उत्तर प्रदेश के संभल में रेलवे लाइन के किनारे 72 बीघा सरकारी जमीन पर ₹18 करोड़ के बजट से बनाए जा रहे एक खेल स्टेडियम का निर्माण अधर में लटक गया है। परियोजना का लगभग 40% काम पूरा होने के बाद, रेलवे ने अपनी भूमि पर दीवार खड़ी कर दी है, जिसके परिणामस्वरूप स्टेडियम तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बंद हो गया है। यह स्थिति डीपीआर (DPR) बनाने वाले लोगों की कथित लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई है, जिन्होंने रेलवे की जमीन को बिना सोचे-समझे प्रोजेक्ट का हिस्सा बना दिया था। रेलवे ने अपनी भूमि का दुरुपयोग देखते हुए यह कठोर कदम उठाया है। अब खेल स्टेडियम परियोजना तक पहुंचने के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प बचा है, हालांकि यह प्रक्रिया बेहद जटिल और खर्चीली बताई जा रही है। इस पूरी घटना के बाद, अब उन 'विद्वान' इंजीनियरों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट का डीपीआर तैयार किया था।
उत्तर प्रदेश के संभल में रेलवे लाइन के किनारे 72 बीघा सरकारी जमीन पर ₹18 करोड़ के बजट से बनाए जा रहे एक खेल स्टेडियम का निर्माण अधर में लटक गया है। परियोजना का लगभग 40% काम पूरा होने के बाद, रेलवे ने अपनी भूमि पर दीवार खड़ी कर दी है, जिसके परिणामस्वरूप स्टेडियम तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बंद हो गया है। यह स्थिति डीपीआर (DPR) बनाने वाले लोगों की कथित लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई है, जिन्होंने रेलवे की जमीन को बिना सोचे-समझे प्रोजेक्ट का हिस्सा बना दिया था। रेलवे ने अपनी भूमि का दुरुपयोग देखते हुए यह कठोर कदम उठाया है। अब खेल स्टेडियम परियोजना तक पहुंचने के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प बचा है, हालांकि यह प्रक्रिया बेहद जटिल और खर्चीली बताई जा रही है। इस पूरी घटना के बाद, अब उन 'विद्वान' इंजीनियरों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट का डीपीआर तैयार किया था।
- लखनऊ के महिंगवा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवक की जान चली गई है। शनिवार रात एक अज्ञात वाहन की टक्कर से युवक उछलकर झाड़ियों में जा गिरा था। यह जानकारी मिली है कि हादसे के बाद युवक का शव 12 घंटे से भी अधिक समय तक झाड़ियों में पड़ा रहा। मृतक की पहचान महिंगवा के बेनीपुर निवासी राहुल मिश्रा के रूप में हुई है। वहीं, घटना को अंजाम देने के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया था।1
- लखनऊ में आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों के विरोध में एक अनोखा प्रदर्शन किया। आप कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और केसरबाग से हजरतगंज चौराहे की ओर चंदा मांगते हुए मार्च निकाला। इस मार्च के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोक दिया, जिसके बाद सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।2
- उत्तर प्रदेश के बिल्हौर तहसील क्षेत्र के शिवराजपुर में खनन माफियाओं ने आम जनमानस का जीवन दूभर कर दिया है। ये खनन और मिट्टी का काम करने वाले लोग सड़कों तथा गांव की गलियों के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से धूल उड़ाकर प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ये खनन माफिया किसी भी मानक का पालन नहीं कर रहे हैं और सरकारी रजबहे में मानक से अधिक मिट्टी उठा रहे हैं। सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत के चलते खनन के इन नियमों का अनुपालन नहीं हो पा रहा है। चंद रुपयों के लालच में जिम्मेदार लोग भी इन खनन करने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते। विशेष रूप से शिवराजपुर थाना क्षेत्र के सखरेज गांव में मानकों की धज्जियां उड़ाकर अवैध खनन जारी है।1
- उत्तर प्रदेश में 'पाप धोने की मशीन' लगने का सवाल उठाते हुए, पैसे से मजबूत विजेंद्र हुड्डा की कारगुज़ारियों पर तीखी टिप्पणी की गई है। जानकारी के अनुसार, विजेंद्र हुड्डा ने 2015 के आसपास एक मीडिया हाउस शुरू किया था, जो कुछ ही समय में अलग-थलग पड़ गया। इसके बाद 2018 में उन्होंने ओला/उबर की तर्ज़ पर 'बाइक बोट टैक्सी सर्विस' लॉन्च की, जिसमें 7 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा का बड़ा घोटाला सामने आया। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने हुड्डा के खिलाफ 100 से अधिक मुकदमे दर्ज किए और उन पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया, जिसके बाद वह पुलिस से बचकर विदेश भाग गए। हालांकि, विदेश से लौटने के बाद, जैसा कि बताया गया है, उन्होंने 'इतनी तगड़ी सेटिंग' की कि 'माई लॉर्ड' ने उन्हें बाहर ही बाहर 'अभयदान' दे दिया। 2024 में विजेंद्र हुड्डा ने नेता बनने का फैसला किया और लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव हारने के कुछ ही दिनों बाद, उन्होंने एक यूनिवर्सिटी खरीद ली और सीधे उसके चांसलर बन गए। पिछले साल, उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने इस यूनिवर्सिटी में छापेमारी कर पैसे लेकर डिग्रियां बांटने के एक बड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया, जिसके चलते हुड्डा साहब को जेल जाना पड़ा। वे कुछ महीने पहले ही जेल से बाहर आए हैं। अब, हाल ही में विजेंद्र हुड्डा ने उत्तर प्रदेश में फिर से अपना टीवी चैनल 'Nation-27' लॉन्च किया है। इस लॉन्च कार्यक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के कई नेता मौजूद थे, और दूसरे राज्य के 'गवर्नर साहब' तक इसमें शामिल होने पहुंचे। इन सारी घटनाओं को देखते हुए, यह सवाल उठाया गया है कि क्या उत्तर प्रदेश में इतने सारे 'पाप' यूं ही धुल जाते हैं?1
- एक ओर जहां हुसैनाबाद ट्रस्ट और सरकार ऐतिहासिक सतखंडा तथा पुराने गेटों की मूल पहचान सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक शैली व उपयुक्त सामग्री का उपयोग कर संरक्षण का दावा कर रहे हैं, वहीं ठीक बगल में कथित तौर पर सीमेंट से नए निर्माण कर शटर वाली दुकानें बनाई जा रही हैं। यह स्थिति विरासत संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। करोड़ों रुपये खर्च करके ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के प्रयासों के बावजूद, उनके आसपास विरासत संरक्षण मानकों की खुलेआम अनदेखी कैसे हो रही है, इस पर जनता जवाब मांग रही है। यदि यह निर्माण नियमों के विरुद्ध है, तो संबंधित अधिकारियों की अब तक की खामोशी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जनता जानना चाहती है कि कहीं संरक्षण के नाम पर केवल दिखावा तो नहीं किया जा रहा और कहीं इसके पीछे व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने का खेल तो नहीं है।1
- लखनऊ के माल थाना क्षेत्र अंतर्गत पतौना चौराहे पर एक घर के पास रखे ट्रांसफार्मर में अचानक आग लगने की घटना सामने आई है। इस हादसे में एक मोटरसाइकिल पूरी तरह से जलकर क्षतिग्रस्त हो गई। सूत्रों के अनुसार, आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।1