जन्म प्रमाण पत्र में संशोधन कैसे करें? जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 के नए नियमों के बारे में जानें नई दिल्ली : आज की दुनिया में जन्म प्रमाण पत्र केवल जन्म का रिकॉर्ड भर नहीं है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में साल 2023 के संशोधन के बाद सरकार की ओर से जन्म प्रमाण पत्र को कई महत्वपूर्ण सरकारी और नागरिक कार्यों में जन्म की तारीख और स्थान साबित करने के लिए इस्तेमाल करने का प्रावधान मजबूत हुआ। इसमें शैक्षणिक प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नियुक्ति, पासपोर्ट और आधार जैसे काम शामिल हैं। ऐसे में प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि, माता-पिता के नाम या किसी अन्य विवरण में गलती होने पर उसे सही कराना जरूरी हो जाता है। दूसरी ओर, यदि जन्म का पंजीकरण ही समय पर नहीं हुआ है, तो 2026 का नया संशोधन और उसके प्रावधानों को जानना भी खास तौर पर जरूरी हो जाता है। Birth Certificate Correction जन्म प्रमाण पत्र में गलती से लेकर देर से रजिस्ट्रेशन तक, जानें इससे जुड़े कानून की पूरी जानकारी जन्म प्रमाण पत्र में गलती सुधारने का कानूनी आधार क्या है? दरअसल...मौजूदा जन्म रिकॉर्ड में किसी गलत प्रविष्टि को सुधारने का आधार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 15 है। इसके लिए नागरिक पंजीकरण प्रणाली Civil Registration System अहम जानकारी देती है। सरकार के नागरिक पंजीकरण प्रणाली वेबसाइट के अनुसार गलत प्रविष्टि में सुधार या अपडेट इसी धारा और संबंधित राज्य के नियमों के तहत किया जाता है। इसलिए यदि जन्म पहले से रजिस्टर्ड है लेकिन प्रमाण पत्र में कोई तथ्य गलत दर्ज है, तो सामान्य स्थिति में इसे नया जन्म पंजीकरण नहीं माना जाएगा। आवेदक को संबंधित अधिकार-क्षेत्र वाले जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रारके सामने के लिए आवेदन करना होता है। राज्य के नियमों के अनुसार जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन के साथ साथ अन्य नियम अलग भी हो सकते हैं। नाम या जन्मतिथि गलत है तो सबसे पहले क्या करें? यदि प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम या अन्य विवरण गलत है, तो सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि मूल जन्म रजिस्टर में गलती है या केवल जारी प्रमाण पत्र में। इसके बाद संबंधित जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार के पास सुधार के लिए आवेदन दिया जाता है। आवेदन के साथ उस तथ्य को साबित करने वाले दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कौन-से दस्तावेज पर्याप्त होंगे, यह संबंधित राज्य के रजिस्ट्रेशन के नियम और स्थानीय रजिस्ट्रार की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। कानूनी रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल शपथपत्र बनवा लेना हर मामले में सुधार की गारंटी नहीं देता। रजिस्ट्रार को उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर संतुष्ट होना होता है। धारा 15 इसी सुधार या रद्द करने की प्रक्रिया का आधार है। जन्म प्रमाण पत्र में गलती होने पर 2026 के नए कानून को सीधे 'प्रमाणपत्र सुधार कानून' समझना सही नहीं है। जन्म प्रमाण पत्र में सुधार का मुख्य आधार कानून की धारा 15 है, जबकि 2026 का संशोधन मुख्य रूप से देर से जन्म या मृत्यु के पंजीकरण को कठोर बनाता है। 2026 के संशोधन की खास बात 2026 के नए कानूनों में हुए बदलावों को जानना है जरूरी जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 का संशोधन मौजूदा जन्म प्रमाण पत्र में सामान्य सुधार की प्रक्रिया को बदलने के बजाय विलंबित पंजीकरण को सख्त करना है। बिल के अनुसार जन्म या मृत्यु की जानकारी एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष से अधिक नहीं है तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या डीएम द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। संबंधित अधिकारी को जन्म या मृत्यु की सत्यता सत्यापित करनी होगी