दरभंगा के केवटी के भाजपा विधायक का गाली गलौज और व्यवसायी को धमकी देने का ऑडियो हुआ Viral तो बोले विधायक जी ऑडियो है पुराना
    1
    दरभंगा के केवटी के भाजपा विधायक का गाली गलौज और व्यवसायी को धमकी देने का ऑडियो हुआ Viral तो बोले विधायक जी ऑडियो है पुराना
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    पत्रकार Darbhanga, Bihar•
    37 min ago
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