और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। दो साल से अधिक की देरी होने पर रजिस्ट्रेशन केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट भी शुद्धता सत्यापित करने के बाद निर्धारित शुल्क के भुगतान पर आदेश देगा। यानी 2026 का मुख्य कानूनी बदलाव यह है कि जितनी पुरानी अपंजीकृत जन्म या मृत्यु से जुड़ी का प्रविष्टि होगी, उतना उच्च स्तर का न्यायिक प्रशासनिक सत्यापन आवश्यक होगा। Navbharat Times मरीजों के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डॉक्टरों के खिलाफ Consumer Court का रास्ता बरकरार, याचिका खारिज नागरिकों के लिए ध्यान रखने वाली बात देखा जाए तो आम नागरिको के लिए ध्यान रखने वाली बात या वैधानिक नियम यही है कि यदि जन्म पहले से दर्ज किया गया है और केवल विवरण गलत है, तो सुधार के लिए रजिस्ट्रार से संपर्क करें। लेकिन यदि जन्म विवरण नहीं है, तो विलंबित पंजीकरण से जुड़ा नियम देखें। इसमें राज्यवार दस्तावेज़, फॉर्म, शुल्क और ऑनलाइन या ऑफ़लाइन प्रक्रिया अलग भी हो सकती है।
जन्म प्रमाण पत्र में संशोधन कैसे करें? जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 के नए नियमों के बारे में जानें नई दिल्ली : आज की दुनिया में जन्म प्रमाण पत्र केवल जन्म का रिकॉर्ड भर नहीं है। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में साल 2023 के संशोधन के बाद सरकार की ओर से जन्म प्रमाण पत्र को कई महत्वपूर्ण सरकारी और नागरिक कार्यों में जन्म की तारीख और स्थान साबित करने के लिए इस्तेमाल करने का प्रावधान मजबूत हुआ। इसमें शैक्षणिक प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नियुक्ति, पासपोर्ट और आधार जैसे काम शामिल हैं। ऐसे में प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि, माता-पिता के नाम या किसी अन्य विवरण में गलती होने पर उसे सही कराना जरूरी हो जाता है। दूसरी ओर, यदि जन्म का पंजीकरण ही समय पर नहीं हुआ है, तो 2026 का नया संशोधन और उसके प्रावधानों को जानना भी खास तौर पर जरूरी हो जाता है। Birth Certificate Correction जन्म प्रमाण पत्र में गलती से लेकर देर से रजिस्ट्रेशन तक, जानें इससे जुड़े कानून की पूरी जानकारी जन्म प्रमाण पत्र में गलती सुधारने का कानूनी आधार क्या है? दरअसल...मौजूदा जन्म रिकॉर्ड में किसी गलत प्रविष्टि को सुधारने का आधार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 15 है। इसके लिए नागरिक पंजीकरण प्रणाली Civil Registration System अहम जानकारी देती है। सरकार के नागरिक पंजीकरण प्रणाली वेबसाइट के अनुसार गलत प्रविष्टि में सुधार या अपडेट इसी धारा और संबंधित राज्य के नियमों के तहत किया जाता है। इसलिए यदि जन्म पहले से रजिस्टर्ड है लेकिन प्रमाण पत्र में कोई तथ्य गलत दर्ज है, तो सामान्य स्थिति में इसे नया जन्म पंजीकरण नहीं माना जाएगा। आवेदक को संबंधित अधिकार-क्षेत्र वाले जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रारके सामने के लिए आवेदन करना होता है। राज्य के नियमों के अनुसार जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन के साथ साथ अन्य नियम अलग भी हो सकते हैं। नाम या जन्मतिथि गलत है तो सबसे पहले क्या करें? यदि प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम या अन्य विवरण गलत है, तो सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि मूल जन्म रजिस्टर में गलती है या केवल जारी प्रमाण पत्र में। इसके बाद संबंधित जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार के पास सुधार के लिए आवेदन दिया जाता है। आवेदन के साथ उस तथ्य को साबित करने वाले दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कौन-से दस्तावेज पर्याप्त होंगे, यह संबंधित राज्य के रजिस्ट्रेशन के नियम और स्थानीय रजिस्ट्रार की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। कानूनी रूप से महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल शपथपत्र बनवा लेना हर मामले में सुधार की गारंटी नहीं देता। रजिस्ट्रार को उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर संतुष्ट होना होता है। धारा 15 इसी सुधार या रद्द करने की प्रक्रिया का आधार है। जन्म प्रमाण पत्र में गलती होने पर 2026 के नए कानून को सीधे 'प्रमाणपत्र सुधार कानून' समझना सही नहीं है। जन्म प्रमाण पत्र में सुधार का मुख्य आधार कानून की धारा 15 है, जबकि 2026 का संशोधन मुख्य रूप से देर से जन्म या मृत्यु के पंजीकरण को कठोर बनाता है। 2026 के संशोधन की खास बात 2026 के नए कानूनों में हुए बदलावों को जानना है जरूरी जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 का संशोधन मौजूदा जन्म प्रमाण पत्र में सामान्य सुधार की प्रक्रिया को बदलने के बजाय विलंबित पंजीकरण को सख्त करना है। बिल के अनुसार जन्म या मृत्यु की जानकारी एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष से अधिक नहीं है तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या डीएम द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। संबंधित अधिकारी को जन्म या मृत्यु की सत्यता सत्यापित करनी होगी और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। दो साल से अधिक की देरी होने पर रजिस्ट्रेशन केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट भी शुद्धता सत्यापित करने के बाद निर्धारित शुल्क के भुगतान पर आदेश देगा। यानी 2026 का मुख्य कानूनी बदलाव यह है कि जितनी पुरानी अपंजीकृत जन्म या मृत्यु से जुड़ी का प्रविष्टि होगी, उतना उच्च स्तर का न्यायिक प्रशासनिक सत्यापन आवश्यक होगा। Navbharat Times मरीजों के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डॉक्टरों के खिलाफ Consumer Court का रास्ता बरकरार, याचिका खारिज नागरिकों के लिए ध्यान रखने वाली बात देखा जाए तो आम नागरिको के लिए ध्यान रखने वाली बात या वैधानिक नियम यही है कि यदि जन्म पहले से दर्ज किया गया है और केवल विवरण गलत है, तो सुधार के लिए रजिस्ट्रार से संपर्क करें। लेकिन यदि जन्म विवरण नहीं है, तो विलंबित पंजीकरण से जुड़ा नियम देखें। इसमें राज्यवार दस्तावेज़, फॉर्म, शुल्क और ऑनलाइन या ऑफ़लाइन प्रक्रिया अलग भी हो सकती है।
- गाजीपुर 375 सदर विधानसभा के विधायक जय किशन साहू ने समाजवादी PDA कार्यकर्ता सम्मान समारोह के बाद प्रेसवार्ता की। आज 13 सितंबर 2026 को विधानसभा सदर गाजीपुर में बूथ, सेक्टर, जोनल, ब्लॉक संगठन के पदाधिकारी, विधानसभा के पदाधिकारी, विधानसभा व जनपद के वरिष्ठ नेतागण का सम्मान समारोह कार्यक्रम शहनाई पैलेस गाजीपुर में सपा जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मान समारोह कार्यक्रम के संयोजक सदर के विधायक श्री जैकिशन साहू जी बड़ी संख्या में आए कार्यकर्ताओं को अंग वस्त्र पेन व डायरी देकर स्वागत व सम्मान किया करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक जंगीपुर डॉ वीरेंद्र यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पीडीए समाज के अधिकारों ,लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए 2027 में समाजवादी पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का आवाह्न किया। सम्मान समारोह का संचालन विधानसभा अध्यक्ष तहसीन अहमद ने किया। कार्यक्रम में सर्वश्री पूर्व सांसद श्री जगदीश कुशवाहा ,पूर्व विधायक श्री खुर्शीद अहमद, पूर्व जिला अध्यक्षगण श्री रामधारी यादव श्री सुदर्शन यादव, डॉक्टर नन्हकू यादव, बलिराम पटेल, मुन्नन यादव, आमिर अली, सीमा यादव, कन्हैयालाल विश्वकर्मा, डॉ समीर सिंह, आत्मा, सदानंद, राजेश, रमेश, सुशील जायसवाल, कमलेश, सूरज रामबिंद, परशुराम बिंद, विभा पाल, बिंदु वाला बिन्द, पुनीता सिंह, शौर्या सिंह, रीना रीता विश्वकर्मा सुषमा बिन्द, धनु, राकेश यादव फेकन राजेंद्र यादव, कन्हैया यादव, फेकू यादव, अजय, अभिषेक कुशवाहा अमित ठाकुर संतोष देवेंद्र, महेंद्र बिंद, शिशु रजनीकांत, पंकज जिला पंचायत, भीम यादव, धर्मदेव, रमेश गोड़, राहुल निषाद, जगत मोहन एडवोकेट, विजय शंकर एडवोकेट, गोपाल एडवोकेट, बचनू, अमन, बाबी चौधरी, असलम खान, तिलक प्रधान, सरदार प्रधान, प्रदीप प्रधान, बलराम यादव सहित बड़ी संख्या में बूथ, सेक्टर, जोनल के पदाधिकारी उपस्थितरहे।1
- ड्यूटी के दौरान गोली लगने से जान गंवाने वाली महिला सिपाही प्रियंका का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब। कौशांबी में ड्यूटी के दौरान राइफल से गोली लगने से जान गंवाने वाली गाजीपुर की 28 वर्षीय महिला सिपाही प्रियंका यादव बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। दुल्लहपुर क्षेत्र के सिखड़ी गांव में तड़के करीब चार बजे प्रियंका का पार्थिव शरीर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। मां प्रमिला यादव और बहन प्रीति ने प्रियंका के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, जबकि पिता रविंद्र यादव बेटी की अंतिम यात्रा में खुद को संभाल नहीं सके। गांव से निकली अंतिम यात्रा में सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही। गाजीपुर के गंगा घाट पर प्रियंका का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पिता रविंद्र यादव ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। कौशांबी से पहुंचे पुलिसकर्मियों ने शोक सलामी देकर अपनी साथी महिला सिपाही को अंतिम विदाई दी।1
- खेलकूद मैदान बरसाना में 27 लोग नरेगा का काम करते हुए जिसमें कुछ लोगों का मास्टर रोलनिकल गया तथा कुछ लोगों का नहीं निकल गया है गाजीपुर करंडा क्षेत्र के बरसाना गांव में खेलकूद मैदान पर 27 लोग काम करते हुए दिखाई दिए जिसमें कुछ लोगों का मास्टर निकल गया है तथा कुछ लोगों को भला फुसलाकर काम कराया जा रहा है कि मास्टर बाद में निकाल दिया जाएगा लेकिन ऐसा कभी नहीं किया जाता है1
- Ganesh pujan samaroh ke taraf se hamare samiti sabhi parivar ko Hardik shubhkamnaen dete hue Jay ho ganpati bappa moriya Ganesh Bhagwan ki aarti sham ko Jaan se manae gai hamare hamare samiti ki taraf se Ganesh pujan ke madhyam se sabhi deshvasiyon aur mere parivar ko Ganesh ji ki hamesha aashirwad banae rakhen aur Har parivar ko Khushi milta rahe yah hamare samiti ki taraf se Ganesh ji ki se kamna Karte Hain ganpati bappa moriya ganpati bappa moriya ganpati bappa moriya4
- गरीब समाज पार्टी का तहसील पर प्रदर्शन, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जताई नाराजगी गरीब समाज पार्टी ने तहसील परिसर में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारी और लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ने से गरीब परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में लोगों के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार से 10 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए गरीब, मजदूर और बेरोजगार वर्ग के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर में काफी देर तक नारेबाजी होती रही।1
- *कक्षा-1 की छात्रा समारा नाज की शिकायत पर पूर्ण हुआ रास्ते का निर्माण।* *कक्षा-1 की छात्रा समारा नाज की शिकायत पर पूर्ण हुआ रास्ते का निर्माण।* *जिलाधिकारी ने भटकुला पट्टी पहुंचकर सड़क की गुणवत्ता का किया स्थलीय निरीक्षण।* *समस्याओं के त्वरित निस्तारण के साथ जनसुविधाओं का ध्यान रखना जिला प्रशासन की प्राथमिकता : जिलाधिकारी।* नगर पालिका परिषद मऊ के अंतर्गत भटकुला पट्टी स्थित वार्ड नंबर-17 में रास्ता निर्माण को लेकर कक्षा-1 की छात्रा समारा नाज द्वारा जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी महोदय के समक्ष शिकायत की गई थी। जिला प्रशासन द्वारा शिकायत का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिसके क्रम में रास्ता निर्माण का कार्य पूर्ण करा लिया गया। आज जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन द्वारा मौके पर पहुंचकर नवनिर्मित रास्ते का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं अन्य आवश्यक बिंदुओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आसपास की गलियों का भी सर्वे कराकर आवश्यकतानुसार कार्रवाई करने के निर्देश अधिशासी अधिकारी नगरपालिका को दिए। उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर क्षेत्र की अन्य समस्याओं एवं मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली तथा प्राप्त समस्याओं के नियमानुसार एवं समयबद्ध ढंग से समाधान के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने छात्रा समारा नाज से मुलाकात की तथा उसे साइकिल एवं चॉकलेट उपहार स्वरूप भेंट की। रास्ते का निर्माण पूर्ण होने और उपहार पाकर समारा नाज काफी प्रसन्न हुई। बच्ची एवं उसके परिजनों द्वारा जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान आसपास के स्थानीय लोगों ने भी क्षेत्र में कराए गए कार्यों तथा जिलाधिकारी द्वारा मौके पर पहुंचकर समस्याओं का जायजा लेने और उनके समाधान के लिए दिए गए निर्देशों की सराहना की। निरीक्षण के दौरान अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद मऊ सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- सहारपुर मे मस्जिद को तोड़ने के विरुद्ध वामपंथी एवं जनतावादी दल का गाजीपुर मे विरोध प्रदर्शन। राज्यपाल को सौपा ज्ञापन मै भी हिन्दू हूँ अवैध मन्दिरों को तोड़ा जाऐ। सहारपुर मे मस्जिद को तोड़ने के विरुद्ध वामपंथी एवं जनतावादी दल का गाजीपुर मे विरोध प्रदर्शन। राज्यपाल को सौपा ज्ञापन। मै भी हिन्दू हूँ अवैध मन्दिरों को तोड़ा जाऐ। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के विरोध में गाजीपुर में वामपंथी और जनवादी संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई की जांच कराने और धार्मिक स्थल के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में भी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मस्जिद कमेटी से जुड़े जुर्माने की वसूली पर फिलहाल रोक लगाई है। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित है। गाजीपुर में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर समान कानून लागू करने की बात कही। इसी दौरान यह संदेश भी सामने आया—“मैं भी हिन्दू हूं, अवैध मंदिरों को भी तोड़ा जाए।” इस प्रदर्शन के जरिए संगठनों ने सरकार और प्रशासन से धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की मांग की। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज | राम लगन मौर्य के परिवार की हत्या मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग, अपनी जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र सिंह कुशवाहा ने उठाए सवाल गाजीपुर/अयोध्या। अयोध्या में राम लगन मौर्य के परिवार की हत्या के मामले में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर अपनी जनता पार्टी गाजीपुर के जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र सिंह कुशवाहा ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले में आरोपित व्यक्तियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। जितेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि परिवार की हत्या जैसी गंभीर घटना के बाद पीड़ित परिजनों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा मिलना जरूरी है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच करते हुए जिन लोगों पर हत्या में शामिल होने के आरोप हैं, उनकी शीघ्र गिरफ्तारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि घटना के वास्तविक तथ्यों की जांच कर दोषियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन को मामले में तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। जितेन्द्र सिंह कुशवाहा ने सवाल उठाया कि यदि हत्या के मामले में आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं तो उनकी गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने पुलिस-प्रशासन से कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई जाती रहेगी। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और दोष सिद्ध होने पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नोट: घटना और आरोपों से संबंधित अंतिम तथ्य पुलिस/जांच एजेंसी की आधिकारिक कार्रवाई तथा न्यायालय के निर्णय के अधीन हैं।3